परिचय

जीभ की कोशिकाओं में विकसित होने वाले कैंसर को जीभ का कैंसर कहा जाता है। जीभ का कैंसर शराबधूम्रपान के सेवन से काफी गहराई से जुड़ा होता है। जीभ में कैंसर होने पर कई लक्षण विकसित हो सकते हैं, जैसे लंबे समय तक गले में दर्द रहना, चबाने व निगलने में दर्द, जबड़े व जीभ में लंबे समय तक दर्द रहना और जबड़े या जीभ को हिलाने में दिक्कत होना आदि।

डॉक्टर जीभ के कैंसर का पता लगाने के लिए जीभ को देखकर उसकी जांच करते हैं, लक्षणों की जांच करते हैं और स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारी लेते हैं। परीक्षण की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर बायोप्सी टेस्ट भी कर सकते हैं। 

जीभ के कैंसर की रोकथाम करने के लिए ऐसे जोखिम कारकों से बचना चाहिए जो जीभ के कैंसर का कारण बन सकते हैं, जैसे धूम्रपान करना या शराब पीना आदि। इसके अलावा स्वस्थ आहार का सेवन करना, एक्सरसाइज करना और नियमित रूप से डेंटिस्ट के पास जाते रहना भी जीभ के कैंसर से बचाव करने के लिए जरूरी होता है।

जीभ के कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी और ऑपरेशन आदि शामिल हैं। जीभ का कैंसर एक गंभीर और जीवन के लिए हानिकारक स्थिति है। जीभ का कैंसर होने से बोलने, खाने व पीने आदि में समस्याएं होने लग जाती हैं। कुछ लोगों में यह समस्याएं स्थायी (जो ठीक नहीं होती) हो जाती हैं। 

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  1. जीभ का कैंसर क्या है - What is Tongue Cancer in Hindi
  2. जीभ के कैंसर के प्रकार - Types of Tongue Cancer in Hindi
  3. जीभ में कैंसर के लक्षण - Tongue Cancer Symptoms in Hindi
  4. जीभ के कैंसर के कारण व जोखिम कारक - Tongue Cancer Causes & Risk Factors in Hindi
  5. जीभ के कैंसर से बचाव - Prevention of Tongue Cancer in Hindi
  6. जीभ के कैंसर का परीक्षण - Diagnosis of Tongue Cancer in Hindi
  7. जीभ के कैंसर का इलाज - Tongue Cancer Treatment in Hindi
  8. जीभ के कैंसर की जटिलताएं - Tongue Cancer Complications in Hindi
  9. जीभ का कैंसर के डॉक्टर

जीभ का कैंसर क्या है?

जीभ का कैंसर जीभ की कोशिकाओं में विकसित होता है और इससे जीभ में ट्यूमरघाव बनने लग जाते हैं। जीभ के कैंसर का जल्द से जल्द पता लगा लेने और तुरंत इलाज शुरू कर देने से मरीज के पूरी तरह से ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है और उसकी जान भी बच जाती है। 

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जीभ का कैंसर कितने प्रकार का होता है?

जीभ में होने वाला कैंसर मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:

  • जीभ के दिखने वाले भाग में कैंसर:
    जीभ का दो-तिहाई हिस्सा जिसे आप बाहर मुंह के बाहर निकाल सकते हैं, इसमें होने वाले कैंसर का आसानी से पता लग जाता है और यदि कैंसर छोटा है तो ऑपरेशन के साथ इसे आसानी से निकाल दिया जाता है।
  • जीभ के पिछले हिस्से में कैंसर:
    जीभ के पीछे का एक तिहाई हिस्सा गले के अंदर गया होता है। जीभ के पिछले हिस्से के कैंसर का अक्सर गंभीर स्टेज पर आने के बाद ही पता चल पाता है। क्योंकि गंभीर चरणों में ट्यूमर का आकार बढ़ जाता है और कैंसर गर्दन की लिम्फ नोड्स तक फैल जाता है।

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जीभ के कैंसर के लक्षण क्या हैं?

