प्राइमरी सिलिअरी डिस्केनेसिया - Primary Ciliary Dyskinesia in Hindi

Dr. Nabi Darya Vali (AIIMS)MBBS

September 16, 2020

April 12, 2021

प्राइमरी सिलिअरी डिस्केनेसिया
प्राइमरी सिलिअरी डिस्केनेसिया

प्राइमरी सिलिअरी डिस्केनेसिया (पीसीडी) एक दुर्लभ आनुवंशिक विकार है, जिसमें सिलिया ठीक से काम नहीं करती है। सिलिया ऐसी छोटी संरचनाएं हैं, जो आपके स्वास्थ्य पर बड़ा प्रभाव डाल सकती हैं। इन्हें केवल माइक्रोस्कोप के जरिए ही देखा जा सकता है। सिलिया आपकी कोशिकाओं को आगे बढ़ाती हैं, जिसकी वजह से सांस लेने और प्रजनन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में मदद मिलती है। यह बीमारी दुनिया भर में लगभग 15,000 लोगों में से किसी एक को होती है।

(और पढ़ें - सांस फूलने या सांस लेने में तकलीफ हो तो क्या करें)

प्राइमरी सिलिअरी डिस्केनेसिया के संकेत और लक्षण क्या हैं? - Primary Ciliary Dyskinesia Symptoms in Hindi

पीसीडी मुख्य रूप से साइनस, कान और फेफड़ों को प्रभावित करता है। इससे जुड़े सामान्य संकेतों, लक्षणों और जटिलताओं में निम्नलिखित शामिल हैं :

साइनस :

कान :

फेफड़े :

  • नवजात शिशुओं में सांस लेने में तकलीफ
  • लंबे समय से खांसी आना
  • बार-बार निमोनिया
  • फेफड़े के एक भाग या पूरे फेफड़े का खराब होना

(और पढ़ें - फेफड़े खराब होने के कारण)

प्राइमरी सिलिअरी डिस्केनेसिया का कारण क्या है? - Primary Ciliary Dyskinesia Causes in Hindi

पीसीडी एक आनुवंशिक स्थिति है जो 32 जीनों में से किसी एक में गड़बड़ी के कारण होती है, लेकिन शोधकर्ता अभी तक उस जीन की पहचान नहीं कर पाए हैं जो सिलिआ के कार्य को प्रभावित करते हैं। ये जीन ऐसे प्रोटीन बनाने के लिए निर्देश देते हैं जो सिलिया की आंतरिक संरचना बनाते हैं। यह कई अंगों और ऊतकों के सामान्य कामकाज के लिए बहुत जरूरी है।

यह ऑटोसोमल रिसेसिव पैटर्न के माध्यम से अगली पीढ़ी को प्रभावित करता है, जिसका मतलब है कि व्यक्ति को उसके माता और पिता दोनों से जीन की खराब प्रतियां प्राप्त हुई हैं।

प्राइमरी सिलिअरी डिस्केनेसिया का निदान कैसे किया जाता है? - Primary Ciliary Dyskinesia Diagnosis in Hindi

यदि किसी व्यक्ति में जन्म से लगातार श्वसन संक्रमण की समस्या बनी हुई है, तो यह प्राइमरी सिलिअरी डिस्केनेसिया (पीसीडी) का सबसे स्पष्ट संकेत हो सकता है। अक्सर पीसीडी का सटीक निदान नहीं हो पाता है, जिस कारण इसे अन्य तरह की समस्या समझ लिया जाता है। 

इस स्थिति में डॉक्टर सबसे पहले "क्रोनिक साइनोपल्मोनरी डिजीज" नाम के लक्षण की पहचान करते हैं, क्योंकि यह साइनस, कान और फेफड़े को प्रभावित कर सकता है। इसके बाद वे इस बात की जांच करते हैं कि मरीज में रिअरैंज या रिवर्स्ड आर्गन (आंतरिक अंग अपनी जगह पर न होना) की स्थिति है या नहीं।

यदि किसी व्यक्ति को पीसीडी है, तो उसमें नेजल नाइट्रिक ऑक्साइड का स्तर बहुत कम होगा। यह आपकी नाक और मुंह से निकलने वाली गैस है।

हालांकि, डॉक्टर जेनेटिक टेस्टिंग का भी उपयोग कर सकते हैं, लेकिन कई बार यह मुश्किल हो सकता है, क्योंकि ऐसे बहुत सारे जीन हैं, जो संभवतः किसी दोष का कारण बन सकते हैं।

अगर व्यक्ति में पीसीडी के लक्षण होने के साथ जेनेटिक टेस्ट के रिजल्ट पॉजिटिव आते हैं, तो ऐसे में डॉक्टर केवल पीसीडी का निदान करेंगे। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि निगेटिव रिपोर्ट आने का मतलब यह नहीं है कि आप पीसीडीमुक्त है।

(और पढ़ें - साइनस के घरेलू उपाय)

प्राइमरी सिलिअरी डिस्केनेसिया का उपचार क्या है? - Primary Ciliary Dyskinesia Treatment in Hindi

डॉक्टर लक्षणों की जांच के बाद यह पता लगाते हैं कि पीसीडी की वजह से शरीर को कितना नुकसान हुआ है। वैसे तो पीसीडी के लिए कोई इलाज नहीं है, लेकिन डॉक्टर निम्न तरीकों को अपना सकते हैं :

  • फेफड़ों के कार्य की बारीकी से निगरानी करना और संक्रमण होने की स्थिति में एंटीबायोटिक दवाएं लिखना
  • वायुमार्ग की जांच करना
  • लक्षणों के अनुसार दवाइयां निर्धारित करना
  • क्रोनिक ईयर इंफेक्शन की स्थिति में ईयर ट्यूब्स का इस्तेमाल
  • हेटरोटैक्सी के कारण जन्मजात हृदय रोग की स्थिति में सर्जरी करना
  • जरूरत पड़ने पर स्पीच थैरेपी और हियरिंग ऐड का उपयोग करना
  • साइनस की सर्जरी करना इत्यादि।

(और पढ़ें - फेफड़ों में इंफेक्शन)



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