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हुक्का पीना सदियों से हमारे समाज का हिस्सा रहा है। उत्तर भारत के अधिकांश गांवों में पहले की तरह आज भी लोग बड़ी संख्या में हुक्के का सेवन करते दिखाई दे सकते हैं। यहां सुबह की पहली चाय के बाद से लेकर रात के भोजन से पहले के लंबे अंतराल में चिंगारी के बीच रखे तंबाकू को सांसों के जरिए दम लगाकर खींचने के लिए एक के बाद एक चौकड़ी लगती जाती हैं।

गहरी सांसों के जरिए गुड-गुड की आवाज के साथ निकलते तंबाकू के धुएं के बीच बेशक देश-विदेश और सैर-सपाटे की बात होती हो, लेकिन यहां बातों ही बातों में सेहत से खिलवाड़ की एक बड़ी प्रतियोगिता लगती है। दरअसल जैसे सिगरेट पीने से कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का जोखिम होता है, वैसे ही हुक्का पीना भी हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

ताजा रिसर्च के जरिए अध्ययनकर्ताओं ने खुलासा किया है कि हुक्के के सेवन के दौरान निकलने वाला धुआं कई तरह से खून के प्रवाह को प्रभावित करता है। इसके कारण खून का थक्का (ब्लड क्लोट) जमने की आशंका होती है, जिससे हार्ट अटैक यानि दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।

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क्या कहती है रिसर्च?
जरनल आर्टेरियोस्क्लेरोसिस, थ्रोम्बोसिस और वैस्कुलर बायोलॉजी में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक शोधकर्ताओं ने पाया कि हुक्के के सेवन के दौरान निकलने वाला धुआं बेहद खतरनाक होता है, जहां खून का थक्का जमने में औसतन 5 मिनट का समय लग सकता है, वहीं हुक्के के धुएं के संपर्क में आने के 11 सेकंड के अंदर खून का थक्का जम सकता है।

इसके अलावा शोधकर्ताओं ने बताया कि हुक्के से निकलने वाले धुएं के खतरनाक होने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके संपर्क में आने से रक्त प्रवाह से जुड़ी कई प्रकार की परेशानियां सामने आ सकती हैं।

दूसरी ओर इस मसले पर अन्य कुछ रिसर्च के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि हुक्के के जरिए किए गए धूम्रपान में सिगरेट की अपेक्षा कहीं ज्यादा हानिकारक कैमिकल यानि रसायन निकलते हैं, जो कि व्यक्ति के स्वास्थ्य पर एक नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

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विशेषज्ञों की राय
अमेरिका की टेक्सास यूनिवर्सिटी से जुड़े के एक शोधकर्ता फडी खाससावनेह का कहना है “हमारी रिसर्च के जरिए कई ऐसे अहम प्रमाण मिले हैं, जो यह बताते हैं कि हुक्का पीना या उसका सेवन करना पारंपरिक सिरगेट (सिगार) से कहीं ज्यादा हानिकारक है। केवल हुक्का ही नहीं, धूम्रपान से जुड़ी सभी चीजें जोखिम से भरी हैं। जैसे- सिगरेट, ई-सिगरेट और अन्य तंबाकू के सेवन से हार्ट अटैक (हृदय रोग) और स्ट्रोक का खतरा कई गुना तक बढ़ जाता है"।

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कैसे की गई रिसर्च?
रिसर्च के दौरान एक धूम्रपान मशीन के जरिए चूहों को हुक्के के धुएं के संपर्क में लाया गया, जिसके बाद यह चूहे वास्तविक या सामान्य जीवन में धूम्रपान से जुड़ी आदतों की नकल करने लगे। इस दौरान धूम्रपान मशीन में 12 ग्राम फ्लेवर्ड तंबाकू मौजूद था, जिसमें तंबाकू, ग्लिसरीन, गुड़ का रस या पिघला हुआ गुड़ और नेचुरल फ्लेवर्ड के साथ निकोटिन और टार मौजूद था।

इसके बाद शोधकर्ताओं ने हुक्के के धुएं के संपर्क में आए चूहों और जो धुएं के संपर्क में नहीं लाए गए थे, उनकी गतिविधियों की तुलना की। इस अध्ययन में एक प्रकार के निकोटीन का पता चला, जो हुक्के के धूम्रपान के साथ जुड़ा था। इसे शोधकर्ताओं ने कोटिनिन, निकोटीन मेटाबोलाइट के स्तर को मापकर वेरिफाई यानि सत्यापित किया, जिससे पता चला कि कैसे हुक्के के धुएं के संपर्क में आने के बाद चूहों के व्यवहार में बदलाव आया।

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शोधकर्ता फडी खाससावनेह का कहना है कि हुक्के का सेवन आज पश्चिमी देशों में बहुत तेजी से बढ़ा है, उसे सिरगेट की अपेक्षा कम हानिकारक माना जाता है। बावजूद इसके हुक्के का धुआं काफी जहरीला होता है, जिसे सिगरेट से कहीं अधिक घातक कहा जा सकता है।

कुल मिलाकर इस रिपोर्ट के आधार पर देखा जाए तो हुक्के का सेवन करना हानिकारक होता है। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि इसके धुएं में घुला जहर कुछ ही क्षण में खून के थक्के जमा सकता है और इसके कारण हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा पैदा होता है। इसलिए अगर आप भी हुक्के का सेवन करते हैं तो आपको स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की जरूरत है और जितना जल्दी हो हुक्के की आदत को छोड़ दें।

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