खराब जीवनशैली के कारण मौजूदा समय में लोगों को तमाम प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। नसों का दबना भी इसी तरह की समस्या है। आमतौर पर इस समस्या का मुख्य कारण शरीर के किसी नस वाले भाग पर पड़ने वाला प्रेशर होता है। नसों को होने वाली क्षति के कारण ऐसी समस्या पैदा हो सकती है। नसों के दबने के कारण कार्पल टनल सिंड्रोम जैसी तमाम अन्य समस्याएं भी जन्म ले सकती हैं।

कई बार नसों के दबने की समस्या गंभीर हो जाती है, जिसमें विशेष चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत होती है। हालांकि, अगर शुरुआती दिनों में इस समस्या को लेकर सावधानी बरती जाए तो इसे कुछ घरेलू उपायों के जरिए आसानी से ठीक किया जा सकता है। इस लेख में हम आपको ऐसे ही कुछ घरेलू उपायों के बारे में बताएंगे, जिनको प्रयोग में लाकर आप नस दबने से होने वाली समस्याओं को दूर कर सकते हैं।

  1. नस दबने की पहचान क्या है?
  2. दबी हुई नस खोलने के उपाय
  3. विभिन्न अंगों के नस दबने की समस्या के उपाय
नस दबने की समस्या दूर करने के घरेलू उपाय के डॉक्टर

नस दबने के कारण शरीर में कई प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं। इन निम्नलिखित लक्षणों से इसे पहचाना जा सकता है।

लेटते समय या जागने के बाद लक्षण गंभीर हो सकते हैं। नसों के दबने की समस्या शरीर में कहीं भी हो सकती है, लेकिन ज्यादातर लोगों में गर्दन, पीठ, कोहनी और कलाई में यह दिक्कत देखने को मिलती है।

नस दबने से होने वाली समस्याओं को दूर करने के लिए निम्नलिखित घरेलू उपायों को प्रयोग में लाया जा सकता है। नियमित रूप से इनके प्रयोग से फायदा मिलता है।

सुधारें मुद्रा

नस दबने का प्रमुख कारण मुद्रा का सही न होना हो सकता है, इतना ही नहीं यह स्थिति को और बदतर भी बना सकता है। लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठने या खड़े रहने से शरीर पर अनावश्यक दबाव पड़ता है, इससे रीढ़ और मांसपेशियों को नुकसान पहुंचा सकता है, बाद में यही स्थिति नसों के दबने का कारण गंभीर रूप भी बन सकती है।

नस दबने के कारण होने वाले दर्द और समस्याओं को दूर करने के लिए अपने पॉस्चर यानी मुद्रा को सुधारने का प्रयास करें। दिन में ज्यादातर उस मुद्रा में बैठने या रात में रोने का प्रयास करें, जिससे दर्द में राहत मिलती हो।

शरीर को दें अतिरिक्त आराम

नसों के दबने की समस्या को दूर करने के लिए शरीर को पर्याप्त मात्रा में नींद की आवश्यकता होती है। नींद के दौरान शरीर स्वयं को रिपेयर करता है। ऐसे में शरीर को ज्यादा देर आराम देने से लक्षणों में तेजी से सुधार होता है।

कुछ मामलों में शरीर के प्रभावित हिस्से को आराम देने और अतिरिक्त नींद लेने मात्र से ही नसों के दबने की समस्या में काफी हद तक आराम मिलता है। ऐसी अवस्था में एक बात का ध्यान रखना और महत्वपूर्ण होता है कि शरीर के प्रभावित हिस्से को बहुत अधिक प्रयोग में नहीं लाया जाना चाहिए। जिन लोगों को इस तरह की समस्याएं हों, उन्हें ऐसे किसी भी कार्य से बचना चाहिए जिसकी वजह से तंत्रिकाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता हो। उन्हें हमेशा ऐसी ही मुद्रा में सोने की कोशिश करनी चाहिए जो तंत्रिका पर दबाव से राहत देती हो।

वर्कस्टेशन में करें बदलाव

नस दबने की समस्या से परेशान लोगों को अपने वर्कस्टेशन में बदलाव करना चाहिए। पारंपरिक रूप से  बैठकर काम करने के बजाय एर्गोनोमिक माउस और कीबोर्ड का उपयोग करने से हाथों और कलाई पर पड़ने वाला दबाव कम होता है। इसके अलावा कंप्यूटर की ऊंचाई को अपने आंखों के सीध में रखें, इससे गर्दन और पीठ के दर्द के लक्षणों को ठीक करने में भी मदद मिलती है। सामान्य रूप से लंबे समय तक बैठकर काम करते रहने से शारीरिक मुद्रा पर असर पड़ता है जिससे नस दबने की समस्याएं पैदा हो सकती है।

