लम्बर स्पाइन एक्स रे क्या है?

लंबोसैक्रल या लम्बर स्पाइन एक्स रे एक इमेजिंग टेस्ट है, जिसकी मदद से रीढ़ के निचले हिस्से (बैकबोन) की हड्डियों की छवियां तैयार की जाती हैं।

रीढ़ के निचले हिस्से में 'लम्बर स्पाइन' और 'सैक्रम' शामिल हैं। लंबर स्पाइन पांच छोटी (एल1 से लेकर एल5) हड्डियों से बनी होती है, जिन्हें कशेरुक कहा जाता है। इनके ठीक नीचे वाले हिस्से को सैक्रम कहा जाता है और यह भी पांच हड्डियों (एस1 से लेकर एस5) से मिलकर बनी होती हैं।

एक्स-रे इमेजिंग टेस्ट में हड्डियों की तस्वीरें लेने के लिए कुछ मात्रा में रेडिएशन का प्रयोग किया जाता है। हालांकि, यह मांसपेशियों, तंत्रिकाओं या डिस्क (कशेरुकाओं के बीच के नरम ऊतक) में समस्याओं का पता नहीं लगा सकता है।

  1. लम्बर स्पाइन एक्स-रे कौन नहीं करा सकता है? - Who cannot have a Lumbar Spine X-ray in Hindi?
  2. लम्बर स्पाइन का एक्स-रे क्यों किया जाता है? - Why is a lumbar spine X-ray done in Hindi?
  3. लम्बर स्पाइन एक्स-रे के लिए तैयारी - Lumbar Spine X-ray preparation in Hindi?
  4. लम्बर स्पाइन एक्स-रे कैसे किया जाता है? - Lumbar Spine X-ray procedure in Hindi?
  5. लम्बर स्पाइन एक्स-रे के दौरान कैसा महसूस होता है? - How does a Lumbar Spine X-ray feel in Hindi?
  6. लम्बर स्पाइन एक्स-रे परिणामों का क्या मतलब है? - Lumbar Spine X-ray mean in Hindi?
  7. लंबोसैक्रल या लम्बर स्पाइन एक्स-रे के जोखिम और लाभ क्या हैं? - Lumbar Spine X-ray risks and benefits in Hindi
  8. लंबोसैक्रल या लम्बर स्पाइन एक्स-रे के बाद क्या होता है? - What happens after a Lumbar Spine X-ray in Hindi
  9. लंबोसैक्रल या लम्बर स्पाइन एक्स-रे के साथ और कौन से टेस्ट किए जा सकते हैं? - Other tests can be done with Lumbar Spine X-ray in Hindi
लम्बर स्पाइन एक्स रे के डॉक्टर

डॉक्टर अक्सर गर्भवती महिलाओं में लंबोसैक्रल या लम्बर स्पाइन एक्स रे कराने का सुझाव नहीं देते हैं।

(और पढ़ें - गर्भावस्था में होने वाली परेशानियां)

​निम्न स्थितियों में पीठ के निचले हिस्से में दर्द का कारण निर्धारित करने के लिए डॉक्टर यह टेस्ट लिख सकते हैं :

  • जब दर्द एक से दो महीने तक बना रहता है
  • बहुत तेज दर्द होने पर
  • चोट के बाद दर्द होने पर
  • वृद्ध व्यक्ति में दर्द होने पर

एक्स-रे निम्नलिखित स्थितियों का निदान करने में भी मदद कर सकता है :

  • फ्रैक्चर
  • गठिया
  • जन्मजात असामान्यता
  • स्पोंडिलोलिस्थीसिस (कशेरुक का उसके नीचे वाले हिस्से से खिसकना)
  • स्कोलियोसिस (रीढ़ की वक्रता में असामान्यता)
  • ट्यूमर
  • डिस्क को नुकसान पहुंचना

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लंबोसैक्रल या लम्बर स्पाइन एक्स-रे के लिए व्यक्ति को बेहोश करने या खाली पेट रहने की जरूरत नहीं होती है। लेकिन हां, बेहतर होगा कि आप अपने सारे आभूषण व धातु से बनी वस्तुओं को उतारकर टेस्ट के लिए जाएं या फिर किसी सहयोगी के साथ हॉस्पिटल जाएं और टेस्ट के लिए जाने से पहले उसे पकड़ा दें। इस तरह की वस्तुएं टेस्ट में बाधा उत्पन्न कर सकती हैं। इसके अलावा यदि आप गर्भवती हैं या आपको गर्भवती होने का संदेह है, तो इस बारे में डॉक्टर को जरूर से बताएं।

(और पढ़ें - स्लिप डिस्क के लिए योगासन)

