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आजकल डाइनिंग टेबल या मेज कुर्सी पर बैठकर खाना आम हो गया है। लेकिन पहले के समय में ऐसा नहीं था। पहले के समय में लोग ज़मीन पर बैठकर खाना खाते थे। ज़मीन पर बैठकर भोजन करना प्राचीन भारतीय परंपरा रही है लेकिन अधिकतर लोग इसे एक परंपरा ही मानते हैं लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। ज़मीन पर बैठकर खाना एक परंपरा ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए एक फायदेमंद क्रिया भी है। कुछ लोग नीचे बैठकर भोजन करने को आउटडेटेड और असभ्य मानते हैं, उनको लगता है अगर किसी ने उनको नीचे बैठकर खाना खाते हुए देख लिया तो ये उनके लिए कितना शर्मिंदगी (Embarrassment) भरा होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं इस प्राचीन परंपरा की जड़ें योग और आयुर्वेद से जुड़ी हुई है और नीचे बैठकर खाना खाने का विज्ञान भी समर्थन करता है। यदि फर्श पर बैठना आपके लिए आरामदायक नहीं हैं, तो बैठने के लिए कुछ आरामदायक कालीन, तकिएं या कुशन का प्रयोग करें। यहां खाने के दौरान ज़मीन पर आलती पालती लगाकर बैठने के कुछ स्वास्थ्य लाभ बताएं गए हैं तो क्या आप उनके बारे में जानना नहीं चाहेंगे -

  1. तनाव को कम करने के लिए खाएँ जमीन पर बैठकर - Sitting on the Floor to Eat for Stress in Hindi
  2. नीचे बैठकर खाना खाने का तरीका है पाचन के लिए अच्छा - Sitting Floor Position for Digestion in Hindi
  3. जमीन पर बैठकर खाना खाने के फायदे हैं लंबी उम्र के लिए - Sit on Floor for Life Expectancy While Eating in Hindi
  4. आलती पालती मारकर बैठना बनाए शरीर को मजबूत - Sitting on Floor with Legs Crossed to Improve Strength in Hindi
  5. पैरों को क्रॉस करके बैठने से करें पीठ दर्द को दूर - Sit Cross Legged on Floor to Relieve Back Pain in Hindi
  6. नीचे बैठकर भोजन करना है रक्त परिसंचरण में सहायक - Sitting Cross Legged on Floor for Improve Blood Circulation in Hindi
  7. जमीन पर बैठकर भोजन करना करे वजन को कंट्रोल - Eating on the Floor for Weight Loss in Hindi
  8. पारिवारिक बंधन के लिए खाएँ नीचे बैठकर - Eating on the Floor Culture for Family Bonding in Hindi

जब आप भोजन खाने के लिए फर्श पर बैठते हैं, तो आप उस समय एक प्रकार से योग कर रहे होते हैं। यह योग सुखासन, स्वास्तिकासन या सिद्धासन हो सकता है। यद्यपि ये सीटेड पोस्चर सरल और आसान हैं, तो इसलिए एक क्लियर इंटेंशन के साथ इनकी प्रैक्टिस करें जो आपको एक साथ कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं। सुखासन में आप अपनी रीढ़ को उठाने के दौरान अपनी छाती को खोलते हुए आराम से अपने पैरों के साथ बैठते हैं। इसमें आपकी पिंडली को लगभग समानांतर रखा जाता है और आपके पैर घुटनों के नीचे होते हैं। यह ऊपरी शरीर के लिए एक बहुत ही अच्छा आसान है। इस योग आसान से मानसिक सुख और शांति का अनुभव होता है। सुखासन करने से चिंता और अवसाद में लाभ मिलता है। यह आसन करने से रीढ़ की हड्डी में होने वाले रोगों से निजात मिलती है। इसके अलावा, यह मांसपेशियों में तनाव को कम करने में मदद करता है।

ज़मीन पर आलती पालती की पोज़िशन में बैठकर भोजन का सेवन करना आपके पाचन तंत्र के लिए अच्छा होता है। जब आप खाना खाने के लिए आगे झुकते हैं तो पेट की मांसपेशियां आगे पीछे होने के कारण सक्रिय रहती हैं। इससे आपके पेट में एसिड बढ़ता है जो त्वरित और उचित पाचन के लिए आवश्यक है। इसके अलावा आलती पालती से मन शांत हो जाता है और रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है जिससे विश्राम मिलता है। इसके अलावा इससे मस्क्युलर तनाव रिलीज होता है और उच्च रक्तचाप कम हो जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, यह सभी चीजों को एक साथ मिलाकर काम करता है जिससे आप खाते समय उचित पाचन सुनिश्चित कर सकते हैं। भोजन का इष्टतम पाचन एक स्वस्थ शरीर की कुंजी है। 

