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डेंटिस्ट क्लिनिक में मसूड़ों संबंधी समस्याओं के मामले काफी आम देखे जाते हैं। मसूड़ों में सूजन आने पर प्रभावित हिस्सा अधिक लाल हो जाता है और उनका आकार भी बढ़ जाता है। इनमें से किसी भी समय खून निकलने लगता है, आमतौर पर इनकी जांच के दौरान भी इनमें से खून निकलता है। मसूड़ों की सूजन एक विशेष हिस्से पर भी हो सकती है या फिर यह पूरे मसूड़े को भी प्रभावित कर सकती है। ज्यादातर लोग जिंजिवाइटिस को मसूड़ों की सूजन समझ लेते हैं। यह रोग मसूड़ों में सूजन के रूप में ही विकसित होता है, लेकिन कुछ अन्य समस्याएं भी हैं जिनके कारण मसूड़ों में सूजन पैदा हो जाती है।

मरीज के मसूड़ों को सामान्य रूप से देख कर ही इनमें आई सूजन का पता लगाया जा सकता है। स्थिति का पता लगने के बाद डेंटिस्ट मसूड़ों में आई सूजन के कारण का पता लगाने के लिए जांच करते हैं। मसूड़ों में सूजन का इलाज करना ज्यादा कठिन तो नहीं होता है, लेकिन नैदानिक रूप से विशेष परिणाम दिखने में काफी समय लग जाता है। यदि मसूड़ों की सूजन किसी अन्य बीमारी से संबंधित नहीं है, तो इसकी रोकथाम आसानी से की जा सकती है।

(और पढ़ें - मसूड़ों में सूजन के घरेलू उपाय)

  1. मसूड़ों की सूजन के प्रकार - Types of Swollen gums in Hindi
  2. मसूड़ों की सूजन के लक्षण - Swollen gums Symptoms in Hindi
  3. मसूड़ों की सूजन के कारण - Swollen gums Causes in Hindi
  4. मसूड़ों की सूजन का परीक्षण - Diagnosis of Swollen gums in Hindi
  5. मसूड़ों की सूजन का इलाज - Swollen gums Treatment in Hindi
  6. मसूड़ो की सूजन के डॉक्टर

मसूड़ों की सूजन के प्रकार - Types of Swollen gums in Hindi

मसूड़े की सूजन कितने प्रकार की होती है?

मसूड़ों की सूजन के प्रकार इस पर निर्भर करते हैं, कि मसूड़े के किस क्षेत्र में सूजन हुई है या कितना भाग सूजन से ग्रस्त हुआ है।

जगह के अनुसार मसूड़ों में सूजन के प्रकार - 

  • मार्जिनल मसूड़े की सूजन:
    मसूड़ों की सूजन का वह प्रकार जिसमें सूजन सिर्फ दांतों के आस-पास के मसूड़े (मार्जिनल जिंजिवा) के हिस्से में आती है।
     
  • पैपिलरी मसूड़े की सूजन:
    दो दांतों के बीच में तिकोने आकार के मसूड़े को पैपिलरी (Papillary) कहा जाता है, इस भाग में सूजन आने की स्थिति को "पैपिलरी जिंजिवा स्वेलिंग" कहा जाता है।
     
  • मसूड़े की विस्तृत सूजन:
    जब मार्जिनल और पैपिलरी दोनों हिस्सों में सूजन आ जाती है, जिसे "डिफ्यूज जिंजिवल स्वेलिंग" कहा जाता है।

विभागन के अनुसार मसूड़े की सूजन के प्रकार

  • मसूड़े की स्थानीयकृत सूजन:
    इसमें सूजन सिर्फ थोड़े बहुत हिस्से तक ही हो पाती है, जैसे 6 दांतों के मसूड़ों से भी कम क्षेत्र।
     
