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एल्डोस्टेरोन टेस्ट क्या है?

एल्डोस्टेरोन एड्रिनल ग्रंथि द्वारा बनाया जाने वाला एक हार्मोन है। एड्रिनल ग्रंथि किडनी के ऊपर मौजूद छोटी ग्रथियां होती हैं। यह हार्मोन रक्त में सोडियम और पोटेशियम के जमाव को सामान्य रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा यह रक्त के आयतन और दबाव को भी नियंत्रित करने में मदद करता है। 

अत्यधिक एल्डोस्टेरोन से शरीर में पोटेशियम के स्तर असंतुलित हो जाते हैं, जिससे उच्च रक्तचाप की स्थिति पैदा हो जाती है। एल्डोस्टेरोन टेस्ट मुख्य रूप से रक्त में एल्डोस्टेरोन हार्मोन के स्तर की जांच करने के लिए किया जाता है। इसकी मदद से हाइपरएल्डोस्टेरोनिज्म (शरीर में एल्डोस्टेरोन का अत्यधिक बनना) या हाइपोएल्डोस्टेरोनिज्म (शरीर में एल्डोस्टेरोन का कम बनना) जैसी स्थितियों की जांच की जाती है।

  1. एल्डोस्टेरोन टेस्ट क्यों किया जाता है - Aldosterone Blood Test Kyu Kiya Jata Hai
  2. एल्डोस्टेरोन टेस्ट से पहले - Aldosterone Blood Test Se Pahle
  3. एल्डोस्टेरोन टेस्ट के दौरान - Aldosterone Blood Test Ke Dauran
  4. एल्डोस्टेरोन टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब है - Aldosterone Blood Test Ke Parinam Ka Kya Matlab Hai

एल्डोस्टेरोन टेस्ट क्यों किया जाता है?

डॉक्टर इस टेस्ट की सलाह उन लोगों को देते हैं जिन्हें हाइपरएल्डोस्टेरोनिज्म या हाइपोएल्डोस्टेरोनिज्म होने का खतरा होता है।

इस टेस्ट की सलाह निम्न के लिए दी जा सकती है:

  • प्राइमरी एल्डोस्टेरोनिज्म (पीए), (कॉन सिंड्रोम) से ग्रस्त लोगों में एल्डोस्टेरोन स्तर की जांच करने  के लिए। पीए से व्यक्ति को उच्च रक्त चाप या हाइपरटेंशन की समस्या हो सकती है।
     
  • सेकेंडरी एल्डोस्टेरोनिज्म (एसए) का पता लगाने के लिए। यह एल्डोस्टेरोनिज्म का एक प्रकार है जो कि एड्रिनल संबंधी विकार से नहीं होता। एसए पीए से अधिक सामान्य है और निम्न स्थितियों में दिख सकता है:
  • यदि किसी मरीज में एल्डोस्टेरोन के अत्यधिक उत्पादन के लक्षण दिखाई दें। इसमें निम्न शामिल हैं:
  • यदि किसी व्यक्ति में एल्डोस्टेरोन के कम उत्पादन के लक्षण दिखाई दें, जैसे:

एल्डोस्टेरोन टेस्ट की तैयारी कैसे करें?

एल्डोस्टेरोन के स्तर सुबह के समय सबसे अधिक होते हैं। इसका स्तर दिन भर अलग-अलग होता है और अधिकतर शरीर की पोजीशन, तनाव के स्तर, कुछ दवाओं और कुछ विशेष प्रकार के भोजन और पेय पदार्थों से प्रभावित होता है। यदि आप किसी भी तरह की कोई दवा ले रहे हैं तो इसके बारे में डॉक्टर को बताएं। कुछ विशेष दवाएं जैसे पेन किलर, स्टेरॉयड, ओटीसी, डाइयुरेटिक्स, बीटा ब्लॉकर और एंजियोटेनसिन-कंवर्टिंग एंजाइम इन्हीबिटर टेस्ट के परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। टेस्ट से दो हफ्ते पहले तक शराब न पिएं क्योंकि इसमें एल्डोस्टेरोन के गुण होते हैं जिनके कारण टेस्ट के परिणामों में एल्डोस्टेरोन के स्तर कम आ सकते हैं। 

