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हाल ही में सीबीएससी बोर्ड का रिजल्ट आया है। कुछ बच्चों को बहुत अच्छा रिजल्ट मिला है। जबकि कुछ बच्चों को उनके मनमुताबिक परिणाम नहीं मिले हैं। इस वजह से बच्चों में तनाव का स्तर बढ़ गया है। कहने की जरूरत नहीं है कि हमारे यहां अक्सर खराब रिजल्ट वाले बच्चे आत्महत्या जैसा गंभीर कदम भी उठा लेते हैं। ऐसे में पैरेंट्स की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। उन्हें चाहिए कि अपने बच्चे को रिजल्ट के तनाव से बाहर निकलने में मदद करें। इसके लिए कुछ जरूरी उपायों को आजमा सकते हैं। 

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बच्चों से बात करें

अगर बच्चे का रिजल्ट उसकी मेहनत के मुताबिक नहीं आया है तो बच्चे को निराश न होने दें। आप भी उसके नंबरों से हतोत्साहित न हों। उसे उत्साहित रखने की कोशिश करें। लगातार उससे बातचीत करें। अक्सर जब बच्चे किसी से अपने मन की बात नहीं कहते हैं तो उन्हें तनाव होने लगता है। इसका असर उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। इसलिए इन दिनों बच्चों से बातचीत करें। ध्यान रखें कि आपकी बातों में नकारात्मकता न हो। शुरूआती दिनों में बेहतर रहेगा कि आप उसे भावनात्मक रूप से सपोर्ट करें। इससे बच्चे का मनोबल बढ़ेगा। साथ ही भविष्य में बेहतर प्रदर्शन के लिए भी तैयार होगा।

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आगे की प्लानिंग करें

जो हो गया है, उस पर बात करने का कोई फायदा कभी नहीं होता है। यह बात सभी जानते हैं। जब बच्चे का रिजल्ट आपके हाथ में है, तो उसके लिए सबसे बेहतर क्या होगा, उसकी प्लानिंग करें। वैसे भी जरूरी नहीं होता है कि हर समय आपने पहले जो सोचा हो, वही हो जाए। कई बार स्थिति आपके सोच के उलट हो जाती है। परिणाम से परेशान न हों। भविष्य के लिए आप उसके साथ बैठकर प्लानिंग तैयार करें। उसके नंबर अनुसार किस तरह के मौके बच्चे को मिल सकते हैं, इसकी प्लानिंग करें। यकीन मानिए बच्चा भविष्य की बातें करके रिजल्ट के स्ट्रेस से आसानी से बाहर निकल जाएगा।

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बच्चे को समय दें

अगर रिजल्ट के बाद तुरंत बाद आप उसे उसके करियर से संबंधित कोई फैसला सुना देते हैं तो इससे बच्चा हताश हो सकता है। उसे तनाव जकड़ सकता है। वह यह भी सोच सकता है कि उसके पैरेंट्स उस पर भरोसा नहीं करते। इसलिए रिजल्ट के बाद बच्चे को कुछ समय दें। उसे कहें कि नंबरों के बारे में सोचने के बजाय उन बातों पर ध्यान केंद्रित करे जो उसे बेहतर बना सकती है। अगर बच्चा दोस्तों की मदद लेना चाहता है तो उसे रोकें नहीं। उसे ऐसा करने दें। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि बच्चे के नंबर कम हो या ज्यादा, उसे मौका देना न छोड़ें। उसे उसका समय देकर आप बच्चे पर भरोसा भी जता रहे हैं। इससे बच्चा स्वतंत्र होकर फैसले लेने में सक्षम होता है। इस तरह वह तनाव से भी निकल पाएगा।

बच्चे को दिमाग शांत रखने को कहें

नंबरों के आधार पर बच्चों की काबीलियत पर भरोसा न करना, बहुत बुरा है। अगर आप उन पैरेंट्स में से हैं जो अपने बच्चे को एक-एक नंबर कम होने पर भी डांटते हैं तो ध्यान रखें कि आपका बच्चा हर समय तनाव के घेरे में बना रहेगा। आपकी पैरेंटिंग का स्टाइल बच्चे का स्वास्थ्य भी खराब कर सकती है। बच्चे को रिजल्ट स्ट्रेस से बाहर निकालने के लिए उससे कहें कि अपने दिमाग को स्थिर रखे। बच्चों के साथ-साथ पैरेंट्स को भी चाहिए कि वे अपने दिमाग को शांत रखें। इस तरह बच्चे और पैरेंट्स दोनों मिलकर रिजल्ट स्ट्रेस को खत्म कर सकते हैं। दिमाग शांत रखने के लिए जरूरी है कि हमेशा रिजल्ट के पाॅजिटिव कारक को देखें। किस-किस क्षेत्र में बच्चे की करियर की संभावना बढ़ सकती है, उस ओर ध्यान दें। यह सब बच्चा शांत दिमाग से ही कर सकता है।

बच्चे को दोस्तों के साथ समय बितान दें

कई बार तनाव से बाहर निकलने के लिए बच्चे को पैरेंट्स की नहीं बल्कि दोस्तों की जरूरत होती है। कम नंबर आने पर भी उसे अपने पैरेंट्स से ज्यादा दोस्तों से मदद मिल सकती है। इसलिए आप उसे उसके दोस्तों के साथ समय गुजारने दें। आप देखेंगे कि कुछ ही दिनों में उसका तनाव कम हो गया है।

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