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आयुर्वेदिक जड़ी बूटी को पानी में डालकर पीना एक प्राचीन प्रथा है जिसका उपयोग बीमार के इलाज के लिए वर्षों तक नैचुरोपैथी में किया गया है। जड़ी-बूटियों और मसालों के आसानी से मिलने के कारण, इन उपचार जलों को घर पर बनाया जा सकता है। इस चिकित्सा पानी को तैयार करने का कारण यह है कि जड़ी-बूटियों और मसालों को पानी में डालने से उनमें निहित तेल पानी में निकल जाते हैं, जिनमें कई प्रकार के चिकित्सकीय गुण होते हैं। पानी को आयुर्वेद में एक शक्तिशाली चिकित्सीय साधन के रूप में माना जाता है और कुछ जड़ी-बूटियों या मसालों को इसमें भिगोने से इसकी चिकित्सा शक्ति और बढ़ जाती है। तो चलिए जानते हैं कुछ महत्वपूर्ण उपचार जलों के बारे में -

  1. मेथी पानी पीने के फायदे ब्लोटिंग के लिए - Methi water for bloating in hindi
  2. विजयसार के पानी का उपयोग मधुमेह के लिए - Vijaysar water for diabetes in hindi
  3. तुलसी के पानी के फायदे हटाए विषाक्त पदार्थों को - Basil leaves for detox water in hindi
  4. पथीमुगम जल का उपयोग कोलेस्ट्रॉल को करे कम - Pathimugam water benefits for cholesterol in hindi
  5. दालचीनी का पानी करे कम रक्त शर्करा को - Cinnamon water lowers blood sugar in hindi
  6. धनिया का पानी बेनिफिट्स फॉर एसिडिटी - Coriander seeds water for acidity in hindi
  7. त्रिफला के पानी के लाभ कब्ज में - Triphala water for constipation in hindi

थोड़े कड़वे और पीले रंग के मेथी के बीज, जो हर भारतीय घर में आमतौर पर खाने में इस्तेमाल किए जाते हैं, औषधीय गुणों का भंडार हैं और कई स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज कर सकते हैं। यह एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण से भरे हुए हैं। मेथी रातभर पानी में डालकर रखने से यह पीला रंग प्रदान करती है। मेथी का पानी शरीर में पानी के प्रतिधारण (retention) को रोकने में बहुत उपयोगी है। यह पेट फूलने को भी रोकता है। मेथी बीजों में मौजूद एमिनो एसिड यौगिक अग्न्याशय (pancreas) में इंसुलिन के स्राव को बढ़ाने में मदद करते हैं। इससे मधुमेह के रोगियों में रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

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विजयसार को भारत में मालाबार कीनो (Malabar Kino) के रूप में भी जाना जाता है। विजयसार मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए सबसे लोकप्रिय जड़ी बूटी है। यह आयुर्वेद में व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है ताकि विभिन्न प्रकार के रोग जैसे मोटापा, दस्त और एक्जिमा आदि का इलाज किया जा सके। इसमें एपिकटेचिन (Epicatechin), मारसुपसिन (Marsupsin) और पटेरोसुपिन (Pterosupin) जैसे यौगिक पाए जाते हैं जो मधुमेह रोगियों में रक्त ग्लूकोज को कम करने में मदद करते हैं। यह स्वाभाविक रूप से इंसुलिन का उत्पादन करने के लिए अग्न्याशय की बीटा कोशिकाओं को फिर से जीवित करता है। अच्छे परिणाम प्राप्त करने के लिए रात में विजयसार को पानी में डाल दें और सुबह भूरे रंग के औषधीय पानी को पी लें।

