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हर कोई जानता है कि हमारा स्वास्थ्य हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म पर निर्भर करता है। पाचन एक महत्वपूर्ण कारक है जो आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। आप क्या और कैसे खाते हैं, यह आपके स्वास्थ्य और उचित वृद्धि और विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

आयुर्वेद ने कुछ खाने के बारे में टिप्स दिए हैं जो आपके स्वास्थ्य में सुधार करने के लिए योगदान कर सकते हैं। अच्छे स्वास्थ्य के लिए 11 आयुर्वेदिक सुझाव नीचे दिए गए हैं -

  1. भूख लगी हो तभी खाएँ
  2. नियमित अंतराल पर भोजन करें
  3. भोजन को ठीक से पचने दें
  4. एक संतुलित आहार करें
  5. भोजन से पहले अदरक और सेंधा नमक लें
  6. ठंडा पेय पीने से बचें
  7. भोजन आराम से करें
  8. भोजन की मात्रा पर ध्यान दें
  9. भोजन उचित समय पर करें
  10. बीच बीच में पानी पिएं
  11. भोजन का अंत एक डेयरी उत्पाद से करें

अगर आप केवल तभी खाते हैं जब आपको भूख लगी हो, तो यह आमाशय रस (gastric juice) और शरीर में पाचन एंजाइमों के स्राव में मदद करता है। जब तक आपके शरीर को भूख महसूस ना हो, तब तक ना खाएँ। आपको यह भी सुनिश्चित करने की जरूरत है कि आप अपनी भूख को ना दबाएं, जब आपको भूख महसूस हो रही हो।

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नियमित अंतराल पर भोजन करना, शरीर के पाचन एंजाइमों को निर्धारित समय पर मुक्त करने में मदद करता है, जिससे यह पाचन को आसान बना देता है।

खाद्य पदार्थों का गलत संयोजन अपच का कारण बन सकता है। अगर पहले खाया हुआ खाना अभी तक पचा ना हो और आप फिर से कुछ खा लें, तो यह आपके शरीर में जटिलताएं पैदा कर सकता है।

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एक संतुलित आहार से मतलब है कि आपको सभी छह स्वादों को अपने भोजन में शामिल करना चाहिए - मीठा, खट्टा, नमक, तीखा, कड़वा और कसैला। एक आदर्श और संतुलित आहार इन सभी स्वादों का एक आदर्श संयोजन है।

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भोजन करने से पहले नींबू और अदरक के साथ सेंधा नमक की एक छोटी राशि खाने की सलाह दी गई है। यह पाचक एंजाइम के उचित स्राव में मदद करता है। इस प्रकार, यह पाचन में सहायता और पाचन शक्ति को भी बढ़ाता है।


एक सुस्त पाचन शक्ति भोजन से पर्याप्त पोषक तत्वों को अवशोषित करने के लिए सक्षम नहीं होती है।

खाने से ठीक पहले ठंडा पेय पीना पाचन आग (अग्नि) को बुझाता है। आइस्ड टी, कोल्ड कॉफी, वातित (aerated) पेय और ठंडा पानी जैसे ठंडे पेय भोजन से पहले पीना पाचन शक्ति में एक असंतुलन पैदा कर सकता है। इसलिए, यह तरल पदार्थ गर्म या कमरे के तापमान के अनुसार पीना सबसे अच्छा है।

भोजन के सेवन की गति का आपके खाने पर भी प्रभाव होता है। अगर आप तेजी से खाना खा रहे हैं, तो आप ज़्यादा खाएँगे, जबकि धीरे धीरे खाने से आप कम खाएँगे। इसलिए आपको न तो बहुत तेजी से और न ही बहुत धीमी गति से खाना चाहिए। हालांकि, अगर आप वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं, तो आपको धीरे-धीरे खाना चाहिए।

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जब भी आप खाना खाते हैं तो सुनिश्चित करें कि आपका पेट और मन शांत रहे। आपका ध्यान केवल भोजन की खुशबू और स्वाद पर होना चाहिए।

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भोजन की मात्रा आपके खाने के अनुसार भिन्न होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि आप तेलीय भोजन खाते हैं जो पचाने के लिए भारी होते हैं, तो केवल अपनी पाचन शक्ति की क्षमता का आधा ही खाएं। लेकिन अगर आप हल्का खाना खा रहे हैं, तो पेट भरकर खाएं। किंतु बहुत ज़्यादा भी ना खाएं।

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सुनिश्चित करें कि आपने भोजन के लिए उचित समय बनाए रखा है। दोपहर के समय अपने भोजन को खत्म करने का प्रयास करें, क्योंकि उस समय पाचन शक्ति अपने चरम पर होती है, जिससे पाचन अच्छे से होता है। इसी तरह, रात्रिभोज सूर्यास्त से पहले खत्म कर देना चाहिए, क्योंकि देर रात भोजन करना विषैले तत्व के गठन और अपच का कारण बनता है। 

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आयुर्वेद दृढ़तापूर्वक सलाह देता है कि जब आप प्यास महसूस कर रहे हैं तब आपको भोजन नहीं करना चाहिए। इसी तरह, अगर आप भूख महसूस कर रहे हैं, तो आपको पानी नही पीना चाहिए। इसी तरह, आपको भोजन से पहले या भोजन के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए। हालांकि, आप पानी का एक छोटी घूंट ले सकते हैं जब आप खाना खाते हैं, लेकिन ध्यान दे कि पानी गर्म होना चाहिए। 

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आयुर्वेद कहता है कि आपको एक डेयरी उत्पाद के साथ अपने भोजन को खत्म करना चाहिए, क्योंकि यह पित्त दोष को कम करने में मदद करता है। आप एक कप दही का या एक गिलास गर्म दूध का ले सकते हैं।

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