  • मसूड़े की सामान्यकृत सूजन:
    यदि सूजन से 6 दांतों से अधिक मसूड़े का क्षेत्र प्रभावित हो गया है या पूरा मसूड़े का क्षेत्र ही प्रभावित हो गया है, तो इस स्थिति को मसूड़े की समान्यकृत सूजन कहा जाता है।

सूजन की शुरुआत होने के अनुसार उसके प्रकार

  • मसूड़े की तीव्र सूजन:
    यदि मसूड़े की सूजन अचानक से विकसित हो गई है, जैसे दांत और मसूड़े संबंधी गहरा घाव हो जाने के कारण मसूड़े में फोड़ा विकसित हो जाना।
     
  • मसूड़े में दीर्घकालिक सूजन:
    इसमें मसूड़े की सूजन धीरे-धीरे विकसित होती है और फाइब्रोटिक जिंजिवल स्वेलिंग की तरह दृढ़ रहती है।

(और पढ़ें - मसूड़ों से खून आने के लक्षण)

मसूड़ों की सूजन के लक्षण - Swollen gums Symptoms in Hindi

मसूड़ों में सूजन के क्या लक्षण हैं?

मसूड़ों में सूजन होना खुद में एक लक्षण होता है, हालांकि यह मुंह संबंधी कुछ अंदरुनी स्थितियों से भी जुड़ा हो सकता है। जिन लोगों को मसूड़े में सूजन होती है, उनमें कुछ अन्य लक्षण भी देखे जा सकते हैं जैसे:

  • मसूड़ों में दर्द होना या छूने पर दर्द होना
  • मसूड़े अधिक बढ़ जाना
  • मसूड़ों की जांच करने के दौरान खून आना
  • मसूड़ों में अधिक लालिमा व सूजन दिखाई देना।

(और पढ़ें - मसूड़ों से खून आने के घरेलू उपाय)

मसूड़ों की सूजन के कारण - Swollen gums Causes in Hindi

मसूड़ों में सूजन क्यों होती है?

ऐसी काफी स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां व रोग हैं, जो मसूड़ों में सूजन आने का कारण बन सकते हैं जैसे:

  • जिंजिवाइटिस:
    यह दांत संबंधी क्षेत्रों में होने वाला एक काफी आम रोग है, जो मसूड़ों के ऊतकों को प्रभावित करता है। यह आमतौर पर दांतों की परत पर प्लाक व कैलक्युलस जमा होने के कारण होता है, जिससे मसूड़ों में लालिमा व सूजन हो जाती है।
     
  • पेरियोडोंटाइटिस:
    यह जिंजिवाइटिस का एक गंभीर रूप होता है। जब जिंजिवाइटिस विकसित हो जाता है और साथ ही मसूड़ों के अंदर हड्डी वाले ऊतक भी इससे प्रभावित हो जाते हैं, तो इस स्थिति को पेरियोडोंटाइटिस कहा जाता है।
     
  • दांतों की सड़न (दांत क्षतिग्रस्त होना):
    जब दांतों में लगातार हो रही क्षति फैल कर पल्प, मसूड़े और हड्डियों को भी प्रभावित कर देती है, तो इस से कई बार मसूड़ों में भी सूजन आ जाती है। कई बार गंभीर और गहरे बैक्टीरियल संक्रमण के कारण मसूड़ों की सतह से साइनस तक छेद भी बन सकता है।
     
  • डेंचर ठीक से फिट ना हो पाना:
    यदि डेंचर (नकली दांत) मुंह के अंदर ठीक से फिट नहीं हुऐ हैं, तो ये म्यूकोसा में तकलीफ पैदा कर सकते हैं। इस स्थिति के कारण भी मसूड़ों में सूजन पैदा होने लगती है।
     
