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गर्भावस्था के दौरान, विकसित हो रहे भ्रूण के सेल्स एचसीजी तैयार करते हैं। प्लेसेंटा एक तरह की थैली होती है, जो अंडों के विकसित होने और गर्भाशय की दिवारों से जुड़ने के बाद उन्हें पोषित करती है। गर्भधारण के 11 दिनों बाद एचसीजी को खून की जांच से पता किया जा सकता है। एचसीजी का स्तर हर 48 घंटों से लेकर 72 घंटों के बीच दोगुना होता रहता है। गर्भधारण के 8वें सप्ताह से लेकर 11वें सप्ताह के बीच वो अधिकतम होता है। उसके बाद एचसीजी का स्तर घटने लगता है और वो शून्य तक पहुंच जाता है।

(और पढ़ें - गर्भधारण कैसे होता है)

  1. ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन टेस्ट क्या होता है? - What is Human Chorionic Gonadotropin test in Hindi?
  2. ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन टेस्ट क्यों किया जाता है? - What is the purpose of HCG test in Hindi?
  3. ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन टेस्ट से पहले - Before HCG test in Hindi
  4. ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन टेस्ट के दौरान - During HCG Test in Hindi
  5. ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन टेस्ट के बाद - After HCG test in Hindi
  6. ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं? - What are the risks of HCG test in Hindi?
  7. ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है? - What do the results of HCG test mean in Hindi?

एचसीजी का पूरा नाम ह्यूमन गोनाडोट्रॉपिन है। एचसीजी ब्लड टेस्ट से खून में मौजूद एचसीजी हार्मोन की मात्रा को मापा जाता है। यह हार्मोन गर्भावस्था के दौरान तैयार होता है। एचसीजी की जांच डॉक्टर अलग-अलग नामों से करवाते हैं, जो निम्नलिखित हैं:

  • बीटा-एचसीजी ब्लड टेस्ट
  • क्वांटिटेटिव ब्लड प्रेगनेंसी टेस्ट
  • क्वांटिटेटिव एचसीजी ब्लड टेस्ट
  • क्वांटिटेटिव सीरियल बीटा-एचसीजी टेस्ट
  • रिपीट क्वांटीटेटिव बीटा-एचसीजी टेस्ट

(और पढ़ें - प्रेगनेंसी टेस्ट कैसे करें)

एचसीजी खून की जांच और एचसीजी यूरीन की जांच में महत्वपूर्ण अंतर हैं। इन्हें आप काउंटर पर पता कर सकते हैं। यूरीन टेस्ट डिहाइड्रेशन और टेस्ट के दिन जैसे तमाम फैक्टर्स से प्रभावित हो सकते हैं। जबकि एचसीजी ब्लड टेस्ट से ज्यादा सटीक परिणाम मिल सकते हैं। ब्लड टेस्ट से एचसीजी की मात्रा बहुत कम होन पर भी सटीक परिणाम मिल सकते हैं। 

एचसीजी टेस्ट को निम्नलिखित कारणों से किया जाता है:

  • गर्भावस्था की पुष्टि करने के लिए।
  • भ्रूण की सटीक उम्र पता करने के लिए।
  • किसी असाधारण गर्भावस्था के उपचार के लिए।
  • किसी संभावित गर्भपात की स्थिति में उपचार के लिए।
  • डाउन सिंड्रोम के लिए।

एचसीजी ब्लड टेस्ट कई बार गर्भवती महिला के किसी विशेष इलाज की शुरूआत से पहले तब किया जाता है, जब इस बात की आशंका होती है कि इलाज के दौरान गर्भ में पल रहे बच्चे पर इलाज का असर पड़ सकता है। एक्स-रे इसका उदाहरण है।

(और पढ़ें - सीआरपी ब्लड टेस्ट क्या है)

एचसीजी टेस्ट से पहले किसी विशेष तरह की तैयारी की जरूरत नहीं होती है। दरअसल इस टेस्ट के लिए आपके खून का सैंपल लिया जाता है। इसलिए इसमें किसी विशेष तैयारी की जरूरत नहीं होती है। फिर भी जांच करवाने जाते समय बेहतर होगा कि ठीले कपड़े पहनकर जाएं। विशेष तौर पर या तो हाफ बांह की शर्ट या फिर ढीले बांह की शर्ट पहने। इससे खून निकालने के लिए कपड़े खिसकाते समय समस्या नहीं होगी।

(और पढ़ें - ब्लड ग्रुप टेस्ट कैसे होता है)

क्वांटिटेटिव टेस्ट से खून में एचसीजी हार्मोन की मात्रा मापते हैं। डॉक्टर आपके खून का नमूना निम्नलिखित तरीके से लेते हैं:

