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बीएनपी (बी-टाइप नेट्रीयूरेटिक पेप्टाइड) टेस्ट क्या है?

बीएनपी टेस्ट रक्त में बीएनपी हार्मोन के स्तर की जांच करने के लिए किया जाता है। बीएनपी खून की मात्रा को नियंत्रित करता है और हमारे हृदय के बाएं भाग के निचले हिस्से (लेफ्ट वेंट्रिकल) में बनता है। हालांकि, बीएनपी का सामान्य से अधिक स्तर हार्ट फेलियर का संकेत हो सकता है। ऐसा इसलिए होता है जब हृदय के निचले भाग में खिंचाव आता है, तो बीएनपी के स्तर रक्त में बढ़ने लगता है। बीएनपी के स्तर में वृद्धि इस बात का संकेत है कि शरीर की ऑक्सीजन की मांग को पूरा करने के लिए हृदय को सामान्य से अधिक काम करना पड़ रहा है। हार्ट फेलियर में मुख्य रूप हृदय इतनी मजबूत स्थिति में नहीं रह पाता कि वह शरीर की जरूरतों को पूरा कर पाए। इससे सर्कुलेटरी सिस्टम संबंधी समस्याओं के बारे में भी पता चल सकता है। 

यह ध्यान रखना जरूरी है कि बीएनपी का स्तर पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक होता है। 

  1. बीएनपी टेस्ट क्यों किया जाता है - BNP Test Kyu Kiya Jata Hai
  2. बीएनपी टेस्ट से पहले - BNP Test Se Pahle
  3. बीएनपी टेस्ट के दौरान - BNP Test Ke Dauran
  4. बीएनपी टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब है - BNP Test Ke Parinam Ka Kya Matlab Hai

बीएनपी टेस्ट किसलिए किया जाता है?

यदि डॉक्टर को व्यक्ति में हार्ट फेलियर से संबंधित लक्षण दिखें तो वे बीएनपी टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। हार्ट फेलियर के लक्षणों में निम्न शामिल हैं:

हार्ट फेलियर का पता लगाने के अलावा ये हार्ट फेलियर की गंभीरता और उसके लिए दी जा रही दवाओं के प्रभाव को जानने के लिए भी किया जाता है।

चूंकि बीएनपी के बढ़े हुए स्तर फेफड़ों, किडनी और लिवर रोग से संबंधित होते हैं इसीलिए बीएनपी टेस्ट इन अंगों से जुड़ी समस्याओं का भी पता लगाता है।

बीएनपी टेस्ट की तैयारी कैसे करें?

इस टेस्ट के लिए आपको किसी विशेष तैयारी की जरूरत नहीं है हालांकि यदि आप कोई भी दवा ले रहे हैं तो इसके बारे में डॉक्टर को बता दें क्योंकि कुछ दवाएं टेस्ट के परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं।

बीएनपी टेस्ट कैसे किया जाता है?

टेस्ट के लिए ब्लड सैंपल लेने की जरूरत होगी। डॉक्टर आपकी बांह की नस में सुई लगाकर ब्लड सैंपल ले लेंगे। निकाले गए खून के सैंपल को किसी ट्यूब या कंटेनर में लिया जाएगा।

कुछ लोगों को टेस्ट के बाद हल्का सा चक्कर भी आ सकता है और इंजेक्शन लगी जगह पर नील भी पड़ सकता है। ब्लड सैंपल लेने से कुछ जोखिम जुड़े हुए हैं, जैसे:

  • सैंपल लेने में कठिनाई 
  • रक्त ली गई जगह से अत्यधिक रक्त स्त्राव होना
  • हीमेटोमा (त्वचा में रक्त का जमना)
  • सुई लगी जगह पर संक्रमण होना

हालांकि उचित सावधानियां बरतने पर इन जोखिमों को कम किया जा सकता है।

बीएनपी टेस्ट के परिणाम क्या बताते हैं?

सामान्य परिणाम:
आमतौर पर बीएनपी के स्तर पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक होते हैं और उम्र के साथ धीरे-धीरे बढ़ते हैं। हालांकि अगर हार्ट फेलियर की समस्या ना हो तो कई बार ये सामान्य स्तर पर ही रहते हैं।

आपकी उम्र और लिंग के अनुसार डॉक्टर रिजल्ट का मतलब समझाएंगे।

अधिकतर लोगों के लिए सामान्य वैल्यू: <100 पिकोग्राम /मिलीलीटर (pg/mL) होती है।

इसका मतलब है कि आपको हार्ट फेलियर नहीं हुआ है। यदि लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो इसका मतलब यह होगा कि इन लक्षणों का कारण हार्ट फेलियर नहीं बल्कि कोई और स्थिति है। 

यह जान लेना जरूरी है कि टेस्ट के तरीकों और अन्य तत्वों के अनुसार हर लैब के सामान्य परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं। इसीलिए यह जरूरी है कि परिणामों की सटीक जानकारी के लिए डॉक्टर से मिलें। 

असामान्य परिणाम:
यदि टेस्ट के रिजल्ट में 100 pg/mL से अधिक वैल्यू आती है, तो इसे असामान्य परिणाम माना जाता है। बीएनपी के स्तर में वृद्धि हार्ट फेलियर की ओर संकेत करती है। जितनी ज्यादा वैल्यू होगी उतनी ही अधिक हार्ट फेलियर की गंभीरता होगी। 

हालांकि निम्न स्थितियां भी बीएनपी के स्तर को बढ़ा सकती हैं:

ये टेस्ट ट्रीटमेंट के प्रभाव पर नजर रखने के लिए भी किया जा सकता है। यदि बीएनपी के स्तर ट्रीटमेंट के बाद भी वही रहते हैं तो इसका मतलब है कि बीमारी बढ़ रही है या ट्रीटमेंट का कोई प्रभाव नहीं हो रहा।

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References

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