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पीरियोडिक एसिड स्किफ (पीएएस) स्टेन क्या है?

पीएएस स्टेन एक स्टेनिंग प्रक्रिया है, लैब में जिसका उपयोग कार्बोहाइड्रेट के मॉलिक्यूल की जांच करने के लिए किया जाता है, जिसमें प्राथमिक तौर पर ग्लाइकोजन और प्रोटियोग्लाइकन शामिल है। यह आमतौर पर शरीर के उन हिस्सों व संरचनाओं की जांच करने के लिए किया जाता है, जिनमें इन कार्बोहाइड्रेट की अधिकता होती है।

ग्लाइकोजन पूरे शरीर में कुछ मात्रा में पाया जाता है। हालांकि, यह अधिकतर मात्रा में लिवर, एंडोमेट्रियल ग्लैंड, वजाइनल एपिथेलियम, हृदय की मांसपेशियों और स्केलेटल मांसपेशियों में बनाया जाता है।

स्टैनिंग टिशू टेस्ट उस ऊतक को विशेष रंग के साथ प्रदर्शित करता है, जिसकी जांच की गई है। इससे जांचकर्ता को माइक्रोस्कोप के अंदर ऊतकों और कोशिकाओं को जांचने में मदद मिलती है। पीएएस का प्रयोग शरीर के अन्य भागों को स्टेन करने के लिए भी किया जा सकता है, जिनमें कनेक्टिव टिशू, बलगम और बेसमेंट मेम्ब्रेन भी शामिल हैं।

इस स्टेन में ऊतकों को अभिरंजित करने के लिए केमिकल पीरियोडिक एसिड और स्किफ रीजेंट का प्रयोग किया जाता है। कभी-कभी दूसरे स्टेन जैसे हेमेटोक्सिलिन को पीएएस स्टेन के साथ अच्छे विज़ुअल प्रभावों के लिए और न्यूक्लियस या ऊतक के अन्य तत्वों को ठीक तरह से देखने के लिए प्रयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया को काउंटरस्टेनिंग कहा जाता है।

  1. पीरियोडिक एसिड स्किफ (पीएएस) स्टेन क्यों किया जाता है - Periodic acid schiff (PAS) stain kyu kiya jata hai
  2. पीरियोडिक एसिड स्किफ (पीएएस) स्टेन से पहले - Periodic acid schiff (PAS) stain se pahle
  3. पीरियोडिक एसिड स्किफ (पीएएस) स्टेन के दौरान - Periodic acid schiff (PAS) stain ke dauran
  4. पीरियोडिक एसिड स्किफ (पीएएस) स्टेन के परिणाम का क्या मतलब है - Periodic acid schiff (PAS) stain ke parinam ka kya matlab hai

पीएएस स्टेन टेस्ट का प्रयोग कई सारे मेडिकल कारणों से किया जा सकता है। इनमें निम्न शामिल हैं -

  • लिवर में ग्लाइकोजन के संचरण की जांच
  • ब्लैडर, किडनी, लिवर, अग्नाशय, ओवरी और फेफड़ों के कैंसर के परीक्षण के लिए क्योंकि उनमें ग्लाइकोजन ग्रेन्यूल्स होते हैं
  • फंगल संक्रमण की पहचान करने के लिए जो कि फंगल सेल वाल में अधिक कार्बोहाइड्रेट के कारण किया जाता है

पीएएस स्टेन टेस्ट का उपयोग बेसमेंट मेम्ब्रेन में असामान्यताओं का पता लगाने के लिए किया जाता है। बेसमेंट मेम्ब्रेन में रेशेदार ऊतकों की एक पतली परत है, जो कि शरीर की बाहरी परत से आंतरिक ढांचों को ऊतकों द्वारा अलग करती है। ये शरीर में भिन्न-भिन्न जगहों पर मौजूद होते हैं। पीएएस स्टेन टेस्ट में देखी गई बेसमेंट मेम्ब्रेन की असामान्यताओं से कुछ विशेष विकारों के परीक्षण करने में भी मदद मिलती है। बेसमेंट मेम्ब्रेन टेस्ट का उपयोग किसी ट्यूमर कि गंभीरता को देखने के लिए किया जा सकता है, जिससे यह पता चलता है कि ट्यूमर त्वचा को कितनी मात्रा में प्रभावित कर रहा है।

