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पेट या ड्यूडिनल म्‍यूकोसा (ड्यूडिनम की अंदरूनी लाइनिंग) में दोष के कारण पेट में अल्‍सर यानि पेप्टिक अल्‍सर होता है। इसमें गोल या अंडाकार घाव बन जाते हैं, जिससे पेट में अत्‍यधिक एसिड और पाचक रस बनने की वजह से पेट या ड्यूडिनल लाइनिंग खराब होने लगती है। इस स्थिति के कारण व्‍यक्‍ति को समय-समय पर और खाना खाने के बाद परेशानी होती रहती है। खाना खाने के बाद पेट में एसिड बनने की वजह से परेशानी होती है। पेप्टिक अल्‍सर के दो प्रकार हैं :

गैस्ट्रिक अल्‍सर : ये पेट के निचले हिस्‍से में होता है और इसमें खाना खाने के तुरंत बाद या कुछ समय के लिए दर्द होता है।

ड्यूडिनल अल्‍सर : ये ड्यूडेनम (छोटी आंत का पहला हिस्‍सा) में होता है और इसमें खाना खाने के बाद 2 से 3 घंटे तक पेट में तेज दर्द रहता है।

आमतौर पर पेट में अल्‍सर बैक्‍टीरियम हैलिकोबैक्‍टर पाइलोरी नामक बैक्‍टीरिया से संक्रमण के कारण होता है। हालांकि, ये लंबे समय तक किसी मॉडर्न सूजन-रोधी दवा या आनुवांशिक कारण की वजह से भी हो सकता है।

पेप्टिक अल्‍सर को नियंत्रित करने के लिए होम्‍योपैथिक दवाओं में आर्जेन्‍टम नाइट्रिकम, आर्सेनिकम एल्बम, जेरेनियम मैक्‍युलेटम, हाइड्रैस्टिस कैनेडेन्सिस, केलियम बाइक्रोमिकम, मरक्‍यूरियस कॉरोसिवस, ऑर्निथोगैलम अम्‍बेलैटम, फॉस्‍फोरस और यूरेनियम नाइट्रिकम का नाम शामिल है।

