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रिपिटेटिव स्ट्रेन/स्ट्रेस इंजरी एक बेहद सामान्य चोट है जो खासतौर से खिलाड़ियों और खराब कार्यस्थल व मुद्रा में काम करने वाले लोगों में पाई जाती है। इस प्रकार के सभी विकार नियमित रूप से एक ही गतिविधि को करने की स्थिति को बिगाड़ सकते हैं। रिपिटेटिव स्ट्रेन इंजरी से सबसे अधिक खिलाड़ी प्रभावित होते हैं। दुनिया की लगभग 50 प्रतिशत स्पोर्ट्स इंजरी रिपिटेटिव स्ट्रेन के कारण होती हैं।

रिपिटेटिव स्ट्रेन इंजरी (आरएसआई) का मतलब है दोहरावदार गति के कारण चोट लगना यानि, एक ही गतिविधि में मांसपेशियों को अत्यधिक इस्तेमाल करने के कारण उस अंग का क्षतिग्रस्त होना। इसमें मुख्य रूप से रोजाना की गतिविधियां शामिल हैं जैसे गेंद फेंकना, फर्श साफ करना या जॉगिंग की वजह से इस प्रकार की स्थिति विकसित हो जाती हैं।

रिपिटेटिव स्ट्रेन इंजरी को रिपिटेटिव स्ट्रेस इंजरी भी कहा जाता है। इसमें अस्थायी या स्थायी समय के लिए मांसपेशियों, नसों, लिगामेंट और टेंडन को क्षति पहुंचती है। सामान्य रिपिटेटिव स्ट्रेन इंजरी को कार्पल टनल सिन्ड्रोम भी कहा जाता है। कंप्यूटर व डेस्क पर काम करने वाले लोगों में स्ट्रेस इंजरी की आशंका विश्व में दूसरे नंबर पर सबसे अधिक होती है।

  1. रिपिटेटिव स्ट्रेस इंजरी के प्रकार - Types of Repetitive Stress Injury in Hindi
  2. रिपिटेटिव स्ट्रेन इंजरी के लक्षण - Repetitive Stress Injury Symptoms in Hindi
  3. रिपिटेटिव स्ट्रेस इंजरी के कारण - Repetitive Stress Injury Causes in Hindi
  4. रिपिटेटिव स्ट्रेस इंजरी से बचाव - Prevention of Repetitive Stress Injury in Hindi
  5. रिपिटेटिव स्ट्रेस इंजरी का परीक्षण - Diagnosis of Repetitive Stress Injury in Hindi
  6. रिपिटेटिव स्ट्रेस इंजरी का इलाज - Repetitive Stress Injury Treatment in Hindi
  7. रिपिटेटिव स्ट्रेस इंजरी के डॉक्टर

रिपिटेटिव स्ट्रेस इंजरी के प्रकार - Types of Repetitive Stress Injury in Hindi

रिपिटेटिव स्ट्रेन इंजरी के टेंडनाइटिस और बर्साइटिस दो सबसे सामान्य प्रकार होते हैं। इन दोनों प्रकारों के बीच अंतर करना बेहद मुश्किल होता है और कई बार यह दोनों एक साथ भी हो सकते हैं।

टेंडोनाइटिस

टेंडन में चोट को टेंडनाइटिस व टेन्डिनोपैथी कहा जाता है। टेंडन एक सफेद रंग का फाइब्रस ऊतक होता हैं, जो मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ता है और मानव शरीर के हर जोड़ को एक साथ गतिविधि पूरी करने में मदद करता है। टेंडन बेहद शक्तिशाली होते हैं, क्योंकि यह शरीर का संपूर्ण वजन उठाने के सक्षम होते हैं।

टेंडोनाइटिस टेंडन में होने वाली सूजन को कहा जाता है। टेंडोनाइटिस अक्सर कंधों, बाइसेप्स, घुटनों और कोहनी को प्रभावित करती है। पुरुषों में इस विकार के होने की अधिक आशंका होती है। टेंडन में सूजन अक्सर हड्डी के शुरुआती ओर होती है। टेंडन्स मांसपेशी के साथ जुड़े स्थान पर मौजूद एक तरल पदार्थ की मदद से कार्य करते हैं, जिनमें सूजन व लालिमा आने की आशंका होती है। इस स्थिति को टेनोसिनोवाइटिस कहा जाता है।

टेनोसिनोवाइटिस और टेंडोनाइटिस लगभग एक जैसे होते हैं। क्योंकि इनके लक्षण, कारण और इलाज एक समान हैं।

