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रूबेला टेस्ट क्या है?

रूबेला टेस्ट खून में रूबेला एंटीबॉडीज की संख्या का पता लगाने के लिए और शरीर की रूबेला वायरस से लड़ने की क्षमता का पता लगाने के लिए किया जाता है। रूबेला एंटीबॉडी दो प्रकार के होते हैं: आईजीएम और आईजीजी।

  • रूबेला वायरस के रक्त में जाने के बाद आईजीएम एंटीबाडी पहले सामने आते हैं। आईजीएम एंटीबॉडीज संक्रमण के 7 से 10 दिनों में अत्यधिक स्तर तक पहुंच जाते हैं फिर अगले कुछ हफ़्तों में इसका स्तर गिरने लगता है। यह खून में उपस्थित हो सकता है और संक्रमित नवजात शिशुओं में कुछ महीनो या एक साल के भीतर इसका पता चल लग जाता है।
  • आईजीजी एंटीबॉडीज निकलने में थोड़ा समय लगा सकते हैं लेकिन एक बार आने के बाद ये जीवन भर के लिए रहते है और भविष्य में होने वाले रूबेला संक्रमण से बचाते हैं।

रूबेला एक संक्रामक बीमारी है जो जल्दी फैलती है। यह छींकखांसी और संक्रमित व्यक्ति की लार से भी फैल सकती है। रूबेला को जर्मन मीजल्स भी कहा जाता है, लेकिन यह मीजल्स (खसरा) से अलग होता है। मीजल्स से होने वाले रैशेज, रूबेला रैशेज की तरह नहीं होते। रूबेला रैशेज कम होते हैं और थोड़े समय के लिए ही रहते हैं।

रूबेला कोई घातक बीमारी नहीं है, लेकिन व्यस्कों के लिए एक गंभीर स्थिति बन सकती है। यह वायरस प्लेसेंटा से गर्भाशय में जा कर मिसकैरेज और शिशु में जन्मजात विकार की स्थितियों को पैदा कर सकता है।

  1. रूबेला टेस्ट क्यों किया जाता है - Rubella Test Kyu Kiya Jata Hai
  2. रूबेला टेस्ट से पहले - Rubella Test Se Pahle
  3. रूबेला टेस्ट के दौरान - Rubella Test Ke Dauran
  4. रूबेला टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब है - Rubella Test Ke Parinaam Ka Kya Matlab Hai

रूबेला टेस्ट किसलिए किया जाता है? 

यह टेस्ट गर्भावस्था के शुरुआती महीनो में प्रसव पूर्व होने वाले टेस्ट के रूप में करवाने के लिए कहा जाता है। इस टेस्ट की सलाह उन गर्भवती महिलाओं को भी दी जाती है जिनमें निम्न लक्षण दिखाई देते हैं:

ऐसी महिलाएं जिनमें पहले से रूबेला वायरस से लड़ने की प्रतिरक्षी क्षमता नहीं होती, उनसे वायरस बच्चे में जा कर उसे संक्रमित कर सकता है, जिससे जन्मजात विकार और गर्भपात भी हो सकता है। रूबेला वायरस से आमतौर पर होने वाले जन्मजात विकार हैं:

ऐसे बच्चों में कुछ और समस्याएं देखी जाती है जैसे, थायराइड की समस्या, फेफड़ों में सूजन, ग्लूकोमा और मस्तिष्क क्षतिग्रस्त होना। इसीलिए रूबेला टेस्ट उन बच्चों का भी करवाना चाहिए जिनकी माता गर्भावस्था के दौराम रूबेला वायरस से संक्रमित थीं।

नवजात शिशुओं में रूबेला वायरस से हुए जन्मजात विकारों का इलाज किया जा सकता है लेकिन क्रोनिक रूबेला सिंड्रोम का इलाज नहीं किया जा सकता। इसीलिए यह हर गर्भवती महिला के लिए आवश्यक है कि वे रूबेला टेस्ट करवाएं और यदि रूबेला एंटीबॉडीज खून में मिल जाएं तो समय पर वैक्सीन लें। वैसे जिन महिलाओं को पहले ही रूबेला इन्फेक्शन हो चुका है, उन्हें दोबारा वैक्सीन लगवाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। क्योंकि इन महिलाओं की प्रतिरक्षा प्रणाली रूबेला वायरस से लड़ने के लिए पहले ही तैयार रहती है और इनको यह इन्फेक्शन फिर से नहीं हो पाता है। इसके अलावा जो महिलाए पहले से ही गर्भवती हैं उन्हें वैक्सीन नहीं लेनी होती।

रूबेला टेस्ट की तैयारी कैसे करें?

