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वैश्विक महामारी कोरोना ने जिंदगी की रफ्तार पर ब्रेक लगाने के साथ संक्रमण सहित कई सारी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां पैदा कर दी हैं। करीब तीन माह के संपूर्ण लॉकडाउन के चलते जीवनशैली में काफी उथल-पुथल आ गई है। इन दिनों न तो आप व्यायाम के लिए जिमों में जा सकते थे, न ही पार्कों में। लिहाजा फिटनेस को लेकर काफी सक्रिय रहने वाले लोगों के लिए यह समय काफी मुश्किलों भरा रहा। अब जब प्रतिबंध धीरे-धीरे कम होने लगे हैं, पार्क, जिम और खेल कूद के अवसर फिर से शुरू हो रहे हैं, यह मौका है अपनी फिटनेस को दोबारा पटरी पर लाने का।

आप चाहे बॉडीवेट एक्सरसाइज कर रहे हों या फिर वेट के साथ जिम में वर्कआउट, सभी तरह के व्यायाम का फायदा तभी होता है जब शरीर को आवश्यक न्यूट्रिशन पूरी तरह से मिलते रहें। यही कारण है कि पूरी दुनिया में न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट्स की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है। ऐसा नहीं है कि वर्कआउट के लिए न्यूट्रिशन की आवश्यकता आधुनिक तकनीक के चलते हुई है। सदियों से पहलवानी (भारतीय कुश्ती) कर रहे पहलवान भी शरीर को शक्ति देने के लिए गाय के दूध के साथ तरह-तरह के नट्स और अन्य आवश्यक पोषक सामग्रियों को मिलाकर सेवन करते रहते थे। समय के साथ पोषक तत्वों के सेवन के तरीके में बदलाव जरूर आया है और इन्हें अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित कर दिया गया है। उदाहरण के लिए वजन बढ़ाने और मांसपेशियों को शक्ति प्रदान करने के लिए प्रोटीन सप्लीमेंट (दूध से बने खाद्य पदार्थ, पशु के मांस और फल-फूल से मिलने वाले प्रोटीन) की मांग बढ़ी है। इन सप्लीमेंट्स को भी प्री और पोस्ट वर्कआउट प्लान में जरूरत के अनुसार विभाजित कर दिया गया है।

दैनिक रूप से वर्कआउट करने वाले लोगों के लिए प्री वर्कआउट में कॉफी का सेवन करना सबसे पहली पसंद रही है।  ज्यादातर लोगों के लिए दिन की शुरुआत करने का इससे बढ़िया कोई और विकल्प हो ही नहीं सकता है। कॉफी और कई अन्य पेय पदार्थों में पाए जाने वाले मुख्य तत्व कैफीन को साइकोएक्टिव ड्रग्स के रूप में वर्गीकृत किया गया है। हालांकि, पूरी दुनिया में इसका उपयोग लीगल है और यह आसानी से उपलब्ध है। साइकोएक्टिव ड्रग्स उन पदार्थों को कहते हैं जो मानसिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं। कैफीन का प्रयोग तुरंत एनर्जी और ताजगी देने वाला होता है। भले ही ब्रिटिश प्रभाव के कारण चाय भारत में सबसे अधिक पसंदीदा पेय पदार्थों में से एक है, फिर भी कॉफी की मांग लगातार बढ़ती जा रही है।

इस लेख में हम आपको बताएंगे कि आखिर कॉफी में प्रोटीन पाउडर को मिलकार इस्तेमाल करना व्यायाम के शौकीन लोगों के लिए किस तरह से फायदेमंद हो सकता है।

  1. एक नया ट्रेंड : कॉफी में प्रोटीन पाउडर मिलाकर इस्तेमाल - Coffee me protein powder milakar istemaal
  2. दैनिक रूप से शरीर को प्रोटीन की आवश्यकता - Rojana Body ko Kitni matra me Protein ki jrurat hoti hai?
  3. कॉफी के साथ मिश्रित प्रोटीन पाउडर भोजन का विकल्प हो सकता है? - Kya protein powder mixed with coffee daily meals ka alternative ho sakta hai?

