बच्चों को होने वाली दुर्लभ बीमारी कावासाकी के इलाज के संबंध में एक नया दावा सामने आया है। जर्नल ऑफ अमेरिकन हर्ड एसोसिएशन में प्रकाशित एक अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक, कावासाकी के इलाज से जुड़े सामान्य इंट्रावीनस (आईवी) इम्यूनोग्लोबुलिन ट्रीटमेंट में कॉर्टिकोस्टेरॉयड को मिलाकर से इस बीमारी के खिलाफ शुरुआती इलाज को बेहतर करने और ज्यादा सफल परिणाम हासिल करने में मदद मिली है। साथ ही मौजूदा इलाज (इनीशियल कॉम्बिनेशन ट्रीटमेंट) से जुड़े कॉम्पलिकेशंस को रोकने में भी सफलता मिली है। 

जापान की जीची मेडिकल यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर और संबंधित अध्ययन के लेखक रूसूके का कहना है कि कावासाकी होने पर उसकी शुरुआत में पहचान कर तुरंत इलाज करना जरूरी होता है ताकि बीमारी के प्रभाव के चलते हृदय से जुड़ी समस्याओं को बढ़ने से रोका जा सके। गौरतलब है कि कावासाकी के चलते बच्चों में हृदय रोग की समस्या देखी जाती हैं।

डॉ. रूसूके ने इस अध्ययन की शुरुआत 2018-19 में की थी। उन्होंने जीची मेडिकल यूनिवर्सिटी और शीर्ष अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सीडीसी के साझा सहयोग से इस अध्ययन को अंजाम दिया है। कावासाकी बीमारी को लेकर उनका कहना है, 'इसमें रक्त वाहिका की वॉल जब बड़ी हो जाती है तो वाहिका अंदर से संकुचित हो सकती है। इससे ब्लड क्लॉटिंग हो सकती है, धमनी ब्लॉक हो सकती है और अंत में हार्ट अटैक आ सकता है। जिन बच्चों को वाहिका से जुड़ी समस्याएं हैं, उन्हें कावासाकी होने पर बहुत लंबे वक्त तक इलाज कराना पड़ सकता है।'

कावासाकी के शुरुआती इलाज के रूप में आईवी इम्यूनोग्लोबुलिन के साथ एस्पिरिन का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसा बताया जाता है कि कावासाकी के 17 प्रतिशत मामलों में बीमारी की शुरुआत में आईवी इम्यूनोग्लोबुलिन ट्रीटमेंट का कोई असर नहीं पड़ता है। इसके चलते हृदय से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ता जाता है। उधर, हाल के सालों में कावासाकी के शुरुआती इलाज में कॉर्टिकोस्टेरॉयड को ऐड करने की बात और ज्यादा सामान्य तरीके से की जाती रही है। हालांकि इलाज के इन दोनों तरीकों में से कौन सा सबसे अच्छा है, इसे लेकर वैज्ञानिक अलग-अलग निष्कर्ष निकालते हैं।

इस सिलसिले में डॉ. रूसूके द्वारा किया गया अध्ययन अब तक की गई तमाम स्टडीज से बड़ा और व्यापक है। जापान में कावासाकी से पीड़ित बच्चों के डेटा के आधार पर उन्होंने विश्लेषण किया कि क्या इस बीमारी के इलाज में दवाओं को लेकर ज्यादा इनटेंसिव कॉम्बिनेशन अप्रोच अपनाने की जरूरत है ताकि बच्चों को ज्यादा जल्दी ठीक किया जा सके और बीमारी के प्रभाव में उनमें हृदय संबंधी जटिलताओं को पैदा होने से रोका जा सके। 

अध्ययन के तहत शोधकर्ताओं ने 18 साल से कम उम्र के ऐसे 1,593 बच्चों को आइडेंटिफाई किया, जिन्हें कावासाकी होने पर पहले स्टैंडर्ड आईवी इम्यूनोग्लोबुलिन-एस्पिरिन का ट्रीटमेंट दिया गया था। फिर इन बच्चों की तुलना उतनी ही संख्या वाले उन कावासाकी पीड़ित बच्चों से की गई, जिन्हें लेकर दावा था कि उनका शुरुआती इलाज स्टैंडर्ड थेरेपी के साथ कॉर्टिकोस्टेरॉयड को मिलाकर किया गया था। विश्लेषण में मरीजों की तुलना आयु और लिंग के साथ-साथ इस आधार पर की गई है कि लक्षण दिखने पर किस बच्चे को कितनी जल्दी इलाज मिला। इस तुलना से जो परिणाम सामने आए वे इस प्रकार हैं-

