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एल्कलाइन फॉस्फेटेस (एएलपी) टेस्ट क्या है?

एएलपी टेस्ट रक्त में एल्कलाइन फॉस्फेटेस (एएलपी) एंजाइम के स्तर की जांच करने के लिए किया जाता है। यह एंजाइम वैसे तो पूरे शरीर में पाया जाता है पर अधिकतर यह लिवर, हड्डियों, किडनी और पित्त नलिकाओं में मिलता है। 

यह हड्डियों को बनाने वाली कोशिकाओं (जैसे ऑस्टिओब्लास्ट्स) में पाया जाता है। अलग-अलग ऊतक एएलपी के अलग-अलग प्रकारों को बनाते हैं, जिन्हें आइसोएंजाइम कहते हैं। इन आइसोएंजाइम में अंतर पता करने के लिए चिकित्सीय संकेतों और टेस्ट की मदद ली जाती है। जिससे यह जानने में मदद मिलती है खून में कौन से आइसोएंजाइम की मात्रा बढ़ी है।

कुछ स्थितियां हैं जो खून में एएलपी के स्तर में वृद्धि कर सकती है जैसे तेज़ी से हड्डी का बढ़ना, जो कि आमतौर पर प्यूबर्टी के दौरान होती है, हड्डियों के विकार उदाहरण के तौर पर पेजेट रोग या हड्डियों का कैंसर, हाइपरपैराथायरायडिज्म (एक स्थिति जो रक्त में कैल्शियम को प्रभावित करती है), विटामिन डी की कमी या लिवर की कोशिकाओं का क्षतिग्रस्त होना।

इसके अलावा इस टेस्ट को एएलपी, एएलके, एएलकेपी, एल्कालाइन फास्फेट आइसोएंजाइम और बोन-स्पेसिफिक एएलपी टेस्ट के नाम से भी जाना जाता है।

  1. एल्कलाइन फॉस्फेटेस (एएलपी) टेस्ट क्यों किया जाता है - Alkaline Phosphatase (ALP) Test Kyu Kiya Jata Hai
  2. एल्कलाइन फॉस्फेटेस (एएलपी) टेस्ट से पहले - Alkaline Phosphatase (ALP) Test Se Pahle
  3. एल्कलाइन फॉस्फेटेस (एएलपी) टेस्ट के दौरान - Alkaline Phosphatase (ALP) Test Ke Dauran
  4. एल्कलाइन फॉस्फेटेस(एएलपी) टेस्ट के परिणाम क्या बताते हैं - Alkaline Phosphatase (ALP) Test Ke Prinaam Ka Kya Matlab Hai

एएलपी टेस्ट किसलिए किया जाता है?

एएलपी टेस्ट निम्न विकारों की जांच के लिए किया जाता है:

कुछ लक्षण जिनसे पता चलता है कि इससे लिवर संबंधित है जैसे:

कुछ लक्षण जिनसे पता चलता है कि इससे हड्डी संबंधित हैं, जैसे:

एएलपी टेस्ट कुछ और स्थितियों में भी किया जा सकता है, स्थितियां जैसे:

  • अधिक शराब के सेवन से होने वाली लिवर की बीमारियां जैसे, हेपेटाइटिस, सिरोसिस
  • शराब की लत 
  • पित्त नलिकाएं असाधारण रूप से संकुचित हो जाना (बाइलरी स्ट्रिक्चर)
  • पित्ताशय में पथरी 
  • जाइंट सेल (टेम्पोरल कार्नियल) आर्टराइटिस (रक्त वाहिकाओं का एक रोग)
  • एंड्रोक्राइन में कई रसोली (एमइएन), (एक विकार जिसमे एंडोक्राइन ग्रंथि अत्यधिक सक्रिय हो जाती है और ट्यूमर बना देती है) 
  • अग्नाशयशोथ  
  • रीनल सेल कार्सिनोमा (किडनी के कैंसर का एक प्रकार)

एएलपी टेस्ट की तैयारी कैसे करें?

