हर कोई जानता है कि हमारा स्वास्थ्य हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म पर निर्भर करता है। पाचन एक महत्वपूर्ण कारक है जो आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। आप क्या और कैसे खाते हैं, यह आपके स्वास्थ्य और उचित वृद्धि व विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

आयुर्वेद ने कुछ खाने के बारे में टिप्स दिए हैं जो आपके स्वास्थ्य में सुधार करने के लिए योगदान कर सकते हैं। अच्छे स्वास्थ्य के लिए 11 आयुर्वेदिक सुझाव नीचे दिए गए हैं -

  1. भूख लगी हो तभी खाएं
  2. नियमित अंतराल पर भोजन करें
  3. भोजन को ठीक से पचने दें
  4. एक संतुलित आहार करें
  5. भोजन से पहले अदरक और सेंधा नमक लें
  6. ठंडा पेय पीने से बचें
  7. भोजन आराम से करें
  8. भोजन की मात्रा पर ध्यान दें
  9. भोजन उचित समय पर करें
  10. बीच बीच में पानी पिएं
  11. भोजन का अंत एक डेयरी उत्पाद से करें

myUpchar से जुड़े डॉ. लक्ष्मीदत्ता शुक्ला का कहना है कि खाना तभी खाएं जब भूख लगी हो। शरीर को भूख का ऐहसास न हो तो भोजन न लें। यह भी ध्यान रखें कि भूख लगने पर इसे दबाएं नहीं। भूख लगने पर भोजन करने से यह आमाशय रस (gastric juice) और पाचन एंजाइमों के स्त्राव में मदद करता है। इस बात को भूले नहीं कि भोजन का पचना जरूरी है। भोजन अगर पचा नहीं है और फिर खा लेते हैं तो शरीर में जटिलाएं पैदा हो जाती हैं। भोजन के पचने में दिक्कत तब आती है जब खाद्य पदार्थों का गलत संयोजन होता है। यही अपच की वजह बनता है। इस बात को भी ध्यान देना चाहिए कि भोजन नियमित अंतराल पर हो। इससे शरीर के पाचन एंजाइमों को निर्धारित समय पर मुक्त करने में मदद मिलती है और पाचन आसान होता है।

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नियमित अंतराल पर भोजन करना, शरीर के पाचन एंजाइमों को निर्धारित समय पर मुक्त करने में मदद करता है, जिससे यह पाचन को आसान बना देता है। कुछ लोगों में फटाफट भोजन निपटा देने की आदत होती है। कोई मोबाइल तो कोई टीवी देखकर या बातें करते हुए खाना खाता है, इससे भोजन की मात्रा पर प्रभाव पड़ता है। भोजन की मात्रा का ध्यान इस बात पर भी होना चाहिए कि अगर तेल वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कर लिया है तो उसे पचाने में मशक्कत होगी। ऐसे समय में पाचन शक्ति की क्षमता का आधा ही खाएं। हल्का भोजन पेट भर किया जा सकता है।

खाद्य पदार्थों का गलत संयोजन अपच का कारण बन सकता है। अगर पहले खाया हुआ खाना अभी तक पचा ना हो और आप फिर से कुछ खा लें, तो यह आपके शरीर में जटिलताएं पैदा कर सकता है।

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एक संतुलित आहार से मतलब है कि आपको सभी छह स्वादों को अपने भोजन में शामिल करना चाहिए - मीठा, खट्टा, नमक, तीखा, कड़वा और कसैला। एक आदर्श और संतुलित आहार इन सभी स्वादों का एक आदर्श संयोजन है।

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भोजन करने से पहले नींबू और अदरक के साथ सेंधा नमक की एक छोटी राशि खाने की सलाह दी गई है। यह पाचक एंजाइम के उचित स्राव में मदद करता है। इस प्रकार, यह पाचन में सहायता और पाचन शक्ति को भी बढ़ाता है।