आमतौर पर जीभ के पिछले हिस्से में विकसित होने वाले कैंसर अक्सर किसी प्रकार के संकेत व लक्षण नहीं दिखाते। यदि कैंसर जीभ के अगले हिस्से में विकसित हो रहा है, तो इससे कई लक्षण पैदा होने लग जाते हैं, जिनमें निम्नलिखित लक्षण भी शामिल हो सकते हैं:

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि किसी को थोड़ा सा भी संदेह हो रहा है कि उनको जीभ का कैंसर हो सकता है तो जितना जल्दी हो सके डॉक्टर के पास चले जाना चाहिए।

यदि आपकी जीभ पर लंबे समय से कोई छाला बना हुआ है, जो ठीक नहीं हो रहा है तो जल्द से जल्द उसकी डॉक्टर से जांच करवा लेनी चाहिए। 

आपको ओरल सर्जन (मुंह की सर्जरी करने वाले डॉक्टर) या ओटोलैरिंगोलॉजिस्ट (Otolaryngologist) के पास भेजा जा सकता है ताकी स्थिति की अच्छे से जांच की जा सके।

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जीभ का कैंसर क्यों होता है?

जीभ में कैंसर बनने के सटीक कारण का अभी तक बता नहीं चल पाया है। कैंसर तब होता है, जब कुछ कोशिकाएं असामान्य रूप से और अत्यधिक तेजी से विकसित होने लग जाती हैं। ऐसे बहुत से कारक हैं, जो कैंसर का कारण बन सकते हैं या कैंसर विकसित होने के जोखिम बढ़ा सकते हैं। नीचे कुछ ऐसे ही विशेष कारकों के बारे में बताया गया है:

  • तंबाकू का सेवन करना (और पढ़ें - गुटखा खाने से होने वाली बीमारियां)
  • शराब पीना
  • एचपीवी इन्फेक्शन(Human Papillomavirus infection)
  • ग्राफ्ट वर्सेस होस्ट डिजीज, यह स्थिति आमतौर पर उन मरीजों को होती है, जो स्टेम सेल ट्रांसप्लांट करवाते हैं।
  • खुरदरे (दांतेदार) दांतों से होने वाली परेशानी
  • दांत में भरा जाने वाला पदार्थ (डेंटल फिलिंग) जीभ में डल जाना
  • ठीक से फिट ना होने वाले नकली दांत भी जीभ में कैंसर होने का कारण बन सकते हैं।

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जीभ में कैंसर होने का खतरा कब बढ़ता है?

कुछ अन्य कारक भी हैं, जो जीभ में कैंसर होने का खतरा बढ़ा सकते हैं:

  • पान, तम्बाकू या गुटखा चबाना
  • अधिक उम्र होना
  • पुरुष होना (महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में जीभ का कैंसर होने के अधिक जोखिम होते हैं)
  • कुछ प्रकार के एनीमिया
  • कुछ प्रकार के कैंसर आनुवंशिक होते हैं और आनुवंशिकता भी कैंसर का एक कारक हो सकती हैं।

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जीभ के कैंसर की रोकथाम कैसे करें?

जीभ के पिछले हिस्से में होने वाले कैंसर के ज्यादातर मामले एचपीवी के कारण होते हैं। कुछ तरीके हैं, जो इस प्रकार का कैंसर होने की आशंका को कम कर देते हैं, जैसे: 

  • नियमित रूप से अपने डॉक्टर के पास जाकर कैंसर की जांच करवाते रहना।
  • स्वस्थ व अलग-अलग प्रकार के खाद्य पदार्थ जिनमें अच्छी मात्रा में फलसब्जियां शामिल हो, खाते रहना।
  • नियमित रूप से ब्रश व फ्लॉस (धागे से दांत साफ करना) करके अपने मुंह की सफाई रखना और नियमित रूप से डेंटिस्ट से जांच करवाते रहना
  • एचपीवी का टीका लगवाना 
  • किसी भी प्रकार के तंबाकू का सेवन ना करना
  • शराब ना पीना

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जीभ के कैंसर की जांच कैसे की जाती है?

