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एंटीबायोटिक दवाइयां दवा वर्ग की सबसे महत्वपूर्ण और सबसे अधिक प्रिस्क्राइब की जाने वाली और उपयोग की जाने वाली दवाओं में से एक हैं। बैक्टीरिया के कारण होने वाली साधारण से लेकर गंभीर बीमारियों और संक्रमण के इलाज में एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल किया जाता है। एंटीबायोटिक्स को एंटीबैक्टीरियल के रूप में भी जाना जाता है। लेकिन अगर बीमारी किसी वायरस की वजह से हुई है जैसे—सर्दी-जुकाम, खांसी, या फ्लू—तो उसमें एंटीबायोटिक दवा लेने से फायदे की जगह नुकसान हो सकता है और इन दिनों दुनियाभर में यही हो रहा है। 

18-24 नवंबर के बीच एंटीबायोटिक जागरुकता सप्ताह
एंटीबायोटिक्स का अधिक उपयोग होने की वजह से एंटीबायोटिक प्रतिरोध यानी रेजिस्टेंस की समस्या पैदा हो गई है और इसी के प्रति जागरुकता फैलाने के मकसद से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की तरफ से हर साल 18 से 24 नवंबर के बीच वर्ल्ड एंटीबायोटिक अवेयरनेस वीक (एंटीबायोटिक जागरुकता सप्ताह) मनाया जाता है। इसकी शुरुआत साल 2015 में हुई थी और इसका थीम है- एंटीबायोटिक्स: संभालकर इस्तेमाल करें। तो आखिर एंटीबायोटिक प्रतिरोध है क्या, इस बारे में हम आपको इस आर्टिकल में बता रहे हैं। 

(और पढ़ें - जानें क्यों खतरनाक हैं एंटीबायोटिक दवाइयां)

प्रतिरोध तब होता है जब बैक्टीरिया, दवा को हराने की क्षमता विकसित कर लेता है
अमेरिका के सीडीसी (सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन) के मुताबिक, एंटीबायोटिक प्रतिरोध तब होता है जब बैक्टीरिया कीटाणु, उन्हें मारने के लिए तैयार की गई दवाइयों को हराने की क्षमता विकसित कर लेते हैं। साधारण शब्दों में समझें तो इसका मतलब ये हुआ कि ये कीटाणु, दवाइयां लेने के बाद भी मरते नहीं हैं और बढ़ना जारी रखते हैं। एंटीबायोटिक प्रतिरोध विकसित कर लेने वाले कीटाणुओं से होने वाला इंफेक्शन बेहद मुश्किल होता है और कई बार उनका इलाज करना असंभव सा हो जाता है। ज्यादातर मामलों में एंटीबायोटिक-प्रतिरोध के कारण होने वाले इंफेक्शन में मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में रहने की जरूरत पड़ती है, बार-बार फॉलोअप के लिए डॉक्टर के पास जाना पड़ता है और महंगी दवाइयां और इलाज के विकल्प भी खोजने की जरूरत पड़ती है। 

(और पढ़ें - एंटीबायोटिक दवा लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान)

किसी को भी प्रभावित कर सकता है एंटीबायोटिक प्रतिरोध
एंटीबायोटिक प्रतिरोध की समस्या किसी भी व्यक्ति, हेल्थकेयर प्रफेशनल, वेटेनरी और कृषि उद्योग से जुड़े लोगों को जीवन के किसी भी स्टेज में प्रभावित कर सकती है। इसलिए यह दुनिया का सबसे खतरनाक और अरजेंट सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या है। हर साल अमेरिका में करीब 28 लाख लोग एंटीबायोटिक-प्रतिरोध वाले बैक्टीरिया या फंगस की वजह से संक्रमित हो जाते हैं और इसकी वजह से 35 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है। एंटीबायोटिक प्रतिरोध के कारण होने वाले संक्रमण से पूरी तरह से बचा नहीं जा सकता लेकिन कुछ लोग जो पहले से किसी क्रॉनिक बीमारी का शिकार हों उन्हें यह संक्रमण होने का खतरा अधिक होता है।    

