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भारत में 'घी' का बहुत महत्व है और इसे हमेशा पवित्रता, उपचार और पोषण के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। घी का स्वाद स्वादिष्ट होता है और यही वजह है कि भारत में लगभग हर मिठाई से लेकर सभी सुगंधित खाद्य पदार्थों को बनाने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। स्वाद को बढ़ाने के अलावा घी विभिन्न औषधीय और पोषक लाभ भी प्रदान करता है।

परंपरागत रूप से देसी घी, जो देसी गाय के दूध या देसी भैंस के दूध से बना होता है, इन सभी लाभों को प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, अधिकांश घरों में कम लागत और लंबी शेल्फ लाइफ के कारण बाजार में उपलब्ध वनस्पति घी (वेजिटेबल घी या डालडा घी) के साथ व्यंजन तैयार किए जाते है, लेकिन क्या वनस्पति घी एक बेहतर स्वास्थ्य विकल्प है?

आइए जानें कि देसी घी और वनस्पति घी को तैयार कैसे किया जाता है -

  1. शी घी बनाने की विधि - How to Make Desi Ghee in Hindi
  2. वनस्पति घी बनाने की विधि - How to Make Vegetable Ghee in Hindi
  3. देसी घी और वनस्पति घी - क्या है ज्यादा फायदेमंद? - Desi Ghee vs Vegetable Ghee Health Benefits in Hindi

शुद्ध घी गाय के दूध से बनता है। पाश्चसराइजेशन की प्रक्रिया के दौरान मलाई एक क्रीम सेपरेटर में अलग हो जाती है। पाश्चरराइजेशन एक प्रक्रिया है जिसमें दूध उच्च तापमान (उबलते बिंदु) पर गर्म होता है ताकि सभी जीवाणुओं और सूक्ष्मजीवों को मार दिया जाए। यह मलाई, जिसे अलग किया जाता है उसमें लगभग 50% से 70% फैट होता है।

मक्खन के उत्पादन के लिए क्रीम को बिलोया जाता है। इस मक्खन में 84% फैट होता है। मट्ठा, जो अंत में शेष तरल पदार्थ बचता है को एक मट्ठा टैंक में बहा दिया जाता है। जो मक्खन बनता है, उसे एक ठंडे कमरे (निचला तापमान) में रखा जाता है। आगे की प्रक्रिया के लिए पर्याप्त मक्खन उपलब्ध हो जाने पर इसे घी केतली में स्थानांतरित किया जाता है।

घी केतली में मौजूद स्टीम वाल्व को खोलकर धीरे-धीरे भाप दी जाती है। जब अधिकतर मक्खन पिघल जाता है तो केतली के तापमान को बढ़ाएँ जिससे मक्खन का तेल उबलने लगता है जिससे सारी नमी / पानी मक्खन से गायब हो जाएंगी। और जब पानी सूख जाता है तो भाप की आपूर्ति धीरे-धीरे बंद हो जाती है।

वाल्व को खोलकर घी को ठंडा किया जाता है। घी का तापमान 70 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने के बाद इसे एक फिल्टर टैंक में डाला जाता है। फिर घी को एक छलनी की मदद से फ़िल्टर्ड किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान, अधिकांश जला हुए प्रोटीन को फ़िल्टर्ड किया जाता है।

फ़िल्टर किए गए घी को एक घी क्लैरफायर (निर्मलकारी) में स्थानांतरित किया जाता है, जहां इसे और शुद्ध किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान, सभी दूध ठोस निकाल दिए जाते हैं। एक बार जब घी शुद्ध हो जाता है, तो इसे एक भंडारण टैंक में स्थानांतरित किया जाता है। इस भंडारण टैंक में इलेक्ट्रिक हीटर के साथ वॉटर हीटर है। ठंडे मौसम के दौरान, बिजली के हीटर को चलाया जाता है ताकि घी को एक मुक्त प्रवाह की स्थिति में रखा जा सकें। अंत में इसे उपभोक्ता पैकिंग में पैक किया जाता है।