  • दांतों के उपकरण ठीक से फिट ना हो पाना:
    यदि मुंह के अंदर टीथ ब्रेसेस, क्राउन या अन्य कोई उपकरण ठीक से फिट नहीं हो पा रहा है, तो बार-बार मसूड़ों को लग सकता है या फिर उनके साथ रगड़ खा सकता है, ऐसे में मसूड़ों में सूजन विकसित हो जाती है। ये उपकरण ठीक से फिट ना हो पाने के कारण इनके व दांत के बीच में प्लाक जमा होने लगता है, जिसके परिणामस्वरूप मसूड़ों में सूजन और जिंजिवाइटिस जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
     
  • गर्भावस्था:
    प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले हार्मोन में बदलाव के कारण कुछ महिलाओं में पायोजेनिक ग्रानुलोमा रोग विकसित हो सकता है। यह मसूड़ों की एक अधिक बढ़ी हुई त्वचा के रूप में दिखाई देता है, जिनमें से खून बहने का खतरा काफी अधिक होता है।
     
  • वायरल इन्फेक्शन:
    मुंह में होने वाले ऐसे कई प्रकार के वायरल इन्फेक्शन हैं, जो मसूड़ों में छाले व घाव आदि पैदा कर देते हैं, जिनके आस-पास के क्षेत्रों में सूजन पैदा हो जाती है।
     
  • फंगल इन्फेक्शन:
    मुंह के अंदर फंगल इन्फेक्शन होने से भी प्रभावित मसूड़ों में सूजन आ सकती है।
     
  • कुपोषण:
    शरीर में विटामिन या मिनरल्स की कमी भी जिंजिवाइटिस और मसूड़ों में अल्सर जैसे रोगों से संबंधित हो सकती है, जिनका सबसे पहला लक्षण मसूड़ों की सूजन ही होता है। कुछ प्रकार के विटामिन भी हैं, जो मसूड़ों के ऊतकों को प्रभावित कर सकते हैं जैसे विटामिन बी1, बी2, बी3 और बी12 आदि।
     
  • स्कर्वी:
    यह विटामिन सी की कमी से होने वाला मसूड़ों का रोग है। स्कर्वी में मुंह संबंधी भाग प्रभावित होने पर मसूड़ों में सूजन हो जाती है।
     
  • दवा का रिएक्शन:
    कुछ प्रकार की दवाएं भी हैं,  मसूड़ों में सूजन हो सकती हैं और इससे "ड्रग इन्ड्यूस्ड जिंजिवल एनलार्जमेंट" (किसी दवा से मसूड़े का आकार बढ़ना) जैसी स्थिति विकसित हो जाती है।
     
  • नियोप्लाज्म:
    मसूड़ों में कैंसर-ग्रस्त ऊतकों का बढ़ना भी, मसूड़ों में सूजन आने का कारण बन सकता है।
     
  • सिस्ट:
    मसूड़ों में बनने वाली सिस्ट भी मसूड़े में सूजन का कारण बन सकती है।
     
  • फाइब्रोमा:
    मसूड़ों पर फाइबर युक्त घाव दिखाई देना जिससे मसूड़ों में फाइबर युक्त ट्यूमर या पेरिफेरल फाइब्रोमा रोग विकसित हो जाता है।
     
  • ग्रेन्युलोमा:
    कुछ प्रकार के ग्रेन्युलोमा घाव भी मसूड़ों पर विकसित हो सकते हैं, जैसे पेरिफेरल जॉयंट सेल ग्रेन्युलोमा।
     
  • मुंह की ठीक से सफाई ना रखना:
    मुंह की स्वच्छता को बनाए ना रखने के कारण धीरे-धीरे दातों व मसूड़ों के बीच प्लाक और कैलक्युलस जमने लग जाता है। यह मसूड़ों की सूजन के साथ-साथ पेरियोडोन्टल डिजीज जैसी समस्याओं का कारण बनता है।
     
  • माउथवॉश व टूथपेस्ट से संवेदनशील प्रतिक्रिया होना:
    माउथवॉश या टूथपेस्ट से होने वाली एलर्जी की प्रतिक्रिया होना, जिससे कई बार मसूड़ों में सूजन आ जाती है।
     
