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थोड़े समय में ज्यादा ऊर्जा के साथ की गई एक्सरसाइज शरीर के मेटाबोलाइट लेवल में बदलाव कर देती है, जिसका व्यक्ति के कार्डियोमेटाबोलिक, कार्डियोवस्क्युलर हेल्थ के साथ-साथ दीर्घकालिक स्वास्थ्य से संबंध है। प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त मैसच्युसेट्स जनरल हॉस्पिटल (एमजीएच) के वैज्ञानिकों ने अध्ययन कर इस जानकारी का पता लगाया है। हार्वर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस अध्ययन को सर्कुलेशन नामक मेडिकल पत्रिका ने प्रकाशित किया है। इसमें शोधकर्ताओं ने बताया है कि कैसे हृदय और फेफड़े को प्रभावित करने वाला 12 मिनट का तीव्र व्यायाम (एक्यूट कार्डियोपल्मनरी एक्सरसाइज) 80 प्रतिशत सर्कुलेटिंग मेटाबोलाइट्स को प्रभावित करता है। इनमें ऐसे कई सब्सटेंस भी शामिल हैं, जिनसे मानव स्वास्थ्य को कई प्रकार से फायदा मिलता है।

इस जानकारी पर एमजीएच के हार्ट फेलियर विभाग के प्रमुख और अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता ग्रेगरी लुइस ने कहा है, 'हमें कम समय में की गई एक्सरसाइज के प्रभावों ने आकर्षित किया। इससे शरीर में सर्कुलेट हो रहे मेटाबोलाइट के लेवलों में बदलाव होते हैं, जो शरीर के कुछ जरूरी फंक्शन को संचालित करने का काम करते हैं, जैसे इंसुलिन रेसिस्टेंस, ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस, वस्क्युलर रिएक्टिविटी, इन्फ्लेमेशन और लॉन्गेविटी (दीर्घायु)।'

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अध्ययन में 12 मिनट की तीव्र एक्सरसाइज के ठीक पहले और तुरंत बाद 588 सर्कुलेटिंग मेटाबोलाइट के लेवल पर पड़ने वाले प्रभावों को मांपने के लिए एमजीएच के वैज्ञानिकों ने चर्चित फ्रैमिंगम हार्ट स्टडी के डेटा का इस्तेमाल किया है। ये आंकड़े मध्य आयुवर्ग के 411 पुरुषों और महिलाओं से जुड़े थे। विश्लेषण के दौरान जांचकर्ता वैज्ञानिकों ने पाया कि एक्सरसाइज के बाद स्वास्थ्य के लिए लाभदायक कई मेटाबोलाइट में अनुकूल परिवर्तन हुए थे। इससे पहले इन सब्सटेंस के लेवल कार्डियोमेटाबोलिक डिजीज से जुड़े हुए पाए गए थे। मिसाल के लिए, ग्लूटामेट नाम का एक मेटाबोलाइट हृदय रोग, डायबिटीज और कम दीर्घायु से संबद्ध था। लेकिन कम समय में की तीव्र एक्सरसाइज के कारण इस संबंध में 29 प्रतिशत तक की कमी आ गई थी। इसी तरह, डीएमजीवी नाम का एक मेटाबोलाइट, जिसे डायबिटीज और लिवर डिजीज से जोड़कर देखा जाता है, इन्टेंस वर्क आउट के कारण 18 प्रतिशत तक कम हो गया था।

इसके अलावा, अध्ययन में यह भी पता चला है कि मोटापा होने पर एक्सरसाइज से इतर किसी व्यक्ति के मेटाबोलाइट रेस्पॉन्स अन्य फैक्टर्स से भी मॉड्युलेट या परिवर्तित हो सकते हैं। इनमें व्यक्ति का लिंग और बॉडी मास इंडेक्स जैसे फैक्टर भी शामिल हैं। हालांकि मोटापे के चलते एक्सरसाइज से मिलने वाले फायदे आंशिक रूप से बाधित हो सकते हैं।

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अध्ययन से जुड़े इन परिणामों पर इसके एक प्रमुख लेखक और एमजीएच के हार्ट फेलियर एंड ट्रांसप्लांटेशन सेक्शन के सदस्य मैथ्यू नेयर कहते हैं, 'हमारे अध्ययन में एक्सरसाइज के अलग-अलग फिजियोलॉजिक रेस्पॉन्स के साथ अलग-अलग मेटाबोलाइट के प्रभावित होने का पता चला है। इसी कारण, ब्लडस्ट्रीम में ऐसे संकेतकों का पता चला सकता है, जो बता सकें कि कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से फिट है या नहीं। इससे यह काम मौजूदा ब्लड टेस्ट विकल्पों से ज्यादा बेहतर तरीके से किया जा सकता है कि किडनी और लिवर सही तरीके से काम कर रहे हैं।' शोधकर्ताओं का कहना है कि एक्सरसाइज रेस्पॉन्स के मेटाबोलिक संकेतकों के दीर्घकालिक प्रभावों का अध्ययन करके वे किसी व्यक्ति के भावी स्वास्थ्य के बारे में अनुमान लगाने में कामयाब रहे। वे यह भी बता सके कि वह व्यक्ति कितने समय तक जीवित रहेगा।

इस बारे में अध्ययन से जुड़े एक और शोधकर्ता और लेखक रवि शाह ने कहा है, 'हमने अब बेहतर तरीके से समझना शुरू किया है कि एक्सरसाइज किस प्रकार शरीर को प्रभावित करती है। इस जानकारी को हम एक्सरसाइज रेस्पॉन्स पैटर्न के इर्द-गिर्द रखते हुए मेटाबोलिक आर्किटेक्चर को समझने में इस्तेमाल कर रहे हैं। यह अप्रोच हाई ब्लड प्रेशर या अन्य मेटाबोलिक रिस्क फैक्टर से प्रभावित लोगों के इलाज में काम आ सकती है।'

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