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स्मीयर फॉर मलिग्नैंट सेल टेस्ट क्या है?

स्मीयर फॉर मलिग्नैंट सेल टेस्ट एक साइटोलॉजी टेस्ट है। साइटोलॉजी टेस्ट में कोशिकाओं और कोशिकाओं के आकार की सूक्ष्मदर्शी द्वारा जांच की जाती है, ऐसा विशेषकर असामान्यताओं और कैंसर की जांच करने के लिए किया जाता है। यह एक कोशिका या कई सारी कोशिकाओं को देखकर रोग के परीक्षण में मदद करता है। 

इस टेस्ट के लिए डॉक्टर किसी विशेष अंग से ऊतक का सैंपल लेते हैं या फिर शरीर के द्रवों जैसे पेशाब, प्लयूरल द्रव या बलगम को एक स्लाइड पर पतला फैला कर उसमें कोशिकाओं के प्रकार, आकार और आकृति की जांच करते हैं।

बायोस्पी, जिसमें किसी प्रभावित हिस्से से ऊतक को काट कर उसका परीक्षण किया जाता है उसकी तुलना में साइटोलॉजी केवल ऊतक को खरोच कर या ऊतक के द्रव को निकाल कर की जाती है। इसमें मरीज को कम तकलीफ होती है और यह कम महंगा होता है व इसे करना भी बहुत आसान होता है।

  1. स्मीयर फॉर मलिग्नैंट सेल टेस्ट क्यों किया जाता है - Smear for malignant cells Kyu Kiya Jata Hai
  2. स्मीयर फॉर मलिग्नैंट सेल टेस्ट से पहले - Smear for malignant cells Se Pahle
  3. स्मीयर फॉर मलिग्नैंट सेल टेस्ट के दौरान - Smear for malignant cells Ke Dauran
  4. स्मीयर फॉर मलिग्नैंट सेल टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब है - Smear for malignant cells Ke Parinam Ka Kya Matlab Hai

स्मीयर टेस्ट का उपयोग रोग का परीक्षण करने के लिए या फिर उसकी गंभीरता पर नजर रखने के लिए किया जाता है :

  • स्क्रीनिंग टेस्ट - स्क्रीनिंग टेस्ट किसी विशेष रोग के लक्षणों के दिखने से पहले रोग का पता लगाने के लिए किया जाता है। यह किसी भी रोग की उपस्थिति की पुष्टि नहीं करता है बल्कि रोग के होने की संभावना को बताता है। यदि स्क्रीनिंग टेस्ट पॉजिटिव है तो डॉक्टर आगे परीक्षणात्मक टेस्ट भी कर सकते हैं। साइटोलॉजी टेस्ट जैसे पैप स्मीयर टेस्ट ज्यादातर स्क्रीनिग के लिए ही किया जाता है।

  • परीक्षणात्मक टेस्ट - परीक्षणात्मक टेस्ट किसी भी रोग की पहचान करने के लिए किया जाता है। जिन व्यक्तियों में  किसी रोग के लक्षण और संकेत दिखाई देते हैं उन्हें यह टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है। उदाहरण के लिए यदि किसी महिला के स्तन में गांठ है तो उसे फाइन नीडल एस्पिरेशन करवाने के लिए कहा जाएगा जो कि स्तन कैंसर के परीक्षण में मदद करता है।

यदि आपको टेस्ट से पहले किसी विशेष तैयारी की जरूरत है तो इसके बारे में अपने डॉक्टर से पूछें क्योंकि वे निर्देश उस स्थान के अनुसार होंगे जहां से सैंपल लिया जाना है। उदाहरण के लिए अगर फाइन नीडल एस्पिरेशन किया जाना है तो आपको टेस्ट से पहले इस प्रक्रिया और ध्यान देने योग्य बातों के बारे में बता दिया जाएगा।

स्मीयर फॉर मलिग्नैंट सेल कैसे किया जाता है?