  • मुंह से सांस लेना:
    जिन लोगों को मुंह से सांस लेने की आदत है, उनको भी धीरे-धीरे मसूड़ों में सूजन व मसूड़े का आकार बढ़ने की समस्या हो सकती है। ऐसा देखा गया है कि मुंह से सांस लेने से मसूड़े बार-बार सूखते और गीले होते रहते हैं, जिसके कारण भी मसूड़ों में सूजन आ सकती है। मुंह से सांस लेने वाले लोगों में अक्सर लाल, चमकदार व सूजन से ग्रस्त मसूड़े देखे जाते हैं।

मसूड़ों की सूजन का परीक्षण - Diagnosis of Swollen gums in Hindi

मसूड़े की सूजन का परीक्षण कैसे किया जाता है?

मसूड़े की सूजन का परीक्षण करने के लिए कोई विशेष टेस्ट या उपकरण मौजूद नहीं है। ज्यादातर मामलों में मरीज के स्वास्थ्य संबंधी पिछली स्थिति के बारे में जानकर और अन्य मेडिकल जांच करके परीक्षण की पुष्टि की जाती है।

मसूड़ों की सूजन का इलाज - Swollen gums Treatment in Hindi

मसूड़े की सूजन का इलाज कैसे किया जाता है?

मसूड़ों में सूजन का इलाज पूरी तरह से इसका कारण बनने वाले कारकों पर निर्भर करता है। यदि उचित इलाज करके अंदरुनी स्थिति को ठीक कर दिया जाए, तो मसूड़े की सूजन व लालिमा को खत्म किया जा सकता है।

मसूड़ों की सूजन को कम करने के लिए निम्न तरीके अपनाए जाते हैं

  • ओरल प्रोफिलैक्सिस या स्केलिंग:
    मसूड़े में सूजन से संबंधित मामलों में सबसे पहले किया जाने वाला सबसे अधिक पेशेवर इलाज, जिसमें मुंह के अंदर की सफाई करके प्लाक व कैलक्युलस को साफ कर दिया जाता है। प्लाक और कैल्क्युलस में बैक्टीरिया रहने लग जाते हैं, जिससे मसूड़ों में सूजन व इन्फेक्शन हो जाता है।
     
  • एंडोडोंटिक ट्रीटमेंट:
    यदि पल्प से मसूड़े के ऊतकों में संक्रमण फैलने से मसूड़े में सूजन हुई है, तो इस इन्फेक्शन को जड़ से खत्म करना ही इस स्थिति का सबसे मुख्य इलाज होता है। आपके डेंटिस्ट प्रभावित दांत के संक्रमण को खत्म करने के लिए रूट कनैल ट्रीटमेंट शुरु करेंगे। जैसे ही दांत संबंधी समस्या ठीक होने लगेगी, तो इसके साथ मसूड़ों में आई सूजन भी कम होने लग जाएगी।
     
  • सर्जिकल एक्सीजन:
    मसूड़े की सूजन के कई मामलों में गर्भावस्था से संबंधित पियोजेनिक ग्रेन्युलोमा में सर्जरी द्वारा इसका इलाज करने को प्राथमिकता दी जाती है। इस सर्जिकल प्रक्रिया में सूजन के कारण बढ़े हुऐ मसूड़े को हटा दिया जाता है। यदि आप गर्भवती हैं तो सर्जरी के लिए जाने से पहले ही अपने डेंटिस्ट को बता दें कि आप गर्भावस्था के कौन से चरण में हैं। ज्यादातर सर्जिकल प्रक्रियाओं को गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में किया जाता है और पहली व तीसरी तिमाही में सर्जिकल प्रक्रियाएं करना असुरक्षित माना जाता है।