बर्साइटिस

बर्साइटिस बर्सा में होने वाली सूजन या जलन को कहा जाता है। दरअसल बर्सा शरीर में मौजूद तरल पदार्थ की एक थैली जैसी होती है। यह थैली मांसपेशियों, हड्डियों, टेंडन और त्वचा के ऊतकों में स्थित होती हैं। यह हमें कई प्रकार की रगड़, घर्षण और जलन से बचाती है।

बर्साइटिस भी टेंडोनाइटिस  की तरह कंधों, कोहनी, टखने और घुटने जैसे जोड़ों को प्रभावित करती है, इसकी कूल्हों, जांघों और नितंब जैसी जगहों पर होने की भी आशंका होती है। हमारे शरीर में बर्सा की कुल 150 थैलियां होती हैं। ज्यादातर बर्सा शिशु में जन्म से होती हैं, लेकिन कुछ एक ही जगह पर लगातार प्रेशर बनने के कारण पैदा हो जाती हैं।

इसके अलावा लगातार स्ट्रेन के कारण शरीर के किसी भी अंग को क्षति पहुंचने पर निम्न प्रकार विकसित होने की आशंका बनी रहती है :

  • फ्रैक्चर -
    चोट कई बार इतनी गंभीर होती है कि उसके कारण हड्डी टूटने जैसी आशंका भी हो सकती है। आमतौर पर हड्डी टूटने को फ्रैक्चर कहा जाता है। नियमित रूप से एक ही गतिविधि में कार्य करने के कारण हड्डी के टूटने का जोखिम बना रहता है।
     
  • सर्वाइकल -
    यह गर्दन की हड्डी का विकार होता है जो कार्यस्थल पर सही अवस्था में न बैठने या खड़े होने के कारण विकसित होता है। यदि रोजाना असामान्य मुद्रा में रहा जाए तो रीड की हड्डी पर स्ट्रेन पड़ने के कारण क्षति पहुंच सकती है। यह एक गंभीर रोग है, जिसे ठीक करना बेहद मुश्किल होता है।
     
  • स्पोर्ट्स इंजरी -
    कई खिलाड़ी अपनी मांसपेशियों का लगातार अत्यधिक इस्तेमाल करते रहते हैं। एक ही गतिविधि के कारण मांसपेशियों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ सकता है, जिसके कारण चोट लगने जैसी आशंका रहती है। विश्व भर में आरएसआई से सबसे अधिक खिलाड़ी ही ग्रस्त होते हैं।

रिपिटेटिव स्ट्रेन इंजरी के लक्षण - Repetitive Stress Injury Symptoms in Hindi

आरएसआई के लक्षणों में निम्न मुख्य रूप से देखे जाते हैं :

  • प्रभावित जोड़ या मांसपेशी में टेंडरनेस या दर्द होना
  • झनझनाहट होना, खासतौर से हाथ या बांह में
  • संवेदनशीलता और शक्ति कम होना

अन्य लक्षण शरीर के प्रभावित हुए अंग पर निर्भर करते हैं, जैसे कि -

  • जोड़ों में दर्द -
    घुटने, टखने और कलाई के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण जोड़ों में दर्द होना रिपिटेटिव स्ट्रेस इंजरी का सबसे सामान्य लक्षण होता है। दरअसल किसी भी अंग को जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने के कारण इसका सीधा प्रभाव जोड़ों पर पड़ता है, जिस कारण आर्थराइटिस जैसी गंभीर स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
     
  • सूजन -
    ज्यादातर मांसपेशियों में अत्यधिक इस्तेमाल के कारण सूजन विकसित हो जाती है। इस स्थिति में आपको अपना प्रभावित अंग सूजा हुआ नजर आ सकता है।
     
  • कमजोरी-
    नियमित रूप से एक ही गतिविधि करने के कारण इस्तेमाल होने वाले अंग में दर्द पैदा हो सकता है। इस दर्द के कारण व्यक्ति को कमजोरी महसूस होने की आशंका होती है।
     
  • छूने पर दर्द होना -
    अत्यधिक इस्तेमाल के कारण मांसपेशियों, टेंडेन, लिगामेंट या हड्डियों का क्षतिग्रस्त होना आम बात होती है। यदि आपको प्रभावित हिस्से को छूने पर दर्द महसूस होता है तो यह रिपिटेटिव स्ट्रेस इंजरी के लक्षण हो सकते हैं।
     
  • क्षमता में कमी आना -
    रोजाना एक ही गतिविधि को करने से मांसपेशियों की क्षमता कम हो जाती है।

रिपिटेटिव स्ट्रेस इंजरी के कारण - Repetitive Stress Injury Causes in Hindi

आरएसआई के कारण बेहद भिन्न हैं। निम्न कुछ ऐसी गतिविधियां और उपकरण हैं, जिनके कारण इसका खतरा बढ़ सकता है -

