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कीमोथेरेपी को कैंसर के सबसे प्रभावी इलाजों में से एक माना जाता है। हालांकि इस ट्रीटमेंट के अपने कई तरह के नुकसान है। अब अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास हेल्थ साइंस सेंटर के वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन के हवाले से बताया है कि कीमोथेरेपी की वजह से उन कोशिकाओं में परिवर्तन आ जाता है, जो हृदय के क्षतिग्रस्त (हार्ट इंजरी) होने पर उसे रिपेयर करने का काम करती हैं। उन्होंने बच्चों के संबंध में इस जानकारी को महत्वपूर्ण बताया है, जिन्हें एंथ्रासाइक्लिंस नामक ड्रग की वजह से आगे चलकर हार्ट फेलियर का सामना करना पड़ता है। कीमोथेरेपी के दौरान इस ड्रग का इस्तेमाल किया जाता है। अध्ययन से जुड़े परिणामों को प्लोस वन पत्रिका ने हाल में प्रकाशित किया है।

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अध्ययन से जुड़े वरिष्ठ लेखक और सैन एंटोनियो स्थित ग्रीहे चिल्ड्रेंस कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक ग्रेगरी आउन ने परिणामों को लेकर कहा है, 'हम पूरी तरह नहीं जानते कि जिन बच्चों को एंथ्रासाइक्लिन थेरेपी दी जाती है, उन्हें तीन-चार दशकों बाद ये समस्याएं (हार्ट इंजरी) क्यों आती हैं। कार्डियक अरेस्ट फाइब्रोलास्ट (सेल्स), जो हृदय और अन्य शरीर के अन्य ऊतकों में केयरटेकर की तरह काम करते हैं, पर अच्छी तरह अध्ययन नहीं किया गया है। हमारा मानना है कि इन कोशिकाओं को होने वाला नुकसान चाइल्डहुड कैंसर से बचने वाले बच्चों को आगे चलकर भी प्रभावित करना जारी रख सकता है।' 

अध्ययन से जुड़ा रिसर्च समूह इस बात पर फोकस कर रहा है कि कैसे शरीर में पी53 नाम का एक ट्यूमर-सप्रेसर जीन (जो वंशाणुओं को क्षतिग्रस्त होने से बचाता है) कार्डियक फाइब्रोलास्ट के रेस्पॉन्स को प्रभावित कता है। इसके लिए उन्होंने चूहों में पी53 की कमी कर दी और उन्हें एंथ्रासाइक्लिन ड्रग दिया। डॉ. आउन ने बताया कि इस प्रयोग से पता चला कि पी53 का लेवल कम करने से चूहों की कोशिकाओं में बदलाव आ गया था। इस बारे में अध्ययन से जुड़ी एक लेखिका ट्रेवी मेन्सिला ने कहा, 'सामान्य फाइब्रोलास्ट हृदय को हुई इंजरी को रिपेयर करने के लिए माइग्रेट करने की क्षमता रखते हैं। लेकिन जिन कार्डियक फाइब्रोलास्ट का ट्रीटमेंट एंथ्रासाइक्लिन से किया गया, उनमें माइग्रेशन की यह क्षमता कम पाई गई है। हालांकि हम यह निश्चित तौर पर नहीं कह रहे हैं कि यह नुकसानदेह है या नहीं।'

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पेडियाट्रिक ऑन्कोलॉजिस्ट बच्चों को कीमोथेरेपी के तहत एंथ्रासाइक्लिन की कम डोज देते हैं। वहीं, थेरेपी से तीव्रता के साथ हार्ट फेलियर होने के मामले अब दुर्लभ हो गए हैं। इसलिए डॉक्टरों के लिए कोई दावा करना आसान नहीं है। लेकिन डॉ. आउन का यह जरूर कहना है, 'हालांकि हम हार्ट फेलियर या हृदय के संचालन में कमी होने की बात नहीं कर रहे। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि (एंथ्रासाइक्लिन से) कोशिकाएं क्षतिग्रस्त नहीं हो रही हैं।'

हृदय को होने वाली क्षति या हार्ट फेलियर के समय केवल फाइब्रोलास्ट ही रेस्पॉन्ड नहीं करतीं। अन्य कोशिकाएं भी हैं जो हार्ट को रिपेयर करने में योगदान देती हैं। इनमें कार्डियोमाइयोसाइट, एंडोथीलियल और इम्यून सेल्स शामिल हैं। लेकिन डॉ. आउन की लैब में वैज्ञानिकों ने फिलहाल फाइब्रोलास्ट पर फोकस किया है। वे बताते हैं, 'लैब में पता चली एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इस कोशिका जनसंख्या को हुआ नुकसान क्षति न पहुंचाने वाला है। लेकिन जीन-डैमेजिंग एजेंट की वजह से इन कोशिकाओं में बुनियादी बदलाव हो सकते हैं। और सैद्धांतिक रूप से उसका प्रभाव वैसा हो सकता है, जैसा कि हमने अध्ययन में देखा। इससे फाइब्रोलास्ट कोशिकाएं हाई ब्लड प्रेशर या हार्ट अटैक जैसी हृदय संबंधी समस्याओं के समय रेस्पॉन्ड करने की क्षमता खो सकती हैं, जिनमें होने वाली इंजरी की रिपेयरिंग में इन सेल्स की भूमिका अहम होती है।'

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