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पेरीटोनियल फ्लूड एक तरह का तरल पदार्थ होता है जो पेट के भीतर पेट की गुहाओं में लुब्रिकेन्ट्स का काम करता है। यह बहुत थोड़ी सी मात्रा (सामान्य तौर पर 5-20 एमएल) में पेट के अंदर की सतह पर पेरीटोनियम (आंतों की ऊपरी झिल्ली) की परतों के बीच पाया जाता है। यह तरल पदार्थ पेट के भीतर के अंगों को नम और मुलायम रखने का काम करता है जिसके कारण भोजन पचते समय पेट के भीतर के अंगों के मूवमेंट के दौरान उनके बीच घर्षण कम लगता है।

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  1. एसीटिक फ्लूड टेस्ट क्या होता है? - What is Ascitic Fluid Test in Hindi?
  2. एसीटिक फ्लूड टेस्ट क्यों किया जाता है? - What is the purpose of Ascitic Fluid Test in Hindi?
  3. एसीटिक फ्लूड टेस्ट से पहले - Before Ascitic Fluid Test in Hindi
  4. एसीटिक फ्लूड टेस्ट के दौरान - During Ascitic Fluid Test in Hindi
  5. एसीटिक फ्लूड टेस्ट के बाद - After Ascitic Fluid Test in Hindi
  6. एसीटिक फ्लूड टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है? - What do the results of Ascitic Fluid Test mean in Hindi?

एसीटिक फ्लूड टेस्ट या पेरीटोनल फ्लूड एनालिसिस को पैरासेन्टिसिस या एबडॉमिनल टेप के नाम से भी जाना जाता है। यह एक तरह की प्रक्रिया है, जिममें आंतो की ऊपरी झिल्ली के तरल पदार्थ की जांच की जाती है। इस टेस्ट को डॉक्टर तब करने की सलाह देते हैं, जब आपकी आंतो की ऊपरी झिल्ली में बहुत ज्यादा पानी इकट्ठा हो जाता है। आंतो की ऊपरी झिल्ली पेट का एक हिस्सा होती है, जहां हमारा पूरा पाचन तंत्र होता है।

इसके टेस्ट के लिए जिस हिस्से से तरल को निकालना होता है, सबसे पहले डॉक्टर उस हिस्से को सुन्न कर देते हैं। इसके बाद उस पेरिटोनियल जगह में एक लंबी लेकिन पतली सी सुई डालकर वहां से तरल पदार्थ निकाल लेते हैं।  डॉक्टर इस तरल को एक विशेष पात्र में रख लेते हैं। इसके बाद उस तरल को जांच के लिए लैब में भेजते हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर इलाज शुरू करते हैं।

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इस टेस्ट को करने के पीछे सबसे बड़ी वजह यह पता करना है कि आखिर पेट में सामान्य की अपेक्षा इतना अधिक तरल क्यों बन रहा है। इस टेस्ट को पेरिटोनिटिस के इलाज से पहले भी करवाया जाता है। पेरिटोनिटिस एक तरह के मृत बैक्टीरिया या फिर फंगल इन्फेक्शन होते हैं। ये पेट की दीवारों पर होते हैं। डॉक्टर इस टेस्ट को आंतरिक रक्तस्राव के उपचार के लिए भी कर सकते हैं। कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि इस विधि से डॉक्टर लीवर की बीमारी या फिर एडवांस स्टेज के कैंसर से पीड़ित मरीजों के पेट में बहुत अधिक मात्रा में इकट्ठा हुए तरल को निकालते हैं। 

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वैसे तो इस टेस्ट के पहले किसी विशेष तरह की तैयारी की जरूरत नहीं होती है। फिर भी जांच के लिए जाने पर आपका सैंपल लेने से पहले डॉक्टर आपसे एक बार पूरी तरह से ब्लैडर को खाली करने को कहेंगे। गाल ब्लैडर खाली करने के बाद ही यह टेस्ट किया जाता है। अगर गाल ब्लैडर खाली नहीं है तो डॉक्टर आपको पेशाब करने के लिए कहेंगे उसके बाद ही आपका टेस्ट करेंगे।

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यह टेस्ट बहुत आसान है। इसे डॉक्टर के अलावा मरीज के साथ का भी कोई व्यक्ति कर सकता है। इस टेस्ट से पहले डॉक्टर आपसे आपके कपड़े उतरवाकर अस्पताल का गाउन पहनने को कहेंगे। अगर डॉक्टर केवल थोड़ी सी मात्रा में ही तरल को लेते हैं तो यह टेस्ट बैठे-बैठे भी करवाया जा सकता है। अगर डॉक्टर अधिक मात्रा में तरल निकालते हैं तो आपको पीठ के बल सिर को हल्का सा उठाकर लेटना पड़ेगा।