  • एक ही मसल या मांसपेशियों के समूह को अत्यधिक इस्तेमाल करना
  • वाईब्रेटिंग उपकरण
  • कम तापमान में काम करना
  • खराब मुद्रा में बैठे रहना, खासतौर से कार्यस्थल पर
  • अतितीव्र गतिविधियां करना
  • एक ही अवस्था व मुद्रा में लंबे समय तक रहना
  • किसी एक अंग पर सीधा प्रेशर पड़ना
  • भारी सामान उठाना
  • मिर्गी और तंत्रिकाओं से संबंधित अन्य विकार
  • गलत तरह से व्यायाम करना
  • कार्य के अनुसार उम्र का बहुत कम या बहुत अधिक होना
  • मोटापा
  • खेलते समय सुरक्षा उपकरण न पहनना

कार्यस्थल पर काम करने वाले लोगों में अक्सर तनाव का स्तर अधिक होता है। यह मानसिक रोग आरएसआई की स्थिति को और अधिक खराब कर देता है।

रिपिटेटिव स्ट्रेस इंजरी से बचाव - Prevention of Repetitive Stress Injury in Hindi

रिपिटेटिव स्ट्रेन इंजरी यदि किसी कार्य या महत्वपूर्ण गतिविधि से जुड़ी होती है, तो इसे रोक पाना मुश्किल हो सकता है। इस प्रकार की चोट के जोखिम को कम करने का मुख्य उपचार गतिविधि को रोकना या उसकी तीव्रता को कम करना होता है।

यदि आपको किसी महत्वपूर्ण गतिविधि के कारण ऐसा हुआ है और आप उसे चाहकर भी रोक नहीं सकते हैं, तो निम्न कुछ ऐसे उपाय हैं जिनकी मदद से आप इसके जोखिमों व लक्षणों कम कर सकते हैं :

  • बीच-बीच में अंतराल लें -
    रोजाना की जाने वाली गतिविधियों से आराम पाने के लिए बीच-बीच में ब्रेक लें। ऐसा करने के लिए आप अपने फोन अलार्म या रिमाइंडर का भी उपयोग कर सकते हैं।
     
  • मुद्रा में बदलाव लाएं -
    लंबे समय से एक ही मुद्रा में बैठे रहने पर खड़े होकर कुछ देर स्ट्रेचिंग कर लें। कमर, बांह और उंगलियों में खिंचाव से खतरे को कम किया जा सकता है।
     
  • आंखों को आराम दें -
    आंखों की मांसपेशियों को आराम प्रदान करने के लिए किसी दूर रखी वस्तु को कुछ देर देखें।
     
  • स्वास्थ्य का ध्यान रखें -
    स्वस्थ भोजन और नियमित रूप से व्यायाम बेहद आवश्यक होता है, इसके अलावा रक्त प्रवाह को संतुलित बनाए रखने के लिए धूम्रपान से परहेज करें।

कंप्यूटर व डेस्क पर काम करने वाले कर्मचारी इस स्थिति से सबसे अधिक परेशान हो सकते हैं। ऐसे कार्यस्थल पर काम करने वाले लोगों में आरएसआई केवल सामान्य गतिविधियों के कारण भी होता है, जैसे कि पूरे दिन एक ही अवस्था में बैठे रहना, लगातार कंप्यूटर पर काम करना या नियमित व्यायाम की कमी।

ऐसे में आप निम्न बातों का ध्यान रखते हुए आरएसआई जैसी गंभीर स्थिति से बचाव कर सकते हैं :

  • संरेखण -
    कार्यस्थल पर अपनी कुर्सी, टेबल और कंप्यूटर की स्क्रीन के बीच कुछ इस तरह का संरेखण करें कि आपको कार्य करते समय किसी भी प्रकार की पीड़ा न हो।
     
  • मुद्रा -
    सही मुद्रा में बैठने के लिए कानों और पीठ को पेल्विस के साथ एक सीध में रखें।
     
  • कलाई -
    आरएसआई के ज्यादातर मामलों में लोगों को कलाई में दर्द की शिकायत होती है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए कलाइयों को मोड़ने से बचें और टाइप करते समय बांहों, कलाईयों और उंगलियों को एक सीध में रखें।
     
  • टाइपिंग -
    टाइप करते समय बटनों को बहुत तेजी से न दबाएं। टच टाइपिंग एक बेहतर विकल्प हो सकता है। वॉयस से टाइप करने वाले सॉफ्टवेयर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
     