वनस्पति घी वनस्पति तेल से बनता है, इसे ठोस बनाने के लिए हाइड्रोजनीकृत किया जाता है। शुद्ध घी के बनावट और स्वाद की नकल करने के लिए इसे हाइड्राजनैशन किया जाता है।

ट्रांस फैटी एसिड सामग्री में वृद्धि हाइड्रोजनीकरण का कारण होती है। ट्रांस फैटी एसिड को एलडीएल (खराब) कोलेस्ट्रॉल और हृदय संबंधी रोगों के बढ़े हुए स्तरों के जोखिम से जोड़ा जाता है।

वनस्पति घी का एक तेल या तेलों के मिश्रण के साथ उत्पादन किया जा सकता है। यह तेल 70 डिग्री सेल्सियस पर मिश्रण वाले बर्तन में गर्म होता है। यह एक समरूप घोल सुनिश्चित करने के लिए इसे लगातार चलाया जाता है।

हालांकि इसे लगातार चलाने से रंग, स्वाद, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट शामिल हैं। ये सामग्रियां वैकल्पिक हैं और देश के खाद्य नियमों के अनुसार इन्हें जोड़ा जाता है।

घी बनाने के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला वनस्पति तेलों में शामिल हैं:

  • सोयाबीन का तेल
  • ताड़ का तेल
  • कपास के बीज का तेल
  • सरसों का तेल

इसमें कोई संदेह नहीं है कि देसी घी संतृप्त वसा और कोलेस्ट्रॉल में उच्च होता है। लेकिन वनस्पति घी में ट्रांस वसा होती है जो आपके शरीर पर अधिक प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। आइए जानते हैं कैसे -

  1. देसी घी या डालडा घी के फायदे कोलेस्ट्रॉल के लिए - Desi Ghee or Vegetable Ghee for Heart Disease in Hindi
  2. वनस्पति घी या देसी घी मोटापे में - Desi Ghee or Vegetable Ghee Causes Obesity in Hindi
  3. शुद्ध घी या वनस्पति घी मधुमेह के लिए - Vegetable Ghee or Pure Ghee for Diabetes in Hindi

देसी घी या डालडा घी के फायदे कोलेस्ट्रॉल के लिए - Desi Ghee or Vegetable Ghee for Heart Disease in Hindi

ट्रांस वसा से संतृप्त वसा के बजाए हृदय रोग की अधिक संभावना होती है। संतृप्त वसा कोलेस्ट्रॉल के कुल स्तर को बढ़ाती है जबकि वनस्पति घी कुल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाने के साथ अच्छे कोलेस्ट्रॉल का स्तर (एचडीएल) कम कर देता है।

वनस्पति घी या देसी घी मोटापे में - Desi Ghee or Vegetable Ghee Causes Obesity in Hindi

ट्रांस वसा मोटापे के एक उच्च जोखिम के साथ भी जुड़ी हुई है। बराबर कैलोरी के साथ, ट्रांस वसा अन्य खाद्य पदार्थों की तुलना में अधिक वजन बढ़ाती है। ये आपके पेट के आसपास की वसा की मात्रा भी बढ़ाती है।

वनस्पति घी कैलोरी में उच्च है। एक बड़े स्पून देसी घी (85.6 कैलोरी) की तुलना में एक बड़े स्पून वनस्पति घी में 122.4 कैलोरी होती है।

शुद्ध घी या वनस्पति घी मधुमेह के लिए - Vegetable Ghee or Pure Ghee for Diabetes in Hindi

पशु उत्पादों में पाए जाने वाले ट्रांस वसा से मधुमेह का खतरा अधिक होता है। ये वसा इंसुलिन प्रतिरोध और टाइप 2 मधुमेह का कारण है।

इसलिए अब आप बिना किसी चिंता के अपने देसी घी के जार को बाहर निकालें और अलग अलग व्यंजनों के लिए प्रयोग करें। लेकिन वनस्पति घी को दूर रखें। इसके अलावा, वनस्पति घी में तले हुए फ्राइज खाने से बचें। ट्रांस वसायुक्त सामग्री के लिए पैक किए गए खाद्य पदार्थों पर पोषण तथ्यों के लेबल की जांच करना याद रखें।

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