एक सुस्त पाचन शक्ति भोजन से पर्याप्त पोषक तत्वों को अवशोषित करने के लिए सक्षम नहीं होती है।

आयुर्वेद के मुताबिक, भोजन के पहले या भोजन के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए। हालांकि, खाना खाते समय बीच-बीच में एक छोटी घूंट ले सकते हैं, लेकिन पानी गर्म हो। खाने के पहले ठंडा पानी या पेय जैसे कोल्ड कॉफी, आइस टी आदि पाचन शक्ति को असंतुलित करता है। गर्म या कमरे के तापमान वाला पानी पिएं। लोगों को ऐसा कभी नहीं करना चाहिए कि भूख लगी है, लेकिन पानी पीकर पेट को शांत कर लिया या फिर प्यास लग रही है तो उस समय भोजन कर लिया। सही खानपान से पाचन सही रहेगा, वरना पाचन तंत्र के रोगों की आशंका बढ़ जाएगी।

कुछ लोगों में फटाफट भोजन निपटा देने की आदत होती है। कोई मोबाइल तो कोई टीवी देखकर या बातें करते हुए खाना खाता है, इससे भोजन की मात्रा पर प्रभाव पड़ता है। भोजन की मात्रा का ध्यान इस बात पर भी होना चाहिए कि अगर तेल वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कर लिया है तो उसे पचाने में मशक्कत होगी। ऐसे समय में पाचन शक्ति की क्षमता का आधा ही खाएं। हल्का भोजन पेट भर किया जा सकता है।

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जब भी आप खाना खाते हैं तो सुनिश्चित करें कि आपका पेट और मन शांत रहे। आपका ध्यान केवल भोजन की खुशबू और स्वाद पर होना चाहिए।

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भोजन की मात्रा आपके खाने के अनुसार भिन्न होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि आप तेलीय भोजन खाते हैं जो पचाने के लिए भारी होते हैं, तो केवल अपनी पाचन शक्ति की क्षमता का आधा ही खाएं। लेकिन अगर आप हल्का खाना खा रहे हैं, तो पेट भरकर खाएं। किंतु बहुत ज़्यादा भी ना खाएं।

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सुनिश्चित करें कि आपने भोजन के लिए उचित समय बनाए रखा है। दोपहर के समय अपने भोजन को खत्म करने का प्रयास करें, क्योंकि उस समय पाचन शक्ति अपने चरम पर होती है, जिससे पाचन अच्छे से होता है। इसी तरह, रात्रिभोज सूर्यास्त से पहले खत्म कर देना चाहिए, क्योंकि देर रात भोजन करना विषैले तत्व के गठन और अपच का कारण बनता है। 

पाचन तंत्र शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों का अवशोषण करने में मदद करता है और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। पाचन ठीक रखने के लिए आहार में बदलाव जरूरी हैं। पाचन तंत्र के रोग हैं तो वसा युक्त और तले हुए पदार्थों, चिकनाई वाले पदार्थों, मसालेदार भोजन से बचना चाहिए।

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आयुर्वेद दृढ़तापूर्वक सलाह देता है कि जब आप प्यास महसूस कर रहे हैं तब आपको भोजन नहीं करना चाहिए। इसी तरह, अगर आप भूख महसूस कर रहे हैं, तो आपको पानी नही पीना चाहिए। इसी तरह, आपको भोजन से पहले या भोजन के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए। हालांकि, आप पानी का एक छोटी घूंट ले सकते हैं जब आप खाना खाते हैं, लेकिन ध्यान दे कि पानी गर्म होना चाहिए। 

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आयुर्वेद कहता है कि आपको एक डेयरी उत्पाद के साथ अपने भोजन को खत्म करना चाहिए, क्योंकि यह पित्त दोष को कम करने में मदद करता है। आप एक कप दही का या एक गिलास गर्म दूध का ले सकते हैं।

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