क्या आप हैं कि भारत में एक बड़ी आबादी सांस संबंधी बीमारियों से ग्रस्त हैं? देखा गया है कि बहुत ही कम लोग इस बारे में जानते हैं। आपको बता दें दुनियाभर में सबसे ज्यादा भारत में ही क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) के मामले पाए जाते हैं और अस्थमा के मामलों में यह दूसरे नंबर पर है। भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण सांस संबंधी बीमारियां लगातार पैर पसार रही हैं। ऐसी स्थितियों में जरूरी है पूरी तरह से सावधानी बरतना और समय-समय पर डॉक्टर से जांच करवाते रहना। हालांकि, बढ़ती महंगाई के कारण यह भी हर किसी के लिए संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में सिर्फ एक ही विकल्प बचता है, वह है एक उचित हेल्थ इन्शुरन्स प्लान

भारत के कुछ हिस्सों में अत्यधिक प्रदूषण के कारण वहां के लोगों को समय रहते ही एक अच्छा इन्शुरन्स प्लान खरीदने की सलाह दी जाती है, जिसमें सांस संबंधी बीमारियों को कवर किया जा सके। इस लेख में बताया गया है कि जिन लोगों को सांस संबंधी बीमारी हैं, उन्हें अपने लिए स्वास्थ्य बीमा लेते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

(और पढ़ें - ग्रुप मेडिकल इन्शुरन्स क्या है)

  1. सांस की बीमारी क्या है
  2. क्यों जरूरी है सांस की बीमारियों के लिए हेल्थ इन्शुरन्स प्लान
  3. सांस की बीमारियों के लिए सही स्वास्थ्य बीमा चुनते समय किन बातों का ध्यान रखें
सांस की बीमारियों के लिए हेल्थ इन्शुरन्स के डॉक्टर

सबसे पहले आपको सांस संबंधी बीमारियों के बारे में जानना जरूरी है, ताकि आप उनके अनुसार उचित बीमा योजना खरीद सकें। फेफड़े श्वसन प्रणाली को प्रभावित करने वाले रोगों को श्वसन तंत्र रोग (रेस्पिरेटरी डिजीज) कहा जाता है और आम बोल चाल की भाषा में इसे सांस की बीमारी कहा जाता है। फेफड़ों के अलावा हमारे शरीर में कई ऐसे अंग हैं, जो श्वसन क्रिया का हिस्सा हैं जैसे मुंह, नाक, साइनस, फेरिंक्स (ग्रसनी), श्वास नली और ब्रोंकायल ट्यूब आदि।

श्वसन प्रणाली को प्रभावित करने वाले एसे कई रोग हैं, जिन्हें सांस की बीमारी कहा जाता है इनमें मुख्य रूप से अस्थमा, सीओपीडी, पल्मोनरी फाइब्रोसिस, निमोनिया और लंग कैंसरसंक्रमण आदि शामिल हैं।

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जैसा कि आप जानते हैं मेडिकल क्षेत्र में बढ़ती टेक्नॉलोजी के साथ-साथ महंगाई भी काफी बढ़ी है। ऐसे में अस्पताल में जाकर इलाज कराना एक आम आदमी के बस से बाहर हो गया है। वहीं बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण लगातार सांस संबंधी बीमारियों का खतरा भी काफी बढ़ा है। ऐसे में इन स्थितियों से निपटने के लिए एक ऐसा हेल्थ इन्शुरन्स प्लान जरूरी है, जो सांस संबंधी सभी बीमारियों के इलाज पर आपको कवरेज दे।

यदि सरल शब्दों में कहा जाए तो सांस संबंधी बीमारियों के लिए हेल्थ इन्शुरन्स प्लान इसलिए जरूरी है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर आप निश्चिंत होकर अपना इलाज करा सकें।

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भारत में ऐसी कई कंपनियां हैं, जो हेल्थ इन्शुरन्स सेवाएं प्रदान करती हैं। इन सभी कंपनियों के अलग-अलग प्लान हैं, जिन्हें अपनी आवश्यकता के अनुसार आप प्लान खरीद सकते हैं। लेकिन कई कंपनियां और उनके अलग-अलग प्लान होने के कारण व्यक्ति अक्सर उलझन में पड़ जाता है और यह तय नहीं कर पाता है कि उसके लिए सबसे उचित प्लान कौन सा है। नीचे आपको कुछ टिप्स दिए गए हैं, जिन्हें पढ़ कर आप जान सकते हैं कि श्वसन रोगों के लिए उचित स्वास्थ्य बीमा योजना कैसे चुनें -