इसके बाद जिस स्थान से तरल निकालना होता है, डॉक्टर उस जगह पर कोई एंटीसेप्टिक लगाकर साफ करेंगे। एंटीसेप्टिक लगाने पर आपको ठंडा महसूस हो सकता है लेकिन यह बहुत अधिक तकलीफ नहीं देगा। त्वचा को साफ करने के बाद डॉक्टर उस जगह पर कोई पट्टी लपेट देंगे। इसके बाद डॉक्टर वहां पर इंजेक्शन लगाकर उस जगह को सुन्न कर देंगे। सूई लगने पर आपको चुभन जरूर होगी लेकिन जल्द ही उस जगह की आपकी त्वचा सुन्न हो जाएगी।

उस जगह को सुन्न कर देने के बाद, डॉक्टर उस पेरिटोनियल में सूई चुभोकर आपके पेट से तरल पदार्थ को निकालते हैं। इस दौरान आपको हल्का सा दर्द या दबाव महसूस हो सकता है। डॉक्टर द्वारा ज्यादा तरल पदार्थ निकालने पर आपको चक्कर आने के साथ हल्कापन भी महसूस हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो अपने डॉक्टर से जरूर बताएं। टेस्ट के दौरान जितना हो सके, प्रयास करें कि एक ही स्थिति में रहें। पेरिटोनियल द्रव की जांच में 30 से 45 मिनट तक का समय लगता है। पेरिटोनियल से लगभग एक गैलन से अधिक तरह का द्रव निकाला जा सकता है।

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इस पूरी प्रक्रिया के बाद, जिस जगह से तरल पदार्थ निकाला गया होता है, उस जगह पर डॉक्टर कोई पट्टी या फिर छोटी सी सर्जिकल बैंडेज बांध देते हैं। इसके बाद उस जगह पर अगले 2 या 3 दिनों तक हल्का-हल्का साफ तरल पदार्थ का रिसाव हो सकता है। कुछ समय के लिए डॉक्टर आपके ब्लड प्रेशर की निगरानी करते हैं। ऐसा करके डॉक्टर इस बात की पुष्टि करना चाहते हैं कि आपके ब्लड प्रेशर में कहीं अप्रत्याशित कमी तो नहीं आई है। अगर डॉक्टर मना न करे तो आप अपने रोजमर्रा के कामों को कर सकते हैं।

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निम्नलिखित परस्थितियों में अपने डॉक्टर से बात करें:

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पेरिटोनियल टेस्ट के लिए लैब में कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं। सबसे पहले तो वो उस जगह पर यह देखते हैं कि वहां पर लाल या फिर मिल्की-ह्वॉइट जैसा तो कुछ नहीं है। इसके बाद ज्यादातर मामलों में डॉक्टर एल्बुमिन और प्रोटीन के स्तर की जांच करते हैं। इसके बाद वो खून के सैंपल में लाल रक्त कोशिकाओं और सफेद रक्त कोशिकाओं की भी जांच करते हैं। इसके अलावा डॉक्टर संक्रमण के कारण होने वाले बैक्टेरिया या फंगी की जांच करते हैं। अंत में कोशिकाओं की साइज और आकार की जांच करते हैं। कैंसर की वजह होने वाली कोशिकाओं की भी जांच की जाती है।

कुछ परिणाम ऐसे होते हैं, जिन्हें डॉक्टर देखते ही निष्कर्ष निकाल लेते हैं:

  • पित्त में लिपटा हुआ तरल पदार्थ पित्ताशय की थैली या लीवर में रोग की ओर इशारा करता है।
  • गुलाबी या लाल तरल पदार्थ दिखने का अर्थ है कि आंतरिक रक्तस्राव हो रहा है।
  • पेरिटोनियल फ्लूड और खून में एल्बुमिन की मात्रा के बीच एक बड़ा अंतर दिखने पर इस बात की पुष्टि होती है कि हृदय, लीवर या किडनी ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। (और पढ़ें - एल्बुमिन टेस्ट क्या है)
  • बढ़ी हुई सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या, जो सूजन या संक्रमण (पेरिटोनिटिस) के कारण होती हैं।
  • सैंपल में प्रोटीन की मात्रा अधिक होना, जो लीवर में किसी रोग या कैंसर की वजह हो सकता है।

शुरुआती जांच रिपोर्ट आने में एक दिन से भी कम का समय लगता है। जांच रिपोर्ट डॉक्टर को मिलने के बाद ही वो उपचार का सुझाव देते हैं। ऐसा भी हो सकता है कि इसके बाद डॉक्टर पूरी बीमारी को समझने के लिए कोई और जांच करवाएं।

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References

  1. Hepatitis C online. Infectious Disease Education and Assessment. University of Washington and CD; Diagnosis and Management of Ascites
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  3. Garcia-Tsao G. Goldman-Cecil Medicine. 25th ed. Philadelphia, PA: Elsevier Saunders; 2016. Chap 153, Cirrhosis and its sequelae.
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