रक्त देने से पहले 15-30 मिनट तक सीधे लेटें। टेस्ट से पहले दो घंटे तक अधिक बैठने या खड़े रहने से रक्त में एल्डोस्टेरोन के स्तर बढ़ सकते हैं। 

एल्डोस्टेरोन के रक्त के स्तर गंभीर बीमारी के कारण कम हो सकते हैं, इसीलिए ऐसे मामलों में ये टेस्ट नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा व्यायाम और गर्भावस्था जैसी कुछ स्थितियां भी हैं, जो टेस्ट के रिजल्ट को प्रभावित कर सकती हैं।

एल्डोस्टेरोन टेस्ट कैसे किया जाता है?

डॉक्टर आपकी बांह की नस, किडनी या एड्रिनल ग्रंथि की नसों (विशेष लैब में) से ब्लड सैंपल लेंगे। एड्रिनल की नस से लिए गए सैंपल से इस बात का भी पता चल जाता है कि एक एड्रिनल ग्रंथि प्रभावित हुई है या दोनों।

एल्डोस्टेरोन टेस्ट के परिणाम क्या बताते हैं?

सामान्य परिणाम:
रक्त में एल्डोस्टेरोन के स्तर शरीर की पोजीशन में बदलाव और बढ़ती उम्र के साथ बदलते रहते हैं। इस टेस्ट की वैल्यू हर लैब की अलग हो सकती है। सामान्य वैल्यू निम्न है:

  • बैठे या खड़े होने की अवस्था में:
    • बच्चे : 5-80 नैनोग्राम प्रति डेसीलिटर (ng/dL) या 0.14-2.22 nmol/L
    • किशोर : 4-48 ng/dL या 0.11-1.33 nmol/L
    • व्यस्क : 7-30 ng/dL या 0.19-0.83 nmol/L
  • लेटने की अवस्था में 
    • बच्चे: 3-35 ng/dL या 0.08-0.97 nmol/L
    • किशोर : 2-22 ng/dL या 0.06-0.61 nmol/L
    • व्यस्क: 3-16 ng/dL या 0.08-0.44 nmol/L

असामान्य परिणाम:
रक्त में एल्डोस्टेरोन के असामान्य स्तर निम्न की ओर संकेत कर सकते हैं 

  • एल्डोस्टेरोन के उच्च स्तर निम्न  के कारण हो सकते हैं:
    • पानी की कमी 
    • एक दुर्लभ कंजेनिटल स्थिति का समूह जिससे किडनी प्रभावित होती है (बारट्टर सिंड्रोम) या अन्य किडनी से जुड़ी हुई बीमारियां होती हैं। 
    • लिवर के रोग 
    • हार्ट फेलियर 
    • पीए (आमतौर पर एड्रिनल ग्रंथि की सौम्य गांठो के कारण होता है)
    • ऐसा आहार जिसमें सोडियम कम मात्रा में मौजूद हो 
    • प्री-एक्लेम्पसिया (गर्भावस्था के दौरान हाइपरटेंशन)
    • एड्रिनल ग्रंथि में ट्यूमर (कोंन सिंड्रोम)
       
  • एल्डोस्टेरोन के सामान्य से कम स्तर निम्न के कारण हो सकते हैं:
    • एल्डोस्टेरोन के कम स्तर पर स्त्रावित होने के कारण एड्रिनल ग्रंथि के विकार जैसे एडिसन रोग 
    • आहार में उच्च मात्रा में सोडियम 
    • कुछ विशेष किडनी के रोग 
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References

  1. John W. Funder et al. The Management of Primary Aldosteronism: Case Detection, Diagnosis, and Treatment: An Endocrine Society Clinical Practice Guideline. The Journal of Clinical Endocrinology & Metabolism, Volume 101, Issue 5, 1 May 2016, Pages 1889–1916.
  2. Cleveland Clinic. [Internet]. Cleveland. Ohio. Addison's Disease
  3. Michigan Medicine: University of Michigan [internet]; Aldosterone in Blood
  4. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Aldosterone blood test
  5. HealthlinkBC [internet] Government of British Columbia. British Columbia. Canada. Aldosterone in Blood