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एसिटाइलकोलाइन रिसेप्टर (एसीएचआर) एंटीबॉडी टेस्ट क्या है?

एसिटाइलकोलाइन (एसीएच) एक रासायनिक यौगिक है, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं (न्यूरॉन) में सिग्नल भेजता है। यह न्यूरॉन के अंतिम सिरे से निकलता है और मांसपेशियों की कोशिकाओं की विशेष जगहों पर जुड़ा होता है, जिन्हें एसीएचआर साइट्स कहा जाता हैं। यह मांसपेशियों के संकुचन को उत्तेजित करता है।

एंटी-एसिटाइलकोलाइन एंटीबॉडीज एक प्रकार के ऑटोएंटीबॉडीज हैं, जो कि ऑटोइम्यून डिजीज जैसे मायस्थेनिया ग्रेविस की स्थिति में बनते हैं। ये एंटीबॉडीज एसीएच को मांसपेशियों में इनकी रिसेप्टर वाली जगह से जुड़ने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करते हैं। यह कार्य या तो रिसेप्टर को नष्ट करके या फिर उनके साथ बांध कर किया जाता है, जिससे वे एसिटाइलकोलाइन के लिए उपलब्ध नहीं रह पाते हैं। परिणामस्वरूप मांसपेशियों में संकुचन की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है। 

एसिटाइलकोलाइन रिसेप्टर (एसीएचआर) एंटीबॉडी टेस्ट रक्त में एसीएचआर के जमाव को मापता है। इसका प्राथमिक कार्य मायस्थेनिया ग्रेविस का पता लगाना है।

  1. एसीएचआर एंटीबॉडी टेस्ट क्यों किया जाता है - AChR Antibody Test Kyu Kiya Jata Hai
  2. एसीएचआर एंटीबॉडी टेस्ट से पहले - AChR Antibody Test Se Pahle
  3. एसीएचआर एंटीबॉडी टेस्ट के दौरान - AChR Antibody Test Ke Dauran
  4. एसीएचआर एंटीबॉडी टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब है - AChR Antibody Test Ke Parinam Ka Kya Matlab Hai

एसीएचआर एंटीबॉडी टेस्ट क्यों किया जाता है?

एसीएचआर टेस्ट की सलाह उन लोगों को दी जाती है, जिनमें मायस्थेनिया ग्रेविस के लक्षण दिखाई देते हैं। यह टेस्ट इम्यूनोसुप्रेसेंट द्वारा किए जा रहे मायस्थेनिया ग्रेविस के इलाज की प्रतिक्रिया पर नजर रखने के लिए भी किया जाता है।

मायस्थेनिया ग्रेविस के एंटीबॉडीज इस रोग से ग्रस्त लगभग 85 प्रतिशत मरीजों में होते हैं। एसीएचआर एंटीबॉडीज तीन प्रकार के होते हैं: एसीएचआर बाइंडिंग एंटीबॉडीज, एसीएचआर ब्लॉकिंग एंटीबॉडीज और एसीएचआर मॉड्यूलेटिंग एंटीबॉडीज। एसीएचआर ब्लॉकिंग एंटीबॉडीज का प्रयोग मुख्य रूप से इम्यूनोसुप्रेसेंट थेरेपी का प्रभाव देखने के लिए किया जाता है। मायस्थेनिया ग्रेविस के लक्षणों में पहले श्वसन तंत्र की मासंपेशियों में कमजोरी होती है और धीरे-धीरे इसमें पूरे शरीर की मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं।

मरीज में निम्न लक्षण दिखने पर डॉक्टर इस टेस्ट की सलाह देते हैं:

  • एक या दोनों आंखों की पलकों का गिरना (Ptosis)
  • धुंधला या दोहरा दिखना 
  • सांस फूलना
  • स्पष्ट रूप से बोल ना पाना 
  • चेहरे के भावों में बदलाव
  • चबाने और निगलने में कठिनाई
  • टांगों और बांहों की मांसपेशियों में कमजोरी के कारण अस्थिर चाल होना

मायस्थेनिया ग्रेविस के मरीजों में शाम आते-आते और व्यायाम करने के बाद कमजोरी और अधिक बढ़ जाती है। जब यह रोग किसी मरीज की सांस लेने और निगलने की क्षमता को प्रभावित करती है तो स्थिति जानलेवा हो सकती है।

एसीएचआर एंटीबॉडी टेस्ट की तैयारी कैसे करें?

