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एंटी-थायराइड पेरोक्सिडेस (टीपीओ) टेस्ट क्या है?

थायराइड पेरोक्सिडेस या टीपीओ एक एंजाइम है, जो कि थायराइड ग्रंथि में बनाया जाता है। थायराइड ग्रंथि कॉलरबोन के नीचे एक छोटी तितली के आकार की ग्रंथि होती है। ये एंजाइम थायराइड हार्मोन (टी3 और टी4) के उत्पादन को नियंत्रित करता है, जो चयापचयी कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

एंटी-टीपीओ पेरोक्सिडेस टेस्ट थायराइड पेरोक्सिडेस के विरोध में बने एंटीबॉडीज की पहचान करने में मदद करता है। थायराइड पेरोक्सिडेस से एक थायराइड विकार होता है जिसे हाइपोथायरायडिज्म कहते हैं।

ऑटोइम्यून थायराइड विकारों की पहचान करने के लिए यह एक संवेदनशील टेस्ट है और इसके साथ इससे विभिन्न बीमारी जैसे हाशिमोटो थायरोडिटिस, आइडियोपैथिक मिक्सोएडिमा और ग्रेव्स डिजीज का पता लगाने में भी मदद करता है।

हाशिमोटो थायरोडिटिस में टीपीओ के अत्यधिक स्तर 90% तक देखे गए हैं, जिससे इस बात की पुष्टि हो जाती है कि ये ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया के कारण हुआ है। ग्रेव्स डिजीज में 60-80% तक एंटीबॉडीज देखे गए हैं।

इस टेस्ट को थायराइड पेरोक्सिडेस एंटीबॉडी, थायरोपेरोक्सिडेस एंटीबॉडी, एंटी-टीपीओ या टीपीओ टेस्ट भी कहते हैं।

  1. एंटी-टीपीओ टेस्ट क्यों किया जाता है - Anti-TPO Test Kyu Kiya Jata Hai
  2. एंटी-टीपीओ टेस्ट से पहले - Anti-TPO Test Se Pahle
  3. एंटी-टीपीओ टेस्ट के दौरान - Anti-TPO Test Ke Dauran
  4. एंटी-टीपीओ टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब है - Anti-TPO Test Ke Parinam Ka Kya Matlab Hai

एंटी-टीपीओ टेस्ट क्यों किया जाता है?

आमतौर पर यह टेस्ट निम्न स्थितियों में किया जाता है:

यदि एक गर्भवती महिला को कोई थायराइड ऑटोइम्यून विकार जैसे ग्रेव्स डिजीज, हाशिमोटो थायरोडिटिस अन्य ऑटोइम्यून विकार होने का संदेह होता है, तो उन्हें गर्भवस्था की शुरुआत और अंत में यह टेस्ट करवाना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि थायराइड एंटीबॉडीज आसानी से गर्भनाल में जा सकते हैं और बच्चे में थायराइड के विकार पैदा कर सकते हैं। ऐसे मामलों में एंटी-टीपीओ टेस्ट इस बात की जांच करता है कि बच्चे को थायराइड संबंधी विकार होने का कोई खतरा तो नहीं है।

एंटी-टीपीओ टेस्ट की तैयारी कैसे करें?

इस टेस्ट के लिए किसी विशेष तैयारी की जरूरत नहीं होती और यह दिन में किसी भी समय किया जा सकता है। इस टेस्ट के लिए भूखे रहने की जरूरत नहीं होती। हालांकि कुछ दवाएं इस टेस्ट के परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं इसलिए यह जरूरी है कि यदि आप कोई भी दवा या सप्लीमेंट ले रहे हैं तो इनके बारे में आपके डॉक्टर को पता हो। इसके अलावा ब्लड सैंपल देने से पहले आधी बाजू की शर्ट पहन कर जाएं।

एंटी-टीपीओ टेस्ट कैसे किया जाता है?

यह एक सामान्य ब्लड टेस्ट है जिसमें आपकी बांह की नस में सुई लगाकर ब्लड सैंपल ले लिया जाता है। आपके डॉक्टर आपकी बांह के ऊपरी हिस्से में एक इलास्टिक बैंड बांधेंगे ताकि बैंड के नीचे की नसें साफ और बड़ी दिखाई दें। इसके बाद सुई लगने वाली जगह को अल्कोहॉल युक्त दवा से साफ किया जाएगा। इसके बाद त्वचा के अंदर से नस में सुई लगाई जाएगी और ब्लड सैंपल ले लिए जाएंगे। इंजेक्शन लगी जगह पर हल्का सा दबाव लगाकर वहां रुई लगा दी जाएगी। लिए गए सैंपल को आगे के परीक्षण के लिए लैब में भेज दिया जाएगा। 

इलास्टिक बैंड के लगने से आपको बांह में कसाव महसूस हो सकता है। सुई लगने से आपको दर्द व चुभन महसूस हो सकता है।

एंटी-टीपीओ टेस्ट के परिणाम क्या बताते हैं?

यदि टेस्ट के परिणाम पॉजिटिव आए हैं तो यह निम्न लोगों में हाइपोथायरायडिज्म होने के खतरे की तरफ संकेत करता है:

टीपीओ एंटीबॉडीज की सामान्य वैल्यू 9 अंतर्राष्ट्रीय यूनिट/मिलीलीटर (IU/mL] मानी जाती है। 

9 अंतर्राष्ट्रीय यूनिट/मिलीलीटर से अधिक वैल्यू ऑटोइम्यून थायरोडिटिस का संकेत करती है। 

मध्यम स्तर नॉन थायराइड ऑटोइम्यून डिजीज जैसे पर्निसियस एनीमिया और टाइप 1 डायबिटीज का संकेत हो सकते हैं।

 
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References

  1. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Antithyroid microsomal antibody
  2. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Antithyroglobulin antibody test
  3. Lab tests online. Thyroid Antibodies. American Association for Clinical Chemistry; Washington, D.C., United States [Internet]
  4. American Thyroid Association. Thyroid Function Tests. Virginia. [internet]
  5. Merck Manual Professional Version [Internet]. Kenilworth (NJ): Merck & Co. Inc.; Thyroid Antibodies