  1. पेप्टिक अल्सर की होम्योपैथिक दवा - Peptic ulcer ki homeopathic dawa
  2. होम्योपैथी में पेट में छाले के लिए खान-पान और जीवनशैली में बदलाव - Homeopathy me Pet me chale ke liye khan pan aur jeevan shaili me badlav
  3. पेट में छाले की होम्योपैथी दवा कितनी लाभदायक है - Pet me chale ki homeopathic dava kitni faydemand hai
  4. पेप्टिक अल्सर के होम्योपैथिक इलाज के नुकसान और जोखिम कारक - Pet me ulcer ki homeopathic dawa ke nuksan aur jokhim karak
  5. पेट में छाले के होम्योपैथिक उपचार से जुड़े अन्य सुझाव - Pet me ulcer ke homeopathic upchar se jude anya sujhav
  6. पेट में छाले की होम्योपैथिक दवा और इलाज के डॉक्टर
  • आर्जेन्‍टम नाइट्रिकम (Argentum Nitricum)
    सामान्‍य नाम :
    नाइट्रेट ऑफ सिल्‍वर (Nitrate of silver)
    लक्षण : इस दवा का नसों पर प्रभाव पड़ता है और ये मस्तिष्‍क एवं रीढ़ की हड्डी से जुड़े लक्षणों जैसे कि तालमेल बैठाने में दिक्‍कत, संतुलन और नियंत्रण में कमी के इलाज में उपयोगी है। ये गैस्ट्रिक इंफ्लामेशन (पेट में जलन) पैदा करने वाली श्‍लेष्‍मा झिल्लियों में जलन में भी असरकारी है। निम्‍न लक्षणों में भी आर्जेन्‍टम नाइट्रिकम लेने की जरूरत पड़ती है :
    • डकार आना
    • जी मितली, उबकाई आना और उल्‍टी
    • पेट फूलना
    • पेट में दर्दभरी सूजन या जलन
    • जलन और संकुचन के साथ अल्‍सर का दर्द होना
    • पेट में कुछ जगहों पर दर्द होना जो कि पेट के सभी हिस्‍सों तक पहुंच जाए
    • शराब की लत की वजह से पेट में सूजन (गे‍स्‍ट्राइटिस)
    • पेट के बाईं ओर पसलियों के अंदर अल्‍सर का दर्द होना
    • पेट में तेज दर्द और कंपन होना
    • बहुत ज्‍यादा पेट फूलना
    • पेट में अल्‍सर होने के साथ दर्द महसूस होना
    • चीज, नमक और मीठा खाने की इच्‍छा करना
    • रात के समय, ठंडे खाने से, मीठी चीजों, खाना खाने के बाद, मासिक धर्म में, इमोशनल होने और बाईं करवट लेटने पर लक्षण और बढ़ जाते हैं। हालांकि, डकार आने, खुली हवा, ठंड और दबाव बनाने पर लक्षणों में सुधार आता है।
  • आर्सेनिकम एल्‍बम (Arsenicum Album)
    सामान्‍य नाम :
    आर्सेनियस एसिड, आर्सेनिक ट्राइऑक्साइड (Arsenious acid, arsenic trioxide)
    लक्षण : ये दवा शरीर के प्रत्‍येक अंग और ऊतक पर प्रभावशाली रूप से कार्य करती है। इससे कई लक्षणों को ठीक किया जा सकता है एवं इसका कई बीमारियों से संबंध है, इसलिए होम्‍योपैथिक उपचार में आर्सेनिकम को व्‍यापक रूप से स्‍वीकृति दी गई है। इस दवा से नीचे बताए गए लक्षणों को ठीक किया जा सकता है :
    • किसी खाद्य पदार्थ को देखना और उसकी गंध को बर्दाश्‍त न कर पाना
    • बहुत ज्‍यादा पानी पीने पर भी प्‍यास न बुझना लेकिन एक बार में घूंट-घूंट कर पानी पीना
    • खाना खाने या कुछ पीने के बाद जी मितली, उबकाई आना और उल्‍टी
    • जलन पैदा करने वाले दर्द के साथ चिंता होना
    • एसिड और कॉफी के सेवन की इच्‍छा होना
    • सीने में जलन
    • एसिडयुक्‍त और खट्टी चीजें निगलना जिससे कि गला छिलने जैसा महसूस हो
    • लंबे समय तक डकार आना
    • उल्‍टी में खून, पित्त, हरे रंग का बलगम या काले-भूरे रंग के पदार्थ के साथ खून आना
    • पेट में बहुत ज्‍यादा दिक्‍कत महसूस होना
    • कम मात्रा में खाद्य या पेय पदार्थ लेने पर भी गैस्‍ट्रैल्जिया (एक प्रकार का पेट दर्द जो कि नसों को नुकसान पहुंचने के कारण हो) होना
