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ज्यादातर लोगों को जोड़ों में दर्द की शिकायत रहती है। लेकिन वे इसे नजरंदाज कर देते हैं। दरअसल जोड़ों का दर्द वक्त के साथ-साथ अपने आप कम हो जाता है। हालांकि बढ़ती उम्र में ऐसा कम ही देखने को मिलता है। इसलिए जोड़ों के दर्द को लेकर लापरवाही करना सही नहीं है। कुछ लोग जोड़ों के दर्द से राहत के लिए दवाईयों का सेवन करते हैं तो कुछ फिजियोथेरेपिस्ट की मदद से अलग-अलग एक्सरसाइज करते हैं। लेकिन क्या आप जाानते हैं कि जोड़ों के दर्द से राहत के लिए आयुर्वेदिक तेल का उपयोग भी किया जाता है। इससे कुछ ही देर में आपके जोड़ों का दर्द छूमंतर हो जाता है। मजे की बात ये है कि आयुर्वेदिक तेल का किसी तरह का नकारात्मक प्रभाव भी नहीं है। सो, आप इसे बिना किसी संकोच के इस्तेमाल कर सकते हैं।

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निर्गुण्डी तेल
आयुर्वेद में निर्गुण्डी तेल का अपना ही महत्व है। यह मांसपेशियों को रिलैक्स करने और एंटीहिस्टामाइन के गुणों के लिए जाना जाता है। एक शोध अध्ययन के अनुसार निर्गुण्डी तेल, दशमूल घृत को गर्म पानी में मिलाकर दो महीने तक लगाने से जोड़ों के दर्द से आराम मिलता है। इसके और भी फायदे हैं।

पंचमुलदी तेल
वात दोष के लोगों में अक्सर जोड़ों में दर्द या अर्थराइटिस की समस्या देखने को मिलती है। ऐसे में पंचमुलदी तेल सहायक हो सकता है। यह आमवात की वजह को खत्म करता है। अतः यह कार्डिनल लक्षणों में भी इसे उपयोगी माना गया है। अगर आपको जोड़ों में अक्सर दर्द रहता है तो इस तेल का इस्तेमाल करें। इससे आपको जल्द असर दिखने लगेगा।

रसना तेल
रसना तेल का स्वाद कड़वा जरूर है लेकिन यह आपको कई तरह से फायदा पहुंचा सकता है। यह नपुंसकता में कारगर है। यह कफ और वात दोनों तरह के दोष में उपयोगी है। अतः माना जाता है कि यह दर्द और जकड़न को कम कर पीठ और साइटिका के दर्द में आराम देता है। आयुर्वेद के अनुसार रसना अमहरा जड़ी बूटियों में से एक है। यह मेटाबॉलिज्म को बेहतर कर शरीर को साफ रखता है। इसके साथ ही सूजन और जलन को कम करने में भी यह सहायक है।

गंध तेल
आयुर्वेद के अनुसार गंध तेल आपकी हड्डियों के लिए काफी अच्छा होता है। अतः जो लोग हड्डियों के दर्द या जोड़ों के दर्द से परेशान हैं, उनके लिए यह काफी उपयोगी है। विशेषज्ञों की सलाह पर आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। वैसे यह वात और पित्त से होने वाली सभी बीमारियों में लाभकारी है। इस तेल को आप लगा भी सकते हैं और नास्य (नाक से औषधी डालने की विधि) के रूप में ले भी सकते हैं।

बला तेल
बला तेल में सूजन को कम करने की क्षमता होती है। यदि आपको शरीर के किसी हिस्से में सूजन हो तो इसके इस्तेमाल से सूजन को कम कर सकते हैं। एक शोध ने भी इस बात को साबित किया है। आयुर्वेद के अनुसार जिन तेल में बला का इस्तेमाल किया जाता है, वह वात के लिए उपयोगी होते है। इसके साथ ही कई अन्य बीमारियों में भी यह तेल फायदेमंद है। खासकर जोड़ों के दर्द में यह काफी प्रभावशाली है। इसकी जड़ी-बूटी को मसाज करने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है। यह हर तरह के अर्थराइटिस के दर्द में कारगर है। इसके साथ ही महिलाओं और पुरूषों की नपुंसकता को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहां तक कि हड्डी का टूटना, खांसी, ट्यूमर, हर्निया जैसी बीमारियों में यह भी कारगर है।

जोड़ों, मांसपेशियों में चाहे हल्का दर्द हो या तीव्र दर्द या फिर किसी तरह की बीमारी हो। यहां बताए गए सभी आयुर्वेदिक तेल आपके लिए उपयोगी हो सकते हैं। इन सबका इस्तेमाल आप घर पर ही कर सकते हैं। जरूरी हो तो विशेषज्ञों की सलाह ले सकते हैं।

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