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फर्टिलिटी इंडस्ट्री में हो रही बढ़ोतरी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने इसके प्रोटोकॉल को स्टैंडर्डाइज (मानकीकरण) करने का इरादा कर लिया है। इसी के चलते वह लोकसभा में असिस्टेड रीप्रॉडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेग्युलेशन) बिल, 2020 (एआरटी बिल) लेकर आई है। इस बिल को सोमवार को मॉनसून सत्र के पहले दिन संसद में पेश कर दिया गया। इस विधेयक के तहत देशभर में फर्टिलिटी ट्रीटमेंट करने वाले क्लिनिकों और बैंकों को अपना रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। यह पंजीकरण एक नेशनल रजिस्टरिंग अथॉरिटी के जरिये किया जाएगा। फर्टिलिटी से जुड़े इन क्लिनिकों और बैंकों को समय-समय पर यह जानकारी देने होगी कि उनके यहां विशेष अवधि के दौरान कितने फर्टिलिटी प्रोसीजर के कितने मामले आए और उनके ट्रीटमेंट किए गए। विधेयक में फर्टिलिटी के लिए पुरुषों और महिलाओं की आयु भी निर्धारित की गई है।

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मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, विवाह के योग्य कोई भी महिला, जिसकी आयु 50 वर्ष से कम हो और विवाह के योग्य कोई भी पुरुष जिसकी आयु 55 वर्ष से कम हो, वह असिस्टेड रीप्रॉडक्टिव टेक्नोलॉजी या सहायक प्रजनन तकनीक के तहत अपनी सेवाएं दे सकता है। इस बारे में स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि आयु को लेकर सीमा इसलिए बांधी गई, क्योंकि ऐसी कई रिपोर्टें जानने में आई हैं, जिनमें ज्यादा उम्र की महिलाओं के फर्टिलिटी प्रोसीजर में शामिल होने की बात कही गई है। चूंकि ज्यादा बड़ी उम्र की महिलाओं के लिए फर्टिलिटी ट्रीटमेंट की सलाह नहीं दी जाती, इसीलिए सरकार को इस प्रक्रिया को अंजाम देने वाले क्लिनिकों और बैंकों के लिए आयु सीमा की शर्त विधेयक में शामिल करनी पड़ी। बता दें कि मौजूदा नियमों के तहत केवल वही महिला अपना एग डोनेट कर सकती है, जिसके बच्चे की उम्र कम से कम तीन साल हो। पूरे जीवनकाल में कोई महिला यह काम केवल एक बार कर सकती है।

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विधेयक के सामने आने के बाद फर्टिलिटी क्लिनिकों और बैंकों को सहायक प्रजनन तकनीक की प्रक्रिया को सख्ती के साथ फॉलो करते हुए लागू करना होगा। बिल के प्रभाव में ऐसे क्लिनिकों के लिए नेशनल और स्टेट बोर्ड्स का गठन किया जाएगा, जो इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि ये क्लिनिक या बैंक फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के प्रोसेस को तमाम नियमों के साथ फॉलो करें। विधेयक के कानून बनने के बाद एक राष्ट्रीय पंजीकरण प्राधिकरण की व्यवस्था की जाएगी। सभी क्लिनिकों और बैंकों को इसके तहत 60 दिन के अंदर पंजीकरण कराना होगा। नियमों का उल्लंघन करते हुए लिंग के आधार पर फर्टिलिटी ट्रीटमेंट करने वाले क्लिनिक या बैंकों का रजिस्ट्रेशन कैंसल किया जा सकता है और उसके मालिकों को पांच से दस साल तक की सजा हो सकती है। साथ ही दस से 25 लाख रुपये तक का जुर्माना भी देना पड़ सकता है।

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