इस टेस्ट के लिए ऊतक का सैंपल भिन्न तरीकों से लिया जाता है जैसे स्क्रैपिंग या ब्रशिंग, सर्जिकल बायोप्सी या फाइन नीडल एस्पिरेशन। यह संभावित कैंसर के स्थान पर निर्भर करता है।

कुछ तरीके नीचे बताए गए हैं :

  • शरीर के द्रवों पर साइटोलॉजी टेस्ट - शरीर के हिस्सों से द्रव कई प्रक्रियाओं द्वारा लिया जा सकता है :

    • पेरिकार्डियल फ्लूइड (हृदय के चारों और बनी थैली से द्रव) पसलियों में सुई लगाकर लिया जा सकता है।
    • स्पाइनल फ्लूइड जिसे मस्तिष्कमेरु द्रव भी कहा जाता है (रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क के बीच में मौजूद स्थान से लिया गया द्रव) स्पाइनल टैप से लिया जाता है।
    • प्लयूरल द्रव - (फेफडों के बीच के स्थान से द्रव) - थोरेसेंटेसिस के द्वारा, एक पतली सुई को आपकी छाती में लगाया जाता है।
    • एसिटिक द्रव को अस्किट्स या पेरिटोनियल द्रव भी कहा जाता है। यह पेट में सुई लगा कर निकाला जाता है।
    • बलगम 
    • पेशाब
  • फाइन नीडल एस्पिरेशन - यह प्रक्रिया ऊतक, द्रवों या कोशिकाओं के सैंपल लेने के लिए की जाती है। जिस जगह पर बायोस्पी की जानी है उसे अल्कोहॉल से साफ कर के एनेस्थीसिया की मदद से सुन्न किया जाता है। इसके बाद वे सुई लगाकर सक्शन (ऊपर की तरफ खींचना) करेंगे ताकि ऊतक का सैंपल ले लिया जाए। एक बार पर्याप्त सैंपल मिल जाने पर सुई निकाल दी जाएगी और सैंपल को परीक्षण के लिए लैब में भेज दिया जाएगा।

  • ब्रश/स्क्रैप साइटोलॉजी टेस्ट -  इस तकनीक में किसी भी अंग या ऊतक को रगड़ कर सैंपल लिया जाता है। उदाहरण के लिए पैप स्मीयर टेस्ट स्क्रैपिंग की तकनीक द्वारा किया जाता है जिसमें एक छोटे ब्रश या स्पैटुला से सर्विक्स में से कोशिकाओं को रगड़ कर निकाला जाता है।

सामान्य परिणाम

नेगेटिव टेस्ट रिजल्ट का मतलब है कि लिए गए सैंपल में कोई भी असामान्यता नहीं है और कोशिकाओं का आकार व आकृति सामान्य है। इसके साथ ही कोशिकाएं ठीक तरह से शरीर के उस विशेष भाग में संयोजित हैं। 

हालांकि, सामान्य साईटोलॉजिकल परिणाम से यह पुष्ट नहीं होता है कि आपको कैंसर नहीं है। 

असामान्य परिणाम

पॉजिटिव या असामान्य परिणाम का मतलब है कि ऊतक के लिए गए सैंपल की कोशिकाओं में कोई असामान्यता है। कैंसर कोशिकाएं आकार में सामान्य से छोटी या बड़ी हो सकती हैं। कोशिका का न्यूक्लियस (एक अंग जो कि कोशिका के अंदर मौजूद होता है) बड़ा और काला हो सकता है। इसके साथ ही कोशिकाओं का संयोजन भी गलत तरह से हो सकता है।

जिस भी प्रकार की कोशिकाओं की पहचान की जाएगी उनके अनुसार डॉक्टर कैंसर के प्रकार का पता लगा लेंगे। उदाहरण के लिए जिस कैंसर में प्रभावित कोशिकाएं वसा या चर्बी जैसी दिखाई देती हैं उसे नरम ऊतक सरकोमा और जिसमें प्रभावित कोशिकाएं हड्डियों के ऊतकों जैसी दिखती हैं उसे ओस्टियोसार्कोमा कहा जाता है।  कैंसर कोशिका कितनी अधिक सामान्य कोशिका की तरह दिखाई देती है इसके बारे में भी डॉक्टर बता देंगे। ऐसे कैंसर जो सामान्य कोशिका की तरह दिखाई नहीं देते हैं वे गंभीर होते हैं और ऐसे कैंसर जिनमें कोशिकाएं सामान्य ऊतकों की तरह दिखाई देती हैं वे लो ग्रेड कैंसर होते हैं।

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