पीएएस स्टेन का उपयोग डायस्टेस स्टेन के साथ भी किया जा सकता है ऐसा विशेष रूप से ग्लाइकोजन ग्रेन्यूल्स की पहचान करने और ग्लाइकोजन को पीएएस स्टेन में पाए गए पॉजिटिव टिशू एलिमेंट में अंतर करने के लिए किया जाता है।

यह स्टेन नियमित रूप से त्वचा में सूजन व लालिमा संबंधी रोगों की जांच करने के लिए किया जा सकता है।

स्टेनिंग की प्रक्रिया के लिए डॉक्टर को किसी विशेष स्थान के ऊतक लेने की जरूरत होगी जो कि बायोप्सी की प्रक्रिया द्वारा लिया जाएगा।

यदि आप किसी भी तरह की स्वास्थ्य स्थिति से ग्रस्त हैं या फिर किसी भी प्रकार की दवा, विटामिन और हर्ब्स ले रहे हैं, तो बायोप्सी से पहले इनके बारे में डॉक्टर को बता दें। ऐसा इसलिए क्योंकि ये टेस्ट के परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं। कुछ दवाएं जिनके बारे में डॉक्टर को बता दें वो निम्न हैं -

  • एंटी डिप्रेस्सेंट
  • एंटीबायोटिक
  • अस्थमा की दवाएं
  • रक्त को पतला करने वाली दवाएं
  • ब्लड प्रेशर की दवाएं
  • डायबिटीज की दवाएं
  • पेन किलर जिसमें नॉन स्टेरोडिअल इन्फ्ल्मेट्री ड्रग्स और एस्पिरिन शामिल हैं

डॉक्टर आपको टेस्ट से आठ घंटे पहले भूखे रहने को कह सकते हैं।

सुरक्षा की दृष्टि से आपको यह सलाह दी जाएगी कि आप बायोप्सी के बाद स्वयं गाड़ी चलाकर घर न जाएं। कुछ विशेष मामलों में डॉक्टर आपको टेस्ट के लिए अस्पताल में भर्ती कर सकते हैं।

  • टेस्ट प्रक्रिया के लिए आपको अस्पताल एक विशेष ड्रैस पहनने को कहा जाएगा
  • डॉक्टर जरूरत पड़ने पर आपको एक नस के द्वारा सीडेटिव देंगे ताकि आप रिलैक्स महसूस कर सकें। यदि स्किन बायोप्सी की जा रही है तो डॉक्टर उस स्थान को सुन्न करने के लिए लोकल एनेस्थीसिया देंगे
  • इसके बाद उस अंग से ऊतक का सैंपल लिया जाएगा
  • लिए गए सैंपल को आगे लैब में टेस्टिंग के लिए भेज दिया जाएगा

बायोप्सी के साथ कुछ खतरे जुड़े हो सकते हैं। स्किन में बायोप्सी ली गई जगह पर एक छोटा गोल चक्र दिखाई दे सकता है, जिसके चारों ओर लालिमा हो सकती है। वैसे ज्यादातर मामलों में यह लालिमा धीरे-धीरे ठीक हो जाती है। यदि आपको उस स्थान पर लालिमा, पस या दर्द बढ़ता महसूस हो तो इसके बारे में डॉक्टर को बता दें। बायोप्सी के बाद सैंपल लिए गए स्थान को ठीक होने में तीन हफ्तों तक का समय लग सकता है।

बायोप्सी के साथ निम्न खतरे जुड़े हुए हैं -

बायोस्पी किए गए स्थान पर कुछ दिनों के लिए सूजन रह सकती है।

सामान्य परिणाम -

एक सामान्य स्टेनिंग प्रक्रिया जो कि पीएएस स्टेन के साथ की जाती है उसमें ग्लाइकोजन, फंगी और बेसमेंट मेम्ब्रेन गुलाबी और लाल दिखाई देती है।

यदि हिमेटोक्सिलिन डाई का प्रयोग किया गया है तो न्युक्ली नीले रंग का दिखाई देगा। साथ ही अगर हल्के हरे रंग का स्टेन प्रयोग किया है तो यह हरा दिखाई देगा।

असामान्य परिणाम -

पीएएस स्टेन के असामान्य परिणाम निम्न स्थितियों से जुड़े हो सकते हैं -

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References

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  2. Alturkistani Hani A.,Tashkandi Faris M., and Mohammedsaleh Zuhair M. Histological Stains: A Literature Review and Case Study. Glob J Health Sci. 2016 Mar; 8(3): 72–79. PMID: 26493433.
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