स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी पूंजी है” सिर्फ एक कहावत ही नहीं, यह जीवन की सच्चाई भी है। जीवन में स्वस्थ रहना सबसे बड़ी संपत्ति है, क्योंकि यदि आप बीमार हैं तो आपके पास मौजूद सारा धन व्यर्थ है। लेकिन शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए मुंह को स्वस्थ रखना बेहद जरूरी है। यदि आपके मुंह में किसी प्रकार का संक्रमण, चोट या बदबू जैसी कोई समस्या नहीं है तो इसका मतलब आपका मुंह पूरी तरह से स्वस्थ है।

दांत आपके मुंह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें विभिन्न प्रकार की बीमारियां लगने का खतरा रहता है और इसीलिए डॉक्टर आपको नियमित रूप से अपने दांतों की जांच करवाते रहने की सलाह देते हैं। यदि समय-समय पर चेकअप न कराया जाए, तो दांतों को कई बीमारियां लग सकती हैं और इससे आपका संपूर्ण स्वास्थ्य बिगड़ सकता है।

लेकिन बढ़ती महंगाई के बीच नियमित रूप से जांच करवाना कोई आसान काम नहीं है और ऐसे में यदि दांतों संबंधी कोई समस्या हो जाती है, तो आपकी वित्तीय स्थिति बदतर हो सकती है। इतना ही नहीं एक आम आदमी के सामने समस्या तब खड़ी होती है, जब उसकी हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी दांत संबंधी समस्याओं के मेडिकल खर्च पर कवरेज नहीं देती है। जी हां! यह बात सच है, सामान्य स्वास्थ्य बीमा योजनाएं दांत संबंधी बीमारियों व रेगुलर चेकअप्स के मेडिकल खर्च पर कवरेज नहीं देती हैं। नीचे इस लेख में हम इसी बारे में बात करने वाले हैं कि हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां डेंटल ट्रीटमेंट पर किन स्थितियों में कवरेज नहीं देती हैं और किन स्थितियों में इस खर्च को शामिल किया जा सकता है।

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  1. क्या स्वास्थ्य बीमा में दांतों का इलाज कवर होता है - Is dental treatment covered in health insurance in Hindi
  2. स्वास्थ्य बीमा में डेंटल केयर को शामिल क्यों नहीं किया जाता है? - Why is dental care not covered in health insurance in Hindi
  3. हेल्थ इन्शुरन्स प्लान जिनमें दंत चिकित्सा पर कवरेज दी जाती है - Health insurance plans that provide coverage on Dental Treatment in Hindi

सभी स्वास्थ्य बीमा कंपनियां डेंटल ट्रीटमेंट पर कवरेज नहीं देती हैं, इसकी पूरी तरह से पुष्टि तो नहीं की जा सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि हर कंपनी के अपने अलग मानदंड हो सकते हैं। सरल भाषा में कहा जाए तो ज्यादातर स्वास्थ्य बीमा कंपनियां दंत चिकित्सा पर कवरेज नहीं देती हैं, जबकि अन्य कंपनियां कुछ विशेष शर्तों पर दांतों के इलाज को कवरेज दे सकती हैं। इसके अलावा किसी भी इमर्जेंसी की स्थिति में जैसे कि दुर्घटना के कारण दांतों में चोट आदि लगी है, तो उसका इलाज हेल्थ इन्शुरन्स प्लान के अंतर्गत ही किया जाता है।

डेंटल ट्रीटमेंट को आमतौर पर कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट की श्रेणी में रखा जाता है और इन पर आने वाला खर्च भी अधिक होता है। यही कारण हैं कि अधिकतर बीमा कंपनियां हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में डेंटल ट्रीटमेंट कवरेज को शामिल नहीं करती हैं। इतना ही नहीं कुछ हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां एक एड-ऑन बेनेफिट के रूप में भी डेंटल केयर पर कवरेज दे सकती हैं, लेकिन ऐसी स्थिति में प्रीमियम बढ़ा दिया जाता है।