किसी भी इंटेंस वर्कआउट-डे के पहले प्री-वर्कआउट में कॉफी सबसे तेज ऊर्जा प्रदान करने वाले ड्रिंक के रूप में जानी जाती है। अक्सर आपको फिटनेस के शौकीन लोग वर्कआउट से पहले कॉफी पीते हुए दिख जाएंगे। हालांकि, अब एक नया ट्रेंड तेजी से देखने को मिल रहा है, इसके तहत कॉफी में प्रोटीन पाउडर मिलाकर पीने की शुरुआत हुई है। लोगों का मानना है कि कॉफी में प्रोटीन पाउडर मिलाकर पीने से न सिर्फ वर्कआउट के दौरान प्रदर्शन में सुधार किया जा सकता है साथ ही यह वजन घटाने में भी मददगार है।

जिन लोगों के पास समय कम होता है, वह नाश्ता नहीं कर पाते हैं, या जिन्हें कॉफी पीना पसंद नहीं होता है उनके लिए बाजार में कैफीन की गोलियां भी मौजूद हैं। कहा जा रहा है कि कैफीन के ये टैबलेट, आपको एक कप कॉफी जितनी ही ऊर्जा प्रदान कर सकती हैं। कई अध्ययनों में साफ हुआ है​ कि अगर व्यायाम से एक घंटे पहले कॉफी पी जाए तो यह एनर्जी देने के साथ मांसपेशियों को बेहतर ढंग से विकसित करने में भी मददगार है। वहीं दूसरी ओर अधिक मेहनत वाले वर्कआउट के बाद मांसपेशियों को प्रोटीन की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है, ऐसे में प्रोटीन पाउडर मांसपेशियों को मजबूती देने और उनको विकसित करने में सहायक हो सकते हैं। यही कारण है कि कॉफी के साथ प्रोटीन पाउडर को मिलाकर पीने का यह ट्रेड बहुत तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है।

जो लोग सुबह समय की कमी के चलते नाश्ता नहीं कर पाते हैं, यह ट्रेंड उन लोगों के लिए भी काफी फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि प्रोटीन मिक्स मात्र एक कप कॉफी से उन्हें शरीर के लिए आवश्यक प्रोटीन मिल जाएगा। यहां आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चाहे आप वजन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं या वजन कम करने की, प्रोटीन दोनों ही मामलों में शरीर के लिए बहुत आवश्यक होता है। प्रोटीन शरीर में मांसपेशियों को बढ़ाने में मदद करने के साथ फैट की मात्रा को कम करता है।

इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ स्पोर्ट्स न्यूट्रीशन के जर्नल में प्रकाशित एक शोध में निम्नलिखित बिंदुओं में कैफीन सप्लीमेंट की आवश्यकताओं को बताया गया है।

  • अगर कैफीन का सेवन सामान्य मात्रा में किया जाए यानी मात्रा लो टू मॉडरेट हो तो यह एथलीटों के प्रदर्शन में सुधार करने में भी सहायक होती है। हालांकि, इसकी मात्रा बहुत अधिक कर देने से प्रदर्शन में कोई बहुत लाभ नहीं मिलता है।
  • कैफीन को अगर निर्जल अवस्था में लिया जाए तो यह एक एर्गोजेनिक प्रभाव (कार्य दर और कार्यभार में बढ़ोतरी) पैदा करता है। निर्जल अवस्था का तात्पर्य कैफीन का बिना पानी के सेवन से है। इसे कॉफी के बीज और पत्तियों से बनाया जाता है। इसके बाद कैफीन के पाउडर को प्रभावशाली बनाने के लिए इसे सुखाया जाता है।
  • ​अधिक शक्ति वाले और थकाने वाले व्यायाम से पहले यदि आप कैफीन का सेवन करते हैं तो यह आपकी सतर्कता और सक्रियता को बढ़ाने में मददगार हो सकता है।
  • कैफीन, व्यायाम और खेल से जुड़े लोगों के लिए भी काफी फायदेमंद हो सकता है। इतना ही नहीं यह टाइम ट्रायल परफॉर्मेंस जैसे लंबी दूरी की साइकिलिंग जैसे अभ्यासों में भी फायदेमंद हो सकता है।
  • उच्च तीव्रता वाले व्यायाम जैसे कि हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग (एचआईआईटी) और फुटबॉल एंव रग्बी जैसे खेल के लिए कैफीन बतौर सप्लीमेंट भी अच्छा माना जाता है।
  • स्ट्रेंथ और पॉवर वाली गतिविधियों के दौरान भी कैफीन बतौर सप्लीमेंट काफी प्रभावी होता है। हालांकि, इसकी प्रमाणिकता के लिए अभी और अधिक शोध किए जाने की आवश्यकता है।
  • व्यायाम के दौरान कैफीन इंडक्टेड ड्यूरेसिस (मूत्र के उत्पादन में वृद्धि) लेने से मना किया जाता है, क्योंकि यह शरीर में द्रव के संतुलन को प्रभावित कर सकता है, जिससे खेल पर असर पड़ सकता है।

