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क्या आपके डॉक्टर ने आपको कभी EMG नामक कोई जांच करवाने का आदेश दिया है? यदि ऐसा हुआ है तो आप जरूर जानते होंगे कि इलेक्ट्रोमायोग्राफी (EMG) यानी ईएमजी मांसपेशियों के स्वास्थ्य की स्थिति और उन्हें नियंत्रित करने वाली तंत्रिका कोशिकाओं का मूल्यांकन करने की एक जांच ​​प्रक्रिया है। इन तंत्रिका कोशिकाओं को मोटर न्यूरॉन्स के रूप में जाना जाता है। ये तंत्रिका कोशिकाएं विद्युत संकेतों को संचारित करती हैं, जिनसे मांसपेशियों में संकुचन तथा सामान्य स्थिति बहाल होती है। ईएमजी टेस्ट इन संकेतों को ग्राफ या संख्याओं में बदलता है, जिससे डॉक्टरों को रोग का पता करने में मदद मिलती है।

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डॉक्टर आमतौर पर ईएमजी टेस्ट करवाने के लिए तब कहते हैं, जब किसी व्यक्ति में मांसपेशी या तंत्रिका विकार के लक्षण दिख रहे हो। मांसपेशी या तंत्रिका विकार के कारण अंगों में झुनझुनी, सुन्नता या कमजोरी जैसे लक्षण पैदा हो सकते हैं। ईएमजी टेस्ट के परिणाम डॉक्टर को मांसपेशियों के विकारों, तंत्रिका विकारों तथा नसों और मांसपेशियों के बीच संबंध को प्रभावित करने वाले विकारों का निदान करने में मदद कर सकते हैं। कुछ डॉक्टर इलेक्ट्रोमायोग्राफी को इलेक्ट्रोडायग्नॉस्टिक एग्जाम भी कहते हैं।

इस लेख में ईएमजी टेस्ट क्या है, कब किया जाता है, ईएमजी टेस्ट के पहले, दौरान और बाद में क्या होता है और ईएमजी टेस्ट के परिणामों को कैसे समझे इसके बारे में विस्तार से बताया गया है।

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  1. ईएमजी टेस्ट क्या होता है? - What is Electromyography (EMG) in Hindi?
  2. ईएमजी टेस्ट क्यों किया जाता है - What is the purpose of Electromyography (EMG) in Hindi
  3. ईएमजी टेस्ट से पहले - Before Electromyography (EMG) in Hindi
  4. ईएमजी टेस्ट के दौरान - During Electromyography (EMG) in Hindi
  5. ईएमजी टेस्ट के बाद - After Electromyography (EMG) in Hindi
  6. ईएमजी टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं - What are the risks of Electromyography (EMG) in Hindi
  7. ईएमजी टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of Electromyography (EMG) mean in Hindi

ईएमजी टेस्ट क्या है?
ईएमजी (EMG) का पूरा नाम इलेक्ट्रोमायोग्राफी है, इसका मतलब है नसों तथा मांसपेशियों का विद्युत परीक्षण करना। ईएमजी टेस्ट एक विशेषज्ञ या विशेष रूप से प्रशिक्षित एमडी, इलेक्ट्रोमायोग्राफर द्वारा किया जाता है, जो आमतौर पर न्यूरोलॉजिस्ट होता है। इस टेस्ट के कुछ हिस्सों को विशेष रूप से प्रशिक्षित तकनीशियन द्वारा भी किया जा सकता है। इस प्रक्रिया के लिए अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती है। 

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औसतन, ईएमजी टेस्ट करने में 30 मिनट से 2 घंटे का समय लग सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपके डॉक्टर कितनी व्यापक जांच करते हैं। यह टेस्ट दिन में किसी भी समय किया जा सकता है और कुछ अपवादों को छोड़ दें तो इसके लिए किसी विशेष तैयारी की भी आवश्यकता नहीं है।

ईएमजी टेस्ट में दो भाग होते हैं:

  • टेस्ट के पहले भाग में नर्व कन्डक्शन स्टडी (एनसीएस) होती है, जो एक टेक्नोलॉजिस्ट द्वारा की जाती है। यह भाग नसों की संबंधित मांसपेशियों तक विद्युत आवेगों या संदेशों को प्रसारित करने (भेजने) की क्षमता को मापता है। इस भाग में एक हल्की और संक्षिप्त विद्युत उत्तेजना तकनीक का उपयोग होता है। (और पढ़ें - एसजीपीटी टेस्ट क्या है)
  • टेस्ट के दूसरे भाग को नीडल इलेक्ट्रोड एग्जामिनेशन कहा जाता है, जो एक डॉक्टर द्वारा किया जाता है। यह भाग मांसपेशियों में विद्युत गतिविधि की जांच करता और मापता है। इस प्रक्रिया में बहुत पतली गेज सुई डाली जाती है जो मांसपेशियों में माइक्रोफोन की तरह काम करती है। सुई के माध्यम से कुछ भी त्वचा के अंदर या बाहर नहीं निकाला जाता है। व्यक्ति की चिकित्सीय ​​समस्या के आधार पर कई मांसपेशियों की इस तरह से जांच की जाती है। (और पढ़ें - थायराइड फंक्शन टेस्ट)