एंटीबायोटिक प्रिस्क्राइब करने के तरीके में बदलाव करने की जरूरत 
एंटीबायोटिक प्रतिरोध का मतलब ये नहीं कि आपका शरीर एंटीबायोटिक्स के प्रति रेजिस्टेंट या प्रतिरोधी हो गया है। इसका मतलब ये है कि वह बैक्टीरिया उस एंटीबायोटिक के प्रति, प्रतिरोध विकसित कर चुका है जिसे उसे मारने के लिए डिजाइन किया गया था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO की मानें तो एंटीबायोटिक प्रतिरोध तब होता है जब बैक्टीरिया, उन्हें मारने के लिए बनाई गई दवाइयों की तरफ अपनी प्रतिक्रिया को बदल लेता है। लिहाजा दुनियाभर में जिस तरह से एंटीबायोटिक्स प्रिस्क्राइब और इस्तेमाल की जा रही हैं उसमें तुरंत बदलाव करने की जरूरत है क्योंकि एंटीबायोटिक प्रतिरोध की समस्या दुनियाभर में बेहद खतरनाक लेवल पर पहुंच गई है। निमोनिया, टीबी, ब्लड पॉयजनिंग, गोनोरिया, खाद्य पदार्थों के कारण होने वाली बीमारियां आदि का इलाज बेहद मुश्किल और असंभव होता जा रहा है क्योंकि एंटीबायोटिक्स कम असरदार होती जा रही हैं। 

(और पढ़ें - 2 साल से कम उम्र के बच्चों को एंटीबायोटिक देने से उन्हें कई बीमारियों का खतरा)

एंटीबायोटिक प्रतिरोध को कंट्रोल करने और उससे बचने के उपाय
एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग और अत्यधिक इस्तेमाल के साथ ही संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण भी सही तरीके से न होने की वजह से एंटीबायोटिक प्रतिरोध की समस्या में तेजी आ रही है। लिहाजा WHO ने कुछ तरीके बताए हैं जिसकी मदद से एंटीबायोटिक प्रतिरोध के प्रभाव और प्रसार को सीमित किया जा सकता है: 

व्यक्तिगत स्तर पर

  • एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल सिर्फ तभी करें जब कोई सर्टिफाइड डॉक्टर या हेल्थ प्रफेशनल उसे प्रिस्क्राइब करें।
  • अगर डॉक्टर आपसे कहें कि आपको एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं है तो तब भी उनसे एंटीबायोटिक देने की मांग न करें।
  • एंटीबायोटिक इस्तेमाल करते वक्त खुराक के मामले में डॉक्टर की सलाह का पूरी तरह से पालन करें।
  • बची हुई एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल या दूसरों के साथ शेयर न करें।
  • नियमित रूप से हाथों को साफ करें, सफाई से खाना पकाएं, बीमार लोगों से संपर्क करने से बचें, सुरक्षित सेक्स करें और टीकाकरण भी नियमित रूप से लें ताकि आप हर तरह के इंफेक्शन से बचे रहें। (और पढ़ें - हाथ धोने का सही तरीका, लाभ और नुकसान)

स्वास्थ्यकर्मियों या डॉक्टर्स के स्तर पर

  • संक्रमण से बचने के लिए डॉक्टरों को भी अपने हाथ, उपकरण और आसपास के वातावरण को साफ रखना चाहिए।
  • मरीजों को एंटीबायोटिक्स सिर्फ तभी प्रिस्क्राइब करें जब उसकी सबसे अधिक जरूरत हो और मौजूदा गाइडलाइन्स को ध्यान में रखते हुए।
  • एंटीबायोटिक-प्रतिरोध से होने वाले इंफेक्शन की समस्या के बारे में सर्विलांस टीम को तुरंत बताएं।
  • एंटीबायोटिक्स को लेने का सही तरीका क्या है और एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल की वजह से प्रतिरोध की समस्या हो सकती है इस बारे में मरीजों से जरूर बात करें।
  • मरीजों को बताएं कि वे किस तरह से इंफेक्शन से बच सकते हैं (उदाहरण के लिए- टीकाकरण समय पर करवाएं, हाथों को धोएं, सेफ सेक्स प्रैक्टिस करें, खांसते या छींकते वक्त नाक और मुंह को ढंक लें)
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