जीभ के कैंसर की जांच करने के लिए डॉक्टर सबसे पहले आपकी मेडिकल स्थिति की जांच करते हैं। परीक्षण के दौरान डॉक्टर आपकी या आपके परिवार में कैंसर से जुड़ी किसी भी पिछली जानकारी के बारे में पूछेंगे। इसके अलावा आप धूम्रपान करते हैं या नहीं, शराब पीते हैं या नहीं और क्या आपको कभी एचपीवी इन्फेक्शन हुआ है आदि के बारे में भी पूछ सकते हैं।

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परीक्षण के दौरान शारीरिक परीक्षण किया जाता है जिसमें मुंह की जांच की जाती है। शारीरिक परीक्षण के दौरान मुंह में कैंसर आदि के लक्षणों का पता लगाया जाता है, जैसे जीभ पर बना कोई छाला ठीक ना हो पाना। 

  • यदि डॉक्टर को जीभ के कैंसर का संदेह हो रहा है, तो वे बायोप्सी टेस्ट करते हैं। बायोप्सी टेस्ट में जीभ के प्रभावित क्षेत्र से ऊतक का सेंपल निकाला जाता है और उसको जांच के लिए लेबोरेटरी भेज दिया जाता है। 
  • यदि बायोप्सी के रिजल्ट में कैंसर की पुष्टि हो जाती है, तो डॉक्टर सीटी स्कैन या एमआरआई स्कैन करवाने का सुझाव देते हैं। यदि यह कैंसर शरीर के अन्य अंगों में भी फैल रहा है, तो ये टेस्ट करके पता लग जाता है। 

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जीभ के कैंसर का इलाज कैसे किया जाता है?

कैंसर का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि ट्यूमर किस जगह पर बना हुआ है और यह कितना बड़ा है। जीभ के कैंसर को ठीक करने के लिए आपको सिर्फ एक इलाज करवाना पड़ सकता है या फिर आपको एक साथ कई इलाज करवाने पड़ सकते हैं। जीभ के कैंसर का उपचार करने के लिए आमतौर पर किए जाने वाले इलाज जिनमें निम्न शामिल हो सकती है:

  • ऑपरेशन:
    ट्यूमर को निकालने के लिए सर्जरी प्रक्रिया की जाती है। सर्जरी की मदद से पूरे ट्यूमर को जीभ से निकाल कर अलग कर दिया जाता है। जब संभव हो तो प्रक्रिया में न्यूनतम इनवेसिव (चीरा आदि देना) सर्जिकल तकनीक उपयोग की जा सकती है। यदि कैंसर का जल्दी ही पता लगा लिया गया है तो आमतौर पर वह अधिक नहीं फैलता है, इसलिए प्रभावित क्षेत्र को निकालने के लिए छोटा ही ऑपरेशन करना पड़ता है। बड़े ट्यूमर को निकालने के लिए विशेष प्रकार की सर्जरी की जाती है जिसे पार्शल ग्लोसेक्टोमी (Partial glossectom) कहा जाता है। जिसमें जीभ के पूरे एक हिस्से को ही निकाल दिया जाता है। (और पढ़ें - विल्म्स ट्यूमर का इलाज)

    यदि सर्जरी से जीभ के बड़े हिस्से को निकाल दिया है, तो फिर उसके बाद डॉक्टर रिकंसट्रक्शन सर्जरी (Reconstruction surgery) कर सकते हैं। इस सर्जरी में डॉक्टर आपके शरीर के किसी दूसरे हिस्से की त्वचा से ऊतक निकाल कर जीभ की जगह पर लगा कर जीभ बना देते हैं। ग्लोसेक्टोमी और रिकंसट्रक्शन दोनों सर्जरी का मुख्य लक्ष्य कैंसर ग्रस्त कोशिकाओं को निकालना और जितना हो सके मुंह को क्षतिग्रस्त होने से बचाना होता है। यदि कैंसर गर्दन की लिम्फ नोड्स तक फैल गया है, तो उसको निकालने के लिए गर्दन की सर्जरी करनी पड़ सकती है।
  • कीमोथेरेपी:
    इसे अक्सर रेडिएशन थेरेपी के साथ संयोजन करके किया जा सकता है। पूरे शरीर में कैंसर से ग्रस्त कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए कीमोथेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। यदि कैंसर आस-पास की लिम्फ नोड्स तक फैल गया है, तो कीमोथेरेपी उसके लिए बेहतर विकल्प हो सकती है। कैंसर की अलग-अलग स्टेज के अनुसार कीमोथेरेपी की अलग-अलग दवाएं दी जा सकती हैं, ताकि कैंसर पर ये दवाएं बेअसर ना हो पाएं। (और पढ़ें - शॉक थेरेपी क्या है)
     