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तुलसी को पवित्र माने जाने के अलावा यह औषधीय गुणों के लिए भी लोकप्रिय है। पानी में भिगोए हुए तुलसी के पत्ते त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं और कई स्वास्थ्य समस्याओं को भी ठीक करते हैं। तुलसी में एंटीबायोटिक, एंटी-फंगल और जीवाणुरोधी गुण हैं जो बुखार और सर्दी को रोकने में मदद करते हैं, साथ ही आपकी त्वचा और बालों को स्वस्थ रखते हैं। तुलसी का पानी मूत्रवर्धक के रूप में कार्य करता है और गुर्दे के लिए भी फायदेमंद होता है। यह रक्त में यूरिक एसिड के स्तर को कम करने में मदद करता है और गुर्दे को साफ करता है।

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केरल में पथीमुगम या इंडियन रेड वुड को पानी में भिगोया जाता है जो कि एक लोकप्रिय प्यास बुझाने वाला पेय है। औषधीय लाभ प्राप्त करने के लिए पेड़ की छाल का उपयोग किया जाता है। इस हल्के गुलाबी रंग के उपचार वाले पानी को गुर्दा विकार, त्वचा रोग, कोलेस्ट्रॉल, रक्त शुद्धि और मधुमेह के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है। आपको बस इतना करना है कि 2-3 मिनट के लिए पथीमुगम को डालकर पानी को उबाल लें और इसके पानी को छान लें। आप इसे भोजन के साथ या दिन में किसी भी समय पी सकते हैं।

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दालचीनी आमतौर पर कर भारतीय रसोई में पाई जाती है। लेकिन शायद ही हम कभी इसके स्वास्थ्य लाभों के बारे में बात करते हैं। इसके नाम की तरह इसका स्वाद भी मीठा होता है और यह सुगंधित भी होती है। यह एक लोकप्रिय मसाला है जो पेड़ की अंदरूनी छाल से बनाया जाता है। यह एंटीऑक्सिडेंट्स से भरी हुई है और फ्री रेडिकल्स के कारण होने वाली ऑक्सीडेटिव क्षति से शरीर को बचाती है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण संक्रमण और ऊतक क्षति से शरीर की रक्षा करते हैं। दालचीनी का पानी भोजन के बाद पाचन तंत्र में कार्बोहाइड्रेट के टूटने की प्रक्रिया को धीमा करके रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है। दालचीनी में मौजूद रोगाणुरोधी गुण भी दाँत क्षय और बदबूदार सांस को रोकते हैं।

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विभिन्न व्यंजनों में स्वाद बढ़ाने के लिए धानिया का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। धनिया के बीज में पौधे से प्राप्त रासायनिक यौगिक होते हैं जो एंटीऑक्सिडेंट और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले गुणों में उच्च होते हैं। धनिया बीज का पानी ठंडा होने के कारण पानी के प्रतिधारण (retention) को रोकने और एसिडिटी को ठीक करने में मदद करता है। धनिया के बीज के पानी में सिट्रोनेलॉल पाया जाता है जो एक एंटीसेप्टिक के रूप में कार्य करता है और इस कारण यह मुंह के अल्सर का इलाज करने में मदद करता है। इसके लिए आप गर्म पानी में 10 मिनट के लिए धनिये के बीज को भिगोएँ, फिर इसे छान लें और पिएं।

त्रिफला अपने रेचक गुणों के कारण कब्ज का इलाज करने में मदद करता है। सामान्य रूप से यह पाउडर के रूप में बाजार में मिलता है। त्रिफला को पानी में मिलाकर मल त्याग (bowel movements) को नियंत्रित करने और कब्ज को ठीक करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को हटाने में मदद करता है और त्वचा को स्वाभाविक रूप से चमकाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट सर्दी, फ्लू और अन्य बीमारियों के खिलाफ प्रतिरक्षा क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। आप गर्म पानी में त्रिफला पाउडर को डालकर नियमित रूप से पी सकते हैं।

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आपके शरीर की जरूरतों के मुताबिक इन उपचार जलों का सेवन करना चाहिए। इसलिए मधुमेह या अन्य बीमारियों वाले रोगियों को सलाह दी जाती है कि इनका सेवन करने से पहले अपने चिकित्सक से मशवरा लें।

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