एक्सरसाइज वजन कम करने में मदद कर सकती है, लेकिन इसके लिए आपको हफ्ते में कम से कम 3,000 कैलोरी बर्न करनी होंगी। ऐसा करने के लिए हफ्ते के छह दिन रोजाना एक घंटे के करीब या हफ्ते में 300 घंटे एक्सरसाइज करनी होगी। यह कोई नई जानकारी नहीं है कि हमारी कमर के नाप और व्यायाम में बेजोड़ संबंध है। वजन कम करने की प्रक्रिया को साधारण शब्दों में बताएं तो यह कुछ यूं है: हम एक्सरसाइज करते हैं तो शरीर की कैलोरी खर्च होती है, जिससे शरीर में ऊर्जा की कमी होती है। ऐसे में बॉडी स्टोर में रखे फैट का इस्तेमाल करना शुरू करती है ताकि हमारी शारीरिक गतिविधियों चलती रहें। इस प्रक्रिया के चलते रहने से कोई व्यक्ति पतला हो जाता है। यह वजन कम करने से जुड़े बेसिक का एक सामान्य विवरण है।

लेकिन यह बेसिक हर व्यक्ति के साथ काम नहीं करता। कई बार लोगों का शरीर एक्सरसाइज के हिसाब से कॉपरेटिव नहीं रहता या कहें अपेक्षित परिणाम के लिहाज से रेस्पॉन्ड नहीं करता। मानव विकास के चलते हमारा शरीर असल में भुखमरी के समय शरीर को एनर्जी देने के लिए फैट स्टोर कर लेता है। यही कारण है कि वजन कम करने के हमारे प्रयास को शरीर कमजोर कर देता है। ऐसे में तकनीकी जानकारियां काम आती हैं। नया अध्ययन ऐसी ही एक तकनीकी और दिलचस्प जानकारी देता है। इसके मुताबिक, वर्कआउट के जरिये ऐपटाइट हार्मोन को एक्टिव रखने से आप ज्यादा कैलोरी कन्ज्यूम कर पाते हैं।

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इससे पहले वजन कम करने से जुड़े पिछले अध्ययनों में कहा गया है कि जो लोग एक्सरसाइज करना शुरू ही करते हैं, वे अपने खानपान की निगरानी के बिना उतना वेट नहीं घटा पाते, जितना की वे चाहते हैं, और कुछ का वजन तो उल्टा बढ़ जाता है। लेकिन अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ केनटुकी में न्यूट्रीशन के प्रोफेसर कायले फ्लैक ने इस दावे के संबंध में सालों रिसर्च किया है। उनका अनुमान है कि शायद एक्सरसाइज के बाद लोगों में कैलोरी घटने की एक उच्चतम सीमा होती है। यानी अगर वे अपनी एक्सरसाइज के घंटे बढ़ा दें तो संभवतः थोड़ी कैलोरी और थोड़ा वजन घटा पाएंगे। 2018 में प्रकाशित अपने एक अध्ययन में प्रोफेसर कायले और उनके सहयोगियों ने इस आइडिया पर काम किया। उन्होंने ज्यादा वजन और ज्यादा समय तक बैठे रहने वाले पुरुषों और महिलाओं को इतनी एक्सरसाइज करने को कहा कि एक हफ्ते में वर्कआउट के दौरान उनका 1,500 या 3,000 कैलोरी कम हो सके।

आइडिया पर अमल करते हुए वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों को तीन महीने तक व्यायाम कराया। इसके बाद उनका वजन चेक किया गया। उन्होंने मेटाबॉलिक गणना कर यह सुनिश्चित किया कि हरेक प्रतिभागी ने तीन महीनों के दौरान कितनी कैलोरी खर्च कीं। कैल्कुलेशन में पता चला कि इन लोगों ने हर हफ्ते औसतन 1,000 कैलोरी क्षतिपूर्ति के रूप में खाई थी। इस गणित पर चलते हुए यह जानने को मिला कि प्रतिभागी महिला और पुरुषों ने हर हफ्ते 1,500 कैलोरी बर्न की थीं। यानी उन्होंने हर हफ्ते वे 500 कैलोरी घटा पा रहे थे। वहीं, जो कुछ प्रतिभागी 3,000 कैलोरी घटाने कामयाब हुए थे, वे कम्पन्सेटरी ईटिंग के बाद भी हर हफ्ते करीब 2,000 कैलोरी डेफिसिट हासिल करने में कामयाब हो गए थे। हालांकि किसी भी प्रतिभागी के मेटाबॉलिक रेट में संपूर्ण रूप से ज्यादा बदलाव नहीं आया था। लेकिन दिलचस्प परिणाम यह सामने आया कि सबसे ज्यादा एक्सरसाइज करने वाले लोगों में से अधिकतर ने अपना वजन कम कर लिया था।