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कम प्रीमियम

प्रीमियम वह राशि जो बीमित व्यक्ति द्वारा एक निश्चित अवधि (मासिक या सालाना) के अंतराल में बीमा कंपनी को भुगतान की जाती है। किसी भी बीमा योजना को खरीदने से पहले उसके प्रीमियम पर नजर डालना जरूरी है। प्रीमियम जितना कम होगा आपकी जेब पर उतना ही कम बोझ पड़ेगा। यदि आप सांस की बीमारियों पर कवरेज प्राप्त करने के लिए हेल्थ इन्शुरन्स प्लान चुन रहे हैं, तो ऐसा प्लान चुनें जिसमें आपको ज्यादा से ज्यादा कवरेज मिले और कम से कम प्रीमियम देना पड़े।

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अधिकतम कवरेज

प्रीमियम की तरह कवरेज भी हेल्थ इन्शुरन्स का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आपकी स्वास्थ्य बीमा योजना जितनी कवरेज प्रदान करती है, उतना ही अधिक आपको लाभ मिलता है। उदाहरण के रूप में किसी भी बीमारी के इलाज पर होने वाला खर्च जैसे हॉस्पिटलाइजेशन, दवाएं, टेस्ट और डॉक्टर की फीस आदि पर होने वाले खर्च के लिए बीमा कंपनी जो पैसा देती है, वह कवरेज पर ही निर्भर करता है। इसलिए कवरेज की जांच करें और वही बीमा योजना चुनें जो आपको अधिक कवरेज प्रदान करती है।

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इनक्लूजन व एक्सक्लूजन की जानकारी

सिर्फ सांस की बीमारियों के लिए ही नहीं कोई भी बीमा योजना खरीदने से पहले यह जान लें कि इस योजना में क्या कवर किया जा रहा है और क्या नहीं। ऐसा न करना आपको बाद में परेशानी में डाल सकता है। ऐसा इसलिए अक्सर लोग अपने व परिवार के लिए हेल्थ इन्शुरन्स प्लान खरीदने से पहले उसके इनक्लूजन और एक्सक्लूजन के बारे में नहीं जानते हैं और फिर बाद में उन्हें कुछ बीमारियों के इलाज पर होने वाला सारा खर्च अपनी जेब से ही भुगतान करना पड़ता है। यदि आप सांस संबंधी बीमारियों पर कवरेज प्राप्त करने के लिए बीमा योजना खरीद रहे हैं, तो जांच कर लें कि इसमें सभी बीमारियों को कवर किया गया है या नहीं।

कम से कम वेटिंग पीरियड

जब आप कोई भी हेल्थ इन्शुरन्स प्लान खरीदते हैं, तो आपको शुरुआती कुछ दिनों तक एक प्रतीक्षा अवधि में रखा जाता है। कुछ स्वास्थ्य बीमा प्रदाता कंपनियां लंबे समय का वेटिंग पीरियड लागू करती हैं, जिस कारण से आपको बीमा योजनाों का लाभ उठाने के लिए लंबे समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। यदि आप सांस संबंधी बीमारियों पर कवरेज के लिए स्वास्थ्य बीमा खरीद रहे हैं, तो ऐसा प्लान चुनें जिसमें कम से कम समय का वेटिंग पीरियड हो।

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प्री एग्जिस्टिंग डिजीज पर वेटिंग पीरियड

यह भी संभव है कि आपको या परिवार में किसी को पहले से ही कोई सांस संबंधी बीमारी हो, ऐसे में आपको ध्यान रखना है कि जो प्लान आप लेने जा रहे हैं उसमें प्री-एग्जिस्टिंग डिजीज पर कवरेज के लिए वेटिंग पीरियड कितना है। पहले से मौजूद बीमारियों को हेल्थ इन्शुरन्स में प्री-एग्जिस्टिंग डिजीज की श्रेणी में रखा जाता है, जिस पर कवरेज पाने के लिए अलग से वेटिंग पीरियड पूरा करना पड़ता है। आपको इन्शुरन्स प्लान खरीदने से पहले यह देखना है कि प्री-एग्जिस्टिंग डिजीज पर कितने समय बाद कवरेज मिलती है। ऐसे में जो भी बीमा योजना आपको पहले से मौजूद बीमारियों पर कम से कम समय का वेटिंग पीरियड दे रही है, आप बेझिझक उस प्लान को चुन सकते हैं।

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किस आयु वर्ग को कवर किया जा रहा है

कुछ स्वास्थ्य बीमा कंपनियां अलग-अलग आयु के आधार पर कवरेज प्रदान करती हैं। यदि हम सांस की बीमारियों की बात करें को अधिक आयु वाले व्यक्तियों को ही अक्सर सांस संबंधी समस्याएं होती हैं। कुछ हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां अधिकतम 60 वर्ष की आयु तक ही कवरेज प्रदान करती हैं, जबकि अन्य कंपनियें में आयु सीमा इससे अधिक हो सकती है। जब आप अपने या परिवार के लिए हेल्थ इन्शुरन्स प्लान खरीदने जाएं तो वह प्लान चुनें जिसमें अधिकतम आयु सीमा ज्यादा हो, ताकि आपके परिवार में बुजुर्ग (यदि हैं) भी इस योजना का लाभ उठा सकें।

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