    • विनेगर, एसिड, आइसक्रीम, बर्फ के पानी और तंबाकू से डिस्‍पेप्सिया (बदहजमी)
    • बहुत ज्‍यादा डर लगना और गैस्‍ट्रैल्जिया के साथ डिस्‍पोनिया (सांस लेने में दिक्कत) जिसमें बेहोशी, अत्‍यधिक ठंड लगना और थकान हो
    • ऐसा महसूस होना कि व्‍यक्‍ति द्वारा निगली गई हर चीज भोजन नली में फंस रही है। इससे ऐसा एहसास होता है जैसे कि भोजन नली बंद हो गई है और खाना नीचे नहीं उतर पा रहा है।
    • सब्‍जी, तरबूज और पानी से युक्‍त फलों का नकारात्‍मक प्रभाव पड़ना
    • बार-बार दूध पीने का मन करना
    • बरसाती मौसम, आधी रात के बाद, ठंडी जलवायु से, ठंडे खाद्य और पेय पदार्थ, समुद्र के पास और दाईं करवट लेटने पर लक्षण और बढ़ जाते हैं। गर्मी में, सिर को ऊंचा कर के रखने और गर्म चीजें पीने पर लक्षणों में आराम मिलता है।
  • जेरेनियम मैक्‍युलेटम (Geranium Maculate)
    सामान्‍य नाम :
    क्रेन्स बिल (Crane’s-bill)
    लक्षण : ये दवा उन मरीजों पर सबसे ज्‍यादा असर करती है जो अक्‍सर सिरदर्द (जी मितली के साथ अक्‍सर सिरदर्द होना) या बहुत ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होने एवं पेट में अल्‍सर की समस्‍या से ग्रस्‍त होते हैं। इस दवा से निम्‍न लक्षणों को भी ठीक किया जा सकता है :
    • कैटेरहल गैस्ट्राइटिस – गैस्‍ट्राइटिस के साथ अत्‍यधिक म्‍यूकस (श्‍लेष्‍मा झिल्लियों द्वारा स्रावित) का स्राव
    • अल्‍सर और ब्‍लीडिंग की प्रवृत्ति
    • ये दवा गैस्ट्रिक अल्‍सर में उल्‍टी की समस्‍या को कम करती है
  • हाइड्रैस्टिस कैनेडेन्सिस (Hydrastis Canadensis)
    सामान्‍य नाम :
    गोल्‍डन सील (Golden seal)
    लक्षण : ये दवा प्रमुख तौर पर श्‍लेष्‍मा झिल्लियों (आंतरिक अंगों पर मौजूद पतली सी झिल्लियां जो म्यूकस का स्राव करती हैं) पर कार्य करती है। ये श्‍लेष्‍मा झिल्लियों को आराम पहुंचाती है और गाढ़े, पीले रंग का स्राव करती है। इस दवा से नीचे बताए गए लक्षणों को भी ठीक किया जा सकता है :
    • पेट में दर्द महसूस होना जो कि कभी-कभी या बार-बार हो
    • पाचन कमजोर होना
    • खट्टा स्‍वाद आना
    • कोई सख्‍त चीज फंसने का एहसास होना, जिसकी वजह से दर्द होना
    • बेहोशी और कमजोरी महसूस होना
    • एपिगैस्ट्रियम में स्‍पंदन (पेट का ऊपरी हिस्‍सा)
    • ब्रेड या सब्जियां न खा पाना
    • डिस्‍पेप्सिया के साथ पेट की दीवारों की मांसपेशियों की मजबूती में कमी आना
    • अल्‍सर और कैंसर
    • गेस्‍ट्राइटिस
  • केलियम बाइक्रोमियम (Kalium Bichromicum)
    सामान्‍य नाम :
    बाइक्रोमेट ऑफ पोटाश (Bichromate of potash)
    लक्षण : इस दवा को पेट, आंतों और वायु मार्गों की श्‍लेष्‍मा झिल्लियों, हड्डियों एवं अन्‍य तंतुमय ऊतकों पर बहुत असरकारी पाया गया है। इस दवा से निम्‍न लक्षणों का इलाज किया जा सकता है :
    • बियर पीने के बाद जी मितली और उल्‍टी
    • अपच
    • पेट फूलना
    • गेस्‍ट्राइटिस
    • पेट में गोल अल्‍सर होना
    • लिवर और प्‍लीहा के हिस्‍से में एवं रीढ़ की हड्डी के जरिए चुभने वाला दर्द होना
    • पानी पीने का मन न करना
    • मीट को न पचा पाना
    • बियर और एसिडयुक्‍त चीजें खाने का मन करना
    • गैस्ट्रिक लक्षण दिखने जो कि खाना खाने के बाद ठीक हो जाएं
    • पीले रंग की उल्‍टी होना
    • गर्मी में लक्षण बेहतर होते हैं जबकि बियर, सुबह के समय और नग्‍नावस्‍था में लक्षण बढ़ जाते हैं।
       
