myUpchar सुरक्षा+ के साथ पुरे परिवार के हेल्थ खर्च पर भारी बचत

पोस्टकंक्सिव सिंड्रोम क्या है?

पोस्टकंक्सिव सिंड्रोम एक जटिल विकार है जिसमें कई लक्षण देखने को मिलते हैं जैसे सिरदर्द और चक्कर आना, जो कि एक हफ्ते तक रहते हैं और कभी-कभी चोट लगने के बाद कुछ महीनों तक भी रह सकते हैं, जिसके कारण कन्कशन (Concussion) होता है।

कन्कशन बेहद ही हल्की सिर की चोट है जो आमतौर पर सिर पर आघात लगने से होती है। यह समस्या सिर या शरीर में बहुत ज्यादा झटकों से भी हो सकती है। यह जरूरी नहीं है कि कन्कशन होने पर आप बेहोश हो जाएं।

(और पढ़ें - सिर में चोट लगने पर क्या करे)

पोस्टकंक्सिव सिंड्रोम के लक्षण क्या हैं?

पोस्टकंक्सिव सिंड्रोम के लक्षण जैसे - सिर दर्द, चक्कर आना, थकान महसूस होना, चिंता, अनिद्रा, धुंधला दिखना, याददाश्त खो जाना आदि। पोस्टकंक्सिव सिंड्रोम में सिर दर्द होता है या माइग्रेन जैसा दर्द भी हो सकता है। अक्सर, इसमें टेंशन टाइप सिरदर्द (Tension-type headaches- सिर दर्द का एक प्रकार) भी हो सकता है।

(और पढ़ें - माइग्रेन दूर करने के घरेलू उपाय)

पोस्टकंक्सिव सिंड्रोम क्यों होता है?

आमतौर पर, पोस्टकंक्सिव सिंड्रोम सिर में आई चोट के कारण होता है। हर किसी को सिर में हल्की चोट के कारण पोस्टकंक्सिव सिंड्रोम नहीं होता। यह विकार उन लोगों की स्थिति को अधिक खराब कर सकता है, जिन्हें पहले कन्कशन हो रखा है या सिर में चोट लगी है।

अगर सिर की चोट लगने के बाद सिर दर्द होता है या जिनमें मानसिक परिवर्तन देखने को मिलते हैं जैसे भूलने की बीमारी या थकान तो ऐसे में पोस्टकंक्सिव सिंड्रोम अधिक गंभीर हो सकता है। महिलाओं और बूढ़े मरीजों में इस बीमारी से जुड़े लक्षण सबसे अधिक देखे जाते हैं।

(और पढ़ें - याददाश्त बढ़ाने के घरेलू उपाय)

पोस्टकंक्सिव सिंड्रोम का इलाज कैसे होता है?

जिन लोगों को पोस्टकंक्सिव सिंड्रोम होता है वो आराम करके और तनाव को कम करके इसे ठीक कर सकते हैं। कई डॉक्टर पोस्टकंक्सिव सिंड्रोम से जुड़े लक्षणों का भी इलाज करते हैं। उदहारण के तौर पर, जिन लोगों को इस बीमारी के कारण सिर दर्द होता है, तो डॉक्टर उन्हें दर्द निवारक या माइग्रेन से संबंधित दवाइयां दे सकते हैं।

(और पढ़ें - तनाव दूर करने का उपाय)

कुछ विशेषज्ञ जैसे न्यूरोलॉजिस्ट या मनोचिकित्सक भी इस समस्या के कारण होने वाले मानसिक परिवर्तनों का इलाज करने में मदद कर सकते हैं। एंटी डिप्रेसेंट दवाएं लेने और मनोचिकित्सा (Psychotherapy) की सलाह दी जा सकती है।

(और पढ़ें - चिंता दूर करने के घरेलू उपाय)

क्या आप या आपके परिवार में किसी को यह बीमारी है? सर्वेक्षण करें और दूसरों की सहायता करें

और पढ़ें ...