इसके अलावा आप बदलाव के तौर पर ऐसे वर्कस्टेशन को प्रयोग में ला सकते हैं, जिसमें खड़े होकर काम करना हो। इससे रीढ़ की हड्डी गतिशील और लचीली बनी रहती है। कई सारे स्टैंडिंग वर्कस्टेशन ऑनलाइन आसानी से उपलब्ध होते हैं। आपके लिए कौन सा वर्कस्टेशन बेहतर होगा इसे जानने के लिए सबसे पहले ऐसी मुद्रा में बैठकर काम करिए जिससे दर्द में आपको रा​हत मिले, फिर उसी आधार पर वर्कस्टेशन का चयन कर सकते हैं।

स्ट्रेचिंग और योग

सामान्य रूप से स्ट्रेचिंग और योग के आसानों को करके भी आप आसानी से नस दबने से होने वाली समस्याओं को दूर कर सकते हैं। हां, लेकिन आपको यहां ध्यान रखने की जरूरत है कि स्ट्रेचिंग बहुत मध्यम दबाव वाला ही रखें, बहुत तेज गति से स्ट्रेचिंग करने से समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।

यदि व्यायाम करते समय किसी प्रकार के दर्द या परेशानी का अनुभव करें, तो व्यायाम को तुरंत रोक देना चाहिए। दर्द के बावजूद व्यायाम को जारी रखने से तंत्रिकाओं को क्षति पहुंचने का खतरा बना रहता है।

मसाज और फिजिकल

दर्द और तंत्रिकाओं पर पड़ रहे तनाव को दूर करने के लिए मसाज थेरपी को प्रयोग में लाना फायदेमंद हो सकता है। प्रभावित हिस्से के आसपास मसाज करने से नसों पर पड़ रहा तनाव कम होता है। इसके लिए आप फुल बॉडी मसाज को भी प्रयोग में ला सकते हैं।

यहां ध्यान रखें कि ऐसी स्थिति में डीप टिश्यू मसाज न लें। अतिरिक्त दबाव के कारण लक्षण और खराब हो सकते हैं। फिजिकल थेरपी, व्यायाम, मसाज और हल्की स्ट्रेचिंग नसों के दबने के कारण पैदा होने वाली समस्याओं के लक्षणों को दूर करने में काफी उपयोगी हो सकती है।

आइस पैक और हीट पैक का प्रयोग

अल्टरनेट रूप से हीट और आइस पैक के प्रयोग से सूजन और दर्द संबंधी समस्याओं को कम किया जा सकता है। हीट और आइस पैक के संयोजन से प्रभावित हिस्से में ताजा रक्त का संचार बढ़ता है, जिससे दर्द से राहत मिल सकती है।

प्रभावित हिस्से पर 15 मिनट के लिए आइस पैक से सेकाई करें। इस क्रिया को दिन में तीन बार दोहराएं। वहीं हीट पैड को एक घंटे तक प्रयोग में लाया जा सकता है। दिन में इसे भी कम से कम तीन बार दोहराएं। आइस पैक और हीट पैक दोनों ही बाजार में आसानी से  उपलब्ध हैं।

लाइफस्टाइल में बदलाव

दैनिक रूप से व्यायाम, हल्के व्यायाम जैसे वॉकिंग, तैराकी, साइकिलिंग आदि का प्रयोग शरीर को फिट रखने के साथ नसों के दबने से होने वाली परेशानियों के लक्षणों को भी कम करने में मददगार होता है। शरीर से अतिरिक्त वजन कम करने से भी नसों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं नियमित रूप से व्यायाम करने से इंफ्लामेशन की समस्याओं को दूर किया जा सकता है।

नस दबने की समस्या शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है। हालांकि आमतौर पर गर्दन, पीठ, ​कूल्हे और गर्दन में यह समस्या देखने को मिलती है। निम्न उपायों को प्रयोग में लाकर इन समस्याओं को दूर किया जा सकता है।

