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पृथ्वी के बढ़ते तापमान को लेकर जहां दुनियाभर के वैज्ञानिकों के माथे पर चिंता की लकीरें उकर आई हैं, वहीं हमारे शरीर के घटते तापमान ने भी मन-मस्तिष्क में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल अभी तक हमारे शरीर का सामान्य औसत तापमान 98.6 डिग्री फारेनहाइट माना जाता है। इस तापमान के बढ़ने पर अक्सर बुखार की समस्या आती थी, लेकिन अब हमारे शरीर का तापमान करीब एक डिग्री कम होकर 97.9 डिग्री फारेनहाइट हो गया है।

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में मेडिसिन की प्रोफेसर और स्टडी की सीनियर ऑथर डॉ जूली पार्सोनेट का कहना है कि जैसे-जैसे हम लोग समय के साथ आगे की ओर बढ़ रहे हैं वैसे-वैसे हमारे शरीर का सामान्य तापमान (98.6 डिग्री फारेनहाइट) कम हो रहा है।

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क्या कहती है रिपोर्ट?
गौरतलब है कि साल 1851 में जर्मन डॉक्टरों ने शरीर का सामान्य तामपान (98.6 डिग्री फारेनहाइट) स्थापित किया था, लेकिन 35 हजार ब्रिटिश लोगों पर किए गए ताजा शोध से पता चला है कि उनका औसत तापमान 97.9 डिग्री फारेनहाइट हो गया है।

ई-लाइफ साइंस में प्रकाशित पार्सोनेट की इस रिसर्च के मुताबिक शोधकर्ताओं ने पाया है कि 1851 से लेकर अब तक शरीर के तापमान में हुआ यह बदलाव कोई गड़बड़ नहीं, बल्कि यह एक ऐतिहासिक पैटर्न को बताता है। इससे पता चलता है कि यह पिछले 200 सालों में जलवायु परिवर्तन का परिणाम है, जिसने हमारे शरीर को भी प्रभावित किया है।

कैसे की गई रिसर्च?
शोधकर्ताओं ने शरीर के घटते तामपान को जांचने के लिए तीन डेटाबेस पर शोध किया। इसके लिए सबसे पहले, साल 1862 से लेकर 1930, 1971 से लेकर 1975 और साल 2007 से लेकर 2017 के आंकड़ों को देखा गया, जिसमें 6 लाख 77 हजार 423 लोगों के शारीरिक तापमान से जुड़े आंकड़े शामिल थे।

रिसर्च के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि साल 2000 में जन्मे पुरुषों के शरीर का तापमान साल 1800 में जन्मे पुरुषों की तुलना में औसतन 1.06 डिग्री फारेनहाइट कम था।

इसी प्रकार से, महिलाओं से जुड़े आंकड़ों पर स्टडी करते हुए शोधकर्ताओं ने समान तरीका अपनाया और पाया कि साल 2000 में जन्मी महिलाओं के शरीर का तापमान साल 1890 में जन्मी महिलाओं की तुलना में 0.58 डिग्री फारेनहाइट कम था। इसका मतलब शरीर का तापमान हर दशक में 0.05 डिग्री फारेनहाइट कम हो गया।

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तो फिर शरीर का सामान्य तापमान क्या है?
इन आंकड़ों के आधार पर देखा जाए तो शरीर के तापमान को समझाना थोड़ा कठिन है, क्योंकि यह शारीरिक तापमान अलग-अलग समय पर अलग उम्र के व्यक्ति में थोड़ा अलग हो सकता है। प्रोफेसर और स्टडी की सीनियर ऑथर डॉ जूली पार्सोनेट बताती हैं कि शरीर का सामान्य तापमान दोपहर की तुलना में सुबह में लगभग आधा डिग्री कम हो सकता है। साथ ही बुजुर्गों में यह काफी कम हो सकता है।

इसके अलावा व्यक्ति के शरीर का वजन और उसके कद पर सामान्य तापमान निर्भर करता है। अपने अनुभव के अनुसार डॉक्टर जूली पार्सोनेट कहती हैं कि कम से कम 75 प्रतिशत मामलों में शरीर का सामान्य तापमान 98.6 डिग्री फारेनहाइट से कम हो सकता है।

क्यों कम हो रहा शरीर का तापमान?
अमेरिका की साउथ कैरोलिना यूनिवर्सिटी में एक्सरसाइज साइंस की एसोसिएट प्रोफेसर सुसैन येरगिन ने हाइपर और हाइपोथर्मिया को पहचानने के लिए सभी प्रकार के तापमान उपकरणों का परीक्षण किया, लेकिन यह रेक्टल (मलाशय) के तापमान की तुलना में गलत थे।

प्रोफेसर येरगिन बताती हैं कि डॉक्टरों को हर व्यक्ति के यूनिक नोर्मोथर्मिक बॉडी टेंपरेचर पर विचार करना चाहिए। दरअसल कुछ दवाएं हैं जो व्यक्ति के नियमित सेट प्वाइंट टेंपरेचर पर असर डाल सकती हैं। साथ ही घर से बाहर का गर्म और ठंडा तापमान भी व्यक्ति के शरीर के तापमान को एक समय पर प्रभावित कर सकता है।

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दूसरी तरफ पार्सोनेट के मुताबिक शरीर के तापमान में गिरावट के अन्य कारण भी सकते हैं। जैसे- मौजूदा समय में ज्यादातर लोग कम ऊर्जा की खपत करते हैं। इसके साथ पहले की तुलना में कम चयापचय दर का होना भी शरीर के तापमान को कम करने का कारण हो सकता है।

वहीं, myUpchar से जुड़ी डॉक्टर फतमा का कहना है कि हमारे शरीर में होने वाले बदलाव हीमोस्टैसिस (Homeostasis) की वजह से ऐसा होता है। मतलब जैसे-जैसे जलवायु में बदलाव होता है, हमारे शरीर में भी उसी हिसाब से अंदरूनी परिवर्तन आते हैं और बॉडी टेंपरेचर में यह कमी उसी का हिस्सा है, जिसके कोई फायदे या नुकसान नहीं हो सकते। इस लिहाज से अगर अब 97.9 डिग्री फारेनहाइट से ऊपर बॉडी टेंपरेचर जाता है तो उस स्थिति में इसे बुखार माना जाना चाहिए।

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