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माइलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम (एमडीएस) विकारों का समूह है, जो कि खराब रक्त कोशिकाओं के बनने या उनके ठीक तरह से कार्य नहीं करने के कारण हो सकता है। यह विकार व्यक्ति के अस्थि मज्जा में हुई किसी गड़बड़ी के कारण उत्पन्न हो सकता है। इसमें रक्त कोशिकाओं में असंतुलन हो जाने से इनकी संख्या कम हो जाती है।

एमडीएस को एक प्रकार का कैंसर माना जाता है। आमतौर पर इसके उपचार में रोग की वजह से होने वाली समस्याओं को नियंत्रित करना शामिल है। कुछ मामलों में कीमोथेरेपी या बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत हो सकती है।

जिन लोगों की उम्र 65 या इससे अधिक है, उनमें इस बीमारी का खतरा ज्यादा होता है। यह विकार युवाओं में भी हो सकता है। हालांकि, पुरुषों में यह महिलाओं की तुलना में सामान्य है।

  1. माइलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम के लक्षण - Myelodysplastic Syndrome (MDS) Symptoms in Hindi
  2. माइलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम के कारण - Myelodysplastic Syndrome (MDS) Causes in Hindi
  3. माइलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम का निदान - Diagnosis of Myelodysplastic Syndrome (MDS) in Hindi
  4. माइलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम का उपचार - Myelodysplastic Syndrome (MDS) Treatment in Hindi
  5. माइलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम के डॉक्टर

माइलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम के लक्षण - Myelodysplastic Syndrome (MDS) Symptoms in Hindi

इस विकार की शुरुआती अवस्था में कभी-कभी संकेत या लक्षण पैदा नहीं होते हैं। कुछ समय के बाद निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं :

  • थकान
  • सांस फूलना
  • त्वचा पीली पड़ना, जो लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या कम होने के कारण हो सकती है
  • प्लेटलेट्स कम होने के कारण असामान्य रूप से ब्लीडिंग होना
  • ब्लीडिंग की वजह से त्वचा पर पिनप्वाइंट के आकार के लाल धब्बे
  • सफेद रक्त कोशिकाओं के कम होने के कारण बार-बार होने वाला संक्रमण

माइलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम के कारण - Myelodysplastic Syndrome (MDS) Causes in Hindi

एक स्वस्थ व्यक्ति में अस्थि मज्जा अपरिपक्व रक्त कोशिकाएं बनाती हैं, जो समय के साथ परिपक्व हो जाती हैं। माइलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम तब होता है, जब किसी कारण से यह प्रक्रिया बाधित होती है और रक्त कोशिकाएं परिपक्व नहीं हो पाती हैं।

सामान्य रूप से विकसित होने के बजाय यह रक्त कोशिकाएं अस्थि मज्जा या रक्तप्रवाह में प्रवेश करने के तुरंत बाद मर जाती हैं। इसके बाद शरीर में खराब या अपरिपक्व कोशिकाएं इकट्ठा हो जाती हैं, जिसकी वजह से निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं।

  • एनीमिया
    इसमें खून की कमी हो सकती है, जिससे व्यक्ति को थकान महसूस हो सकती है।
     
  • ल्यूकोपेनिया
    यह खून का कैंसर है, जिसमें संक्रमण होने का खतरा रहता है।
     
  • थ्रोम्बोसाइटोपेनिया
    थ्रोम्बोसाइटोपेनिया में प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं, जिससे ब्लीडिंग जैसी समस्या हो सकती है।

माइलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम के कुछ मामले ऐसे भी हैं, जिनके निष्कर्षों तक डॉक्टर नहीं पहुंच पाए हैं। कैंसर को ठीक करने के लिए उपचार जैसे कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी या जहरीले रसायन जैसे तम्बाकू, बेंजीन और कीटनाशक चीजें या भारी धातुओं जैसे सीसे के संपर्क में आने के कारण होते हैं।

माइलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम का निदान - Diagnosis of Myelodysplastic Syndrome (MDS) in Hindi

यदि डॉक्टर को संदेह है कि आपको मायलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम है तो वे टेस्ट, फिजिकल टेस्ट या मेडिकल हिस्ट्री के ​जरिए इस विकार की पुष्टि कर सकते हैं। इस टेस्ट में शामिल हो सकते हैं :

  • ब्लड टेस्ट
    डॉक्टर लाल कोशिकाओं, सफेद कोशिकाओं और प्लेटलेट्स की संख्या निर्धारित करने और विभिन्न रक्त कोशिकाओं के आकार या उनमें असामान्य बदलावों को जानने के लिए ब्लड टेस्ट कर सकते हैं।
     
  • टेस्ट के लिए अस्थि मज्जा को निकालना
    इसमें बायोप्सी की जाती है। इसके लिए डॉक्टर सुई के जरिये अस्थि मज्जा से कुछ मात्रा में तरल निकालते हैं और लैब में एक्सपर्ट द्वारा इन नमूनों की जांच की जाती है।

माइलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम का उपचार - Myelodysplastic Syndrome (MDS) Treatment in Hindi

उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि यह विकार किस प्रकार का है और यह कितना गंभीर है। यदि लक्षण हल्के हैं और ब्लड काउंट सामान्य है, तो आपके डॉक्टर नियमित जांच कर सकते हैं।

कुछ मामलों में, डॉक्टर "कम तीव्रता वाले उपचार" की सलाह दे सकते हैं। इनमें शामिल हो सकते हैं :

  • कीमोथेरेपी दवाएं
    इनका उपयोग ल्यूकेमिया के इलाज के लिए किया जाता है।
     
  • इम्यूनोसप्रेसिव थेरेपी
    यह उपचार प्रतिरक्षा प्रणाली को मज्जा पर हमला करने से रोकने की कोशिश करता है, जिससे ब्लड काउंट बढ़ने में मदद मिलती है।
     
  • ब्लड ट्रांसफ्यूजन
    यह कुछ लोगों में ब्लड काउंट को सामान्य करने में मदद कर सकता है।
     
  • आयरन चेलेशन
    यदि गंभीर संक्रमण है, तो इससे आपके शरीर में आयरन की अधिकता हो सकती है। ऐसे में आयरन चेलेशन थेरेपी के जरिए आयरन की मात्रा को सामान्य किया जा सकता है।
     
  • ग्रोथ फैक्टर
    ये रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने के लिए अस्थि मज्जा की मदद करते हैं।
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