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सर्दी के मौसम में गर्मी से जुड़ी एक खबर आई है, जो गर्भवती महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है। एक नई अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक, गर्मी में चलने वाली लहर प्रेग्नेंसी के लिए खतरनाक हो सकती है। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (बीएमजे) में प्रकाशित इस अध्ययन रिपोर्ट में 24 देशों में हुई 70 स्टडीज को शामिल किया गया था। इसके विश्लेषण में पता चला है कि हरेक डिग्री सेल्सियस (या 1.8 डिग्री फॉरेनहाइट) के बढ़ते तापमान के चलते समय से पहले बच्चा होने और मृत जन्म का खतरा पांच-पांच प्रतिशत बढ़ जाता है। दि न्यूयॉर्क टाइम्स (एनवाईटी) में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने प्रीटर्म बर्थ और स्टिलबर्थ के बढ़ते तापमान से संबंध का पता लगाया है।

अध्ययन की मानें तो प्रेग्नेंसी के लिए खतरनाक गर्म लहर होने का मतलब दो दिन या उससे ज्यादा समय में असामान्य उच्च तापमान से है। अगर ऐसे माहौल में गर्भवती महिला को उल्लिखित या उससे ज्यादा समय तक रहना पड़े तो उसके बच्चे के जन्म से पहले ही पैदा होने का अंदेशा 16 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। वहीं, मृत जन्म का खतरा 46 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। इसके अलावा, प्रेग्नेंसी के अंतिम महीने में गर्म तापमान या हीट वेव के इस तरह के प्रभाव सबसे अधिक देखने को मिल सकते हैं। हालांकि अध्ययन में यह भी कहा गया है कि होने वाले बच्चे के वजन पर हीट वेव का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

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पिछले अध्ययनों में शोधकर्ताओं ने कहा है कि दिन के समय तापमान में होने वाले बदलावों के साथ-साथ रात में उच्च तापमान होने के कारण प्रीटर्म बर्थ का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, नया अध्ययन मुख्यतः गर्म लहर पर फोकस करता है और बच्चे पर पड़ने वाले प्रभावों को रेखांकित करता है। इस बारे में अध्ययन के प्रमुख लेखक और दक्षिण अफ्रीका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ विटवॉटर्सरैंड के वैज्ञानिक मैथ्यू फ्रांसिस चेरिश कहते हैं, 'गर्म लहर स्वास्थ्य के लिए पूर्ण रूप से खतरनाक है। ऐसा नहीं है कि केवल मैराथन धावक को हीटस्ट्रोक होता है या मरुस्थल में फंसे व्यक्ति की ही गर्मी के कारण हालत खराब होता है। गर्भवती महिलाओं में भी इसके खतरे हो सकते हैं। गरीब महिलाओं में या कहीं भी, जहां एयर-कंडीशनिंग की सुविधा नहीं है, यह खतरा और ज्यादा हो सकता है।'

हालांकि गर्मी और उसमें चलने वाली गर्म लहर के खतरों के बारे में बताते हुए प्रोफेसर मैथ्यू यह भी कहते हैं कि महिलाओं को बढ़ते तापमान से डरने की जरूरत नहीं है। बकौल मैथ्यू 'गर्भवती महिलाओं को गर्म तापमान वाले दिन घर से निकलते हुए घबराना नहीं चाहिए। इसका खतरा तभी है, जब वे बार-बार उच्च तापमान (या गर्म लहर) की चपेट में आती हैं। जब ऐसा लगातार होता है, तब बच्चे के लिए गैर-जरूरी खतरा बढ़ने का जोखिम होता है।'

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पहले भी किया गया है दावा
यह पहली बार नहीं है, जब गर्मी या उसमें चलने वाली गर्म लहर को गर्भावस्था के खराब परिणामों से जोड़ा गया है। इसी साल मार्च महीने में आए एक अन्य अध्ययन के मुताबिक, गर्मी के मौसम में चलने वाली गर्म हवाएं या लू से गर्भवती महिलाओं की प्रीमैच्योर डिलीवरी (समय से पहले बच्चे का जन्म) की आशंका बढ़ सकती है। यह रिपोर्ट भी एनवाईटी में प्रकाशित हुई थी। अखबार ने बताया था कि प्रीमैच्योर डिलीवरी के कई कारण हो सकते हैं और पिछले कुछ अध्ययनों में इस बात के प्रमाण मिले हैं कि इसकी एक वजह अत्यधिक गर्म मौसम भी हो सकता है। उस समय इस दावे से जुड़ी अध्ययन रिपोर्ट को जलवायु परिवर्तन से जुड़ी पत्रिका ‘एनवायरन्मेंटल इंटरनेशनल’ ने प्रकाशित किया था। पत्रिका के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने पाया था कि गर्म मौसम समय से पहले बच्चे के जन्म का कारण बन सकता है।

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