फैशन का दौर भले ही बदलता रहे, लेकिन जीन्स सालों से ट्रेंड में है। डेनिम जीन्स ने लोगों पर कुछ ऐसा जादू कर दिया है कि आज के युवाओं को सिंपल पैंट पहनना अब अच्छा नहीं लगता। यहां तक कि आजकल लोग फॉर्मल मीटिंग्स में भी जीन्स पहनकर पहुंचने लगे हैं। जीन्स ट्रेंडी लगती है, इसे मेनटेन करना आसान है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि लगातार जीन्स पहनना आपके लिए घातक भी हो सकता है? जी हां, ये सच है।

दरअसल 12 अक्टूबर को लगभग 2 बजे, दिल्ली के 30 वर्षीय सौरभ शर्मा को शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस दौरान सौरभ का ब्लड प्रेशर सामान्य नहीं था और नाड़ी भी बहुत धीमी गति से चल रही थी। इस संबंध में 21 नवंबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी गई। इस दौरान सौरभ ने बताया कि वे बीमार पड़ने से एक दिन पहले ही अपने दोस्तों के साथ हरिद्वार की लंबी रोड़ ट्रिप से लौटे थे। दोस्तों के साथ मस्ती करते-करते उन्होंने लगातार आठ घंटे कार ड्राइव की और बीच में एक भी ब्रेक नहीं लिया। हरिद्वार से लौटने के बाद अगले ही दिन सौरभ को अपनी बाईं टांग में सूजन महसूस हुई और उनको चलने में भी कठिनाई हो रही थी। उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया और सूजनदर्द के लिए दवा लगाकर वे रोजाना की तरह ऑफिस चले गए।

सौरभ के अनुसार ऑफिस पहुंचने के कुछ ही देर बाद उन्हें चक्कर जैसा महसूस होने लगा और फिर अचानक से उनको दौरा पड़ गया। सौरभ के सहयोगी उन्हें होश में लाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वे पूरी तरह से बेसुध थे और कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे थे। उन्हें धुंधला दिखने लगा और फिर पूरी तरह से उनकी आंखों के आगे अंधेरा छा गया, इसके आगे उन्हें कुछ भी याद नहीं।

क्या बताती हैं जांच
सौरभ को पहले नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन वहां के डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को देखते उन्हें शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल में रेफर कर दिया। मैक्स अस्पताल के डॉक्टर नवीन भ्रामरी का कहना है कि यह एक अनोखा मामला है, सौरभ को लगातार 45 मिनट तक सीपीआर पर रखा गया, ताकि इनका हृदय लगातार काम करता रहे। उस समय उन्हें सीपीआर देना बहुत ही जरूरी हो गया था, क्योंकि उनका शरीर नीला पड़ने लगा था।

जब सौरभ का इको टेस्ट किया गया, तो पता चला कि उनके हृदय का दायां चैंम्बर गंभीर रूप से फैल चुका है। डॉ. भ्रामरी और डॉ. देवेंद्र कुमार अग्रवाल बताते हैं कि उन्हें पल्मोनरी एम्बोलिज्म पर संदेह था, जिसकी पुष्टि के लिए उनको आगे टेस्ट भी करने थे। लेकिन उनके पास इतना समय नहीं था, इसलिए उन्होंने देर न करते हुऐ सौरभ को खून का थक्का पिघलाने वाली (क्लोट बस्टिंग) दवा दे दी।

डॉक्टर भ्रामरी के अनुसार, अक्सर एंटीकॉग्युलेंट्स दवाएं देने से पहले दो घंटे इंतजार किया जाता है, लेकिन इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उसी समय दवा दे दी गई और अगर ऐसा नहीं किया जाता तो शायद सौरभ को बचा पाना संभव नहीं हो पाता।

क्या है पल्मोनरी एंबोलिज्म?
जब फेफड़ों में मौजूद एक या अधिक धमनियों में अवरोध उत्पन्न हो जाता है, तो इस स्थिति को पल्मोनरी एम्बोलिज्म कहा जाता है। यह अवरोध आमतौर पर खून का थक्का जमने के कारण होता है। ये खून का थक्का अक्सर टांगों की नसों में बनता है और फिर बहते खून के साथ आकर पल्मोनरी धमनी को ब्लॉक कर देता है। पल्मोनरी एंबोलिज्म में आमतौर पर सांस फूलना, बलगम में खून आना और छाती में दर्द होना आदि लक्षण विकसित हो सकते हैं।

ऐसा ही कुछ सौरभ के केस में था जो पल्मोनरी एंबोलिज्म की स्थितियों से मेल खा रहा था। डॉक्टरों ने अनुमान लगाया कि थक्का बनने के बाद हृदय को खून पंप करने में काफी कठिनाई हो रही थी, जिस कारण उनका दायां चैंबर प्रभावित हो गया था। एक मुख्य तथ्य यह भी निकला कि एक दिन पहले ही सौरभ ने लगातार आठ घंटे तक ऑटोमेटिक कार को ड्राइव किया था, जिसमें क्लच नहीं होता है और इस कारण से उनकी टांग स्थिर रही। लंबे समय तक बैठे रहने व टांग में कोई हलचल न होने के कारण खून का बहाव रुक गया और थक्का बन गया।

कितना गंभीर है पल्मोनरी एंबोलिज्म?
यह खून के थक्के से संबंधित स्थिति है, इसलिए इसमें मुख्य रूप से हृदय प्रभावित होता है। थक्का धमनी को ब्लॉक कर देता है, जिसकी वजह से हृदय को खून पंप करने में सामान्य से अधिक बल लगाना पड़ता है। परिणामस्वरूप हृदय धीरे-धीरे काम करना बंद कर देता है, जिससे दिल का दौरा पड़ना या कार्डियक अरेस्ट आदि कई समस्याएं हो सकती हैं। इतना ही नहीं पल्मोनरी एंबोलिज्म के कारण अन्य कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं, जैसे:

(और पढ़ें - पल्मोनरी हाइपरटेंशन के लक्षण, कारण)

कैसे बचाव किया जा सकता है?
ऐसे रोगों से बचाव के लिए एक स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना और स्वास्थ्यकर व संतुलित आहार का सेवन करना बहुत जरूरी होता है। साथ ही कुछ अन्य टिप्स भी हैं, जो पल्मोनरी एम्बोलिज्म के खतरे को कुछ हद तक कम कर सकते हैं:

  • यदि आपको खून का थक्का जमने की स्थिति पहले से है, तो ब्लड थिनर दवाएं (anticoagulants) अपने साथ रखें। डॉक्टर से बात करके अपने लिए उचित दवाओं का चुनाव कर लें।
  • अपनी टांगों की हल्के दबाव के साथ सिकाई करते रहें, इससे आपकी नसें हिलती-डुलती रहेंगी और कोई थक्का नहीं जम पाएगा।
  • यदि आप कहीं लॉन्ग ड्राईव पर जा रहे हैं, तो बीच-बीच में उतरकर कोई गतिविधि करते रहें और साथ ही स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज भी करते रहें।
  • यदि आपको किडनी, हृदय या फेफड़ों संबंधी कोई भी रोग है, तो नियमित रूप से डॉक्टर के पास जाकर उसकी जांच करवाते रहें, ताकि स्थिति को नियंत्रिण में रखा जा सके।
  • शरीर का सामान्य वजन बनाए रखें और अगर आप धूम्रपान करते हैं तो उसे आज ही छोड़ दें।

 

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