रुबेला टेस्ट के लिए किसी विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं होती। हालाँकि, यदि आप डॉक्टर द्वारा बताई गई कोई भी दवाई ले रहे हैं या हर्ब्स, विटामिन सप्लीमेंट्स आदि कोई और अन्य दवा ले रहे हैं तो उस के बारे में टेस्ट से पहले डॉक्टर को बता दें।

रूबेला टेस्ट कैसे किया जाता है?

बांह की नस में सुई लगाकर ब्लड सैंपल लिया जाता है। शिशुओं में खून सैंपल उनकी ऐड़ी से निकाला जाता है, जबकि नवजात शिशुओं में उनकी गर्भनाल से सेंपल लिया जाता है। टेस्ट के दौरान सुई लगने से हल्का सा दर्द और चुभने सी महसूस हो सकती है, जो थोड़े ही समय के लिए रहती है।

ब्लड सैंपल लेने में जुड़े कुछ खतरे होते हैं जैसे खून बहना, संक्रमण, चक्कर आना, नील पड़ना और घबराहट होना।

रूबेला टेस्ट के परिणाम क्या बताते हैं?

हर व्यक्ति की उम्र के अनुसार टेस्ट के परिणाम अलग-अलग आते हैं। रूबेला टेस्ट के सामान्य और असामान्य परिणाम निम्न हैं:

सामान्य नतीजे:

  • आईजीएम एंटीबाडीज और आईजीजी एंटीबाडीज दोनों की अनुपस्थिति दिखाती है, कि व्यस्क और बच्चे दोनों में न तो कोई हाल ही में और न ही पहले कोई रूबेला वायरस से संक्रमण हुआ है।

  • शरीर में सिर्फ आईजीजी एंटीबाडी का होना और आईजीएम का ना होना बताता है कि व्यक्ति को पहले रूबेला वायरस से संक्रमण हुआ है या रूबेला की वैक्सीन दी गई है।

  • यदि नवजात शिशु में आईजीजी एंटीबाडी मिलते हैं तो इसका मतलब है कि बच्चे में ये माता से आए हैं। इन एंटीबाडी के रहते बच्चे को 6 से 12 रूबेला संक्रमण से  बचाव रहता है।

  • आईजीएम और आईजीजी दोनों की अनुपस्थिति दिखाती है कि व्यस्क और बच्चे दोनों को हाल ही में या पहले कोई रूबेला वायरस से संक्रमण हुआ है। यह ये भी बताता है की व्यक्ति को रूबेला की कोई भी प्रतिरक्षी दवाई नहीं दी गई है। 

असामान्य नतीजे:

  • नवजात शिशुओं में आईजीएम एंटीबॉडीज की उपस्थिति इस बात का संकेत है की बच्चे को प्रसवपूर्व संक्रमण या जन्मजात संक्रमण हुआ है। 

  • बच्चों और वयस्कों में आईजीएम एंटीबॉडीज का होना (आईजीजी हो या न हो) इसका संकेत देते हैं कि व्यक्ति को हाल ही में रूबेला वायरस से संक्रमण हुआ है। 

यदि व्यक्ति किसी और वायरस के संक्रमण से ग्रस्त है, तो भी आईजीएम रूबेला एंटीबॉडीज का गलत-पॉजिटिव परिणाम तब भी आ सकता है। इसीलिए डॉक्टर को आईजीजी बेसलाइन टेस्ट और आईजीजी टेस्ट की सलाह संक्रमण के 7 से 21 दिन के बीच में देनी चाहिए। आईजीजी एंटीबॉडीज में अधिक वृद्धि इलाज की पुष्टि करने में मदद करती है।

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References

  1. University of Rochester Medical Center Rochester, NY. [Internet] Rubella
  2. Center for Disease Control and Prevention [internet], Atlanta (GA): US Department of Health and Human Services; Epidemiology and Prevention of Vaccine-Preventable Diseases
  3. World Health Organization [Internet]. Geneva (SUI): World Health Organization; Manual for the laboratory diagnosis of measles and rubella virus infection.
  4. Center for Disease Control and Prevention [internet], Atlanta (GA): US Department of Health and Human Services; Manual for the Surveillance of Vaccine-Preventable Diseases
  5. Center for Disease Control and Prevention [internet], Atlanta (GA): US Department of Health and Human Services; Pregnancy and Rubella.