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हाथ की आवश्यकता के बिना फर्श से नियमित रूप से खड़े होने से आपको लंबे समय तक जीवित रहने में मदद मिल सकती है। यूरोपियन जर्नल ऑफ प्रीवेंटीव कार्डियोलॉजी में प्रकाशित एक 2012 के अध्ययन में बताया गया है कि बिना किसी समर्थन के ज़मीन पर बैठने की पोज़िशन से खड़े होने की क्षमता लंबे समय तक जीवित रहने के साथ जुड़ी हुई है। अध्ययन के अनुसार, बैठने की स्थिति से उठने के लिए पर्याप्त लचीलापन और शरीर की ताकत की ज़रूरत होती है जो सामान्य दुर्घटनाओं, चोटों और गिरने से बचने के लिए आवश्यक है। अगर किसी व्यक्ति को नीचे बैठने में कोई कठिनाई हो रही है, तो उसकी अगले छह सालों में मरने की संभावना 6.5 गुना अधिक है। यह अध्ययन 51 से 80 साल की उम्र प्रतिभागियों के बीच किया गया था।

ज़मीन पर पलोथी बैठने से आपका शरीर मजबूत और अधिक लचीला बन जाता है। यह स्थिति कूल्हे, घुटनों और टखनों को स्ट्रेच करती है। यह रीढ़ की हड्डी, कंधों और छाती के लचीलेपन को भी बढ़ाती है, इस प्रकार यह आपको अधिक लचीला बना देती है। यह ताकत और लचीलापन आपको बिना झुके खड़े होने में मदद करता है जिससे आप अपनी पीठ को चोट न देकर भारी वस्तुएं उठा सकते हैं। दूसरी ओर, एक कुर्सी पर घंटों तक बैठने से पेट की मांसपेशियां कमजोर, कमर में दर्द आदि हो जाता है। 

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कुछ मांसपेशियों और जोड़ों पर अत्यधिक तनाव को कम करने के लिए अच्छा पोस्चर महत्वपूर्ण है, खासकर पीठ और गर्दन के लिए। ज़मीन पर पर क्रॉस लेग करके बैठने से अपने आप ही पोस्चर सही हो जाता है। जब आप सुखासन मुद्रा में ज़मीन पर बैठते हैं, तो आपको अपनी पीठ को सीधा रखने की ज़रूरत होती है, अपनी रीढ़ को बढ़ा कर और कंधों को वापस धकेलना होता है। यह आसन सभी तरह के दर्द को रोकने में मदद करता है जो खराब पोस्चर के कारण होते हैं। दूसरी तरफ, अधिक समय के लिए पने डेस्क और कंप्यूटर पर बैठे के लिए एक कुर्सी या सोफे का उपयोग आपको एक कराभ पोस्चर और कमजोर निचले हिस्से को जन्म दे सकते हैं। 

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अपने भोजन खाने के लिए पैर पर पैर रखकर बैठना भी आपके संचार प्रणाली के लिए फायदेमंद है। जब आप नीचे ज़मीन पर बैठते है तो रक्त अधिक आसानी से पंप होता है शरीर के अन्य हिस्सों तक दिल के माध्यम से आसानी से पहुचता है, जबकि इसके विपरीत अपने पैरों के साथ कुर्सी पर बैठना आपके दिल के स्तर के नीचे करता है। इसके अलावा, नीचे बैठकर खाना खाने पर अतिरिक्त दबाव को कम किया जाता है जो एक स्वस्थ हृदय के लिए अच्छा होता है। अच्छा रक्त परिसंचरण सुनिश्चित करता है कि शरीर के सभी अंग सही ढंग से काम करने के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त करते हैं। परिसंचारी समस्याओं वाले लोगों के लिए, खाने के दौरान फर्श पर बैठने के लिए अत्यधिक सलाह दी जाती है। 

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जब आप ज़मीन पर बैठकर खाना खाते हैं, तो आपके मन और शरीर पर इसका शांत प्रभाव पड़ता है। एक शांत शरीर भोजन पर ध्यान केंद्रित करने में बेहतर होता है जिससे आप अधिक खाना खाने से बच जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वेगस तंत्रिका (vagus nerve) बेहतर प्रदर्शन करती है और इस पोज़िशन में संकेतों को अधिक कुशलता से संचार करती है। यह वेगस तंत्रिका ही होती है जो पेट से दिमाग तक संकेतों को भेजती है जिससे आपको यह पता चल जाता है कि आपका पेट भरा हुआ है या नहीं। इसके अलावा, आलती पालती करके खाना खाने से आप धीमा खाते हैं जिससे यह आपके पेट और मस्तिष्क को पहचानने के लिए पर्याप्त समय देता है कि आपका पेट भर गया है। साथ ही, बैठकर खड़े होने का कार्य एक अच्छी एक्सरसाइज है। ये सभी कारक एक साथ आपके शरीर के वजन को कंट्रोल करने में सहायता करते हैं।

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परिवार के साथ अपने खाने या दोपहर खाने के लिए पालती लगाकर बैठें। यह आपके लिए अपने परिवार के सदस्यों से जुड़ने का एक नया तरीका दे सकता है। इसके अलावा, जब आप अपने बच्चों के साथ एक ही स्तर पर बैठते हैं, तो उनके साथ जुड़ना आसान हो जाता है जिससे आप उनकी फीलिंग्स और प्रॉब्लम्स के बारे में जान सकते हैं। परिवार के बंधनों को सुधारने के लिए आप पालती लगाकर खाना पारिवारिक रस्म बना सकते हैं। इसके अलावा, यह पोस्चर शरीर और मन को आराम देता है।

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