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वीर्य में मौजूद शुक्राणु यानी स्पर्म की गतिविधि किस तरह की होती है, इसे लेकर वैज्ञानिकों ने नया और बड़ा दावा किया है। यह स्पर्म की मूवमेंट को लेकर अभी तक स्वीकार्य माने जाते रहे इस तथ्य को पूरी तरह से खारिज करता है कि शुक्राणु के आगे बढ़ने की चाल किसी सांप की तरह होती है। बताया जाता है कि करीब 300 साल पहले प्रसिद्ध डच साइंटिस्ट एंटनी वैन लीवनहुक ने माइक्रोस्कोप की मदद से यह बताया था कि मानव स्पर्म के पिछले हिस्से में पूंछ होती है, जो मूव होते समय किसी सांप की तरह हिलती दिखती है। लेकिन नई स्टडी इस जानकारी को खारिज करती है।

नए शोध से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि स्पर्म की मूवमेंट असल में किसी पेंचकस के चलने जैसे होती है। इसे ऐसे समझें कि वाइन की बोतल पर लगे ढक्कन को खोलने के लिए जिस तरह कॉर्कस्क्रू को घुमाया जाता है, उसी तरह मानव स्पर्म भी मूव करता है। यूनाइटेड किंगडम स्थित ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ और ताजा शोध के लेखक हर्म्स गेडला कहते हैं, 'हमने यह जाना है कि अगर ह्यूमन स्पर्म मूव करता है तो इसकी चाल किसी कॉर्कस्क्रू जैसी होती है।'

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लीवनहुक ने 17वीं शताब्दी में स्पर्म की मूवमेंट को लेकर जो व्याख्या दी थी, उसके हिसाब से 2डी माइक्रोस्कोप से देखने पर शुक्राणु एक तरह का इलूजन या उलझाव पैदा करते हैं। इसमें स्पर्म से जुड़ी पूंछ दोनों तरफ लगातार बराबर (साइड-टू-साइड) मूव करती है, जैसे ऊदबिलाव पानी में मूव करता है। नए शोध में वैज्ञानिकों ने अत्याधुनिक 3डी माइक्रोस्कोपी और गणितीय विश्लेषण की मदद से इस मूवमेंट का रीकन्स्ट्रक्शन किया है। उन्होंने स्पर्म सैंपल की मूवमेंट को कैप्चर करने के लिए प्रति सेकंड 55 हजार से भी ज्यादा फ्रेम लेने की क्षमता वाले हाईस्पीड कैमरा का इस्तेमाल किया। इस काम में पीजोइलेक्ट्रिक (दाब-विद्युतिकीय) डिवाइस और माइक्रोस्कोप स्टेज का इस्तेमाल भी किया गया ताकि सैंपल को बेहद तेज दर के साथ ऊपर-नीचे मूव किया जा सके। इनकी मदद से शोधकर्ता 3डी में स्पर्म को पूरी तरह मूव करा पाए।

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इसके बाद जांच में पता चला कि असल में स्पर्म की पूंछ काफी टेढ़ी-मेढ़ी है और केवल एक तरफ ही हरकत (विगलिंग) करती है। इस आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि स्पर्म के पूंछ की यह एकतरफा मूवमेंट उसे आगे की ओर ले जाती है, लेकिन तैरने की तरह नहीं, बल्कि घुमावदार तरीके से। इस तरह स्पर्म ने आगे बढ़ने की एक चतुराई भरी शैली विकसित की है। हालांकि यह थोड़ी जटिल भी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि जिस समय स्पर्म आगे बढ़ रहा होता है, उसी समय वह स्पिन (घूमना) भी हो रहा होता है। भौतिक विज्ञान में इसे प्रीसेशन या अग्रगमन कहते हैं।

बहरहाल, मानव शुक्राणु के संबंध में यह नई खोज और इसका पता लगाने में इस्तेमाल हुई 3डी माइक्रोस्कोप तकनीक ह्यूमन रीप्रोडक्शन से जुड़े विज्ञान के लिए और नई खोजें करने के रास्ते खोल सकती है। इस तकनीक और स्पर्म मूवमेंट को लेकर हुई नई खोज की जानकारी साइंस एडवांसेज नामक पत्रिका में प्रकाशित हो चुकी है।

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