टेस्ट के दोनों भागों के दौरान, रोगी को कुछ असहजता महसूस हो सकती है।

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ईएमजी टेस्ट क्यों किया जाता है?
जब आप आपको कमजोरी, झुनझुनी, सुन्नता, मांसपेशियों में दर्द, ऐंठन या अन्य असामान्य संवेदनाएं या लक्षण महसूस हो, तो आपके डॉक्टर ईएमजी टेस्ट करवाने के लिए कह सकते हैं। कई अन्य चिकित्सा समस्याएं भी हैं जिनमें ईएमजी टेस्ट की आवश्यकता हो सकती हैं।

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यह टेस्ट आपके लक्षणों के कारण की पहचान करने में मदद कर सकता है और यह निर्धारित करने में भी मदद कर सकता है कि समस्या कितने समय से मौजूद है। टेस्ट के परिणाम से चिकित्सक को यह तय करने में मदद मिलती है कि विकार का इलाज कैसे किया जाए। यदि आपको यह टेस्ट करवाने के लिए कहा जाता है तो आप अपने डॉक्टर से भी पता कर सकते हैं कि आपको इस टेस्ट की आवश्यकता क्यों है।

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ईएमजी टेस्ट से पहले क्या करें?

  • आमतौर पर, इस टेस्ट से पहले उपवास की आवश्यकता नहीं होती है। कुछ मामलों में, सिगरेट और कैफीन युक्त पेय पदार्थ जैसे कि कॉफीचाय और कोला को टेस्ट से दो से तीन घंटे पहले प्रतिबंधित किया जा सकता है। (और पढ़ें - सिगरेट पीने के नुकसान)
  • आप जो भी दवाएं (डॉक्टर द्वारा लिखित तथा ओवर-द-काउंटर) और हर्बल सप्लीमेंट्स ले रहे हैं, उनके बारे में अपने डॉक्टर को सूचित करें। यदि आप पेसमेकर का उपयोग करते हैं तो इसके बारे में भी अपने डॉक्टर को सूचित करें। (और पढ़ें - पेसमेकर सर्जरी कैसे होती है)
  • ऐसे कपड़े पहने जिनको जांच वाले क्षेत्र से आसानी से हटाया जा सकता है।
  • इस प्रक्रिया से पहले कुछ दिनों के लिए अपनी त्वचा पर लोशन या तेल का उपयोग करना बंद कर दें या कम से कम टेस्ट के दिन उनका उपयोग करना बंद कर दें।

आपकी चिकित्सा स्थिति के अनुसार, डॉक्टर किसी अन्य विशिष्ट तैयारी का भी अनुरोध कर सकते हैं। आपके डॉक्टर से आप इस प्रक्रिया के बारे में सभी चीजें समझ सकते हैं और यदि आपका कोई भी प्रश्न है तो वह भी उनसे पूछ सकते हैं।

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EMG टेस्ट के दौरान क्या होता हैं?
आम तौर पर, EMG टेस्ट के दौरान निम्नलिखित प्रक्रिया का अनुसरण किया जाता है:

  • आपको कोई भी कपड़ा, गहने, हेयरपिन, चश्मा, श्रवण यंत्र या अन्य धातु की वस्तु जो प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर सकती हैं उनको हटाने के लिए कहा जाएगा। यदि आपसे कपड़े हटाने के लिए कहा जाता है, तो आपको पहनने के लिए हॉस्पिटल वाले कपड़े दिए जाते हैं। 
  • आपको जांच के लिए बैठने या लेटने के लिए कहा जाता है। (और पढ़ें - हीमोग्लोबिन टेस्ट क्या है)
  • आपके न्यूरोलॉजिस्ट टेस्ट के लिए संबंधित पेशी का पता लगाते हैं।
  • एंटीसेप्टिक घोल से उस क्षेत्र की त्वचा साफ की जाती है। अब, एक स्वच्छ और नई सुई पेशी में डाली जाती है। एक ग्राउंड इलेक्ट्रोड आपके हाथ या पैर के नीचे रखा जाता है। (और पढ़ें - एलिसा टेस्ट क्या है)
  • टेस्ट के लिए लगभग पांच या अधिक सुई की आवश्यकता हो सकती है। आप इलेक्ट्रोड डालने से मामूली दर्द महसूस कर सकते हैं, लेकिन यह आमतौर पर दर्द रहित होता है।
  • यदि परीक्षण दर्दनाक है, तो आपको अपने डॉक्टर को बताना होगा क्योंकि यह टेस्ट के परिणाम प्रभावित कर सकता है। (और पढ़ें - एल्बुमिन टेस्ट क्या है)
  • आपको मांसपेशियों को ढीला छोड़ने और फिर हल्की या पूरी ताकत से मांसपेशियों के संकुचन के लिए कहा जाएगा।
  • आपकी उस मांसपेशी में होने वाली विद्युत तरंगों की गतिविधि को ऑसिलोस्कोप पर मापा और प्रदर्शित किया जाएगा। (और पढ़ें - बिलीरुबिन टेस्ट क्या है)
  • एक ऑडियो एम्पलीफायर भी इस्तेमाल किया जा सकता है ताकि विद्युत तरंगों की क्षमता और ध्वनि दोनों का मूल्यांकन किया जा सके। यदि रिकॉर्डर एक ऑडियो एम्पलीफायर से जुड़ा हुआ है, तो आप अपनी मांसपेशियों को संकुचित करते समय टिन की छत पर ओले गिरने जैसी आवाज सुन सकते हैं।

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EMG टेस्ट के बाद क्या करें?
EMG टेस्ट की प्रक्रिया के बाद मांसपेशियों में दर्द एक दिन या कुछ दिन तक बना रह सकता है। यदि आप सुई डालने की जगहों पर दर्द, कोमलता, सूजन या मवाद का अनुभव करते हैं तो अपने डॉक्टर को सूचित करें। डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार टेस्ट के बाद कुछ अतिरिक्त या वैकल्पिक निर्देशों का पालन करने के लिए कह सकते हैं।

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EMG टेस्ट के जोखिम क्या हैं?
EMG टेस्ट के कुछ मामूली जोखिम हो सकते हैं, जैसे:

  • सुई इलेक्ट्रोड को आपकी मांसपेशी में डालने पर आपको थोड़ी असुविधा महसूस हो सकती है। यह एक्यूपंक्चर में सुई चुभाने जैसा महसूस हो सकता है। बाद में, आपकी मांसपेशियों में कुछ दिनों के लिए दर्द महसूस हो सकता है या मामूली सूजन आ सकती है।
  • एंटीकोगुलेंट थेरेपी यानि वॉरफेरिन जैसी खून पतला करने वाली दवा लेने वाले लोगों में ईएमजी टेस्ट नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि सुई इलेक्ट्रोड मांसपेशियों के भीतर रक्तस्राव का कारण हो सकती है।

आपकी विशिष्ट चिकित्सा स्थिति के चलते कुछ अन्य जोखिम भी हो सकते हैं। इसलिए अपनी वर्तमान स्थिति के बारे में अपने डॉक्टर को सही जानकारी दें।

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EMG टेस्ट के परिणामों का क्या मतलब है?
यदि आपके ईएमजी टेस्ट में आराम की स्थिति वाली मांसपेशी में कोई विद्युत तरंगों की गतिविधि दिखती है, तो आपको निम्नलिखित कोई समस्या हो सकती है:

  • मांसपेशी विकार
  • मांसपेशियों से जुड़ी तंत्रिका को प्रभावित करने वाला विकार
  • सुई चुभाने के कारण सूजन (और पढ़ें - सूजन दूर करने का तरीका)
  • यदि आपका ईएमजी टेस्ट मांसपेशी को संकुचित करने के दौरान विद्युत तरंगों की असामान्य गतिविधि दिखाता है, तो आपको हर्नियेटेड डिस्क या एएलएस (एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस) या कार्पल टनल सिंड्रोम जैसे तंत्रिका विकार हो सकते हैं। (और पढ़ें - स्लिप डिस्क का इलाज)

आपके परिणामों के आधार पर, डॉक्टर आपसे किसी भी अतिरिक्त टेस्ट या उपचार के बारे में बात करेंगे।

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References

  1. Daroff RB, et al. Clinical electromyography. In: Bradley's Neurology in Clinical Practice. 7th ed. Philadelphia, Pa.: Saunders Elsevier; 2016
  2. KR Mills. The basics of electromyography. J Neurol Neurosurg Psychiatry 2005;76(Suppl II):ii32–ii35.
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