इस टेस्ट के लिए किसी तैयारी की जरूरत नहीं होती। टेस्ट से पहले डॉक्टर आपको टेस्ट की प्रक्रिया और उद्देश्य के बारे में समझा देंगे। यदि आपके कोई भी प्रश्न हैं तो उन्हें डॉक्टर से बिना किसी हिचकिचाहट के पूछ लेना चाहिए।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि यदि मरीज ने पहले इम्यूनोसुप्रेसेंट दवा ली है तो इसके बारे में डॉक्टर को बता दें। ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसे मरीजों में एंटीबॉडीज असामान्य रूप से होते हैं।

एसीएचआर एंटीबॉडी टेस्ट कैसे किया जाता है?

इस टेस्ट के लिए आपकी बांह की नस में सुई लगा कर (वेनेपंक्चर की मदद से) सात मिली लीटर खून का सैंपल ले लिए जाएगा। रक्त निकलने से पहले इंजेक्शन वाली जगह को पोविनोडन-आयोडीन से साफ किया जाएगा और पर्याप्त मात्रा में रक्त ले लिया जाएगा। ब्लड सैंपल पर लेबल लगाकर आगे के टेस्ट के लिए लैब में भेज दिया जाएगा।

एसीएचआर एंटीबॉडी टेस्ट के परिणाम क्या बताते हैं?

सामान्य परिणाम:
नेगेटिव रिजल्ट का मतलब है, कि परिणाम सामान्य है। रक्त में एसीएचआर का 0.02 nmol/L से कम जमाव सामान्य माना जाता है।

असामान्य परिणाम:
ब्लड सैंपल में 0.02 nmol/L से ज्यादा एसीएचआर एंटीबॉडीज को असामान्य माना जाता है। मरीज में दिखे न्यूरोलॉजिकल (मस्तिष्क-संबंधी) लक्षणों के अनुसार डॉक्टर अन्य सेरोलॉजिकल टेस्ट की सलाह भी दे सकते हैं, इसमें विशेषकर एसीएचआर ब्लॉकिंग एंटीबॉडीज, एसीएचआर मॉड्यूलेटिंग एंटीबॉडीज और स्ट्रिएशनल एंटीबॉडीज की जांच की जाती है। एसीएचआर एंटीबॉडीज के असामान्य रूप से अधिक स्तर दिखाते हैं, कि व्यक्ति को मायस्थेनिया ग्रेविस है। एसीएचआर एंटीबॉडीज से जुड़े कुछ जरूरी परिणाम निम्न हैं:

  • लगभग 90 प्रतिशत लोग जिन्हें मायस्थेनिया ग्रेविस होता है उनमें एसीएचआर एंटीबॉडीज का जमाव असामान्य रूप से अधिक होता है। 70 प्रतिशत तक मरीज जिन्हें ऑक्युलर मायस्थेनिया होता है, उनमें भी इसके परिणाम असामान्य आते हैं। लगभग 80 प्रतिशत तक लोग जो इस ऑटोइम्यून स्थिति से ठीक हो रहे होते हैं उनमें भी इन एंटीबॉडीज का जमाव अधिक देखा जाता है। 
  • कुछ इम्यूनोसुप्रेसेंट दवाएं एसीएचआर एंटीबॉडीज टाइटर को कम कर सकती हैं। 
  • मायस्थेनिया ग्रेविस की शुरुआती अवस्थाओं में एंटीबॉडीज का पता लगाने की आवृत्ति कम होती है। वहीं कंजेनिटल मायस्थेनिया ग्रेविस के मरीजों में एंटीबॉडीज दिखाई नहीं देते। 
  • जिन मरीजों को केवल आंखों से संबंधित लक्षण होते हैं, उनमें सामान्य मायस्थेनिया ग्रेविस के मरीजों की तुलना में एसीएचआर एंटीबॉडीज के टाइटर कम होते हैं। ऑक्युलर मायस्थेनिया की स्थिति में रोग की उपस्थिति की पुष्टि के लिए डॉक्टर कुछ एंसिलरी टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। 
  • कभी-कभी लैंबर्ट-ईटोन- मायस्थेनिक-सिंड्रोम या ऑटोइम्यून लिवर डिजीज की स्थिति में टेस्ट के रिजल्ट गलत तरह से पॉजिटिव आ सकते हैं। जिन मरीजों ने टेस्ट से 48 घंटे पहले एनेस्थेसिया या मांसपेशियों को आराम पहुंचाने के लिए कोई दवा या बाम लगाई है, तो भी टेस्ट के परिणाम गलत तरह से पॉजिटिव आ सकते हैं। इसके अलावा एम्योट्रॉफिक लेटरल स्क्लेरोसिस के मरीजों में भी परिणाम गलत तरह से पॉजिटिव आ सकते हैं।
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References

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