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माइट्रल वाल्व रिगर्जिटेशन क्या है?

माइट्रल वाल्व रिगर्जिटेशन एक ऐसी स्थिति है, जिसमें हृदय की वाल्व लीक हो जाती है। यदि आपको यह समस्या है, तो आपकी हार्ट वाल्व की संरचना सही नहीं (असाधारण) है और इस वजह से खून गलत दिशा में जाने लगता है। माइट्रल वाल्व रिगर्जिटेशन के कारण हृदय में खून उल्‍टी दिशा में (बाएं वेंट्रिकल से दाएं एट्रियम) में बहने लगता है। अगर यह स्थिति ज्‍यादा गंभीर हो जाए तो खून हृदय के अंदर ठीक तरह से प्रवाहित नहीं हो पाता है या फिर अत्यधिक थकान या सांस फूलने जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

माइट्रल वाल्व रिगर्जिटेशन के कारण

यह माइट्रल वाल्व में होने वाली कुछ जटिलताओं के कारण हो सकता है, जिसे प्राइमरी माइट्रल वाल्व रिगर्जिटेशन कहा जाता है। बाएं वेंट्रिकल में होने वाली जटिलताओं को सेकेंड्री या फंक्शनल माइट्रल वाल्व रिगर्जिटेशन कहा जाता है। 

  • माइट्रल वाल्व प्रोलैप्स:
    इस स्थिति में माइट्रल वाल्व के दोनों फ्लैप ठीक तरह से बंद ना होकर दाएं एट्रियम की तरफ उभरने लगते हैं। यह हृदय संबंधी एक सामान्‍य विकृति है जिसे “क्लिक मर्मर सिंड्रोम, बारलो सिंड्रोम या फ्लोपी वाल्व सिंड्रोम भी कहा जाता है।

  • टिश्यू कोर्ड्स को नुकसान:
    माइट्रल वाल्व को हार्ट वॉल (हृदय की परत) से जोड़ने वाले टिश्यू कोर्ड समय के साथ-साथ क्षतिग्रस्त (या घिस कर पतला होना) होने लगती हैं। ऐसा खासतौर पर माइट्रल वाल्व प्रोलैप्स में होता है। टिश्यू कोर्ड में किसी प्रकार की क्षति (दरार या छेद आदि) होने और छाती में चोट लगने के कारण भी माइट्रल वाल्व में लीकेज (रिसाव) होने लग जाता है। इस स्थिति में माइट्रल वाल्व को ठीक करने के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ती है। 

  • रूमेटिक फीवर:
    रूमेटिक फीवर एक ऑटोइम्यून इंफ्लामेट्री डिजीज है जो आमतौर पर स्ट्रेप थ्रोट इन्फेक्शन के बाद होता है। रूमेटिक फीवर के कारण हृदय के संयोजी ऊतकों, जोड़ों, रक्त वाहिकाओं और ऊतकों में सूजन व लालिमा पैदा होने लग जाती है। रूमेटिक फीवर माइट्रल वाल्व को भी प्रभावित कर सकता है जिससे माइट्रल वाल्व रिगर्जिटेशन होने की संभावना बढ़ सकती  है। 

  • हार्ट फेलियर:
    हार्ट अटैक भी माइट्रल वाल्व को प्रभावित कर सकता है और इसके परिणामस्वरूप वाल्व का कार्य भी प्रभावित होता है। हार्ट अटैक के कारण अधिक नुकसान होने की स्थिति में अचानक माइट्रल वाल्व रिगर्जिटेशन विकसित हो सकता है लेकिन स्थिति के बहुत ज्‍यादा बिगड़ जाने पर ही ऐसा होता है। 

 माइट्रल वाल्व रिगर्जिटेशन के लिए मेडिकल देखभाल

माइट्रल वाल्व रिगर्जिटेशन के लिए आपको कितनी मेडिकल देखभाल की जरूरत है, यह आपकी स्थिति की गंभीरता पर निर्भर करता है और साथ ही इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपके शरीर में दर्द के किस तरह के लक्षण सामने आ रहे हैं। यदि माइट्रल वाल्व में थोड़ी बहुत ही रिसाव संबंधी समस्या है, तो इसके लिए विशेष मेडिकल देखभाल की आवश्यकता नहीं पड़ती है। 

यदि रिसाव अत्यधिक हो रहा है, तो वाल्व को ठीक करने या उसे बदलने के लिए हृदय की सर्जरी करने की आवश्यकता पड़ सकती है। अगर सही समय पर ठीक इलाज ना लिया जाए तो इसकी वजह से कोई गंभीर समस्‍या हो सकती है। ये समस्‍या आगे चलकर हार्ट फेलियर या हृदय संबंधी अन्य दिक्‍कतों का कारण बन सकती है जैसे कि अनियमित दिल की धड़कन। यदि आपको कोई लक्षण नहीं भी दिखाई दे रहा है तो भी आपको किसी कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोगों के डॉक्टर) या ह्रदय विशेषज्ञ से जांच करवा लेनी चाहिए। इससे समय रहते ही इलाज शुरु किया जा सकता है। 

माइट्रल वाल्व की चेतावनियों को कैसे पहचानें?

कई बार माइट्रल वाल्व रिगर्जिटेशन को नज़रअंदाज कर दिया जाता है क्योंकि हर किसी में इसके लक्षण सामने नहीं आ पाते हैं। हालांकि यह समस्या शरीर को निम्न तरीके से प्रभावित कर सकती है:

  • हृदय से असामान्य आवाजें आना (हार्ट मर्मर) जिनका स्टेथोस्कोप की मदद से पता लगया जा सकता है।
  • सांस लेने में दिक्कत खासतौर पर शारीरिक गतिविधि करने या लेटने के दौरान
  • थकान
  • अनियमित दिल की धड़कन
  • टखने या पैरों में सूजन आना

आमतौर पर माइट्रल वाल्व रिगर्जिटेशन की समस्‍या धीरे-धीरे बढ़ती है। अनियमित दिल की धड़कन या दिल की धड़कन के असामान्य गति से चलने का पता लगाने के लिए डॉक्‍टर कुछ टेस्ट करवाने के लिए कह सकते हैं। दूसरी ओर, कई बार यह बीमारी तेजी से गंभीर रूप लेने लगती है, जिसकी वजह से कुछ गंभीर संकेत व लक्षण महसूस हो सकते हैं।

माइट्रल वाल्व रिगर्जिटेशन कैसे होता है?

हृदय की संरचना में 4 वाल्व होते हैं, जो ठीक तरह से रक्‍तप्रवाह करने का काम करते हैं। हृदय के 4 वाल्‍व में माइट्रल वाल्व, पल्मोनरी वाल्व, ट्रिकस्पिड वाल्व और एओर्टिक वाल्व (महाधमनी) शामिल हैं। हर बार दिल के धड़कने पर ये वाल्‍व खुलते और बंद होते हैं। इन वाल्‍व के ठीक तरह से काम ना कर पाने की स्थिति में हृदय से बहने वाले खून की गति असामान्य हो जाती है। इसकी वजह से शरीर के किसी अन्य हिस्से में भी दिक्‍कतें उत्‍पन्‍न हो सकती हैं। 

डॉक्टर को कब दिखाएं?

यदि स्टेथोस्कोप से परीक्षण के दौरान डॉक्‍टर को दिल की धड़कन में किसी प्रकार की असामान्यता का पता चलता हैं, तो आपको बिना कोई देरी किए हृदय विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए।

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