  • रेडिएशन थेरेपी:
    इस थेरेपी को ओन्कोलॉजिस्ट (Oncologist) करते हैं। इस थेरेपी में एक शक्तिशाली रेडिएशन का उपयोग किया जाता है जो कैंसर ग्रस्त ऊतकों को नष्ट कर देती है। इसमें एक विशेष प्रकार की तकनीक का उपयोग किया जाता है, जो स्वस्थ ऊतकों को छोड़ देती है और कैंसर से ग्रस्त ऊतकों को नष्ट कर देती है। (और पढ़ें - काइरोप्रैक्टिक चिकित्सा कैसे होती है)
     
  • टार्गेटेड ड्रग थेरेपी:
    यह थेरेपी कैंसर कोशिकाओं के विकसित होने में हस्तक्षेप करने का काम करती है। इस थेरेपी को मरीज के ट्रीटमेंट प्लान के एक हिस्से के रूप में अक्सर कीमोथेरेपी या फिर रेडिएशन थेरेपी के साथ संयोजन करके किया जाता है। यह उपचार एक प्रकार की इम्यूनोथेरेपी प्रक्रिया है। यह थेरेपी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं से लड़ने के लिए उत्तेजित कर देती है। (और पढ़ें - मनोचिकित्सा क्या है)

उपचार के बाद की प्रक्रियाएं: 

  • यदि आपकी जीभ अधिक प्रभावित हो गई है, तो आपको स्पीच थेरेपी भी दी जाती है।
  • जीभ को हिलाने-ढुलाने, चबाने और निगलने में सुधार करने वाली थेरेपी।
  • आपके मुंह, गले, भोजन नली और फेफड़ों की गहराई से जांच करना और पता लगाना कि कैंसर फिर से तो विकसित नहीं हो रहा या फिर इन अंगों तक तो नहीं फैला। 

(और पढ़ें - कैंसर ट्रीटमेंट के लिए अश्वगंधा)

जीभ के कैंसर से क्या जटिलताएं हो सकती हैं?

जीभ के कैंसर का इलाज करना संभव है और जिन लोगों ने समय रहते जांच करवा ली है और स्थिति का पता लगा लिया है, उनके इलाज के बेहतर परिणाम भी निकले हैं। जीभ के कैंसर का जल्दी ही पता लगाने से उसके इलाज के कई विकल्प हो जाते हैं और उससे साइड इफेक्ट्स भी कम हो पाते हैं।

जिन लोगों में जीभ का कैंसर किसी दूसरे अंग तक नहीं फैला है, उनके पूरी तरह से ठीक होने की बहुत अधिक संभावनाएं होती हैं। ज्यादातर छोटे आकार के कैंसर ठीक होने के बाद मुंह के कार्यों में थोड़ा बहुत बदलाव या फिर निशान आदि ही छोड़ते हैं। यदि कैंसर अधिक बड़े आकार का है, तो वह फैल भी सकता है और निगलने में कठिनाई भी पैदा कर सकता है। (और पढ़ें - थायराइड कैंसर का इलाज)

जीभ के कैंसर का इलाज करने के लिए की जाने वाली सर्जरी से आपको निम्नलिखित कार्यों संबंधी जटिलताएं हो सकती हैं, जैसे:

  • बोलना
  • खाना
  • सांस लेना
  • निगलना

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