टेस्ट से दस घंटे पहले तक कुछ भी खाएं-पीएं नहीं क्योंकि वसा युक्त भोजन से एएलपी के स्तर में वृद्धि हो सकती है। यदि आप कुछ विशेष दवा या सप्लीमेंट ले रहें हैं तो इसकी जानकारी डॉक्टर को दें। डॉक्टर आपको ऐसी दवा लेने से मना कर सकते हैं, जो टेस्ट के रिजल्ट को प्रभावित कर सकती हैं। एएलपी के स्तर को प्रभावित करने वाली दवाओं में निम्न शामिल हो सकती हैं:

  • एंटीबायोटिक नारकोटिक्स
  • मिथाइलडोपा
  • प्रोप्रानोलोल
  • कोर्टीसोन
  • एलोप्यूरिनॉल
  • ट्रिसाइक्लिक
  • एंटी डिप्रेसेंट
  • एंड्रोजन
  • ट्रैंक्विलाइज़र
  • क्लोरप्रोमाज़ाइन
  • ओरल कंट्रासेप्टिव (गर्भनिरोधक गोलियां)
  • एटी- इंफ्लेमेटरी एनालजेसिक्स
  • एंटीअर्थरिटिक ड्रग्स
  • ओरल एंटीडायबिटिक ड्रग्स

एएलपी टेस्ट कैसे किया जाता है?
यह एक सामान्य प्रक्रिया है जिसमें बांह की नस में सुई लगाकर ब्लड सैंपल ले लिए जाते हैं। ब्लड सैंपल लेने के लिए सुई लगाने से पहले, उस जगह को एंटीसेप्टिक दवा लगाकर साफ किया जाता है। 

इंजेक्शन की जगह को हल्का सा दबाया जाता है और रक्त प्रवाह को रोकने के लिए उस पर रुई लगा दी जाती है। इस के बाद ब्लड सैंपल को परीक्षण के लिए लैब में भेज दिया जाता है।

एएलपी टेस्ट के परिणाम क्या बताते हैं?

एएलपी टेस्ट के परिणाम उम्र, लिंग और टेस्ट जिस तरीके से किया गया है और व्यक्ति के पिछले स्वास्थ्य स्थितियों के आधार पर अलग हो सकते हैं। डॉक्टर टेस्ट की रिपोर्ट देख कर उसके रिजल्ट का मतलब समझा पाते हैं।

सामान्य परिणाम:
एएलपी के सामान्य स्तर 18 वर्ष से अधिक की महिलाओं और पुरुषों में 37-116 यूनिट प्रति लीटर (U/L) होता है। 

  • लड़को में

1-3 वर्ष: 104-345 U/L

4-6 वर्ष: 93-309 U/L

7-9 वर्ष: 86-315 U/L

10-12 वर्ष:  42-362 U/L

13-15 वर्ष: 74-390 U/L

16-18 वर्ष: 52-171 U/L

  • लड़कियों में  

1-3 वर्ष: 108-317 U/L

4-6 वर्ष: 96-297 U/L

7-9 वर्ष: 69-325 U/L

10-12 वर्ष: 51-332 U/L

13-15 वर्ष: 50-162 U/L

16-18 वर्ष: 47-119 U/L

असामान्य परिणाम:
एएलपी के उच्च स्तर निम्न स्थितियों में देखे जा सकते हैं:

  • पित्त नलिकाएं रुक जाना (बाइलर ऑब्ट्रक्शन)
  • बोन डिजीज और डिसॉर्डर
  • ओस्टियोब्लास्टिक बोन कैंसर या ट्यूमर
  • ओस्टियोमेलासिया (हड्डियों का कमजोर होना)
  • हीलिंग फ्रैक्चर (टूटी हुई हड्डी के ठीक होने की प्रक्रिया)
  • लिवर रोग
  • हेपेटाइटिस
  • हाइपरपैराथायरायडिज्म (पैराथायराइड हार्मोन का अधिक बनना)
  • ल्यूकेमिया (रक्त बनाने वाले ऊतकों में कैंसर)
  • लिम्फोमा (लिम्फोसाइट्स में कैंसर)
  • पेजेट रोग 
  • रिकेट्स 
  • सारकॉइडोसिस (शरीर में ग्रेन्युलोमा का बनना)
  • एनीमिया

एएलपी के कम स्तर निम्न स्थितियों में देखे जा सकते हैं:

और पढ़ें ...

References

  1. Johns Hopkins Medicine [Internet]. The Johns Hopkins University, The Johns Hopkins Hospital, and Johns Hopkins Health System; Common Liver Tests
  2. Ellis E. Golub and Kathleen Boesze-Battaglia. The role of alkaline phosphatase in mineralization. Curr Opin Orthop 18:444–448. 2007 Lippincott Williams & Wilkins.
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  5. Lee Goldman Andrew Schafer. Goldman's Cecil Medicine. 24th Edition, SBN: 9781455753369
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  7. Penn State Health. Gallstones. Milton S. Hershey Medical Center; Pennsylvania
  8. University of Rochester Medical Center. Alkaline Phosphatase. Rochester, New York. [internet].