  • तापमान -
    उचित तापमान में कार्य करें।
     
  • टेलीफोन-
    यदि आप फोन पर बात करते समय लिखते हैं तो टेलीफोन की जगह हेड्फोन का इस्तेमाल करें।

रिपिटेटिव स्ट्रेस इंजरी का परीक्षण - Diagnosis of Repetitive Stress Injury in Hindi

आमतौर पर डॉक्टर आरएसआई का परीक्षण कुछ सामान्य सवालों व मरीज की मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर करते हैं। आरएसआई के दो मुख्य प्रकार होते हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं :

  • टाइप 1 आरएसआई -
    यह एक मस्क्यूस्केलेटल विकार है। इसके लक्षणों में आमतौर पर कुछ विशिष्ट मांसपेशियों या टेंडन में सूजन और जलन होती है।
     
  • टाइप 2 आरएसआई -
    इसके कई प्रकार के कारण हो सकते हैं। यह आमतौर पर तंत्रिका के क्षतिग्रस्त होने से जुड़ा होता है।

इनकी पहचान करने के लिए एमआरआई टेस्ट करवाने की आवश्यकता पड़ सकती है। एमआरआई एक बेहद विस्तृत इमेज तैयार करता है, जिससे सूजन, जलन या अन्य रोग के विकसित होने के स्पष्ट स्थान का पता लगाया जा सकता है।

रिपिटेटिव स्ट्रेस इंजरी का इलाज - Repetitive Stress Injury Treatment in Hindi

रिपिटेटिव स्ट्रेन इंजरी का इलाज घर पर भी किया जा सकता है। जोड़ों में दर्द या सूजन को कम करने के लिए एलिवेशन का इस्तेमाल करें। इसके अलावा दर्द और सूजन से राहत पाने के लिए आप चाहें तो बर्फ की सिकाई भी कर सकते हैं।

बर्फ की सिकाई दिन में 2 से 3 बार 20 से 30 मिनट के लिए करने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने के लिए एक तौलिया लें और उसमें बर्फ या ठंडी सब्जियां लपेट लें, अब इसे अपने प्रभावित हिस्से पर लगाएं।

यदि आपका कंधा इस स्थिति से ग्रस्त है तो अगले 24 से 48 घंटों तक उसे स्थिर न रखें। ऐसा करने से वह सुन्न या अपनी गतिविधि करने की क्षमता खो सकता है।

आरएसआई के इलाज में सबसे जरूर होता है व्यक्ति के प्रभावित अंग को मोशन में लाना। मरीज की स्थिति और चोट की गंभीरता व चरण के आधार पर इलाज के लिए कुछ विशेष प्रकार के प्रोग्राम तैयार किए गए हैं। प्रोग्राम को सक्षम बनाने के लिए मरीज व परिवार का क्रियात्मक योगदान बेहद आवश्यक है।

इस प्रोग्राम का लक्ष्य मरीज की गतिविधि को उच्चतम चरण पर पहुंचाना है, ताकि उसका प्रभावित अंग सही ढंग व पूरी गतिशीलता के साथ एक बार फिर कार्य कर सके। इसके साथ ही व्यक्ति के शारीरिक, भावनात्मक व सामाजिक रूप से संपूर्ण जीवनशैली में भी सुधार आता है।

इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए व्यक्ति को निम्न स्टेप्स फॉलो करने की आवश्यकता होगी -

  • फिजियोथेरेपी
  • प्रभावित अंग को मजबूत बनाने व स्ट्रेच करने वाले व्यायाम
  • चोट को बढ़ने से रोकने वाले व्यायाम
  • ठंडी या गर्म सिकाई
  • अंग को स्थिर रखने के लिए ब्रेस या स्प्लिंट्स का इस्तेमाल
  • दर्दनिवारक तकनीक
  • मरीज और परिवार का चोट व रोजाना के कार्यों और कार्यस्थल की स्थिति के बारे में शिक्षा प्राप्त करना

इसके अलावा रिपिटेटिव मोशन इंजरी के इलाज के लिए एक पूरी टीम की आवश्यकता होती है। हालांकि, कम गंभीर मामलों में निम्न में से किसी एक विशेषज्ञ से इलाज करने की जरूरत होती है -

  • ऑर्थोपेडिक सर्जन
  • न्यूरोसर्जन
  • शारीरिक चिकित्सक
  • फिजियाट्रिस्ट
  • वोकेशनल काउंसलर

इन सभी उपायों को अपनाने के बाद भी यदि इलाज नहीं हो पाता है या लक्षणों में कोई सुधार नहीं देखे जाते हैं तो स्टेरॉयड इंजेक्शन व अत्यधिक गंभीर मामलों में सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।

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