व्यायाम करने वाले या खेल से जुड़े लोगों को दैनिक रूप से औसत 30-35 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है। हालांकि, यदि आप इससे अधिक मात्रा में प्रोटीन का सेवन करते हैं तो यह हानिकारक भी हो सकता है। यानी आपको यह ध्यान रखना है कि शरीर को प्रोटीन उतनी ही मात्रा में मिले, जितना उसे आवश्यक हो। औसत से अधिक मात्रा में प्रोटीन का सेवन करने से शरीर उसका उपयोग सही से नहीं कर पाता है और यह मूत्र के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाता है।

यदि दिन में आपके पास थोड़ी-थोड़ी देर पर कुछ खाने का समय नहीं है तो आप कॉफी के साथ प्रोटीन पाउडर को मिश्रित करके इसका सेवन कर सकते हैं। इससे आपकी दैनिक रूप से प्रोटीन की आवश्यकता पूरी हो जाएगी। इतना ही नहीं यदि आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो भी यह आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।

प्रोटीन के सेवन से आपको दिनभर भूख कम लगती है और पेट भरा हुआ महसूस होता है। ऐसे में आप अपना वजन आसानी से कम कर सकते हैं। फैट और कार्बोहाइड्रेट की तुलना में प्रोटीन के सेवन से बिना कमजोरी महसूस किए आपको पूरे दिन कम भूख लगती है। मेटाबॉलिज्म को तेज करने में भी प्रोटीन काफी मददगार हो सकता है इससे आप दैनिक रूप से अधिक कैलोरी बर्न कर सकते हैं।

जब कॉफी और प्रोटीन के मिश्रण की चर्चा हो रही है तो यह प्रश्न आना लाजमी है कि क्या यह मिश्रण आपके भोजन का विकल्प हो सकता है? इसे ऐसे समझते हैं। कॉफी में प्रोटीन को मिलाकर सेवन करने से आपकी दैनिक पोषण संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति हो जाती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह संतुलित आहार का विकल्प हो सकता है।

कैफीन शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद है, यह बहुत तेजी से रक्तप्रवाह में अवशोषित होकर आपको त्वरित ऊर्जा प्रदान कर सकती है। यह मस्तिष्क के उन हिस्सों को सक्रिय करती है जो आपको ध्यान केंद्रित करने और थकान को कम करने में मदद करते हैं। यह शरीर को एंडोर्फिन हार्मोन प्रवाहित करने, मूड को ठीक करने और व्यायाम के बाद उत्साहित महससू कराने में भी सहायक है। कॉफी एक बेहतर एंटीऑक्सिडेंट होती है। इतना ही नहीं यह कई प्रकार की मानसिक बीमारियों और अन्य पुरानी बीमारियों को बढ़ने और होने से रोकती भी है।

हालांकि, कैफीन को नियत मात्रा में ही लेने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसका एथलीटों के प्रदर्शन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। स्वास्थ्य संबंधी भी इसके कई नुकसान हैं जैसे यदि आप कैफीन का सेवन बहुत अधिक मात्रा में कर लेते हैं तो इससे मतिभ्रम या मतली जैसी कई प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं। कुछ अध्ययनों में यह भी कहा गया है कि जो लोग कैफीन के प्रति अति संवेदनशील हों, उन्हें कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही जिसे चिंता या नींद की बीमारी रहती है, उनको भी कैफीन का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है जो ऐसे लोगों के लिए चिंता का कारण बन सकता है।

जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, प्रोटीन पाउडर सप्लीमेंट है और इसे व्यायाम व खेलों में अपने प्रदर्शन और मांसपेशियों को विकसित करने के लिए लिया जा सकता है, ऐसे में इसका मतलब ​है कि यह भोजन का विकल्प नहीं, बल्कि उसका पूरक है। प्रोटीन पाउडर में कई तरह के फ्लेवर्स और कृत्रिम मिठास मिले होते हैं जो आपकी संपूर्ण पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा नहीं कर सकते हैं, जैसा कि भोजन करता है। प्रोटीन पाउडरों की जगह पर अगर आप प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं तो वह पाउडर और सप्लीमेंट की तुलना में शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद होते हैं।

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