लंबोसैक्रल या लम्बर स्पाइन एक्स-रे करते समय निम्नलिखित स्टेप्स को ध्यान में रखा जाता है :

  • सबसे पहले आपको एक्स-रे टेबल पर पीठ के बल लेटने के लिए कहा जाएगा।
  • तकनीशियन आपकी पीठ के निचले हिस्से पर एक बड़ा कैमरा लगाएंगे। जब कैमरा चलता है तो टेबल के नीचे रखी फिल्म में रीढ़ की छवियां कैप्चर हो जाती हैं।
  • डॉक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों के आधार पर आपको अलग-अलग स्थिति में लेटना पड़ सकता है या एक्स-रे के दौरान खड़े भी रहना पड़ सकता है।
  • शरीर के जिन हिस्सों की तस्वीर नहीं बनाई जानी है, उन्हें रेडिएशन से बचाने के लिए एप्रन (एक तरह का कपड़ा) से ढक दिया जाता है।
  • तकनीशियन आमतौर पर तीन से पांच एक्स-रे चित्र ले सकते हैं।
  • छवियों को धुंधली होने से बचाने के लिए एक्स-रे छवियों को लेते समय आपको अपनी सांस रोककर रखने और स्थिर रहने की आवश्यकता हो सकती है।

लंबोसैक्रल या लम्बर स्पाइन एक्स-रे में लगभग आधे घंटे से लेकर 45 मिनट तक का समय लग सकता है।

चूंकि इस दौरान एक्स-रे टेबल पर लेटना होता है, ऐसे में आपको टेबल ठंडी महसूस हो सकती है, लेकिन इस दौरान आमतौर पर कोई अन्य असुविधा महसूस नहीं होती है।

(और पढ़ें - रीढ़ की हड्डी में दर्द का इलाज)

लंबोसैक्रल या लम्बर स्पाइन एक्स-रे से निम्नलिखित असामान्यताओं के बारे में पता चल सकता है :

  • हड्डियों और उपास्थि को नुकसान पहुंचना, जैसे कि कशेरुक के बीच के जोड़ों का संकुचित होना
  • रीढ़ की वक्रता में असामान्यता
  • फ्रैक्चर
  • ऐसे जन्म दोष जो रीढ़ को प्रभावित करते हैं 
  • स्पोंडिलोलिस्थीसिस (लंबर वाले हिस्से में कशेरुक का अपने स्थान से खिसकना)
  • ऑस्टियोपोरोसिस
  • कैंसर
  • गठिया

(और पढ़ें - गठिया का होम्योपैथिक इलाज)

एक्स-रे के लाभ हैं :

  • यह जल्दी और आसानी से हो जाता है
  • इस प्रक्रिया में दर्द नहीं होता है
  • एक्स-रे प्रक्रिया पूरी होने के बाद, रेडिएशन का असर नहीं होता है

एक्स-रे से जुड़े जोखिम हैं :

  • कुछ मात्रा में ही सही, लेकिन रेडिएशन का इस्तेमाल होता है ऐसे में जीवन में बाद के चरणों में कैंसर विकसित होने का छोटा जोखिम रहता है
  • गर्भवती महिलाओं के लिए एक्स-रे सुझाया नहीं जाता है, क्योंकि रेडिएशन की वजह से बच्चे में जन्म दोष हो सकता है

(और पढ़ें - रीढ़ की हड्डी में टेढ़ापन)

लंबोसैक्रल या लम्बर स्पाइन एक्स-रे के बाद आप अपनी नियमित गतिविधियों को जारी रख सकते हैं।

(और पढ़ें - रीढ़ की हड्डी की चोट का इलाज)

लंबोसैक्रल या लम्बर स्पाइन एक्स-रे स्लिप्ड डिस्क, स्पाइनल स्टेनोसिस (रीढ़ की हड्डी का संकरा होना) और साइटिका (साइटिका नस में दर्द जो पीठ के निचले हिस्से से पैर की ओर बढ़ता है) से संबंधित पीठ की समस्याओं का पता नहीं लगा सकता है। ऐसे में सटीक निदान के लिए, डॉक्टर अन्य टेस्ट कराने के लिए सलाह दे सकते हैं :

  • मैग्नेटिक रिसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई)
  • कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन

ध्यान रहे: इन भी टेस्ट के परिणाम रोगी के नैदानिक स्थितियों से सहसंबद्ध यानी जुड़े होने चाहिए। ऊपर मौजूद जानकारी शैक्षिक दृष्टिकोण से दी गई है और यह किसी भी डॉक्टर द्वारा सुझाए गए मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं है।

Dr. Rachita Gupta

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