  • मरक्‍यूरियस कॉरोसिवस (Mercurius Corrosivus)
    सामान्‍य नाम :
    कॉरोसिव सबलिमेट (Corrosive sublimate)
    लक्षण : निम्‍न लक्षणों में इस दवा की जरूरत पड़ती है :
    • लगातार हरे रंग की पित्त की उल्‍टी होना
    • एपिगैस्ट्रियम का बहुत ज्‍यादा संवेदनशील होना
    • आराम करने पर लक्षणों में सुधार आता है जबकि शाम या रात के समय और लगातार एसिड के इस्‍तेमाल पर लक्षण बढ़ जाते हैं
       
  • ऑर्निथोगैलम अम्‍बेलैटम (Ornithogalum Umbellatum)
    सामान्‍य नाम :
    स्‍टार ऑफ बैथलहम (Star of Bethlehem)
    लक्षण : इस दवा का प्रमुख प्रभाव छोटी आंत से सीधे जुड़ने वाले पेट के पाइलोरस पर पड़ता है। ड्यूडिनम के बढ़ने के साथ पेट में दर्द एवं संकुचन के इलाज में ये औषधि उपयोगी है। ड्यूडिनम छोटी आंत का पहला हिस्‍सा होता है जो कि पाइलोरस के ठीक बाद होता है। इस दवा से अन्‍य लक्षणों का भी इलाज किया जा सकता है, जैसे कि :
    • सीने और पेट में तेज दर्द होना जो कि पाइलोरस से शुरू हो एवं पेट में गैस का एक तरफ से दूसरी तरफ घूमने जैसा एहसास होना
    • भूख में कमी
    • वजन कम होना
    • पेट में अल्‍सर के साथ ब्‍लीडिंग होना
    • पाइलोरिक हिस्‍से से खाना गुजरने पर दर्द बढ़ जाना
    • कॉफी जैसे रंग की उल्‍टी होना
    • पेट फूलना
    • बदबूदार गैस निकलने के साथ बार-बार डकार आना
    • पेट के ऊपरी हिस्‍से में दर्द महसूस होना
  • फॉस्‍फोरस (Phosphorus)
    सामान्‍य नाम :
    फॉस्‍फोरस (Phosphorus)
    लक्षण : अगर फॉस्‍फोरस की उचित खुराक उपयोग की जाए तो इसका बिना किसी दुष्‍प्रभाव के रोगनिवारक प्रभाव पड़ता है। इस दवा से निम्‍न लक्षणों को भी ठीक किया जा सकता है :
    • खाना खाने के तुरंत बाद भूख लगना
    • खाना खाने के बाद खट्टा स्‍वाद आना और खाने का बाहर निकल जाना
    • खाने के बाद डकार आना
    • खाने के बाद उल्‍टी
    • पानी बर्दाश्‍त न कर पाना, व्‍यक्‍ति तुरंत उल्‍टी कर देता है
    • ऑपरेशन या सर्जरी के बाद उल्‍टी
    • कार्डिएक ओपनिंग (भोजन नली से लेकर पेट तक का द्वार) के सिकुड़ने जैसा लगना और इस वजह से निगले हुए खाने का मुंह में वापिस आना
    • पेट दर्द जो कि ठंडा और बर्फ खाने पर ठीक हो जाए
    • पेट के प्रभावित हिस्‍से को छूने या चलने पर दर्द होना
    • अत्‍यधिक नमक खाने की वजह से पेट में जलन के साथ जीभ और आंतों में जलन का अहसास होना
    • छूने पर, शारीरिक या मानसिक थकान होने, संध्‍या के समय, गर्म खाद्य या पेय पदार्थ लेने, मौसम बदलने, गर्म मौसम में गीले होने, शाम के समय, बाईं ओर या दर्द वाले हिस्‍से से लेटने, तूफान के दौरान और सीढियां चढ़ने पर लक्षण बढ़ जाते हैं।
    • अंधेरे, दाईं ओर लेटने पर, ठंडी चीजें खाने, ठंडी हवा, ठंडे पानी से नहाने और पर्याप्‍त नींद लेने पर लक्षणों में सुधार देखा जाता है
  • यूरेनियम नाइट्रिकम (Uranium Nitricum)
    सामान्‍य नाम :
    नाइट्रेट ऑफ यूरेनियम (Nitrate of uranium)
    लक्षण : निम्‍न लक्षणों में इस दवा को लेने की जरूरत पड़ सकती है :
    • तेज प्‍यास लगना
    • जी मितली
    • तेज भूख लगना
    • खाने के बाद पेट फूलना
    • पाइलोरिक हिस्‍से में दर्द
    • पेट और ड्यूडिनम में अल्‍सर
    • जलन के साथ दर्द
    • पेट का फूलना
    • गैस
  • बिस्‍मथम सबनाइट्रिकम (Bismuthum Subnitricum)
    सामान्‍य नाम :
    बिस्‍मथम (bismuthum)
    लक्षण : बिस्‍मथम आहार या पाचन नली में जलन या समस्‍या के इलाज में उपयोगी है। इस दवा से अन्‍य लक्षणों को भी ठीक किया जा सकता है, जैसे कि :
    • उल्‍टी के साथ बार-बार दम घुटना और दर्द