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हालांकि इस अध्ययन में प्रोफेसर फ्लैक कई सवालों के जवाब नहीं मिले थे। जैसे क्या अलग-अलग मात्रा में की गई एक्सरसाइज से लोगों के ऐपटाइट हार्मोन को अलग तरह से प्रभावित करती है? इसलिए शोधकर्ताओं ने पिछले अध्ययन की तरह एक्सरसाइज से जुड़ा एक्सपेरिमेंट तो वही रखा, लेकिन प्रतिभागियों के शेड्यूल में बदलाव कर दिया। इस बार प्रयोग में शामिल 44 सेडेन्टरी और ओवरवेट महिला व पुरुषों में से आधे को हफ्ते में दो बार कम से कम 90 मिनट या तब तक एक्सरसाइज करने को कहा गया, जब तक वे एक सेशन में 750 कैलोरी नहीं घटा लेते या एक हफ्ते में (दो बार एक्सरसाइज कर) 1,500 कैलोरी खर्च नहीं कर प्रतिभागियों को उनके मनमर्जी का व्यायाम करने को कहा गया। कइयों ने वॉकिंग करने का फैसला किया। लेकिन कुछ ने दूसरे व्यायाम विकल्प भी चुनें। इन लोगों ने अपने प्रयासों की ट्रैकिंग के लिए हार्ट रेट मॉनटिर भी पहने।

बाकी वॉलन्टियर्स ने हफ्ते में छह दिन 40 से 60 मिनट तक एक्सरसाइज करना शुरू किया। वे एक सेशन में 500 कैलोरी बर्न करते। इस तरह हफ्ते में 3,000 कैलोरी कन्ज्यूम हो जाते। वहीं, शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों के ऐपटाइट को प्रभावित करने वाले विशेष हार्मोनों के लेवल चेक करने के लिए उनके ब्लड सैंपल भी लिए। 12 हफ्तों के बाद सभी प्रतिभागी अध्ययन संबंधी लैब में वापस आए, जहां शोधकर्ताओं ने उनकी बॉडी कंपोजीशन को रीफिगर किया, फिर से ब्लड सैंपल लिए और कैलोरी कंपनसेशन को कैलकुलेट किया। इस बार फिर कंपनसेटरी कैलोरी 1,000 पाई गई। इसका नतीजा यह हुआ कि जिन महिला और पुरुष प्रतिभागियों ने हफ्ते के छह दिन एक्सरसाइज की थी, केवल उन्हीं के वजन में कटौती हुई और वे बॉडी से चार पाउंड फैट कम कर पाए।

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वहीं, अध्ययनकर्ताओं ने स्टडी में शामिल सभी प्रतिभागी समूहों के बीच एक अप्रत्याशित अंतर बताया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने हफ्ते में 3,000 कैलोरी बर्न की थीं, उनके शरीर में लेपटिन हार्मोन के लेवल में बदलाव आ गए थे। यह ऐपटाइट हार्मोन का ही एक प्रकार है, जो भोजन की इच्छा को कम कर सकता है। इससे यह जानने में आया कि एक्सरसाइज करने से रेग्युलर व्यायाम करने वाले प्रतिभागियों की हार्मोने के प्रति सेंसिटिविटी में बढ़ोतरी हो गई थी। इससे वे अपने खाने की आदत को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर सकते थे। कम व्यायाम करने वाले प्रतिभागियों में इस तरह हार्मोनल बदलाव देखने को नहीं मिला।

परिणामों पर प्रोफेसर फ्लैक ने कहा है, 'नए प्रयोग से इस पिछले परिणाम की पुष्टि हुई है कि हममें से अधिकतर लोग एक्सरसाइज करने के बाद ज्यादा खाएंगे, लेकिन हफ्ते में अतिरिक्त 1,000 कैलोरी से ज्यादा नहीं खा पाएंगे। लिहाजा अगर कोई एक्सरसाइज कर इससे ज्यादा कैलोरी बर्न कर रहा है तो वह वजन कम कर सकता है।' हालांकि इस दावे की अपनी सीमाएं हैं। डॉ. फ्लैक ने कहा कि एक्सरसाइज कर हफ्ते में हजारों कैलोरी कम करना चुनौतीपूर्ण है, जिसे हमेशा पूरा नहीं किया जा सकता। साथ ही, यह अध्ययन कुछ महीनों के विश्लेषण पर आधारित है और यह नहीं बताता कि क्या बाद में भूख और मेटाबॉलिज्म में होने वाले बदलाव हमारे फैट की गिरावट में बढ़ोतरी करेंगे या कमी। फिर भी, जो लोग एक्सरसाइज की मदद से अपना वजन कम करना चाहते हैं, वे चाहें तो ऐसा कर सकते हैं।

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