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पतले-दुबले लोगों के लिए जिम में एक्सरसाइज करके वजन बढ़ाना एक बड़ी चुनौती है। कुछ लोग तो ऐसे होते हैं, जिन्हें महीनों लग जाते हैं वजन बढ़ाने में। वजन बढ़ाना हो या फिर घटाना दोनों ही ऐसे काम हैं, जिन्हें कड़ी मेहनत से ही पूरा किया जा सकता है। लेकिन यह जरूर नहीं की आप नियमित रूप से एक्सरसाइज कर रहे हों, तो आपका वजन बढ़ेगा या घटेगा। वजन बढ़ने के पीछे खानपान, एक्सरसाइज और आराम प्रमुख तीन कारण होते हैं।

आप कह सकते हैं कि यह एक ऐसी कड़ी है, जिसमें एक भी कारक के कमजोर पड़ने पर आपको नतीजे नहीं मिलते हैं। आज हम आपको यहां पर सिर्फ एक्सरसाइज के बारे में बताएंगे। जिसमें बदलाव करके आपको वजन बढ़ाने में मदद मिलेगी।

जिम में लगातार कई दिनों तक एक्सरसाइज करने से आपका शरीर उस वर्कआउट का आदि हो जाता है। आसान भाषा में आप उस एक्सरसाइज को आसानी से करने में सक्षम हो जाते हैं, जिसके चलते आपकी मांसपेशियों में टूटफूट होना रुक जाती है और वजन नहीं बढ़ता है। सबसे जरूरी बात कि आपको एक्सरसाइज करते वक्त उबाऊपन का अहसास होगा। यदि आप भी वजन बढ़ाने को लेकर गंभीर हैं तो आपको इन बदलावों को जरूर अपनाना चाहिए।

इंटेनसिटी (तीव्रता) को बढ़ाना
एक्सरसाइज में तीव्रता बढ़ाने से आपकी मांसपेशियां बनती हैं। एक्सपर्ट्स इसे एक्सरसाइज में बदलाव की श्रेणी में सबसे ऊपर रखते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यह बेहद ही जरूरी है।

एक्सरसाइज को और ज्यादा तीव्र बनाने के लिए एक्सरसाइज के बीच में आराम के समय को कम करना होगा। यदि आपको लगता है कि आप किसी भी एक्सरसाइज के दोहराने को उस सीमा से आगे नहीं कर सकते तो ऐसे में कम से कम 2 सेट्स ज्यादा करने है।

इसे फोर्स्ड रिपीटेशन कहा जाता है, जिन्हें आप अपने शरीर पर दबाव डालकर पूरा करते हैं। यदि आप लंबे समय तक एक ही रूटीन जारी रखते हैंं, ऐसे में आपको तो लगता है कि आप कठिन एक्सरसाइज कर रहे हैं लेकिन आपके वर्कआउट की तीव्रता में धीरे-धीरे कमी आ रही होती है।

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वर्कआउट को बदलें
आपके शरीर में मौजूद प्रत्येक मांसपेशियों की एक्सरसाइज को अलग-अलग तरीके से किया जा सकता है। ऐसे में जिम में वजन बढ़ाने की लालसा लिए लोग हफ्तों तक एक ही जैसी एक्सरसाइज को करते रहते हैं।

आपको जो एक्सरसाइज पसंद नहीं आती है आप वह एक्सरसाइज नहीं करते हैं। वजन बढ़ाने के लिए यह जरूरी है कि आप टारगेट मसल्स (उस दिन की जाने वाली मांसपेशियों की एक्सरसाइज) का वर्कआउट अलग-अलग तरह की एक्सरसाइज से करें।

आपको इसमें निरंतर बदलाव करने की जरूरत है। यदि आप अनुभवी बॉडीबिल्डर्स का उदाहरण लेंगे तो वह कभी भी समान एक्सरसाइज को लगातार दोहराते नहीं है। आपको भी इस बात को सुनिश्चित करना है कि एक्सरसाइज करने के एक तरीके को आप बार-बार न दोहराएं।

हर बॉडी पार्ट के लिए एक्सरसाइज के दिनों में करें बदलाव
एक्सरसाइज करने की क्रमबद्धत्ता में यदि आप बदलाव करते हैं तो उसका आपके शरीर पर एक बड़ा बदलाव होता है। खासतौर से वजन बढ़ाने के इच्छुक लोग अगर अपने एक्सरसाइज रुटीन में फेरबदल करते हैं तो शरीर अच्छी प्रतिक्रिया देता है।

उदाहरण के लिए हफ्ते के शुरुआती दिन में आपको शरीर के सबसे कमजोर हिस्से की एक्सरसाइज करनी चाहिए। इसका कारण यह है कि आप हफ्ते के पहले दिन ज्यादा ऊर्जावान होते हैं। आपकी दिनचर्या में हर चीजों की तरह इस बदलाव का फायदा भी मिलेगा।

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इस क्रमबद्धत्ता में बदलाव करते वक्त आपको इस बात का ध्यान रखना है कि हर मांसपेशियों के समूह को पर्याप्त आराम मिले। इस समूह में ऐसी भी मांसपेशियां हो सकती हैं, जिनकी आप एक्सरसाइज तो नहीं कर रहे लेकिन फिर भी वह सेकेंडरी मसल्स के रूप में सक्रिय होती हों।

उदाहरण के लिए आपको सोमवार को बाइसेप्स और उसके अगले दिन मंगलवार को बैक की एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए। बैक की एक्सरसाइज में बाइसेप्स की मांसपेशियां सेकेंडरी मसल्स के रूप में कार्य करती हैं। आप अपने वर्कआउट का एक साइकिल बना सकते हैं, जिससे सोमवार को आप अलग मसल ग्रुप की एक्सरसाइज करें और उसके अलगे दिन दूसरे की।

बॉडी को दें एक हफ्ता आराम
ज्यादातर एक्सरसाइज करने वाले लोगों के बीच आराम को तरजीह नहीं दी जाती है। बॉडीबिल्डिंग एक लंबी रेस की तरह नहीं होती है बल्कि थोड़ी उससे ज्यादा है। कई स्थितियों में आपके लिए एक्सरसाइज के दौरान एक हफ्ते का आराम करना बेहतर साबित हो सकता है।

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हमारे शरीर और दिमाग को नियमित रूप से कड़ी मेहनत वाली एक्सरसाइज से आराम की जरूरत होती है। कठिन एक्सरसाइज न सिर्फ हमारी मांसपेशियों पर बल्कि पूरे शरीर पर दबाव डालती है। ऐसे में यदि आप वजन बढ़ा रहे हैं तो आपको कैसे पता चलेगा कि आपके शरीर को आराम की जरूरत है? कई बार आपको थकान के शरीर से संकेत मिल सकते हैं लेकिन मोटे तौर पर हर 8-12 हफ्ते में आप ब्रेक ले सकते है।

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