  • इम्यूनोग्लोबुलिन, एस्पिरिन और कॉर्टिकोस्टेरॉयड से मिलने वाले शुरुआती मिश्रित या कॉम्बिनेशन ट्रीटमेंट से बच्चों में दूसरी थेरेपी की जरूरत 35 प्रतिशत ही बनी रही
  • इस तरह के इलाज से बच्चों में हृदय धमनी से जुड़ी जटिलताओं का खतरा 47 प्रतिशत तक कम हो गया
  • कई दिनों तक कॉर्टिकोस्टेरॉयड के हल्के डोज देने के लाभ कम दिनों में हाई डोज देने की अपेक्षा ज्यादा थे

इन परिणामों से उत्साहित डॉक्टर रूसूके का कहना है, 'हमारे विश्लेषण में ऐसे नाटकीय परिणाम मिलना हैरान करने वाला था। डॉक्टरों को कावासाकी के प्रति ज्यादा संवेदनशील मरीजों के इलाज के लिए कॉर्टिकोस्टेरॉयड के मल्टीपल-डोज वाले इनीशियल कॉम्बिनेशन ट्रीटमेंट पर विचार करना चाहिए।'

कोविड-19, कावासाकी रोग और कॉर्टिकोस्टेरॉयड
कॉर्टिकोस्टेरॉयड ड्रग्स की वह श्रेणी है, जिससे बनी दवाएं सूजन कम करने के काम आती हैं। ये ड्रग्स इम्यून सिस्टम की सक्रियता को कम करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। डॉक्टर अक्सर अस्थमा के इलाज में भी इस श्रेणी की दवाएं सजेस्ट करते हैं। इसके अलावा ये ड्रग्स शरीर में होने वाले विशेष प्रकार के उभारों, खुजली, लालिमा और एलर्जिक रिऐक्शन्स से निजात दिलाने में भी काम में लाई जाती है।

कोविड-19 और इससे बच्चों को होने वाले दुर्लभ सिंड्रोम (एमआईएस-सी), जिसके लक्षण कावासाकी से मिलते हैं, के उपचार में भी कॉर्टिकोस्टेरॉयड आधारित दवाओं ने सकारात्मक परिणाम देते हुए सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। रिपोर्टें बताती हैं कि हाल में कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते एमआईएस-सी से पीड़ित हुए बच्चों को इम्यूनोग्लोबुलिन और कॉर्टिकोस्टेरॉयड आधारित कॉम्बिनेशन ट्रीटमेंट दिया गया है। वहीं, वयस्क कोविड मरीजों के इलाज के संबंध में कॉर्टिकोस्टेरॉयड आधारित ड्रग डेक्सामेथासोन ने दुनियाभर में चर्चा बटोरी है। इंग्लैंड में तो इस दवा को सरकार की तरफ से औपचारिक रूप से कोविड-19 का इलाज माना गया है, जिसे गंभीर मरीजों के लिए इस्तेमाल की अनुमति मिली हुई है। बता दें कि हाल में प्रकाशित एक अध्ययन में यह दावा किया गया था कि अगर कोविड-19 महामारी की शुरुआत में ही कोरोना वायरस के मरीजों का स्टेरॉयड से इलाज किया जाना जारी रखा गया होता तो हजारों जानें बचाई जा सकती थीं।

कावासाकी क्या है?
यह एक ऐसी बीमारी है जो ज्यादातर बच्चों को ही होती है। मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक, आमतौर पर पांच वर्ष से कम आयु के बच्चे कावासाकी का शिकार होते हैं। इस बीमारी को म्यूकोक्यूटेनियस लिम्फ नोड सिंड्रोम भी कहा जाता है, जो बच्चों में दिल की बीमारी के प्रमुख कारणों में से एक है। हालांकि इस रोग का जल्दी पता चल जाने पर इसका इलाज किया जा सकता है। बताया जाता है कि अधिकांश बच्चे इस बीमारी से स्वस्थ हो जाते हैं। कावासाकी रोग क्यों होता है, यह अभी तक साफ नहीं हो पाया है। शोधकर्ताओं की मानें तो इसके कारणों के पीछे जेनेटिक और पर्यावरणीय कारक शामिल हैं। माना जाता है कि यह आमतौर पर किसी खास मौसम में होता है, लेकिन यह एक बच्चे से दूसरे बच्चों में नहीं फैलता है। इसके लक्षणों में त्वचा पर लाल चकत्ते, गर्दन में सूजन, सूखे और फटे होंठआंखें लाल होना आदि शामिल हैं।

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