    • पानी के पेट तक पहुंचते ही उल्‍टी के जरिए पानी निकाल देना
    • कुछ पीने के बाद डकार आना
    • कोई भी पेय पदार्थ पीने के बाद उल्‍टी कर देना
    • पेट में जलन के साथ भारीपन का एहसास होना
    • कई दिनों तक खाते रहना और फिर उल्‍टी कर देना
    • पाचन कमजोर होने के साथ बदबूदार डकार आना
    • गैस्‍ट्रैल्जिया, पेट से लेकर रीढ़ की हड्डी तक दर्द महसूस होना
    • गैस्‍ट्राइटिस
    • ठंडी चीज पीने पर लक्षण बेहतर हो जाते हैं लेकिन पेट भरने पर व्‍यक्‍ति उल्‍टी करना शुरू कर देता है
  • ग्रेफाइट्स (Graphites)
    सामान्‍य नाम :
    काला सीसा, प्‍लम्‍बगो (Blacklead, plumbago)
    लक्षण : ग्रेफाइट में खुजली को कम करने की शक्‍ति है। ये दवा खासतौर पर मोटे, गोरी रंगत और त्‍वचा संक्रमण एवं कब्‍ज की प्रवृत्ति वाले लोगों पर असरकारी है। इस दवा से निम्‍न लक्षणों का भी इलाज किया जा सकता है :
    • मीट खाने का मन न करना
    • मीठे से जी मितली
    • गर्म पेय पदार्थों को बर्दाश्‍त न कर पाना
    • हर बार खाना खाने के बाद उल्‍टी और जी मितली
    • पीरियड्स के दौरान मॉर्निंग सिकनेस
    • पेट पर दबाव जैसा महसूस होना
    • पेट में जलन जिससे भूख लगे
    • डकार लेने में दिक्‍कत
    • पेट में संकुचन जैसा दर्द होना
    • बार-बार गैस्‍ट्रैल्जिया होना
    • पेट फूलना
    • पेट दर्द जो कि खाने के बाद, कोई पेय पदार्थ पीने खासतौर पर दूध पीने और लेटने पर कुछ समय के लिए ठीक हो जाए
    • गरमाई में, रात के समय, माहवारी के दौरान और बाद में लक्षण गंभीर हो जाते हैं। अंधेरे और शरीर को ढकने पर लक्षणों में आराम मिलता है
  • लाइकोपोडियम क्‍लेवेटम (Lycopodium Clavatum)
    सामान्‍य नाम :
    क्‍लब मॉस (lycopodium)
    लक्षण : ये दवा तब अपना असर दिखाती है जब इसे सही तरह से मसल कर और पतला कर के उचित मात्रा में दिया जाए। इस दवा से इसे निम्‍न लक्षणों को ठीक किया जाता है :
    • स्‍टार्च और खमीर की गई चीजें, पत्ता गोभी एवं बींस खाने से डिस्पेप्सिया (अपच)
    • बहुत तेज भूख लगना
    • ब्रेड खाने का मन न करना
    • मीठी चीजें खाने का मन करना
    • खाने का खट्टा स्‍वाद आना
    • खट्टी डकारें आना
    • अपच
    • बहुत ज्‍यादा खाना खाने के साथ पेट फूलना
    • खाना खाने के बाद पेट पर दबाव महसूस होना और मुंह में खट्टा स्‍वाद आना
    • बहुत थोड़ा खाने पर ही पेट भर जाना
    • ओएस्टर न खा पाना
    • पेट के अंदर गैस का इधर-उधर घूमना
    • रात में जागने पर भूख लगना
    • हिचकी आना
    • जलने वाली डकार आना जो कि सिर्फ ग्रसनी (ड्योडिनम) से शुरू हो रही हो। यहां पर इसकी वजह से घंटों तक जलन रहना
    • गर्म खाद्य और पेय पदार्थ पसंद आना
    • पेट में कुछ हिलने जैसा महसूस होना जो कि रात के समय और बढ़ जाए
    • दाईं करवट लेटने, दाएं से बाईं ओर चलने और ऊपर से नीचे आने, गर्म कमरे, गर्म हवा, पलंग पर लेटने और कुछ गर्म लगाने पर लक्षण और बढ़ जाते हैं। चलने, आधी रात के बाद, ठंड में जाने और कपड़े उतारने पर लक्षण ठीक हो जाते हैं
  • प्‍लम्‍बम मेटैलिकम (Plumbum Metallicum)
    सामान्‍य नाम :
    सीसा (Lead)
    लक्षण : स्‍कलेरोटिक स्थितियों में तंतुमय ऊतकों की अति वृद्धि के कारण शरीर में कुछ ऊतक सख्‍त होने लगते हैं। ये दवा नीचे बताए गए लक्षणों का इलाज कर सकती है :
    • पेट और भोजन नली में संकुचन
    • पेट में दबाव और सख्‍त महसूस होना
    • गैस्‍ट्रैल्जिया के साथ लगातार उल्‍टी होना
    • कोई सख्‍त चीज खाने में दिक्‍कत
    • रात के समय और चलने पर लक्षण और बढ़ जाते हैं, लेकिन सख्‍त दबाव और शारीरिक थकान होने पर लक्षणों में आराम मिलता है