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कुछ लोग जिन्होंने स्वास्थ्य बीमा कराया हुआ है, उन्हें इस बात का पता नहीं होता कि इसमें दंत चिकित्सा को शामिल नहीं किया जाता है। ऐसे में जब वे दांत संबंधी किसी समस्या के लिए अस्पताल जाते हैं, तो उन्हें पता चलता है कि डेंटल ट्रीटमेंट को इन्शुरन्स प्लान में शामिल नहीं किया गया है। इसके बाद आप सिर्फ यही सोचते रह जाते हैं कि जब दांत शरीर का ही हिस्सा है, तो उन्हें हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में कवर क्यों नहीं किया जाता है। इन्हीं सवालों का जबाव देने के लिए हम नीचे दिए गए कुछ पॉइंट्स की मदद से आपको यह समझाने की कोशिश करेंगे कि डेंटल केयर पर हेल्थ इन्शुरन्स में कवरेज क्यों नहीं दी जाती है।

  • एक अलग क्षेत्र -
    डेंटल और मेडिकल ट्रीटमेंट क्षेत्र को काफी समय पहले ही अलग-अलग कर दिया गया था और आज भी इन्हें ऐसे ही रखा जा रहा है। ट्रीटमेंट फील्ड अलग होने के कारण मेडिकल एक्पर्ट्स ने दंत चिकित्सा को स्वीकार नहीं किया और इस कारण से इनका एक अलग फील्ड बनाना पड़ा। इसलिए यह भी एक कारण रहा है कि बीमा कंपनियों ने हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में डेंटल ट्रीटमेंट के खर्च को कवर नहीं किया। जब हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में इसे शामिल नहीं किया गया, तो इसके लिए डेंटल इन्शुरन्स नाम से अलग से बीमा प्लान पेस किया गया।
     
  • बीमाधारक व बीमाकर्ता दोनों की लागत कम करना -
    जैसा कि आपको पता है दंत चिकित्सा, स्वास्थ्य चिकित्सा से काफी अलग है। ऐसे में हेल्थ इन्शुरन्स प्लान बनाते समय उसे किसी एक फील्ड के लिए रखा जाता है, ताकि जितना हो सके उसे सस्ता बनाया जा सके और बीमाकर्ता कंपनी को भी नुकसान न हो। बीमाकर्ता कंपनी अपने नेटवर्क के अस्पतालों में आपको अच्छी सेवा प्रदान करने की कोशिश करती है, ऐसे में उन्हें सिर्फ एक ही क्षेत्र के अस्पतालों को अपने नेटवर्क में शामिल करना पड़ता है। ठीक उसी प्रकार डेंटल इन्शुरन्स करने वाली कंपनियां सिर्फ दंत अस्पतालों को ही अपने नेटवर्क में रखती हैं। एक ही फिल्ड के अस्पतालों को नेटवर्क में रखने पर आपको डिस्काउंट मिलने की संभावना भी अधिक हो जाती है।
     
  • दंत चिकित्सा की अलग से देखभाल करने की आवश्यकता -
    हेल्थ इन्शुरन्स को आमतौर पर अप्रत्याशित बीमारियों का सामना करने के लिए तैयार किया जाता है, ताकि अचानक से आने वाली बीमारी का इलाज आप बिना पैसे की चिंता किए करवा सकें। इसी प्रकार यदि किसी दुर्घटना के समय आपके दांतों को कोई हानि पहुंचती है तो हेल्थ इन्शुरन्स प्लान के तहत उसे कवरेज दी जाती है। इसके विपरीत यदि आपके दांतों को कोई अन्य बीमारी होती है, तो उसे हेल्थ इन्शुरन्स प्लान से कवरेज नहीं मिलती है। इसलिए डेंटल इन्शुरन्स में दी जाने वाली कवरेज में दांत संबंधी सभी बीमारियां और नियमित देखभाल पर होने वाले खर्च की कवरेज दी जाती है। सरल भाषा में कहा जाए तो दंत चिकित्सा का अपने आप में ही एक विस्तृत स्वरूप है, जिसके लिए अलग से इन्शुरन्स प्लान की आवश्यकता पड़ती है।

