प्रून जूस (आलूबुखारे का रस) का सेवन कब्ज का इलाज, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने, हृदय को स्वस्थ रखने, लिवर की समस्याओं को कम करने, हड्डियों को मजबूत करने, कोलन कैंसर को रोकने, मस्तिष्क के कार्य को बढ़ाने, मेटाबोलिज्म को बढ़ाने और श्वसन तंत्र के स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। यह ब्लड प्रेशर को कम करने, वजन कम करने, एनीमिया को रोकने, कोलेस्ट्रॉल को कम करने और एम्फसीमा का इलाज करने में भी मदद करता है।

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  1. आलूबुखारे के रस के फायदे - Alubukhare ke Ras ke Fayde
  2. आलूबुखारे के रस के नुकसान - Alubukhare ke Ras ke Nuksan

आलूबुखारा के रस में विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन ई और विटामिन K की भरपूर मात्रा पाई जाती है। इसमें अन्य विटामिन यौगिक जैसे थायामिन, रिबोफ्लाविन, नियासिन, विटामिन बी 6 और फोलेट आदि भी पाए जाते हैं। 100 ग्राम रस में लगभग 71 कैलोरी और 18 ग्राम कार्बोहाइड्रेट की मात्रा पाई जाती है। इस रस में कई खनिज जैसे सोडियम, कैल्शियम और आयरन आदि भी पाए जाते हैं। इसके साथ ही इसमें फैटी एसिड और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा ना के बराबर होती है।

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आलूबुखारे का जूस रखें पाचन तंत्र को स्वस्थ - Alubukhare ka juice rakhe paachan ko swsth

यह रस पाचन तंत्र को बेहतर रखने के लिए जाना जाता है। यदि आप कब्ज या अपच से पीड़ित हैं, तो आपको एक गिलास आलूबुखारे के रस का सेवन करना चाहिए। इस रस में पाए जाने वाले फाइबर पाचन प्रक्रिया और आंतों के पोषण को सुधारने में मदद कर सकते हैं। यह उन लोगों के लिए बहुत ही लाभकारी है जो बवासीर की समस्या से परेशान रहते हैं। इसलिए आपको इस जूस का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए।

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6 आलूबुखारे की सर्विंग में 4 ग्राम फाइबर होता है और आधा कप आलूबुखारे में 6.2 ग्राम फाइबर होता है। 50 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं को हर दिन 25 ग्राम फाइबर लेने की सलाह दी जाती है और 50 वर्ष से कम उम्र के पुरुषों को 38 ग्राम फाइबर का सेवन करने की सलाह दी जाती। 50 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों और महिलाओं के लिए क्रमशः 30 ग्राम और 21 ग्राम फाइबर का सेवन लाभकारी माना जाता है।

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आलूबुखारे के जूस के औषधीय गुण बचाएं कैंसर से - Alubukhare ke juice ke aushdhiya gun bachayen cancer se

अक्सर कोलन कैंसर का पता लगाना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन यह काफी खतरनाक हो सकता है। कुछ आहार कोलन कैंसर को रोकने में मदद कर सकते हैं। रिसर्च के अनुसार अपनी डाइट में ड्राई आलूबुखारा को शामिल करने से इसके जोखिम को कम किया जा सकता है।

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आलूबुखारा के रस पर की गई एक रिसर्च के अनुसार यह रस आपके पेट के अंदर मौजूद जीवाणुओं के स्तर में काफी सुधार कर सकता है। इससे कोलन कैंसर का खतरा कम हो सकता है। अध्ययन के अनुसार आलूबुखारे का रस कोलन कैंसर के विकास में बाधा डालने में मदद करता है। लेकिन अभी भी अन्य प्रकार के कैंसर पर इस रस के एंटीऑक्सीडेंट प्रभावों को लेकर रिसर्च की जा रही है।

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आलूबुखारे के जूस के फायदे करें एनीमिया को दूर - Alubukhare ke juice ke fayde karen anemia ko dur

जैसा कि आप जानते हैं, शरीर में स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं की कम मात्रा के कारण एनीमिया होता है। आलूबुखारा का रस लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है।

आयरन का एक बड़ा स्रोत होने के कारण आलूबुखारे का रस, आयरन की कमी के कारण होने वाले एनीमिया और इसके लक्षण थकान, अवसाद और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याओं को रोकने में मदद कर सकता है। एक कप आलूबुखारा के रस में 6 मिलीग्राम आयरन होता है, जो कि दैनिक जरुरत का 34 प्रतिशत है।

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आलूबुखारे के जूस के लाभ स्वस्थ ह्रदय के लिए - Alubukhare ke juice ke labh swasth hriday ke liye

आलूबुखारा के रस में एंटीऑक्सीडेंट की भरपूर मात्रा कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करती है जिससे हृदय रोगों को रोकने में मदद मिलती है। इस रस में पोटेशियम की भी अच्छी मात्रा पाई जाती है जो हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। इसके अलावा इसमें मौजूद विटामिन K धमनियों को सख्त होने से रोक कर हृदय स्वास्थ्य में सुधार करता है।

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आलूबुखारे के जूस के गुण रखें कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित - Alubukhare ke juice ke gun rakhen cholesterol ko niyntrit

