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बच्चों में बढ़ती बीमारियों की रोकथाम को लेकर भारत सरकार की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना मिशन इंद्रधनुष 2.0 लॉन्च हो गई है। इस योजना का उद्देश्य दो साल से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को 8 वैक्सीन या टीके देकर उन्हें गंभीर संक्रामक बीमारियों से सुरक्षा देना है।

सभी राज्यों में किया जाएगा टीकाकरण
मिशन इंद्रधनुष के तहत बच्चों और महिलाओं को डिप्थीरिया के टीके लगाए जाएंगे। जिसमें खांसी, टेटनस, पोलियोमाइलाइटिस (पोलियो), तपेदिक यानी टीबी, खसरा, मेनिनजाइटिस (दिमागी बुखाार) और हेपेटाइटिस बी के टीके शामिल हैं। हालांकि, जापानी एन्सेफलाइटिस और हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा के टीके चयनित क्षेत्रों में ही दिए जा रहे हैं। इस मिशन का लक्ष्य 28 राज्यों और तमाम केंद्रशासित प्रदेशों के 272 जिलों में पूर्ण टीकाकरण के लक्ष्यों को हासिल करना है। मिशन इंद्रधनुष 2.0 को दिसंबर 2019 से मार्च 2020 के बीच चलाया जा रहा है।

मिशन इंद्रधनुष के जरिए इन आठ बीमारियों से गर्भवती महिलाओं और मासूम बच्चों को सुरक्षा मुहैया कराना है। आइए जानें क्या हैं इन बीमारियों के लक्षण और कितनी घातक हैं ये बीमारियां।

डिप्थीरिया
डिप्थीरिया एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है, जो नाक और गले की श्लेष्मा झिल्ली को प्रभावित करता है। डिप्थीरिया आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है, लेकिन दवाएं लेने से इससे बचा जा सकता है। इस बीमारी के कुछ लक्षण आमतौर पर ज़ुकाम के लक्षणों जैसे होते हैं। डिप्थीरिया के कारण गला खराबबुखार, ग्रंथियों में सूजन और कमजोरी आदि समस्याएं होती हैं।

टेटनस
टेटनस एक गंभीर बैक्टीरियल बीमारी है, जो शरीर के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। टेटनेस विशेष रूप से जबड़े और गर्दन की मांसपेशियों को प्रभावित करता है। इसके कारण सांस लेने में परेशानी महसूस होने लगती है और आखिर में टेटनस एक गंभीर खतरा बन सकता है।

पोलियोमाइलाइटिस या पोलियो
पोलियो या पोलियोमेलाइटिस एक गंभीर संक्रामक रोग है। यह पोलियोवायरस  के कारण होता है। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलता है। जिसके कारण पीड़ित के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचता है।

तपेदिक या टीबी
टीबी एक संक्रामक रोग है, जो आमतौर पर फेफड़ों को प्रभावित करता है। बाकी बीमारियों के मुकाबले टीबी दुनियाभर में दूसरा सबसे बड़ा जानलेवा रोग है। टीबी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। टीबी के बैक्टीरिया हवा में उन व्यक्तियों द्वारा फैलाए जाते हैं, जिनके शरीर में पहले से ही टीबी के बैक्टीरिया हैं।

खसरा
खसरा श्वसन प्रणाली का एक वायरल संक्रमण है। संक्रमित व्यक्ति जब खांसते या छींकते हैं तो संक्रमण हवा में फैल जाता है। यह बच्चों में होने वाला एक संक्रामक रोग है। खसरा, जो कि पहले बहुत आम बीमारी थी; अब खसरा वायरस वैक्सीन (टीका) से रोकी जा सकती है।

दिमागी बुखार या मेनिनजाइटिस
मेनिन्जेस में होने वाली सूजन को मेनिनजाइटिस कहते हैं। मेनिन्जेस तीन झिल्लियां होती हैं, जो मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को ढककर रखती हैं। मेनिन्जेस के आसपास स्थित तरल पदार्थ के संक्रमित हो जाने पर दिमागी बुखार हो सकता है।

हेपेटाइटिस बी
हेपेटाइटिस बी एक वायरस है जो लिवर को संक्रमित करता है। कभी-कभी संक्रमण लंबे समय तक रह सकता है। इसे क्रोनिक हेपेटाइटिस बी कहा जाता है। यह समय के साथ आपके लीवर को नुकसान पहुंचा सकता है। वायरस से संक्रमित शिशुओं और छोटे बच्चों को क्रोनिक हेपेटाइटिस होने की अधिक आशंका होती है।

क्या है मिशन इंद्रधनुष 2.0?
मिशन इन्द्रधनुष भारत सरकार का एक स्वास्थ्य मिशन है, जिसे 25 दिसंबर 2014 को पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने लॉन्च किया था। इस योजना का मकसद भारत में साल 2020 तक 90 प्रतिशत टीकाकरण को पूरा करना है।

इसके बाद अक्टूबर 2017 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन इंद्रधनुष को गति देते हुए इसे अलग स्तर पर दोबारा से लॉन्च किया। सरकार ने इस मिशन में स्वास्थ्य के अलावा अन्य क्षेत्रों को शामिल किया और जिन इलाकों में बीमारियों का जोखिम अधिक है, वहां इसका विस्तार किया।

(और पढ़ें- गर्भावस्था में कब-कब टीका लगवाएं)

मिशन इंद्रधनुष का उद्देश्य?
मिशन इंद्रधनुष का मुख्य उद्देश्य 2 साल तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित कराना है। भारत सरकार ने सभी राज्यों में कुछ ऐसे जिलों की पहचान की है, जहां आंशिक रूप से प्रतिरक्षित (इम्यूनाइज्ड) और गैर-प्रतिरक्षित बच्चों की संख्या सबसे अधिक है।

इंद्रधनुष से हुआ फायदा
सरकार की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक मिशन इंद्रधनुष के बाद टीकाकरण में हर साल के हिसाब से बढ़ोतरी हुई है। आंकड़े बताते हैं कि पहले पूर्ण टीकाकरण में वृद्धि दर प्रति वर्ष महज 1 प्रतिशत थी, जो मिशन इंद्रधनुष के पहले दो चरणों के जरिए बढ़कर 6.7 प्रतिशत प्रति वर्ष हो गई है। बता दें कि मिशन इंद्रधनुष के पहले चार चरण अगस्त 2017 तक चलाए गए थे, जिसके तहत देशभर में 2.53 करोड़ से अधिक बच्चों और 68 लाख गर्भवती महिलाओं को टीके लगाए गए।

(और पढ़ें- बच्चे को कब-कब टीका लगवाएं)

कुल मिलाकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं में खांसी, टेटनस, टीबी, खसरा और अन्य गंभीर बीमारियों को दूर करने के लिए मिशन इंद्रधनुष 2.0 चलाया जा रहा है। सरकार की इस योजना से करोड़ों लोगों को लाभ हुआ है। क्योंकि गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों में इम्यूनिटी कमजोर होती है। जिसके कारण उनमें इन बीमारियों का जोखिम गंभीर स्तर पर पहुंच जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने मिशन इंद्रधनुष 2.0 के जरिए एक बड़े लक्ष्य को साधने की कोशिश की है।

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