होम्‍योपैथी उपचार ले रहे लोगों को आहार एवं जीवनशैली में कुछ जरूरी बदलाव करने के लिए कहा जाता है, जैसे कि:

क्‍या करें

क्‍या न करें

  • कैफीनयुक्‍त पेय पदार्थ, चाइनीज टी या अन्‍य हर्बल टी न पिएं
  • औषधीय तत्‍वों से बनी बियर, औषधीय मसालों से बनी शराब और सभी तरह के फलों के रस का सेवन करने से बचें
  • तेज खुशबू वाली चीजों, परफ्यूम, फूलों की तेज खुशबू से महका कमरा, टूथ पाउडर और इत्र का इस्‍तेमाल न करें
  • मसालेदार खाना, चटनी, मसालेदार केक और चॉकलेट, प्‍याज न खाएं
  • औषधीय गुणों से युक्‍त सब्जियों और जड़ी बूटियों, औषधीय गुण रखने वाले पौधों की जड़ों एवं डंठल से बने व्‍यंजनों का सेवन न करें
  • औषधीय गुण रखने वाली अजमोद, पुरानी चीज और बासी मीट या मांस न खाएं
  • ओवरईटिंग से बचें
  • चीनीनमक और मादक पदार्थ न लें
  • ऐसे कपड़े पहनने से बचें, जिनमें आपको बहुत गर्मी लगे या जिनमें हवा आने में दिक्‍कत हो

