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वैक्सीन्स आपको कई बिमारियों और इन्फेक्शन्स से बचाती हैं। ऐसा अनुमान है कि हर साल टीके 50 लाख लोगों की जान बचाते हैं। निस्संदेह, वैक्सीन्स को आधुनिक चिकित्सा की सबसे बड़ी सफलता माना जाता है।

आमतौर पर वैक्सीन को इंजेक्शन के माध्यम से दिया जाता है। लेकिन और भी तरीके हैं। वैक्सीन आपके शरीर के अंदर पहुँच कर, आपके इम्यून सिस्टम को उन जर्म्स पर हमला करना सिखाती है जिनसे इसे आपकी रक्षा के लिए बनाया गया है।

आपको इस प्रक्रिया के हल्के साइड इफ़ेक्ट हो सकते हैं, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि आपका शरीर एंटीबॉडी और अन्य सेल्स बनाता है जो इन जर्म्स को पहचानने में सक्षम होते हैं। इससे आपके इम्यून सिस्टम को वो नए औज़ार मिल जाते हैं जो उसे आपके शरीर को इस जर्म्स से आपको सेफ रखने के लिए चाहिए होते हैं।

वैक्सीन्स कई तरह की होती हैं - कुछ में कमजोर या मृत जर्म्स होते हैं, और कुछ में आरएनए जैसे जेनेटिक पदार्थ होते हैं। आइये इनके बारे में विस्तार में बात करते हैं।

  1. लाइव एटेनुएटेड वैक्सीन - Live attenuated vaccines in Hindi
  2. इनएक्टिवेटेड वैक्सीन - Inactivated vaccines in Hindi
  3. टॉक्सोइड वैक्सीन - Toxoid vaccine in Hindi
  4. सबयूनिट और कोन्ज्यूगेट वैक्सीन - Subunit and conjugate vaccines in Hindi
  5. एमआरएनए वैक्सीन - mRNA vaccines in Hindi
  6. वायरल वेक्टर वैक्सीन - Viral vector vaccines in Hindi
  7. हेर्ड इम्यूनिटी के लिए वैक्सीन हैं जरुरी - Vaccines for herd immunity in Hindi
वैक्सीन के प्रकार के डॉक्टर

लाइव एटेनुएटेड वैक्सीन (Live attenuated vaccines) जीवित लेकिन कमजोर जर्म्स का इस्तेमाल करती हैं।

यह उन्हें नेचुरल इन्फेक्शन के सबसे करीब बनाता है, और इस वजह से सबसे स्ट्रांग इम्युनिटी देती हैं।

उदाहरण हैं एमएमआर वैक्सीन और चिकनपॉक्स वैक्सीन

इनएक्टिवेटेड वैक्सीन (Inactivated vaccines) निष्क्रिय या मृत जर्म्स का इस्तेमाल करती हैं।

अक्सर, समय के साथ इन वैक्सीन के बूस्टर शॉट्स की जरुरत होती है।

उदाहरण हैं फ्लू वैक्सीन, पोलियो वैक्सीन और रेबीज वैक्सीन। इनके आलावा कोवाक्सिन भी इसी प्रकार की वैक्सीन है।

टॉक्सोइड वैक्सीन (Toxoid vaccine) कीटाणुओं द्वारा बनाए गए टॉक्सिन्स नामक हानिकारक पदार्थों से रक्षा करती हैं। ये वैक्सीन इन टॉक्सिन्स के कमजोर रूपों का इस्तेमाल करती हैं जिन्हें टॉक्साइड कहा जाता है।

इन टीकों को भी अक्सर बूस्टर शॉट्स की आवश्यकता होती है।

और इनके उदाहरण हैं डीपीटी वैक्सीन के डिप्थीरिया और टेटनस वाले भाग।

सबयूनिट और कोन्ज्यूगेट वैक्सीन (Subunit and conjugate vaccines) जर्म्स के सिर्फ एक खास भाग का इस्तेमाल करती हैं। वे जर्म के उस भाग के खिलाफ मजबूत इम्यूनिटी देती हैं।

इन वैक्सीनों के भी बूस्टर शॉट की जरुरत पड़ सकती है।

इसका एक उदाहरण हेपेटाइटिस बी की वैक्सीन है। नोवावैक्स की कोविड 19 वैक्सीन भी एक प्रोटीन सबयूनिट वैक्सीन है।

दूसरी तरफ, एमआरएनए वैक्सीन (mRNA vaccines) जर्म्स या टॉक्सिन्स का इस्तेमाल नहीं करती हैं। इनमें में एक ख़ास टाइप का आरएनए होता है जिसे मैसेंजर आरएनए या एमआरएनए कहा जाता है।

mRNA आपके सेल्स को जर्म्स का एंटीजन बनाने का निर्देश देता है, जिससे इम्यून सिस्टम हरकत में आ जाता है।

फाइजर और मॉडर्ना की कोविड वैक्सीन mRNA vaccines की उदाहरण हैं।

वायरल वेक्टर वैक्सीन (Viral vector vaccines) जर्म्स के ही जेनेटिक मटेरियल का इस्तेमाल करके आपके इम्यून सिस्टम को जर्म का एंटीजन बनाने का निर्देश देती हैं।

इन निर्देशों को आपके सेल्स तक पहुंचाने के लिए, जेनेटिक मटेरियल को एक अलग सुरक्षित वायरस के अंदर डाला जाता है।

कोविड-19 वैक्सीन्स स्पुतनिक वी और कोविशील्ड इसके उदाहरण हैं।

यह जानना महत्वपूर्ण है कि वैक्सीन न सिर्फ आपकी बल्कि आपके आस-पास सब लोगों की भी रक्षा करती हैं।

वैक्सीन जिन बीमारियां से बचती हैं, उनमें से कई इंसानों से इंसानों में फैलती हैं।

जब कुछ ही लोगों को वैक्सीन लगी होती है तो बीमारी फैलने का खतरा ज्यादा होता है। लेकिन अगर ज्यादातर लोगों को वैक्सीन लग गयी होती है तो बीमारी फैलने की संभावना बहुत कम हो जाती है।

इसे “हर्ड इम्यूनिटी” कहते हैं।

हर्ड इम्युनिटी उन लोगों की सुरक्षा के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जिन्हें वैक्सीन नहीं लगायी जा सकती है। इसमें कमजोर इम्यूनिटी, गंभीर एलर्जी या कुछ हेल्थ कंडीशंस वाले लोग शामिल हैं।

वैक्सीन्स आपको, आपके परिवार और आपके आस-पास सभी लोगों को उन बीमारियों से बचाती हैं जो खतरनाक या जानलेवा भी हो सकती हैं।

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