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एंड्रोस्टेनडायोन (ए4) टेस्ट क्या है?

एंड्रोस्टेनडायोन एक एंड्रोजेनिक हार्मोन (पुरुष सेक्स हार्मोन) होता है, जो कि पुरुष और महिला दोनों में पाया जाता है। यह पुरुषों में वृषणों (कुछ मात्रा में एड्रिनल ग्रंथि द्वारा भी) द्वारा स्त्रावित होता है और महिलाओं में ओवरी और एड्रिनल ग्रंथि द्वारा स्रावित किया जाता है।

एंड्रोस्टेनडायोन नाम होने के बाद भी इसके एंड्रोजेन हर्मोन संबंधी विशेष कार्य नहीं होते जैसे - यौन लक्षणों का विकास इत्यादि। इसके अलावा ये एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन बनाने में एक प्रीकर्सर (किसी हार्मोन के बनने से पहले बनने वाला पदार्थ) के रूप में कार्य करता है। यह एक आवश्यक सेक्स स्टेरॉयड है जो कि लड़कों व लड़कियों में अलग-अलग यौन लक्षणों की शुरुआत करता है। जैसा कि यह प्राथमिक रूप से एक एंड्रोजेनिक है, यह पुरुषों में द्वितीय यौन लक्षणों को विकसित होने में भी मदद करता है। इसमें चेहरे पर बाल (दाढ़ी व मूछें) आना और आवाज गहरी हो जाना शामिल है।

इस हार्मोन के अधिक होने के कारण हार्मोनल असंतुलन हो जाता है, जिससे महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी समस्याएं और शरीर पर अधिक बाल आने जैसी शिकायतें होती हैं। यह महिला और पुरुष दोनों के ही जननांगों में बदलाव करता है।

एड्रिनल ग्रंथि के कार्यों की जांच, एंड्रोजन के उत्पादन क्षमता का पता लगाने और ओवरी व टेस्टिकल की कार्य प्रक्रिया की जांच करने के लिए डॉक्टर एंड्रोस्टेनडायोन टेस्ट की सलाह देते हैं।

  1. एंड्रोस्टेनडायोन (ए 4) टेस्ट क्यों किया जाता है - Androstenedione (A4) Test Kyu Kiya Jata Hai
  2. एंड्रोस्टेनडायोन (ए4) टेस्ट से पहले - Androstenedione (A4) Test Se Pahle
  3. एंड्रोस्टेनडायोन (ए4) टेस्ट के दौरान - Androstenedione (A4) Test Ke Dauran
  4. एंड्रोस्टेनडायोन (ए4) टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब है - Androstenedione (A4) Test Ke Parinam Ka Kya Matlab Hai

एंड्रोस्टेनडायोन (ए4) टेस्ट किसलिए किया जाता है?

एंड्रोस्टेनडायोन टेस्ट की सलाह निम्न के लिए दी जाती है:

  • हाइपरएंड्रोजेनिज्म का परीक्षण करने के लिए (एण्ड्रोजन के बढ़े हुए स्तर)
  • कंजेनिटल एड्रेनल हाइपरप्लासिया (सीएएच) के परीक्षण के लिए 
  • सीएएच के इलाज पर नजर रखने के लिए 
  • प्री मेच्योर एड्रेनार्क (एड्रिनल के कार्य के शुरुआती लक्षण) के परीक्षण के लिए

डॉक्टर आपको इसकी सलाह तब भी दे सकते हैं जब वे निम्न स्थितियों का परीक्षण करने की कोशिश कर रहे हों:

  • एड्रिनल ग्रंथि के कार्यों की जांच करना
  • एड्रिनल ट्यूमर का पता लगाने के लिए 
  • विरिलाइसेशन (महिलाओं में पुरुष के लक्षण) के कारण का पता लगाने के लिए 
  • लड़कों में प्यूबर्टी की जल्दी शुरुआत का कारण जानने के लिए 
  • एण्ड्रोजन के उत्पादन का आकलन करने के लिए 
  • महिलाओं में ओवरी की कार्य-प्रक्रिया की जांच के लिए 
  • पुरुषों में टेस्टिकल के कार्य-प्रक्रिया की जांच के लिए

इसके अलावा, इस टेस्ट को करवाने की सलाह उन लोगों को दी जाती है जिन्हें शरीर और चेहरे पर अत्यधिक बाल आना (हर्सुटिज्म), मुहांसे और बांझपन जैसी स्थितियां हैं। जिन महिलाओं को मासिक धर्म नहीं होते (एमेनोरिया) उन्हें भी यह टेस्ट करवाने के लिए कहा जाता है, साथ ही जिन लड़कों में प्यूबर्टी की शुरुआत जल्दी हो जाती है उन्हें भी डॉक्टर यह टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं।

एंड्रोस्टेनडायोन (ए4) टेस्ट की तैयारी कैसे करें?