पीठ के निचले हिस्से में नस दबने के उपाय

पीठ के निचले हिस्से में नस दबने से होने वाले दर्द और अन्य लक्षणों को कम करने के लिए डॉक्टर सबसे पहले आपको जीवनशैली में बदलाव करने की सलाह देंगे। निम्न उपायों को प्रयोग में लाकर आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।

  • आराम करें: कई प्रकार की विशेष गतिविधियों और शारीरिक मुद्रा के कारण नस दबने से होने वाली समस्याएं बदतर हो जाती हैं। लक्षणों को ठीक करने के लिए डॉक्टर आपको ज्यादा से ज्यादा आराम करने की सलाह देते हैं। शरीर को आराम देने से नसों पर पड़ने वाला दबाव कम होता है जिससे स्थिति में सुधार आता है।
  • हीट और आइस पैक: दिन में दो से तीन बार के लिए 20 मिनट तक हीट और आइस पैक के प्रयोग से नसों के दबने के कारण होने वाले दर्द और मांसपेशियों में ऐंठन से राहत मिलती है।
  • नियमित रूप से व्यायाम: व्यायाम करने से तंत्रिकाओं पर पड़ने वाला दबाव कम होता है और नस दबने के कारण उत्पन्न लक्षण ठीक होने लगते हैं।

गर्दन की नस दबने का उपाय

गर्दन में नस दबने की समस्या सबसे आम है। गलत ढंग से सोने के कारण यह दिक्कत आती है। गर्दन की नस दबने की स्थिति में निम्न उपायों को प्रयोग में लाकर आराम प्राप्त किया जा सकता है।

  • गर्म और ठंडी सेकाई: नस दबने के कारण होने वाले दर्द और सूजन को कम करने में हीट और आइस पैक से सेकाई काफी फायदेमंद मानी जाती है। आइस पैक का प्रयोग आप पांच-पांच मिनट के लिए दिन में तीन बार कर सकते हैं। वहीं अगर आप हीट पैक को प्रयोग में ला रहे हैं तो एक बोतल में गर्म पानी भरकर उसे कपड़े में लपेट लें और 20 मिनट के लिए अपनी गर्दन पर लगा सकते हैं। यह प्रक्रिया दिन में दो या तीन बार की जा सकती है।
  • पॉश्चर को सही करें: गलत ढंग से सोने और बैठने से इस तरह की समस्याएं शुरू हो सकती हैं। अपने बैठन के तरीके को बदलें। वर्कस्टेशन को ऐसा रखें कि आपको सिर सामने की ओर झुकाना न पड़े। इससे भी तंत्रिकाओं पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सकता है।
  • फिलिकल थेरपी: गर्दन की नस दबने की स्थिति में व्यायाम काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस समस्या से बचने के लिए गर्दन-मांसपेशियों को मजबूती देने वाले व्यायामों को प्रयोग में ला सकते हैं। सामान्य रूप से स्ट्रेचिंग से शुरुआत कर गर्दन की मांसपेशियों को सक्रिय करने वाले अन्य व्यायामों को करने से लाभ प्राप्त होता है।

कूल्हे की नस दबने का उपाय

कूल्हे की नस दबने की समस्या अगर शुरुआती स्तर की है तो इसका इलाज घर पर आसानी से किया जा सकता है। ऐसे स्थिति में आप निम्न उपायों को प्रयोग में ला सकते हैं।

  • शरीर को दें आराम: ऐसे किसी भी प्रकार के कार्यों से बचें जिससे दर्द की समस्या बढ़ती हो। इस दौरान शरीर को पूरा आराम देने से नस पर पड़ने वाला अतिरिक्त तनाव कम होता है जिससे दर्द में राहत मिलती है।
  • दवाइयों का सेवन: कुछ एंटी-इंफ्लामेटरी दवाइयां सूजन को कम करने में प्रभावी होती हैं, जिससे तंत्रिकाओं पर पड़ने वाला दबाव कम होता है। किसी भी दवा के सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।
  • हीट और कोल्ड पैड: अल्टरनेट रूप से हीट और कोल्ड पैड का प्रयोग दर्द से राहत दिलाता है। प्रभावित हिस्से पर इन पैड का प्रयोग करें। दोनों ही पैड बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं।
  • स्ट्रेचिंग: कूल्हों के लिए विशेष रूप से प्रयोग में लाए जाने वाले स्ट्रेचिंग से भी आपको राहत मिल सकती है। स्ट्रेचिंग करने से मांसपेशियों और तंत्रिकाओं पर पड़ने वाला दबाव कम होता है।
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