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गर्भवती महिला की नॉर्मल डिलिवरी या प्रसव के दौरान दर्दनिवारक विकल्प के तौर पर नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) जिसे साधारण भाषा में लाफिंग गैस भी कहते हैं का इस्तेमाल मां और नवजात शिशु दोनों के लिए सुरक्षित माना जाता है। हाल ही में हुई एक नई स्टडी में यह बात सामने आयी है। अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो कॉलेज ऑफ नर्सिंग और ऐन्शुट्स मेडिकल कैंपस स्थित स्कूल ऑफ मेडिसिन डिपार्टमेंट ऑफ ऐनेस्थिसिओलॉजी के अनुसंधानकर्ताओं की तरफ से की गई इस रिसर्च को जर्नल ऑफ मिडवाइफरी एंड विमिन्स हेल्थ में प्रकाशित किया गया है।

इस स्टडी में 463 महिलाओं पर सर्वे किया गया जिन्होंने लेबर के दौरान नाइट्रस ऑक्साइड यानी लाफिंग गैस का इस्तेमाल किया था। यह अमेरिका में हुई अब तक की सबसे बड़ी और अपने तरह की पहली स्टडी है जिसमें लेबर के दौरान N2O के साइड इफेक्ट्स के बारे में भी बताया गया है। साथ ही साथ उन कारणों के बारे में भी जिसकी वजह से लेबर में गर्भवती महिला को N2O से दूसरे दर्द निवारक तरीकों का इस्तेमाल करना पड़ा। वे महिलाएं जिन्होंने शुरुआती दर्दनिवारक तकनीक के तौर पर N2O का इस्तेमाल करना शुरू किया उनमें से करीब 31 प्रतिशत ने पूरे लेबर के दौरान सिर्फ N2O का इस्तेमाल किया और 69 प्रतिशत महिलाएं N2O से दूसरे दर्दनिवारक तरीकों जैसे- एपिड्यूरल या ओपिओएड पर परिवर्तित हो गईं।      

स्टडी की लीड ऑथर प्रिससिला नोडिन कहती हैं, अमेरिका में लेबर के दौरान दर्दनिवारक दवाई के तौर पर नाइट्रस ऑक्साइड उपयोगी और सुरक्षित विकल्प है। लेबर के दौरान कई मांओं को तो दर्दनिवारक के तौर पर सिर्फ इसी की जरूरत होती है। N2O को सांस द्वारा शरीर के अंदर लेने पर क्या-क्या परिवर्तन हो सकते हैं इसे समझते हुए, दर्दनिवारक दवा के दूसरे प्रकार भी जो मौजूद हैं उन दर्दनिवारक विकल्पों के बारे में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी लेबर के दौरान गर्भवती महिला के साथ चर्चा कर सकते हैं। 

लेबर के दौरान 96 प्रतिशत मौकों पर N2O की जगह दूसरे वैकल्पिक थेरेपी का इस्तेमाल करने का कारण ये था कि N2O से दर्द को दूर करने में पर्याप्त मदद नहीं मिल रही थी। जब लेबर को ऑक्सिटोसिन की मदद से बढ़ाया गया और जब लेबर पूरी तरह से उभर गया उस वक्त N2O से परिवर्तित होने की आशंका करीब 3 गुना बढ़ गई। वैसी महिलाएं जिनके पास एपिड्यूरल का विकल्प नहीं है या जो एपिड्यूरल इस्तेमाल नहीं करना चाहतीं, उन्हें दर्द मैनेज करने के विकल्प के तौर पर नाइट्रस ऑक्साइड दिया जा सकता है। साथ ही N2O बहु उपयोगी और परिवर्तनशील है इसलिए इसका इस्तेमाल लेबर के किसी भी स्टेज में किया जा सकता है। इसे किसी भी समय रोका जा सकता है, कभी भी शुरू किया जा सकता है या किसी भी समय किसी और दर्द निवारक विकल्प पर स्विच किया जा सकता है। 

अमेरिका में हर साल करीब 40 लाख महिलाएं बच्चे को जन्म देती हैं और बहुत सी महिलाओं के लिए लेबर के दर्द से जूझना चिंता का विषय होता है। ऐसे में लेबर के दौरान दर्द को मैनेज करने के टूल के तौर पर इस वक्त अमेरिका में एपिड्यूरल्स और स्पाइनल ब्लॉक्स का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। इन दोनों के अलावा जो मुख्य विकल्प मौजूद है वह है- सिस्टेमिक ओपिऑयड्स लेकिन इसके इस्तेमाल से मां और बच्चे दोनों को साइड इफेक्ट्स हो सकता है। 

कई विकासशील देशों में लंबे समय से दर्दनिवारक के तौर पर N2O का इस्तेमाल हो रहा है और अब इसे अमेरिका में भी लेबर के दौरान दर्दनिवारक विकल्प के तौर पर दोबारा प्रस्तावित किया गया है और अब अमेरिका में भी इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। 

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