पेप्टिक अल्‍सर के एलोपैथिक इलाज में लक्षणों एवं बीमारी को पूरी तरह से ठीक करने की बजाय लक्षणों को दबाने का काम होता है। हालांकि, होम्‍योपैथिक उपचार में बीमारी को जड़ से खत्‍म करने पर काम किया जाता है। होम्‍योपैथिक चिकित्‍सक न‍ सिर्फ बीमारी के लक्षणों को ठीक करने के लिए दवा देते हैं बल्कि मरीज की सेहत में सुधार लाने पर भी काम करते हैं।

अध्‍ययनों के अनुसार होम्‍योपैथिक दवाएं श्‍लैष्मिक कोशिका के फैलाव को उत्तेजित एवं गैस्ट्रिक एसिड के स्राव को रोक कर कार्य करती है। ये पेट में एसिड के स्राव के लिए जिम्‍मेदार कुछ आयनिक और आणविक चक्रों को भी रोकती है।

एक समीक्षा में 107 ट्रायल में से 81 मामलों में होम्‍योपैथिक उपचार का सकारात्‍मक प्रभाव देखा गया। इतना ही नहीं, इस अध्ययन ने यह भी साबित किया कि होम्योपैथिक ट्रीटमेंट पूरी तरह से प्‍लेसिबो इफेक्‍ट (इसमें मरीज मान लेता है कि उसे दवा से लाभ हो रहा है) नहीं है।

(और पढ़ें - पेट में अल्सर के घरेलू उपाय)

होम्‍योपैथिक दवाएं बहुत पतली होती हैं और लक्षणों के आधार पर हर मरीज के लिए विशेष दवा तैयार की जाती है। इन दवाओं के चिकित्‍सकीय प्रभाव अधिक और दुष्‍प्रभाव कम या न के बराबर होते हैं। होम्‍योपैथिक दवाएं तभी असर करती हैं, जब इन्‍हें सही मात्रा में लिया जाए, इसलिए अनुभवी चिकित्‍सक की देखरेख में ही इन्‍हें लेना चाहिए।

पेट में अल्‍सर के इलाज में होम्‍योपैथी इलाज सुरक्षित और असरकारी तरीका है। अत्यधिक शक्तिशाली होने के कारण होम्‍योपैथी दवाओं का प्रभाव बहुत अच्‍छा पड़ता है और इसके दुष्‍प्रभाव भी कम होते हैं। बेहतर परिणाम के लिए होम्‍योपैथिक दवाओं को अनुभवी चिकित्‍सक की देखरेख में ही लेना चाहिए।

(और पढ़ें - पेट में कैंसर के कारण)

Dr. Deepti Papanai

Dr. Deepti Papanai

होमियोपैथ

Dr. Minalben Mathurbhai Patel

Dr. Minalben Mathurbhai Patel

होमियोपैथ

Dr. Ashwini Madandas Bairagi

Dr. Ashwini Madandas Bairagi

होमियोपैथ

और पढ़ें ...

References

  1. British Homeopathic Association. Digestive problems . London; [Internet]
  2. Repertory by Oscar E. Boericke. Repertory. Médi-T; [lnternet]
  3. Wei-Ping Bi, Hui-Bin Man, Mao-Qiang Man. Efficacy and safety of herbal medicines in treating gastric ulcer: A review World J Gastroenterol. 2014 Dec 7; 20(45) PMID: 25493014
  4. William Boericke. Homeopathic Materia Medica. Kessinger Publishing: Médi-T 1999, Volume 1 Homoeopathic Materia Medica
  5. Ronald L. Koretza, Michael Rotblatt. Complementary and alternative medicine in gastroenterology: The good, the bad, and the ugly The Journal of Clinical Gastroentrology and Hepatology, November 2004, Volume 2, Issue 11, Pages 957–967
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