एंटीऑक्सिडेंट्स और घुलनशील फाइबर होने के कारण आलूबुखारा का रस शरीर में एलडीएल (खराब) कोलेस्ट्रॉल को कम करने के साथ साथ एथेरोस्क्लेरोसिस के खतरे को भी रोकने में मदद करता है। एथरोस्क्लेरोसिस की समस्या धमनियों में फैट और कोलेस्ट्रॉल के जमने का कारण होती है। शरीर में अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल भी हार्ट फेलियर, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक का कारण बन सकता है। यह रस प्लाक को बनने से रोकने में मदद करता है। इस अध्ययन के अनुसार, आलूबुखारे के रस में एंटीऑक्सीडेंट कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करते हैं।

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एक शोध भी इसकी पुष्टि करता है कि सूखे आलूबुखारे एथेरोस्क्लेरोसिस के विकास को धीमा करने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा पशुओं पर किये गए एक अध्ययन के अनुसार आलूबुखारे में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद कर सकते हैं।

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आलूबुखारे के जूस का सेवन करें लिवर के लिए - Alubukhare ke juice ka sewan kare liver ke liye

आलूबुखारा का रस आपके लिवर में दो मुख्य एंजाइम के उत्पादन को बनाए रखने में मदद करता है, जिसमें एलानिन एमिनोट्रांसफेरस भी एक है। यह एंजाइम आपके शरीर में भोजन को ऊर्जा में बदलने में मदद करता है। जब आपका लिवर खराब हो जाता है, तो यह आपके रक्त में एएलटी के स्तर को बढ़ाता है जिससे रक्त का स्तर बढ़ जाता है।

आलूबुखारा का रस हेपेटाइटिस जैसी समस्याओं का इलाज भी कर सकता है। एक अध्ययन के अनुसार भी इस तथ्य की पुष्टि हुई है कि यह रस लिवर के कार्यों में सुधार कर सकता है और लिवर की बीमारियों को रोक सकता है।

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आलूबुखारे के जूस का उपयोग ब्लड सर्कुलेशन के लिए - Alubukhare ke juice ka upyog circulation ke liye

आलूबुखारे के रस में आयरन की भरपूर मात्रा होती है और यह खनिज लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने में मदद करता है। यह आपके रक्त परिसंचरण को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे शरीर के सभी अंगों को अधिक ऑक्सीजन और पोषक तत्व प्रदान करने में मदद मिलती है। साथ ही साथ इससे ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

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मेटाबोलिज्म को बढ़ाएं आलूबुखारे के सेवन से - Metabolism ko badhayen alubukhare ke sewan se

विटामिन बी के विभिन्न प्रकार आलूबुखारे के रस में पाए जाते हैं। इसलिए यह रस हमारे मेटाबोलिज्म को नियंत्रित करने में सक्षम है। इसके अलावा यह रस एंजाइम और हार्मोन के उत्पादन को नियमित करने, जन्म दोषों को दूर करने और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करता है।

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आलूबुखारे का जूस है वजन कम करने में लाभकारी - Alubukhare ka juice hai wajan kam karne mein labhkari

आलूबुखारे का जूस पोषक तत्वों से भरपूर होता है और यह लेप्टिन (यह एक हार्मोन जो शरीर को अधिक खाने से बचाता है) को रिलीज करने में भी मदद कर सकता है। भूख को दबाने वाले गुणों के कारण, इसे वजन को कम करने वाली डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है।

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ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा कम करें आलूबुखारे का जूस - osteoporosis ka khatra kam karen alubukhare ka juice

यह जूस हड्डीयों के घनत्व को बढ़ाने और ऑस्टियोपोरोसिस की शुरुआत को रोकने में मदद करता है। यह बढ़ती उम्र में बहुत ही लाभकारी होता है क्योंकि इस उम्र में हड्डियों के कमजोर होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है।

एक अध्ययन के अनुसार, यह रस रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में हड्डियों के किसी भी प्रकार के नुकसान को रोकने में मदद कर सकता है। रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं को ऑस्टियोपोरोसिस होने का जोखिम अधिक होता है।

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  1. आलूबुखारे का रस पीने से दस्त और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्या, निर्जलीकरण, वजन बढ़ना, ब्लड शुगर कम होना और ऑक्सीडेटिव तनाव का खतरा जैसी परेशानिया हो सकती हैं। (और पढ़ें - दस्त में क्या खाना चाहिए)
  2. प्रून जूस में न केवल फाइबर की भरपूर मात्रा होती है, बल्कि इसमें सोरबिटल भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। ये दोनों शरीर में रेचक पदार्थ के रूप में कार्य कर सकते हैं। इसलिए यदि आप खाली इस रस का सेवन करते हैं तो आपको गैस और सूजन, साथ ही दस्त जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। (और पढ़ें - सूजन कम करने के उपाय)
  3. कई अध्ययनों के अनुसार इस जूस के सेवन से ब्लड शुगर के स्तर में कमी आ सकती है। जो लोग डायबिटीज को कम करने चाहते हैं, यह उनके लिए बहुत ही लाभकारी है। लेकिन यदि आप पहले से ही ब्लड शुगर कम करने वाली दवा ले रहे हैं, तो इसके सेवन से पहले अपने डॉक्टर से बात करें।

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