हम इस बात को स्वीकार करते हैं कि दंत चिकित्सा अन्य शारीरिक चिकित्सा से कुछ हद तक अलग है, लेकिन इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता है कि ये दोनों बहुत महत्वपूर्ण हैं। कुछ लोगों को लगता है कि दांतों की नियमित रूप से जांच करवाने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन यह बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। इतना ही नहीं बढ़ती महंगाई और मुंह की बढ़ती बीमारियों को देखते हुए दांतों के स्वास्थ्य के लिए अलग से बीमा करवाना भी बेहद जरूरी हो गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि दांत व मुंह को स्वस्थ न रखने पर डायबिटीज जैसे रोग होने का खतरा बढ़ सकता है।

(और पढ़ें - सबसे अच्छा हेल्थ इन्शुरन्स कौन सा है)

ऐसा नहीं है कि कोई भी कंपनी हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में दांतों पर कवरेज नहीं देती है। मार्केट में रोज नई-नई बीमा कंपनियां आने की वजह से उनमें प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है और ऐसे में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए उन्हें नए-नए फीचर शामिल करने पड़ते हैं। निम्न कुछ हेल्थ इन्शुरन्स प्लान हैं, जिनमें डेंटल ट्रीटमेंट के खर्च पर कवरेज दी जाती है -

  • व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा -
    इंडिविजुअल हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में बीमा कंपनी बीमाधारक को डेंटल ट्रीटमेंट पर कवरेज दे सकती है। कुछ कंपनियां इस प्लान में दंत चिकित्सा को एक अतिरिक्त बेनेफिट के रूप में देती है, जिसे प्राप्त करने के लिए बीमाधारक को अधिक प्रीमियम देना पड़ता है।
     
  • क्रिटिकल इलनेस इन्शरन्स -
    क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स वह बीमा प्लान है, जिसे कुछ विशेष प्रकार की बीमारियों के मेडिकल खर्च को कवर करने के लिए लिया जाता है। यदि आपको दांत संबंधी कोई गंभीर समस्या हो जाती है, तो उन्हें भी क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स के रूप में कवर किया जा सकता है।
     
  • परिवार के लिए स्वास्थ्य बीमा -
    फैमिली फ्लोटर हेल्थ इन्शुरन्स के अधिकतर प्लान मेडिक्लेम के कैशलेस बेनेफिट्स से जुड़े होते हैं, जिसमें डेंटल इन्शुरन्स की सुविधाएं भी दी जाती हैं। इस प्रकार बीमाधारक व उसके परिवार के सभी लोगों को बीमाकर्ता कंपनी द्वारा दंत चिकित्सा पर होने वाले खर्च पर भी कवरेज दी जा सकती है।
     
  • प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पॉलिसी -
    प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पॉलिसी में आमतौर पर नियमित रूप से शारीरिक जांच व डॉक्टर से परामर्श आदि पर कवरेज प्रदान की जाती है। इस प्लान के तहत भी आपको दांतों की नियमित जांच व डेंटिस्ट की फीस आदि पर कवरेज मिल सकती है।
     
  • व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा -
    अधिकतर मामलों में पर्सनल एक्सीडेंट कवर में भी डेंटल ट्रीटमेंट को कवर किया जाता है। ऐसा विशेष रूप से उन स्थितियों में होता है, जब किसी दुर्घटना के कारण आपके दांतों में भी क्षति हो जाती है। हालांकि, यदि किसी दुर्घटना के कारण दांतों को भी नुकसान पहुंचता है, तो सामान्य हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में भी उसे कवर किया जा सकता है।

अपने मुंह व दांतों की सफाई रखना शरीर को स्वस्थ रखने के लिए उठाया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण कदम है। इतना ही नहीं सफाई के साथ-साथ दांतों के डॉक्टर के पास नियमित रूप से जाकर जांच करवाना बेहद जरूरी हो गया है, इसलिए दांतों का अलग से इन्शुरन्स करवा लेना ही समझदारी है।

(और पढ़ें - आपके लिए myUpchar बीमा प्लस पॉलिसी क्यों है बेहतर)

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