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ट्राईआयोडोथायरोनिन टोटल (टीटी3) टेस्ट क्या है?

टी3 एक हार्मोन है जो कि थायराइड ग्रंथि द्वारा स्त्रावित किया जाता है। थायराइड ग्रंथि तितली के आकार की एक ग्रंथि है जो कि गले में मौजूद होती है। यह शरीर के सभी महत्वपूर्ण कार्यों जैसे तापमान, विकास, वृद्धि, हृदय की दर और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है।

अधिकतर टी3 शरीर के विभिन्न ऊतकों में थायरोक्सिन (टी4) के द्वारा संश्लेषित किया जाता है। थायरोक्सिन मुख्य रूप से थायराइड ग्रंथि द्वारा स्त्रावित किया जाता है। केवल टी3 ही सीधे थायराइड ग्रंथि द्वारा बनाया जाता है। टी3 रक्त में दो रूपों में पाया जाता है -

  • बाउंड टी3 - टी3 हार्मोन का 99.7 फीसद रक्त में प्रोटीन से बंध जाता है (थायरॉक्सिन बाइंडिंग ग्लोब्युलिन टिबीजी) जो कि इसे पूरे शरीर में संचारित करता है।
  • फ्री टी3 - जो टी3 हार्मोन किसी से नहीं बंधता है वह रक्त में खुले रूप से संचारित होता है।

यह टेस्ट रक्त में टोटल ट्राईआयोडोथायरोनिन (टी3) हार्मोन की जांच करता है। इसमें दोनों बाउंड व फ्री हार्मोन की जांच की जाती है। यह मुख्यतौर पर थायराइड के कार्यों का अवलोकन करने के लिए और थायराइड की समस्याओं का परीक्षण करने के लिए किया जाता है। इसमें मुख्यतः हाइपरथायरायडिज्म जो कि शरीर में थायराइड का अत्यधिक स्तर होने के कारण होता है जैसी स्थिति आती है।

टोटल टी3 टेस्ट को कुछ अन्य नामों से भी जाना जाता है, जिनमें टी3 टेस्ट, थायरॉइड फंक्शन टेस्ट, ट्राईआयोडोथायरोनिन टेस्ट, टॉक्सिक नोड्यूलर गोइटर - टी3, थायरोटॉक्सिकोसिस - टी3, टी3 रेडियोइम्यूनोएसे, थाइरोडिटिस - टी3 और ग्रेव्स डिजीज टी3 आदि शामिल हैं।

  1. ट्राईआयोडोथायरोनिन टोटल (टीटी3) टेस्ट क्यों किया जाता है - Triiodothyronine Total (TT3) test Kyu Kiya Jata Hai
  2. ट्राईआयोडोथायरोनिन टोटल (टीटी3) टेस्ट से पहले - Triiodothyronine Total (TT3) test Se Pahle
  3. ट्राईआयोडोथायरोनिन टोटल (टीटी3) टेस्ट के दौरान - Triiodothyronine Total (TT3) test Ke Dauran
  4. ट्राईआयोडोथायरोनिन टोटल (टीटी3) टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब है - Triiodothyronine Total (TT3) test Ke Parinam Ka Kya Matlab Hai

यदि आपके शरीर में हाइपरथायरायडिज्म के लक्षण दिखाई देते हैं तो इस टेस्ट को करवाने की सलाह डॉक्टर द्वारा दी जा सकती है। हाइपरथायराइडिज्म के लक्षणों में निम्न शामिल हैं -

यदि आपको हाइपरथायराइडिज्म होने का अधिक खतरा है तो डॉक्टर आपको इस टेस्ट को करवाने के लिए कह सकते हैं।

निम्न घटकों से आपको हाइपरथायराइडिज्म होने का खतरा हो सकता है -

  • यदि आपको पहले से थायराइड संबंधी कोई समस्या है
  • यदि आपको लंबे समय से कोई रोग है जैसे
    • टाइप 1 डायबिटीज 
    • पर्निशियस एनीमिया, इसमें आपका शरीर स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं का उतपादन नहीं कर पाता है जो कि विटामिन बी12 की कमी के कारण होता है।
    • एडिसन रोग एक स्थिति, जिसमें आपका शरीर कोर्टिसोल नामक हार्मोन का ठीक तरह से उत्पादन नहीं कर पाता है।
  • यदि आप बहुत अधिक आयोडीन युक्त आहार ले रहे हैं या फिर आयोडीन युक्त दवाएं ले रहे हैं
  • यदि आपकी हाल ही में डिलीवरी हुई है
  • यदि आपकी उम्र 60 वर्ष से अधिक है
  • यदि आपके परिवार में लोगों को थायराइड की समस्याएं हैं