    इसी तरह से मसूड़ों में फाइब्रोटिक ग्रोथ या हल्के घावों के मामलों में, डेंटिस्ट घाव से बायोप्सी सेंपल ले लेते हैं और अंदर के अतिरिक्त भाग को निकाल देते हैं। कभी-कभी सर्जरी की मदद से बढ़े हुऐ भाग के पूरे हिस्से को निकाल दिया जाता है और उसे बायोप्सी के लिए भेज दिया जाता है।

    सिस्ट हटाने के लिए विशेष तकनीकों का पालन करके जिंजिवल सिस्ट को भी सर्जरी द्वारा निकाला जा सकता है।

    यदि नाक का मांस बढ़ने के कारण श्वसन मार्गों या नाक में किसी प्रकार की रुकावट हो रही है, तो इसे भी सर्जरी की मदद से निकाला जा सकता है ताकि व्यक्ति मुंह से सांस लेने की बजाए बिना किसी परेशानी के नाक से सांस ले सके।
     
  • संतुलित आहार:
    कुपोषण या स्कर्वी (विटामिन सी की कमी) के कारण व्यक्ति को मसूड़ों में सूजन हुई है, तो उसको संतुलित आहार लेने को कहा जा सकता है। कुपोषण से संबंधित मसूड़े की सूजन से पीड़ित व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा में ताजे फलसब्जियां खानी चाहिए, ताकि पोषक तत्वों की कमी हो पूरा किया जा सके।
     
  • दवाएं:
    गंभीर संक्रमण के मामलों में सूक्ष्म जीवों के बढ़ने से रोकथाम करने के लिए आपके डॉक्टर कुछ दवाएं दे सकते हैं। पहले संक्रमण के प्रकार व उसके कारण का पता लगाया जाता है और फिर उसके अनुसार दवाएं दी जाती हैं। बैक्टीरियल इन्फेक्शन के लिए एंटीबायोटिक, कैंडिडा इन्फेक्शन के लिए एंटीफंगल दवाएं और वायरल इन्फेक्शन के लिए एंटीवायरल दवाएं दी जाती हैं। इसके अलावा किसी विशेष जगह से संक्रमण को रोकने के लिए कुछ मलम भी दिए जा सकते हैं।
     
  • वैकल्पिक दवाएं:
    दवाओं से होने वाली मसूड़ों की सूजन को ठीक करने के लिए, डॉक्टर आपके द्वारा ली जाने वाली दवाओं में बदलाव कर सकते हैं।
     
  • दांत संबंधी आदतें छुड़ाने के उपकरण और परामर्श:
    इसमें ओरल स्क्रीन जैसे कई ऑर्थोडॉन्टिक उपकरण शामिल हैं, जिन्हें विशेष रूप से नाक से सांस लेने की प्रक्रिया को बढ़ाने के लिए डिजाइन किया जाता है।
     
  • मुंह की स्वच्छता बनाए रखना:
    मुंह की उचित सफाई रखने से संक्रमण होने के खतरे को कम किया जा सकता है और मसूड़ों में बढ़ती सूजन को भी रोका जा सकता है। मुंह की स्वच्छता को बनाए रखने के लिए दिन में दो बार ब्रश करें और खाना खाने के बाद हर बार फ्लॉसिंग (धागे से दांत की सफाई) करें। यदि आपको लगता है कि आपको किसी टूथपेस्ट के एलर्जी है, तो उसे बिलकुल इस्तेमाल ना करें। साथ ही चिपचिपे, कठोर और अधिक मीठे खाद्य पदार्थों को न खाएं या बहुत ही कम मात्रा में खाएं, ताकि दांतों में क्षति होने से रोका जा सके।
Dr. Suraj Bhagat

Dr. Suraj Bhagat

गैस्ट्रोएंटरोलॉजी

Dr. Smruti Ranjan Mishra

Dr. Smruti Ranjan Mishra

गैस्ट्रोएंटरोलॉजी

Dr. Sankar Narayanan

Dr. Sankar Narayanan

गैस्ट्रोएंटरोलॉजी

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