इस टेस्ट से पहले आपको कोई भी विशेष तैयारी की जरूरत नहीं है। हालांकि, टेस्ट आसानी से हो जाए इसके लिए ढीले और आरामदायक कपड़े पहन कर जाएं।

जिन महिलाओं को पीरियड्स हो रहे हैं, डॉक्टर उन्हें कुछ महत्वपूर्ण निर्देश देंगे और बताएंगे कि यह टेस्ट कब किया जाना चाहिए।

एंड्रोस्टेनडायोन (ए4) टेस्ट कैसे किया जाता है?

डॉक्टर टेस्ट के लिए आपकी बांह की नस से एक ब्लड सैंपल ले लेंगे। यह निम्न चरणों का पालन करते हुए किया जाता है:

  • हाथ में रक्त का प्रवाह धीमा करने के लिए बांह में एक इलास्टिक बैंड बांधा जाता है।
  • इससे बैंड के नीचे मौजूद नसें फूल जाएंगी और सुई लगाने में आसानी होगी।
  • इसके बाद डॉक्टर इंजेक्शन लगने वाली जगह को अल्कोहॉल युक्त दवा से साफ करते हैं और पर्याप्त मात्रा में खून का सैंपल ले लिया जाता है। हो सकता है कि आपको बिलकुल दर्द न हो या सुई लगने से हल्की सी चुभन हो सकती है। 
  • कभी-कभी एक से ज्यादा सुई लगाने की जरूरत पड़ सकती है। 
  • पर्याप्त रक्त मिल जाने पर इलास्टिक बैंड हटा दिया जाता है। 

इस टेस्ट से निम्न जोखिम जुड़े हैं:

  • ब्लड सैंपल लेने में कठिनाई 
  • सैंपल ली गई जगह से अत्यधिक रक्तस्राव 
  • बेहोशी 
  • हीमेटोमा (त्वचा में रक्त जमना)
  • सुई वाली जगह पर संक्रमण हो जाना 

हालांकि सही सावधानियां बरतने से इन खतरों को कम किया जा सकता है।

एंड्रोस्टेनडायोन (ए4) टेस्ट के परिणाम क्या बताते हैं?

अन्य एण्ड्रोजन के स्तरों के साथ एंड्रोस्टेनडायोन के सामान्य स्तर इस बात का संकेत दे सकते हैं कि एड्रिनल ग्रंथि ठीक प्रकार से कार्य कर रही है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम और एड्रिनल कैंसर की स्थिति में भी इस हार्मोन के स्तर सामान्य हो सकते हैं। 

इस टेस्ट की सामान्य रेंज निम्न हैं:

  • पुरुष (व्यस्क): 2.1 – 10.8 nmol/L
  • महिला (व्यस्क): 1.0 – 11.5 nmol/L 

एंड्रोस्टेनडायोन के अधिक स्तर निम्न की ओर संकेत कर सकते हैं:

  • ओवरी, एड्रिनल ग्रंथि और टेस्टिकल द्वारा हार्मोन का अधिक उत्पादन 
  • एड्रिनल ग्रंथि में ट्यूमर होना
  • एड्रिनल कैंसर
  • सीएएच

एंड्रोस्टेनडायोन के सामान्य से कम स्तर निम्न की ओर संकेत कर सकते हैं:

  • एड्रिनल ग्रंथि में विकार होना
  • अंडाशय या वृषणकोष काम करना बंद कर देना

सीएएच के मरीजों में स्टेरॉयड के इलाज का प्रभाव देखने के लिए इस टेस्ट को करवाने के लिए कह सकते हैं। सामान्य स्तर का मतलब होता है कि एण्ड्रोजन के अत्यधिक उत्पादन को नियंत्रित करने में ट्रीटमेंट लाभदायक साबित हो रहे हैं। 

चूंकि एंड्रोस्टेनडायोन टेस्ट किसी भी स्थिति के परीक्षण के लिए किया जाने वाला टेस्ट नहीं है इसीलिए आमतौर पर लक्षणों के सही कारण जानने के लिए डॉक्टर अन्य टेस्ट करवाने के लिए कहते हैं।

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References

  1. South Tees Hospitals. NHS Foundation trust. National Health Service, U.K. Androstenedione
  2. Marx TL, Mehta AE. Polycystic ovary syndrome: Pathogenesis and treatment over the short and long term. Cleve Clin J Med. 2003 Jan;70(1):31-33, 36-41, 45. PMID: 12549723
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  4. Pagana KD,Pagana TJ. Mosby’s Diagnostic and Laboratory Test Reference. 10th ed. 2010. Mosby, Inc., St. Louis, MO. Pp: 63-64.
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