  • सबसे पहले तो जिस नस से खून निकालना होता है, उसके चारों ओर अल्कोहल से स्किन को साफ कर दिया जाता है।
  • इसके बाद उस जगह पर एक इलास्टिक बैंड बांध दिया जाता है। इससे उस जगह से खून का बहाव रुक जाता है जिसके कारण खून की नसें उभर आती हैं। अब उस जगह से नसों में से खून का सैंपल लेना आसान हो जाता है।
  • इसके बाद नस में सूई चुभोकर खून निकाला जाता है। सूई के दूसरे सिरे पर पहले से ही एक शीशी लगी होती है। इस शीशी में खून को इकट्ठा कर लेते हैं। (और पढ़ें - मल में खून आने का इलाज)
  • इसके बाद जैसे ही सूई को निकाला जाता है, उस स्थान से खून निकलने से रोकने के लिए वहां पर रुई या किसी गत्ते से सहलाया जाता है।
  • रूई या गत्ता रखने के बाद उन्हें किसी पट्टी से बांध देते हैं। 
  • सूई चुभोए जाने पर आपको हल्का सा चुभन जैसा दर्द हो सकता है। इसके अलावा आपको किसी तरह को कोई तकलीफ नहीं होगी। 
  • जिस समय सूई आपकी नसों में होती है, उस समय आपको थोड़ी सी तकलीफ या फिर असहजता महसूस हो सकती है। हालांकि उसके बाद जल्द ही आपकी सारी तकलीफ दूर हो जाती है। सूई चुभोए जाने वाली जगह पर आपको हल्का सा कंपन महसूस हो सकता है। 
  • एचसीजी स्तर की जांच करने के बाद जांच रिपोर्ट को डॉक्टर को भेज दिया जाता है। इसके बाद आपके डॉक्टर आपसे परिणाम के बारे में बात करने के लिए बुला सकते हैं। इस टेस्ट के लिए किसी विशेष तरह की तैयारी आवश्यक नहीं है।

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नस में से खून का सैंपल लेने के लिए सूई चुभोए जाने पर कुछ लोगों को हल्का सा दर्द हो सकता है। इस दर्द का एहसास अलग-अलग लोगों में अलग-अलग होता है। कुछ लोगों को हल्की सी चुभन का अहसास हो सकता है। खून का सैंपल लेने के बाद उस जगह पर रूई में स्पिरीट या कोई दूसरा एंटीसेप्टिक लगाकर उस जगह पर थोड़ी देरी के लिए हल्का सा सहला देते हैं। ऐसा करने से खून बाहर बहना बंद हो जाता है और संक्रमण से नहीं फैलता है। हालांकि सूई निकालने के बाद वहां हल्की सी तकलीफ हो सकती है, जो जल्द ही ठीक हो जाती है।

(और पढ़ें - कैल्शियम ब्लड टेस्ट क्या है)

इस टेस्ट के लिए खून निकालने में कुछ खास ख़तरे नहीं हैं। फिर भी, जिस जगह पर सुई चुभोई जाती है, वहां पर थोड़ी सी तकलीफ हो सकती है। लेकिन सुई निकाल लेने के बाद उस जगह पर कुछ देर तक हल्के हाथों से सहलाने और दबाने से ठीक हो जाता है। बहुत कम मामलों में निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं: 

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जांच रिपोर्ट के आ जाने के बाद डॉक्टर आपसे आपके एचसीजी के लेवेल के बारे में बताएंगे। एचसीजी के ये लेवेल खून के एचसीजी हॉर्मोन/मिलीलीटर के मिली-इंटरनेशनल यूनिट में मापे जाते हैं।

निचे दी गई सारणी गर्भावस्था के दौरान सामान्य एचसीजी स्तर बताती है। ये आंकड़े ऑस्ट्रेलिया की सरकार द्वारा महिलाओं की अंतिम माहवारी, बच्चे के जन्म और बच्चों पर किए गये शोध पर आधारित हैं।

सप्ताह (अंतिम माहवारी के सप्ताह से) सामान्य एचसीजी का लेवेल (mIU/mL)
4 0-750
5 200-7,000
6 200-32,000
7 3,000-160,000
8-12 32,000-210,000
13-16 9,000-210,000
16-29 1,400-53,000
29-41 940-60,000

जो महिलाएं गर्भवती नहीं हैं उनमें सामान्य एचसीजी का स्तर 10.0 mIU/mL से कम होता है। अगर आपका एचसीजी का स्तर सामान्य रेंज के बाहर है तो इसके कई कारण हो सकते हैं। इसके बारे में आपके डॉक्टर आपको बताएंगे।

एचसीजी का स्तर सामान्य से कम होने के निम्नलिखित मतलब हो सकते हैं: 

  • गर्भावस्था की तारीख के बारे में सही जानकारी न होना।
  • संभावित मिसकैरेज या फूला हुआ गर्भ।
  • बच्चे का गर्भाशय में न होना।

एचसीजी का स्तर सामान्य से अधिक होने के निम्नलिखित मतलब हो सकते हैं:

  • गर्भावस्था की तारीख के बारे में सही जानकारी न होना।
  • एक ऐसी गर्भावस्था, जिसमें गर्भ के भीतर भ्रूण के सामान्य विकास की बजाय असाधारण विकास होना।
  • गर्भ में एक से अधिक भ्रूण का पलना।

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References

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