चार मिनट का इन्टेंस या कड़ा व्यायाम जीवनकाल को बढ़ाने में मददगार हो सकता है। एक नया अध्ययन कहता है कि अगर हम अपने हृदय की गति को एक्सरसाइज से बढ़ाएं तो इससे आयु बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसके लिए 'चार मिनट का कड़ा व्यायाम' एक अच्छा विकल्प बताया गया है। दि न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, व्यायाम और मृत्यु दर के विषय पर हुए अब तक के सबसे बड़े और लंबे प्रयोगात्मक एग्जामिनेशन में से एक के पूरा होने के बाद वैज्ञानिकों ने कहा है कि जो पुरुष और महिलाएं (लगभग) किसी भी प्रकार की गतिविधि या व्यवहार के तहत एक्सरसाइज करते हैं, उनके असमय रूप से मरने का खतरा तुलनात्मक रूप से कम होता है। वहीं, अगर एक्सरसाइज इन्टेंसिटी के साथ की जाए तो इससे जल्दी मरने का खतरा और कम हो जाता है। यानी व्यक्ति की आयु बढ़ जाती है और उसकी जीवन गुणवत्ता में भी सुधार होता है।

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यह कोई नई बात नहीं है कि व्यायाम करने से लोगों के स्वास्थ्य और आयु दोनों में बेहतरी देखने को मिलती है। पिछले कई अध्ययनों में कहा गया है कि रोजाना एक्सरसाइज करने का दीर्घायु से मजूबत संबंध है, भले ही एक्सरसाइज हफ्ते में कुछ ही मिनट की जाए। हालांकि ऐसे लगभग सभी अध्ययन ऑब्जर्वेशनल रहे हैं। यानी इनमें वैज्ञानिकों ने लोगों के तात्कालिक स्वास्थ्य जीवन की जांच की थी। मसलन, वे उस समय किन और किस प्रकार से शारीरिक गतिविधियों में शामिल थे और बाद में यही जाना गया कि उन लोगों की मौत कब हुई। इस तरह के अध्ययन यह तो बता सकते हैं कि दीर्घायु का एक्सरसाइज से संबंध है, लेकिन वे यह साबित नहीं कर सकते कि गतिविधियों में लीन रहने से वाकई में लोग लंबा जीवन जी सकते हैं या नहीं। नया अध्ययन इस थ्योरी का समर्थन करने के साथ इसके कारण भी बताता है। इस स्टडी की मानें तो हफ्ते में कुछ मिनट का इन्टेंस वर्कआउट करने से कोई व्यक्ति लंबी आयु प्राप्त करने में सफल हो सकता है।

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यह जानने के लिए एक्सरसाइज या शारीरिक गतिविधियां वाकई में दीर्घायु में मददगार हो सकती हैं, शोधकर्ताओं को लंबे समय के लिए वॉलन्टियर्स को एनरोल करना पड़ा, जिनमें 70 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या अच्छी खासी थी। उनकी जीवनशैली में हस्तक्षेप न करते हुए कुछ को एक्सरसाइज करने वाले लोगों के साथ रखकर उनके रैंडमाइज्ड कंट्रोल ट्रायल किए गए। वहीं, कुछ अलग प्रकार से वर्कआउट कर रहे थे, जबकि कुछ बिल्कुल भी शारीरिक गतिविधि में नहीं थे। फिर इन लोगों की सालोंसाल ट्रैकिंग की गई। यह फॉलोअप तब तक किया गया, जब तक वॉलन्टियर्स के रूप में शामिल लोगों की बड़ी संख्या में मौत नहीं हो गई ताकि उनकी अलग-अलग समूह के आधार पर तुलना की जा सके। पांच साल की फॉलोइंग के बाद वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि अध्ययन में शामिल सभी वॉलन्टियर्स में 4.6 प्रतिशत की अध्ययन के दौरान मौत हो गई थी। यह दर एक दूसरे अध्ययन में शामिल हुए और बाद में मारे गए लोगों से कम थी। 

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इससे संकेत गया कि नए अध्ययन में शामिल बुजुर्ग वॉलन्टियर्स कुल-मिलाकर अन्य लोगों की अपेक्षा ज्यादा लंबे जीवन जी रहे थे। हालांकि कड़ा व्यायाम करने वाले लोगों के समूहों पर गौर करने के बाद पता चला कि उनमें लंबा जीवन जीने की संभावना कंट्रोल ग्रुप की अपेक्षा और दो प्रतिशत अधिक थी। वहीं, किसी भी ग्रुप से तुलना करने पर यह दर तीन प्रतिशत अधिक पाई गई। यह जानना और दिलचस्प रहा कि सामान्य एक्सरसाइज करने वाले ग्रुप के वॉलन्टियर्स में जल्दी मरने की आशंका कंट्रोल ग्रुप से ज्यादा पाई गई है। उधर, कड़ा व्यायाम करने वाले पुरुषों और महिलाओं के जीवन की गुणवत्ता में अन्य वॉलन्टियर्स की अपेक्षा अधिक सुधार हुआ।

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