'जिंदगी और मौत ऊपर वाले के हाथ में है जांहपनाह। उसे न तो आप बदल सकते हैं न ही मैं' फिल्म 'आनंद' का यह डायलॉग सिर्फ एक डायलॉग नहीं बल्कि सच्चाई है। मौत कभी भी दरवाजा खटखटाकर नहीं आती है, न ही कोई व्यक्ति पहले से जान सकता है कि उसे मौत कब आएगी। यही जीवन का आनंद भी है। जब तक हम जीवित होते हैं, भविष्य के लिए कुछ न कुछ तैयारियां करते रहते हैं। बीमारी या एक्सीडेंट की हालत में उचित इलाज के लिए हम सब हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी लेते हैं, ताकि पैसों की किल्लत के कारण मौत गले न लगा ले। ऐसा भी नहीं है कि आपके पास हेल्थ इन्शुरन्स प्लान है तो मौत नहीं आएगी। ऐसे में प्रश्न ये उठता है कि यदि प्रपोजर या किसी अन्य बीमित व्यक्ति की मौत हो जाए तो फिर हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी का क्या होगा? चलिए इस आर्टिकल में इसी विषय को समझते हैं -

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  1. क्या हेल्थ इन्शुरन्स में डेथ कवर होता है - Is death covered in health insurance in Hindi?
  2. हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी कितने तरह की होती हैं - Type of Health Insurance in Hindi
  3. बीमाधारक की मृत्यु होने पर पॉलिसी का क्या होगा - What happens after the death of an insured member in Hindi?
  4. प्रपोजर की मृत्यु हो जाए तो पॉलिसी का क्या होगा - What happens when the proposer of a policy dies in Hindi?
  5. प्रपोजर सहित एक से ज्यादा सदस्यों की अस्पताल में मौत होने पर - If Proposer and any other member dies in Hospital in Hindi

हेल्थ इन्शुरन्स किसी भी बीमारी या एक्सीडेंट की स्थिति में अस्पताल के खर्चों से राहत देता है। इसमें किसी भी तरह के सर्वाइवल या डेथ बेनिफिट नहीं मिलता। सर्वाइवल या डेथ बेनिफिट जीवन बीमा और टर्म इन्शुरन्स से जुड़े हुए शब्द हैं। जीवन बीमा में सर्वाइवल या डेथ बेनिफिट दोनों मिलते हैं, जबकि टर्म इन्शुरन्स में डेथ बेनिफिट मिलता है।

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आमतौर पर हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी दो तरह की होती हैं। इंडिविजुअल हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी और फैमिली हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी। इंडिविजुअल हेल्थ पॉलिसी का मतलब स्पष्ट है कि ऐसी पॉलिसी में सिर्फ एक व्यक्ति बीमित होता है। कोई व्यक्ति सिर्फ अपने लिए यह पॉलिसी ले सकता है या परिवार का कोई सदस्य अपने ही परिवार के किसी एक व्यक्ति के लिए इंडिविजुअल हेल्थ पॉलिसी लेता है। इसमें पूरा सम-इनश्योर्ड एक व्यक्ति के लिए उपलब्ध रहता है।

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फैमिली हेल्थ इन्शुरन्स का मतलब पूरे परिवार की एक पॉलिसी से है। फैमिली हेल्थ इन्शुरन्स दो प्रकार की होती है - फैमिली इंडिविजुअल पॉलिसी और फैमिली फ्लोटर पॉलिसी। फैमिली इंडिविजुअल पॉलिसी में पूरा परिवार एक ही पॉलिसी के तहत कवर होता है, लेकिन हर किसी का अपना एक अलग सम-इनश्योर्ड होता है। उदाहरण के लिए किसी परिवार में चार लोग हैं और वह प्रत्येक के लिए 5 लाख का सम-इनश्योर्ड लेते हैं तो कुल मिलाकर 20 लाख का सम-इनश्योर्ड हो जाता है, लेकिन कोई भी एक व्यक्ति सिर्फ पांच लाख ही क्लेम कर सकता है। दूसरी तरफ फैमिली फ्लोटर में पूरे परिवार को एक ही सम-इनश्योर्ड मिलता है। उदाहरण के लिए यदि आप 10 लाख का सम-इनश्योर्ड लेते हैं तो परिवार का कोई भी सदस्य पूरे 10 लाख तक का क्लेम कर सकता है।

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यदि फैमिली हेल्थ इन्शुरन्स में मौजूद किसी बीमाधारक की मृत्यु हो जाती है तो प्रपोजर की जिम्मेदारी है कि वह इन्शुरन्स कंपनी को इस बारे में जानकारी दे। इसके बाद इन्शुरन्स कंपनी मृतक व्यक्ति का नाम हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी से हटा देगी और नियम व शर्तों के मुताबिक जितना भी प्रीमियम बचता है, उसे रिफंड कर दिया जाएगा। परिवार का एक सदस्य कम हो जाने के कारण रिन्युअल पर आपका प्रीमियम भी कम हो सकता है। जिसकी मृत्यु हुई है यदि उसकी उम्र पॉलिसी में मौजूद लोगों में से सबसे ज्यादा थी तो रिन्युअल प्रीमियम में काफी फर्क पड़ सकता है।

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प्रपोजर या प्राइमरी इनश्योर्ड की मृत्यु हो जाने पर परिवार की जिम्मेदारी है कि वह इन्शुरन्स कंपनी को इस संबंध में जानकारी दें। इन्शुरन्स कंपनी को यह जानकारी देना बेहद जरूरी है, क्योंकि पहले प्रपोजर की मृत्यु के बाद हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी में प्रपोजर का नाम बदलना जरूरी होता है। ऐसी स्थिति में नए प्रपोजर के नाम से एक नया फॉर्म भरकर जमा करना होगा। इस तरह नया फॉर्म लेकर इन्शुरन्स कंपनी प्रपोजर बदल देती है और परिवार के बाकी सदस्यों को पॉलिसी के लाभ पहले की तरह मिलते रहते हैं। कंपनी के नियम और शर्तों के मुताबिक अतिरिक्त प्रीमियम को रिफंड भी किया जा सकता है। इसके अलावा एक सदस्य कम हो जाने के कारण आपका रिन्युअल प्रीमियम भी कम हो सकता है।

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यदि परिवार के एक से ज्यादा सदस्यों की अस्पताल में मौत हो जाती है और इसमें प्रोपजर भी शामिल है तो रिइम्बर्समेंट के मामले में कंपनी नॉमिनी को क्लेम की राशि देती है। नॉमिनी हर हेल्थ इन्शुरन्स में जरूरी होता है। यदि अस्पताल में मौत हुई है और वह अस्पताल कैशलेस नेटवर्क में है तो इलाज के दौरान हुआ पूरा खर्च कंपनी सीधे अस्पताल के साथ सेटल कर लेती है। यदि किसी व्यक्ति ने हेल्थ इन्शुरन्स में नॉमिनी घोषित नहीं किया है तो ऐसे में इन्शुरन्स कंपनी रिइम्बर्समेंट क्लेम ट्रांसफर करने से पहले परिवार से सक्सेशन सर्टिफिकेट की मांग करेगी।

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