इसके अलावा यदि आपके शरीर में हाइपोथायराइडिज्म (थायराइड ग्रंथि द्वारा थायराइड हार्मोन का अपर्याप्त या कम उत्पादन) के लक्षण दिखाई देते हैं तो भी डॉक्टर इस टेस्ट को करने के लिए कह सकते हैं, इन लक्षणों में निम्न शामिल हैं -

इसके साथ ही डॉक्टर यह टेस्ट निम्न स्थितियों के चलते भी कर सकते हैं -

  • यदि आप हाइपोथायराइडिज्म की दवाएं ले रहे हैं
  • यदि आपकी पिट्यूटरी ग्रंथि ठीक तरह से कार्य नहीं कर रही है या फिर आपको हाइपोपिट्यूट्रिज्म नामक स्थिति है

इस टेस्ट के लिए किसी भी विशेष तैयारी की जरूरत नहीं है। यदि आप किसी भी तरह की दवा, विटामिन या सप्लीमेंट ले रहे हैं तो इसके बारे में डॉक्टर को बता दें।

ऐसा इसलिए क्योंकि कुछ दवाएं टीटी3 के स्तरों को कम कर सकती हैं जिसके कारण टेस्ट के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। टीटी3 के स्तर निम्न दवाओं के कारण बढ़ सकते हैं -

  • क्लोफिब्रिट
  • एमिओडेरोन
  • मेथाडोन
  • कीटोमेल
  • गर्भ निरोधक गोलियां
  • फेनोथायज़िन
  • टर्ब्यूटेलाइन
  • टेमोक्सीफेन
  • वैल्प्रोइक एसिड
  • थायरोक्सिन
  • एस्ट्रोजन
  • कुछ विशेष हर्बल दवाएं

निम्न दवाएं रक्त में टीटी3 के स्तरों को  बढ़ा सकती हैं -

  • एनाबोलिक स्टेरॉयड
  • एंटी थायराइड दवाएं (मेथिमेजोल, प्रोपिलथिओरासिल)
  • फेनीटोइन
  • एमिनोडेरोन
  • एंड्रोजन
  • लिथियम
  • प्रोपेनोल
  • एस्पिरिन
  • कार्बमाज़ेपिन
  • एटेनोलोल
  • कॉर्टिकोस्टेरॉइड
  • थियोफिलिन
  • फ्यूरोसेमाइड

आपकी टिबीजी प्रोटीन के स्तर अधिक या कम किसी आनुवंशिक स्थिति या उपार्जित स्थिति के कारण हो सकते हैं जिसके कारण टीटी3 के स्तर प्रभावित हो सकते हैं।

कुछ स्थितियां, जिसके कारण टीटी3 के स्तर गलत तरह से अधिक आ सकते हैं वे निम्न हैं -

ट्राईआयोडोथायरोनिन टोटल (टीटी3) टेस्ट कैसे किया जाता है?

इस ब्लड टेस्ट के लिए लैब टेक्नीशियन आपकी बांह की नस में सुई लगाकर ब्लड सैंपल ले लेंगे।

आपको सुई लगने से हल्की सी चुभन महसूस हो सकती है। सुई लगी जगह पर घाव हो सकता है। यदि आपको ज्यादा समय तक नील या संक्रमण होता है तो इसके बारे में डॉक्टर से बात कर लें।

सामान्य परिणाम -

रक्त में टीटी3 के सामान्य स्तर 75-195 ng/dL (नैनोग्राम प्रति डेसीलीटर) माने जाते हैं। यदि ट्राईआयोडोथायरोनिन टोटल टेस्ट यह पता लगाने के लिए किया जा रहा है कि हाइपरथायराइडिज्म का इलाज कितने अच्छे से काम कर रहा है, तो सामान्य वैल्यू का मतलब है कि दवा रोग को नियंत्रित करने में ठीक तरह से कार्य कर रही है।

असामान्य परिणाम -

टीटी3 के बढ़े हुए स्तर निम्न स्थितियों में देखे जा सकते हैं -

  • थायराइड कैंसर
  • थायरॉइडिटिस (थायराइड ग्रंथि में सूजन)
  • हाइपरथायराइडिज्म
  • टी3 थायरोटॉक्सिकोसिस, एक स्थिति जिसमें किसी व्यक्ति के रक्त में टी3 के स्तर अधिक होते हैं लेकिन टी4 के स्तर सामान्य होते हैं

टीटी3 के कम स्तर निम्न स्थितियों में देखे जाते हैं -

  • एनोरेक्सिया नर्वोसा (खाने से जुड़ा हुआ एक विकार)
  • कंजेनिटल टिबीजी डेफिशियेंसी
  • लिवर रोग
  • भूख लगना
  • गंभीर रूप से बीमार पड़ना
  • लंबे समय से बीमार
  • हाइपोथायराइडिज्म
  • किडनी फेलियर
  • थायरॉइडेक्टोमी (थायराइड ग्रंथि के किसी भाग का पूरी ग्रंथि को सर्जरी द्वारा निकालना)
और पढ़ें ...

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